Skip to main content
Follow Us On
Hindi News, India News in Hindi, हिंदी समाचार, Latest News in Hindi, Breaking News in Hindi, ताजा ख़बरें, News9india

पानी में डूबे गांव, नाव बनी सहारा... बिहार में बाढ़ ने मचाई तबाही, सामने आईं खौफनाक तस्वीरें

by न्यूज डेस्क

बिहार में गंगा समेत कई नदियों का जलस्तर बढ़ने के बाद बाढ़ ने बड़ी आबादी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। पटना से भागलपुर, मुंगेर और वैशाली तक कई इलाकों में पानी तेजी से फैल गया है। गांवों की सड़कें, खेत और घर जलमग्न हैं, जबकि कई जगहों पर लोगों का मुख्य सड़क और आसपास के इलाकों से संपर्क टूट गया है। ऐसे हालात में नाव ही लोगों के आने-जाने और जरूरी सामान पहुंचाने का सहारा बनी हुई है। बाढ़ की तस्वीरें इस आपदा की गंभीरता को बयां कर रही हैं। कहीं घरों की छत तक पानी पहुंच गया है तो कहीं लोग अपने जरूरी सामान और मवेशियों को नाव पर रखकर सुरक्षित जगहों की ओर जाते दिखाई दे रहे हैं।

पटना में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर

राजधानी पटना में गंगा का जलस्तर लगातार चिंता बढ़ा रहा है। गांधी घाट पर नदी का पानी 50.41 मीटर तक पहुंच गया है। यहां खतरे का निशान 48.60 मीटर है, यानी पानी इस स्तर से 1.81 मीटर ऊपर बह रहा है। गंगा के बढ़े जलस्तर का असर गांधी घाट पर भी साफ दिखाई दे रहा है। घाट की सीढ़ियां और वॉकवे पानी में डूब चुके हैं। घाट के आसपास मौजूद शिव मंदिर समेत कई धार्मिक स्थल भी बाढ़ के पानी से घिरे नजर आ रहे हैं।

भागलपुर में गांवों तक पहुंचा बाढ़ का पानी

भागलपुर जिले के सुल्तानगंज प्रखंड का भवनाथपुर गांव भी बाढ़ की चपेट में है। गांव के खेत, मकान, स्कूल और सड़कें पानी में डूब गई हैं। चारों तरफ फैले पानी के कारण सामान्य जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। भागलपुर में गंगा का जलस्तर भी खतरे के निशान 33.68 मीटर से ऊपर बताया जा रहा है। नौगछिया और आसपास के इलाकों में भी नदी का पानी बढ़ने से हालात गंभीर बने हुए हैं। इसी स्थिति का जायजा लेने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भागलपुर के नौगछिया क्षेत्र पहुंचे। उन्होंने गंगा और कोसी के बढ़े जलस्तर से प्रभावित इलाकों का मोटरबोट के जरिए निरीक्षण किया।

मुंगेर में घर छोड़ने को मजबूर परिवार

मुंगेर जिले के जमालपुर प्रखंड का बोचाही गांव भी बाढ़ के पानी से घिरा हुआ है। घरों के आसपास पानी भरने के कारण ग्रामीणों के सामने सुरक्षित स्थान तक पहुंचने की चुनौती खड़ी हो गई है। ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान यहां बाढ़ की गंभीर स्थिति देखने को मिली। एक परिवार अपने घर का जरूरी सामान और मवेशियों को जुगाड़ से तैयार नाव पर लेकर सुरक्षित ठिकाने की तलाश में निकलता नजर आया। बताया गया कि परिवार पास के सरकारी स्कूल में शरण लेने जा रहा था। यह तस्वीर बताती है कि बाढ़ सिर्फ लोगों के घरों तक नहीं पहुंची है, बल्कि उनके सामने रोजमर्रा की जरूरतों और पशुधन को बचाने की भी बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।

वैशाली में ड्रोन तस्वीरों ने दिखाई बाढ़ की भयावहता

वैशाली जिले में भी गंगा और गंडक नदियों के बढ़ते जलस्तर ने हालात बिगाड़ दिए हैं। ड्रोन से सामने आई तस्वीरों में कई इलाकों में दूर-दूर तक पानी फैला नजर आ रहा है। घनी आबादी वाले गांव, पक्के मकान, खेत और सड़कें बाढ़ के मटमैले पानी से घिरी हुई हैं। कई इलाकों में लोगों के सामने खाने-पीने की चीजों की व्यवस्था करने की चुनौती है। पानी भरने के कारण सामान्य आवाजाही भी प्रभावित हुई है।

तेजस्वी यादव ने भी लिया बाढ़ प्रभावित इलाकों का जायजा

बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भी बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने मौके पर पहुंचकर गंगा के बढ़े जलस्तर और उससे प्रभावित ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति देखी। बाढ़ की वजह से प्रभावित लोगों के सामने घर, रोजगार, भोजन और सुरक्षित स्थान तक पहुंचने जैसी कई मुश्किलें एक साथ खड़ी हो गई हैं।

हाजीपुर में राहत सामग्री के लिए लोगों की नजर

हाजीपुर और आसपास के इलाकों में भी गंगा समेत दूसरी नदियों का पानी बढ़ने से कई गांव प्रभावित हुए हैं। कई जगहों पर बाढ़ का पानी आबादी तक पहुंच गया है। इससे ग्रामीणों के सामने भोजन और पीने के साफ पानी की समस्या पैदा हो रही है। केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी के प्रमुख चिराग पासवान ने हाजीपुर और वैशाली के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। उन्होंने प्रभावित परिवारों से मुलाकात की और राहत सामग्री व राशन के पैकेट वितरित किए।

नावों पर टिकी जिंदगी

बिहार के बाढ़ प्रभावित इलाकों से सामने आ रही तस्वीरों में एक बात लगातार दिखाई दे रही है—जहां सड़कें और रास्ते पानी में डूब गए हैं, वहां नाव लोगों की जिंदगी का जरूरी हिस्सा बन गई है। ग्रामीण इन्हीं नावों के जरिए राशन, पीने का पानी, घरेलू सामान और मवेशियों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचा रहे हैं। कई परिवार घर छोड़कर ऊंचे स्थानों या सरकारी भवनों में शरण लेने को मजबूर हैं। ऐसे में राहत और बचाव अभियान के साथ-साथ प्रभावित इलाकों में भोजन, साफ पानी और स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाना बड़ी चुनौती बनी हुई है।


केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान को जान से मारने की धमकी, डाक से भेजे पत्र में आतंकियों का जिक्र

by न्यूज डेस्क

नई दिल्ली: केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान को जान से मारने की धमकी मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। बताया जा रहा है कि धमकी एक पत्र के जरिए दी गई है, जिसे डाक से भेजा गया था। मामले को गंभीरता से लेते हुए चिराग पासवान के कार्यालय ने केंद्रीय गृह सचिव को पत्र लिखकर घटना की जानकारी दी है और आवश्यक कार्रवाई के साथ सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की मांग की है। जानकारी के अनुसार, चिराग पासवान के नाम भेजे गए पत्र में अंग्रेजी में धमकी दी गई है। पत्र में लिखा है, 'You will be killed shortly by hardcore Terrorists'। इसका अर्थ है कि उन्हें जल्द ही कथित तौर पर कट्टर आतंकवादियों द्वारा मारने की धमकी दी गई है।

गृह मंत्रालय को दी गई जानकारी

धमकी भरा पत्र सामने आने के बाद चिराग पासवान के कार्यालय की ओर से केंद्रीय गृह मंत्रालय को इसकी सूचना दी गई। गृह सचिव को भेजे गए पत्र में धमकी से जुड़ी जानकारी साझा करते हुए मामले में जरूरी कदम उठाने का अनुरोध किया गया है। फिलहाल यह साफ नहीं हो सका है कि पत्र किस व्यक्ति या संगठन की ओर से भेजा गया और इसके पीछे वास्तविक मकसद क्या है। जांच एजेंसियां पत्र के स्रोत का पता लगाने के साथ-साथ इसे भेजने वाले व्यक्ति की पहचान करने में जुटी हैं। पत्र कहां से पोस्ट किया गया और इसे भेजने वाले तक कैसे पहुंचा जा सकता है, इसकी भी पड़ताल की जा रही है।

चिराग पासवान की सुरक्षा पर बढ़ी निगरानी

केंद्र सरकार में मंत्री होने के अलावा चिराग पासवान लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं। धमकी मिलने के बाद उनकी सुरक्षा से जुड़े पहलुओं पर भी विशेष सतर्कता बरती जा रही है। संबंधित एजेंसियां पत्र की विश्वसनीयता और संभावित खतरे से जुड़े तमाम पहलुओं की जांच कर रही हैं।

आरक्षण के मुद्दे पर भी चर्चा में हैं चिराग

चिराग पासवान इन दिनों अनुसूचित जाति आरक्षण के भीतर उप-वर्गीकरण और क्रीमी लेयर के मुद्दे पर अपने रुख को लेकर भी चर्चा में हैं। इस मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी और चिराग पासवान के बीच राजनीतिक मतभेद सामने आए हैं। चिराग पासवान ने मांझी और बिहार सरकार में मंत्री उनके बेटे संतोष कुमार सुमन के इस्तीफे की मांग तक कर दी थी। उनका तर्क था कि यदि कोई नेता अनुसूचित जाति आरक्षण में क्रीमी लेयर या उप-वर्गीकरण का समर्थन करता है और खुद आरक्षण का लाभ प्राप्त कर चुका है, तो उसे नैतिक आधार पर अपने मंत्री पद से इस्तीफा देने पर विचार करना चाहिए। फिलहाल चिराग पासवान को मिली धमकी के मामले में जांच जारी है और सुरक्षा एजेंसियां पत्र से जुड़े सभी पहलुओं की जानकारी जुटा रही हैं।


बिहार विद्या साथी ऐप लॉन्च, 3 लाख छात्रों को मिलेगा फ्री ट्यूशन, JEE-NEET की तैयारी में भी मदद

by पूजा झा

बिहार के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों के लिए शिक्षा के क्षेत्र में एक नई डिजिटल पहल शुरू की गई है। राज्य सरकार ने ‘बिहार विद्या साथी’ ऐप लॉन्च किया है। इस ऐप का उद्देश्य विद्यार्थियों को पढ़ाई से जुड़े सवालों का समाधान घर बैठे उपलब्ध कराना और उन्हें जरूरत के समय शिक्षकों की मदद दिलाना है। सरकार के मुताबिक, इस पहल से राज्य के 38 जिलों के करीब 3 लाख विद्यार्थियों को फायदा पहुंचाने की योजना है। फिलहाल इसे 700 सरस्वती विद्या निकेतन मॉडल विद्यालयों में शुरू किया गया है।
24 घंटे मिलेगी शिक्षक की मदद

‘बिहार विद्या साथी’ ऐप की सबसे खास बात इसका 24x7 लाइव शिक्षक सपोर्ट बताया जा रहा है। यानी छात्र पढ़ाई के दौरान किसी सवाल या विषय को लेकर अटकते हैं तो उन्हें शिक्षक से मदद लेने का विकल्प मिलेगा। इस व्यवस्था के लिए करीब 75 हजार शिक्षकों को जोड़े जाने की बात कही गई है। छात्र अपनी जरूरत के अनुसार शिक्षक का चयन कर सकते हैं और पढ़ाई से जुड़े सवालों पर मार्गदर्शन ले सकते हैं। इसका फायदा खासतौर पर उन विद्यार्थियों को मिल सकता है, जिन्हें स्कूल के अलावा अतिरिक्त पढ़ाई या किसी विषय को समझने के लिए अलग से ट्यूशन की जरूरत पड़ती है।

कक्षा 9 से 12 तक के छात्रों पर फोकस

ऐप में फिलहाल कक्षा 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों को ध्यान में रखकर शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। कक्षा 9वीं और 10वीं के विद्यार्थियों के लिए सभी प्रमुख विषयों को कवर किया गया है। वहीं कक्षा 11वीं और 12वीं के विज्ञान वर्ग के छात्रों के लिए भी पढ़ाई से जुड़ी सुविधाएं दी जाएंगी। इसका मकसद केवल बिहार बोर्ड की परीक्षा की तैयारी तक सीमित नहीं है। JEE और NEET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के लिए भी डिजिटल स्टडी मटेरियल उपलब्ध कराने की योजना है। 

AI की भी मिलेगी मदद

‘बिहार विद्या साथी’ को सिर्फ ऑनलाइन शिक्षक से सवाल पूछने वाला ऐप नहीं बनाया गया है। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI आधारित टूल्स को भी शामिल किया गया है। इनकी मदद से छात्रों को कॉन्सेप्ट समझने, अभ्यास करने और टेस्ट देने जैसी सुविधाएं मिलने की उम्मीद है। डिजिटल स्टडी मटेरियल के जरिए विद्यार्थी अपनी तैयारी को बेहतर तरीके से व्यवस्थित कर सकेंगे।

सरकार का क्या है लक्ष्य?

ऐप के लॉन्च के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने डिजिटल माध्यम से शिक्षा को छात्रों तक आसानी से पहुंचाने पर जोर दिया। सरकार का उद्देश्य ऐसी व्यवस्था तैयार करना है, जिसमें विद्यार्थी कहीं भी और किसी भी समय पढ़ाई से जुड़ी मदद हासिल कर सकें। फिलहाल इस पहल को 700 मॉडल स्कूलों में लागू किया गया है। सरकार की योजना आगे चलकर इसका विस्तार राज्य के अन्य सरकारी और संबद्ध विद्यालयों तक करने की है।

छात्रों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह पहल?

बिहार में बड़ी संख्या में ऐसे विद्यार्थी हैं, जिन्हें स्कूल के बाद अलग से महंगी कोचिंग या ट्यूशन की सुविधा नहीं मिल पाती। ऐसे में अगर ऐप के जरिए वास्तव में 24 घंटे शिक्षकों का मार्गदर्शन और गुणवत्तापूर्ण डिजिटल कंटेंट उपलब्ध होता है, तो यह छात्रों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है। खासकर ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले छात्रों के लिए यह सुविधा महत्वपूर्ण हो सकती है। हालांकि, इस योजना की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि ऐप कितने प्रभावी तरीके से काम करता है, कितने शिक्षक सक्रिय रूप से उपलब्ध रहते हैं और छात्रों को JEE-NEET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए किस स्तर की सामग्री मिलती है। फिलहाल सरकार ने इसे बिहार की स्कूली शिक्षा को डिजिटल माध्यम से मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है।


आंदोलन से पहले एक्टिव हुई बिहार सरकार, 32,388 शिक्षकों की भर्ती का नोटिफिकेशन जारी

बिहार में शिक्षक भर्ती की मांग को लेकर प्रतियोगी छात्रों का आंदोलन शुरू होते ही सरकार और बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) ने बड़ा कदम उठाया है। मंगलवार, 18 अगस्त को पटना के गर्दनीबाग में अभ्यर्थियों के आमरण अनशन शुरू करने के कुछ ही घंटों बाद BPSC ने चौथे चरण की विद्यालय अध्यापक भर्ती परीक्षा यानी TRE-4.0 की आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी। आयोग के नोटिफिकेशन के मुताबिक, इस भर्ती प्रक्रिया के तहत कुल 32,388 शिक्षकों के पदों पर नियुक्ति की जाएगी। भर्ती में प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर के शिक्षक पद शामिल हैं।

1 सितंबर से शुरू होंगे आवेदन

BPSC की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार TRE-4.0 के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 1 सितंबर 2026 से शुरू होगी, जबकि अभ्यर्थी 30 सितंबर 2026 तक आवेदन कर सकेंगे। भर्ती से जुड़ी प्रमुख तारीखें

कुल पद: 32,३८८

आवेदन शुरू: 1 सितंबर 2026

आवेदन की अंतिम तारीख: 30 सितंबर 2026

भर्ती: प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक शिक्षक पद

गर्दनीबाग में आमरण अनशन से बढ़ा दबाव

दरअसल, मंगलवार सुबह छात्र नेता दिलीप कुमार के नेतृत्व में बड़ी संख्या में प्रतियोगी अभ्यर्थी पटना के गर्दनीबाग धरना स्थल पर अनिश्चितकालीन आमरण अनशन पर बैठ गए थे। छात्रों की प्रमुख मांग TRE-4.0 का विज्ञापन जल्द जारी करना थी। अभ्यर्थियों का कहना था कि शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने जुलाई में शिक्षक भर्ती के विज्ञापन को लेकर आश्वासन दिया था, लेकिन तय समय पर नोटिफिकेशन जारी नहीं हुआ। छात्रों ने चेतावनी दी थी कि अगर पांच दिनों के भीतर भर्ती का विज्ञापन नहीं आया, तो विधानसभा का घेराव किया जाएगा। आंदोलन शुरू होने के कुछ ही घंटों बाद BPSC की ओर से नोटिफिकेशन जारी होने से अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है।

सिर्फ नोटिफिकेशन से खत्म नहीं होगा आंदोलन

हालांकि भर्ती का विज्ञापन जारी होने के बाद भी छात्रों ने साफ कर दिया है कि उनकी सभी मांगें अभी पूरी नहीं हुई हैं। आंदोलनकारी अभ्यर्थियों का कहना है कि वे भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और नियमों के पालन को लेकर भी सरकार से स्पष्टता चाहते हैं। छात्रों की अन्य मांगों में सिंगल फेज परीक्षा, BSSC में संविदा कर्मियों को मिलने वाले वेटेज से जुड़े मुद्दे और लंबे समय से लंबित लाइब्रेरियन भर्ती को लेकर कार्रवाई शामिल है। ऐसे में TRE-4.0 का नोटिफिकेशन जारी होने के बावजूद प्रतियोगी छात्रों का आंदोलन पूरी तरह खत्म होगा या दूसरी मांगों को लेकर आगे भी जारी रहेगा, इस पर सबकी नजर है।


नीतीश कब देंगे इस्तीफा? नई सरकार के गठन का शेड्यूल लगभग फाइनल, अब सबसे बड़ा सवाल – बीजेपी किसे बना रही बिहार का नया सीएम?

by KhabarCafe

नीतीश कब देंगे इस्तीफा? नई सरकार के गठन का शेड्यूल लगभग फाइनल, अब सबसे बड़ा सवाल – बीजेपी किसे बना रही बिहार का नया सीएम?

पटना: बिहार की राजनीति में एक युग का अंत होने जा रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 30 मार्च 2026 को बिहार विधान परिषद (MLC) की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। अब सभी की नजरें इस पर टिकी हैं कि वे मुख्यमंत्री पद से कब इस्तीफा देंगे और नई सरकार कब बनेगी।

नीतीश कुमार 10 अप्रैल 2026 को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेंगे। सूत्रों के मुताबिक, वे खरमास खत्म होने के बाद यानी 14 अप्रैल के आसपास मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं। इसके तुरंत बाद एनडीए विधायक दल की बैठक बुलाई जाएगी, जिसमें नया नेता चुना जाएगा और नई सरकार का गठन होगा।

नया सीएम कौन? बीजेपी की तैयारी तेज

  • यह पहला मौका होगा जब बिहार को बीजेपी का मुख्यमंत्री मिल सकता है। पिछले करीब 20 साल से नीतीश कुमार की अगुवाई में सरकार चल रही थी।
  • सबसे मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं सम्राट चौधरी (वर्तमान डिप्टी सीएम और बीजेपी नेता)।
  • अन्य नामों पर भी चर्चा है, लेकिन बीजेपी ओबीसी चेहरे को प्राथमिकता दे सकती है ताकि सामाजिक समीकरण बिगड़ें नहीं।
  • जेडीयू की तरफ से भी संभावित नामों पर अटकलें हैं, लेकिन गठबंधन की अंदरूनी बातचीत में बीजेपी ज्यादा आक्रामक नजर आ रही है।

नीतीश कुमार ने खुद कहा है कि नई सरकार को उनका पूरा सहयोग और मार्गदर्शन मिलेगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि वे अब राष्ट्रीय राजनीति में ज्यादा सक्रिय रहेंगे।

क्या बदल जाएगा बिहार में?

  • नीतीश के लंबे शासन (सुशासन बाबू के नाम से मशहूर) के बाद सत्ता का केंद्र अब बीजेपी की तरफ शिफ्ट हो रहा है।
  • जेडीयू भविष्य में गठबंधन में जूनियर पार्टनर की भूमिका में रह सकती है।
  • जातीय समीकरण, विकास मॉडल और प्रशासनिक बदलाव पर नजरें टिकी हैं।

राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज है। एनडीए के अंदर चर्चाएं चल रही हैं और 10-14 अप्रैल के आसपास बड़ा ऐलान होने की उम्मीद है।

अपडेट: स्थिति तेजी से बदल रही है। 10 अप्रैल को राज्यसभा शपथ के बाद पटना और दिल्ली में बैठकें होंगी, जिसके बाद नई सरकार का शेड्यूल क्लियर हो जाएगा।

---------- समाप्त ------------