CBAM और स्टील पर 50% शुल्क को लेकर पीयूष गोयल की यूरोप को चेतावनी, भारत-जर्मनी व्यापार बढ़ाने का रखा लक्ष्य

CBAM और स्टील पर 50% शुल्क को लेकर पीयूष गोयल की यूरोप को चेतावनी, भारत-जर्मनी व्यापार बढ़ाने का रखा लक्ष्य

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने यूरोपीय संघ की व्यापार और जलवायु नीतियों पर चिंता जताते हुए कहा कि कार्बन लागत और स्टील पर ऊंचे आयात शुल्क से उद्योगों की लागत बढ़ सकती है। वहीं, उन्होंने भारत और जर्मनी के बीच द्विपक्षीय व्यापार को लगभग 31 अरब यूरो से बढ़ाकर 310 अरब यूरो तक ले जाने की संभावना भी सामने रखी। बर्लिन ग्लोबल डायलॉग 2026 में 22 अक्टूबर को बोलते हुए पीयूष गोयल ने कहा कि व्यापार में भरोसा, सहयोग और पारस्परिक लाभ महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने यूरोप की कुछ व्यापारिक पाबंदियों पर सवाल उठाते हुए आगाह किया कि अतिरिक्त लागत का असर उद्योगों के साथ उपभोक्ताओं पर भी पड़ सकता है।

CBAM और स्टील शुल्क पर क्या बोले पीयूष गोयल?

गोयल ने यूरोपीय संघ के कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) और स्टील पर लागू आयात शुल्क का उल्लेख करते हुए कहा कि इन उपायों से निर्माण सामग्री महंगी हो सकती है। उनके मुताबिक, स्टील, एल्युमीनियम और सीमेंट जैसी वस्तुओं की लागत बढ़ने से बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और औद्योगिक उत्पादन पर असर पड़ सकता है। CBAM यूरोपीय संघ की ऐसी व्यवस्था है, जिसके तहत कुछ आयातित वस्तुओं के उत्पादन से जुड़े कार्बन उत्सर्जन की लागत को यूरोप के घरेलू उत्सर्जन नियमों के अनुरूप लाने का प्रयास किया जाता है। स्टील पर 50 प्रतिशत शुल्क का मामला अलग है। यूरोपीय संघ की नई व्यवस्था में तय आयात कोटा से अधिक आने वाले स्टील पर यह शुल्क लागू होता है। इसलिए इसे सभी स्टील आयातों पर लगने वाला सामान्य शुल्क समझना सही नहीं होगा। गोयल ने तर्क दिया कि नियमों और शुल्कों के कारण लागत बढ़ने से यूरोपीय उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मकता प्रभावित हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि व्यापारिक साझेदारों के बीच विश्वास बनाए रखना जरूरी है, क्योंकि एक पक्ष की पाबंदियां दूसरे पक्ष की कारोबारी गतिविधियों को प्रभावित कर सकती हैं।

भारत-जर्मनी व्यापार को 310 अरब यूरो तक ले जाने की योजना

बर्लिन में एक अन्य कार्यक्रम में गोयल ने भारत और जर्मनी के बीच व्यापार बढ़ाने की बड़ी संभावना का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दोनों देश अपनी-अपनी औद्योगिक ताकतों का उपयोग करते हुए संयुक्त रूप से उत्पाद और तकनीक विकसित करें, तो द्विपक्षीय व्यापार मौजूदा लगभग 31 अरब यूरो से बढ़कर 310 अरब यूरो तक पहुंच सकता है। यह एक प्रस्तावित लक्ष्य है, न कि हासिल किया जा चुका व्यापार स्तर। गोयल ने इसे प्राप्त करने के लिए कोई निश्चित समयसीमा नहीं बताई। उन्होंने कंपनियों से ग्राहकों, निवेशकों और कारोबारी साझेदारों के साथ संपर्क बढ़ाने तथा संभावित व्यापार अवसरों की तैयारी करने का आह्वान किया। जर्मनी की आर्थिक मामलों और ऊर्जा मंत्री कैथरीना रीचे ने भी दोनों देशों के बीच नौकरशाही संबंधी बाधाएं कम करने और संयुक्त परियोजनाओं को बढ़ावा देने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि बेहतर कारोबारी सहयोग से द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाया जा सकता है। 

भारत-EU FTA पर 2026 के अंत तक हस्ताक्षर की उम्मीद

गोयल ने भारत और यूरोपीय संघ के मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को लेकर भी उम्मीद जताई। उनके अनुसार, समझौते पर 2026 के अंत तक हस्ताक्षर हो सकते हैं और आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी होने पर यह 2027 की पहली तिमाही में लागू हो सकता है। यह समयसीमा उनकी ओर से जताई गई संभावना है, अंतिम कार्यान्वयन की पुष्टि नहीं।  इस समझौते का उद्देश्य भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार तथा निवेश के अवसर बढ़ाना है। गोयल ने कारोबारियों से कहा कि वे संभावित बाजारों, उत्पादों की गुणवत्ता संबंधी आवश्यकताओं और कीमतों को लेकर अभी से तैयारी करें, ताकि समझौता लागू होने पर उन्हें लाभ मिल सके।

AI, सेमीकंडक्टर और ग्रीन एनर्जी में सहयोग पर चर्चा

भारत और जर्मनी के बीच हुई बातचीत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सेमीकंडक्टर, उन्नत विनिर्माण, महत्वपूर्ण खनिज, ग्रीन हाइड्रोजन, नवीकरणीय ऊर्जा और ऊर्जा भंडारण जैसे क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा हुई। दोनों देशों के लिए मजबूत आपूर्ति शृंखलाएं विकसित करना और औद्योगिक तथा डिजिटल क्षेत्रों में निवेश बढ़ाना भी प्रमुख विषय रहा। गोयल ने भारत और जर्मनी के बीच केवल तैयार उत्पादों के व्यापार के बजाय संयुक्त रूप से तकनीक और उत्पाद विकसित करने पर जोर दिया। भारत और जर्मनी के बीच कारोबारी संबंधों को विस्तार देने की यह पहल ऐसे समय में हो रही है, जब दोनों पक्ष व्यापार, निवेश और स्वच्छ ऊर्जा से जुड़ी साझेदारी को आगे बढ़ाने के अवसर तलाश रहे हैं।


न्यूज डेस्क