केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने यूरोपीय संघ की व्यापार और जलवायु नीतियों पर चिंता जताते हुए कहा कि कार्बन लागत और स्टील पर ऊंचे आयात शुल्क से उद्योगों की लागत बढ़ सकती है। वहीं, उन्होंने भारत और जर्मनी के बीच द्विपक्षीय व्यापार को लगभग 31 अरब यूरो से बढ़ाकर 310 अरब यूरो तक ले जाने की संभावना भी सामने रखी। बर्लिन ग्लोबल डायलॉग 2026 में 22 अक्टूबर को बोलते हुए पीयूष गोयल ने कहा कि व्यापार में भरोसा, सहयोग और पारस्परिक लाभ महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने यूरोप की कुछ व्यापारिक पाबंदियों पर सवाल उठाते हुए आगाह किया कि अतिरिक्त लागत का असर उद्योगों के साथ उपभोक्ताओं पर भी पड़ सकता है।
CBAM और स्टील शुल्क पर क्या बोले पीयूष गोयल?
गोयल ने यूरोपीय संघ के कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) और स्टील पर लागू आयात शुल्क का उल्लेख करते हुए कहा कि इन उपायों से निर्माण सामग्री महंगी हो सकती है। उनके मुताबिक, स्टील, एल्युमीनियम और सीमेंट जैसी वस्तुओं की लागत बढ़ने से बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और औद्योगिक उत्पादन पर असर पड़ सकता है। CBAM यूरोपीय संघ की ऐसी व्यवस्था है, जिसके तहत कुछ आयातित वस्तुओं के उत्पादन से जुड़े कार्बन उत्सर्जन की लागत को यूरोप के घरेलू उत्सर्जन नियमों के अनुरूप लाने का प्रयास किया जाता है। स्टील पर 50 प्रतिशत शुल्क का मामला अलग है। यूरोपीय संघ की नई व्यवस्था में तय आयात कोटा से अधिक आने वाले स्टील पर यह शुल्क लागू होता है। इसलिए इसे सभी स्टील आयातों पर लगने वाला सामान्य शुल्क समझना सही नहीं होगा। गोयल ने तर्क दिया कि नियमों और शुल्कों के कारण लागत बढ़ने से यूरोपीय उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मकता प्रभावित हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि व्यापारिक साझेदारों के बीच विश्वास बनाए रखना जरूरी है, क्योंकि एक पक्ष की पाबंदियां दूसरे पक्ष की कारोबारी गतिविधियों को प्रभावित कर सकती हैं।
भारत-जर्मनी व्यापार को 310 अरब यूरो तक ले जाने की योजना
बर्लिन में एक अन्य कार्यक्रम में गोयल ने भारत और जर्मनी के बीच व्यापार बढ़ाने की बड़ी संभावना का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दोनों देश अपनी-अपनी औद्योगिक ताकतों का उपयोग करते हुए संयुक्त रूप से उत्पाद और तकनीक विकसित करें, तो द्विपक्षीय व्यापार मौजूदा लगभग 31 अरब यूरो से बढ़कर 310 अरब यूरो तक पहुंच सकता है। यह एक प्रस्तावित लक्ष्य है, न कि हासिल किया जा चुका व्यापार स्तर। गोयल ने इसे प्राप्त करने के लिए कोई निश्चित समयसीमा नहीं बताई। उन्होंने कंपनियों से ग्राहकों, निवेशकों और कारोबारी साझेदारों के साथ संपर्क बढ़ाने तथा संभावित व्यापार अवसरों की तैयारी करने का आह्वान किया। जर्मनी की आर्थिक मामलों और ऊर्जा मंत्री कैथरीना रीचे ने भी दोनों देशों के बीच नौकरशाही संबंधी बाधाएं कम करने और संयुक्त परियोजनाओं को बढ़ावा देने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि बेहतर कारोबारी सहयोग से द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाया जा सकता है।
भारत-EU FTA पर 2026 के अंत तक हस्ताक्षर की उम्मीद
गोयल ने भारत और यूरोपीय संघ के मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को लेकर भी उम्मीद जताई। उनके अनुसार, समझौते पर 2026 के अंत तक हस्ताक्षर हो सकते हैं और आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी होने पर यह 2027 की पहली तिमाही में लागू हो सकता है। यह समयसीमा उनकी ओर से जताई गई संभावना है, अंतिम कार्यान्वयन की पुष्टि नहीं। इस समझौते का उद्देश्य भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार तथा निवेश के अवसर बढ़ाना है। गोयल ने कारोबारियों से कहा कि वे संभावित बाजारों, उत्पादों की गुणवत्ता संबंधी आवश्यकताओं और कीमतों को लेकर अभी से तैयारी करें, ताकि समझौता लागू होने पर उन्हें लाभ मिल सके।
AI, सेमीकंडक्टर और ग्रीन एनर्जी में सहयोग पर चर्चा
भारत और जर्मनी के बीच हुई बातचीत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सेमीकंडक्टर, उन्नत विनिर्माण, महत्वपूर्ण खनिज, ग्रीन हाइड्रोजन, नवीकरणीय ऊर्जा और ऊर्जा भंडारण जैसे क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा हुई। दोनों देशों के लिए मजबूत आपूर्ति शृंखलाएं विकसित करना और औद्योगिक तथा डिजिटल क्षेत्रों में निवेश बढ़ाना भी प्रमुख विषय रहा। गोयल ने भारत और जर्मनी के बीच केवल तैयार उत्पादों के व्यापार के बजाय संयुक्त रूप से तकनीक और उत्पाद विकसित करने पर जोर दिया। भारत और जर्मनी के बीच कारोबारी संबंधों को विस्तार देने की यह पहल ऐसे समय में हो रही है, जब दोनों पक्ष व्यापार, निवेश और स्वच्छ ऊर्जा से जुड़ी साझेदारी को आगे बढ़ाने के अवसर तलाश रहे हैं।
NCLT ने सुभाष चंद्रा को बड़ी राहत देने वाले आदेश पर लगाई रोक, 22 हजार करोड़ के लोन का 6.25 करोड़ में निपटारा था मामला
NCLT Subhash Chandra Case: एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन सुभाष चंद्रा से जुड़े दिवालियापन मामले में नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने अपने पहले के आदेश पर रोक लगा दी है। मंगलवार को पांच सदस्यीय स्पेशल बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए 25 अगस्त को दिए गए उस आदेश को फिलहाल रोक दिया, जिसमें 22,006 करोड़ रुपये से अधिक के कर्ज के निपटारे के लिए करीब 6.25 करोड़ रुपये के भुगतान को मंजूरी दी गई थी। स्पेशल बेंच ने सुभाष चंद्रा को अपनी उन संपत्तियों को सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से ट्रांसफर करने से भी रोक दिया है, जो इस मामले में गारंटर के तौर पर उनकी जिम्मेदारी से जुड़ी हैं। ट्रिब्यूनल ने मामले से जुड़े सभी पक्षों को नोटिस जारी कर आगे की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
तीन सदस्यीय बेंच के फैसले में नहीं बनी सहमति
मामले की सुनवाई पहले NCLT की तीन सदस्यीय बेंच कर रही थी। सुनवाई के दौरान सदस्यों के बीच मतभेद सामने आया और किसी एक फैसले के पक्ष में स्पष्ट बहुमत नहीं बन सका। इसके बाद मामला पांच सदस्यीय स्पेशल बेंच के पास भेजा गया। स्पेशल बेंच ने मंगलवार को सुनवाई शुरू करने के बाद कहा कि पहले के आदेशों में मतभेद मौजूद थे और ऐसा स्पष्ट बहुमत नहीं था, जिसके आधार पर आदेश को लागू किया जा सके। इसी आधार पर स्पेशल बेंच ने 25 अगस्त के आदेश के अमल पर रोक लगा दी।
क्या था 25 अगस्त का फैसला?
दरअसल, NCLT ने अपने पुराने आदेश में 22,006 करोड़ रुपये से ज्यादा के लोन से जुड़े मामले में करीब 6.25 करोड़ रुपये के भुगतान के आधार पर निपटारे का रास्ता खोला था। यह रकम सुभाष चंद्रा का व्यक्तिगत कर्ज नहीं थी, लेकिन वह इन ऋणों के गारंटर के तौर पर जुड़े हुए थे। इसी गारंटी से संबंधित दिवालियापन कार्यवाही में NCLT के आदेश ने बेहद कम राशि के भुगतान के जरिए मामले को समाप्त करने की संभावना पैदा कर दी थी।
फैसले के बाद उठे थे कई सवाल
22 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की देनदारी के मुकाबले सिर्फ करीब 6.25 करोड़ रुपये में निपटारे के आदेश ने कई सवाल खड़े कर दिए थे। खासतौर पर इतनी बड़ी देनदारी के मुकाबले भुगतान की राशि बेहद कम होने को लेकर मामले ने तूल पकड़ा। इसके बाद आदेश की समीक्षा और उस पर आगे की कार्रवाई को लेकर मामला NCLT की स्पेशल बेंच तक पहुंचा। अब पांच सदस्यीय बेंच ने पुराने आदेश पर रोक लगाते हुए संपत्तियों के ट्रांसफर पर भी प्रतिबंध लगाया है। फिलहाल मामले में जुड़े पक्षों को नोटिस जारी किए गए हैं और आगे की सुनवाई के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि सुभाष चंद्रा से जुड़े इस दिवालियापन मामले में अंतिम रूप से क्या फैसला आता है।
RBI ने ब्याज दरों में नहीं किया बदलाव, EMI और नए लोन पर फिलहाल राहत नहीं
नई दिल्ली: अगर आप होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन सस्ता होने का इंतजार कर रहे हैं, तो फिलहाल आपको राहत नहीं मिलने वाली है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने लगातार तीन दिन चली बैठक के बाद रेपो रेट 5.25% पर यथावत रखने का फैसला किया है। इसका मतलब है कि मौजूदा समय में लोन की ब्याज दरों और EMI में कोई तत्काल बदलाव नहीं होगा। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 5 अगस्त को मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए कहा कि वैश्विक स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और आर्थिक अनिश्चितताओं ने महंगाई के जोखिम बढ़ा दिए हैं। ऐसे माहौल में केंद्रीय बैंक ने सतर्क रुख अपनाते हुए ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया।
EMI पर क्या होगा असर?
रेपो रेट वह दर होती है, जिस पर RBI वाणिज्यिक बैंकों को अल्पकालिक कर्ज देता है। चूंकि इस बार रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं हुआ है, इसलिए रेपो रेट से जुड़े होम लोन, कार लोन और अन्य फ्लोटिंग रेट लोन की EMI फिलहाल न बढ़ेगी और न ही घटेगी। जिन ग्राहकों की EMI पहले से चल रही है, उन्हें फिलहाल मौजूदा किस्त ही चुकानी होगी।
नए लोन लेने वालों को भी राहत नहीं
अगर आप नया होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन लेने की योजना बना रहे हैं, तो बैंक फिलहाल मौजूदा ब्याज दरों पर ही लोन देंगे। यानी सस्ते लोन की उम्मीद कर रहे ग्राहकों को अभी और इंतजार करना पड़ सकता है। हालांकि भविष्य में महंगाई और आर्थिक परिस्थितियों के आधार पर RBI अपने फैसले में बदलाव कर सकता है। वहीं
रेपो रेट स्थिर रहने का एक फायदा फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) निवेशकों को भी मिलेगा। फिलहाल बैंकों पर जमा योजनाओं की ब्याज दरें घटाने का तत्काल दबाव नहीं होगा। हालांकि अलग-अलग बैंक अपनी फंडिंग लागत और बाजार की स्थिति के अनुसार ब्याज दरों में सीमित बदलाव कर सकते हैं।
RBI ने क्यों नहीं घटाई ब्याज दर?
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि वैश्विक आर्थिक माहौल अभी भी अनिश्चित बना हुआ है। पश्चिम एशिया में तनाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, खाद्य महंगाई और मौसम से जुड़े जोखिमों का असर भारत की मुद्रास्फीति पर पड़ सकता है। ऐसे में केंद्रीय बैंक ने आर्थिक वृद्धि और महंगाई के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए 'वेट एंड वॉच' की रणनीति अपनाई है। RBI ने स्पष्ट किया कि आगे के फैसले आने वाले आर्थिक आंकड़ों और महंगाई की स्थिति को देखते हुए लिए जाएंगे। मतलब साफ है कि भविष्य में ब्याज दरों का फैसला महंगाई, वैश्विक परिस्थितियों और आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर करेगा।
एयर इंडिया CEO कैम्पबेल विल्सन का इस्तीफा, घाटे और क्रैश की जांच के बीच आया बड़ा फैसला
एयर इंडिया के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) और मैनेजिंग डायरेक्टर कैम्पबेल विल्सन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। टाटा ग्रुप के स्वामित्व वाली एयरलाइंस में विल्सन का कार्यकाल जुलाई 2027 तक था, लेकिन उन्होंने अचानक इस्तीफा सौंप दिया। उनका इस्तीफा पिछले हफ्ते बोर्ड मीटिंग में स्वीकार कर लिया गया। सूत्रों के अनुसार, कैम्पबेल विल्सन नया CEO नियुक्त होने तक कंपनी में बने रहेंगे ताकि लीडरशिप ट्रांजिशन सुचारू रूप से हो सके। वे वर्तमान में नोटिस पीरियड पर हैं। विल्सन ने मई 2022 में सिंगापुर एयरलाइंस की सब्सिडियरी Scoot से एयर इंडिया जॉइन की थी। उनका इस्तीफा ऐसे समय आया है जब एयर इंडिया पिछले साल हुए घातक प्लेन क्रैश (जिसमें 260 से ज्यादा लोगों की मौत हुई), लगातार घाटे, ऑपरेशनल चुनौतियों और बढ़ती रेगुलेटरी जांच का सामना कर रही है। टाटा ग्रुप ने अभी नया CEO नियुक्त करने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। यह बदलाव एयर इंडिया के विस्तार और रीब्रांडिंग प्लान के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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टाटा करेगी बिग बास्केट का अधिग्रहण, CCI ने दी मंजूरी
टाटा करेगी बिग बास्केट का अधिग्रहण, CCI ने दी मंजूरी
मुंबई: भारत में ई-कॉमर्स बाजार में पहले से धाक जमा रखी कंपनियों जैसे अमेजन और रिलायंस को टाटा समूह से कांटे की टक्कर मिलने वाली है। भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने टाटा और बिग बास्केट सौदे को मंजूरी दे दी है। टाटा डिजिटल द्वारा बिग बास्केट में अधिकांश हिस्सेदारी की खरीद का यह सौदा 1.2 अरब डॉलर का रहने का अनुमान है। इस अधिग्रहण से टाटा डिजिटल ई-ग्रॉसरी मार्केट में दिग्गज कंपनी बन जाएगी और अमेजन, फ्लिपकार्ट, जियोमार्ट, ग्रोफर्स को कड़ी टक्कर मिलेगी।
टाटा डिजिटल की बिग बास्केट में दिलचस्पी सबसे पहले अक्टूबर 2020 में सामने आई थी। टाटा समूह की प्राथमिक और द्वितीयक अधिग्रहण के जरिये बिगबास्केट की ऑनलाइन बिजनेस टू बिजनेस शाखा सुपरमार्केट ग्रॉसरी सप्लाइज (एसजीएस) में 64.3 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने की योजना है। इसके बाद एक अलग ट्रांजेक्शन में एसजीएस, बिगबास्केट वेबसाइट के जरिये बिजनेस टू कंज्यूमर सेल्स से जुड़े इनोवेटिव रिटेल कॉन्सेप्ट्स पर एकल नियंत्रण हासिल करेगी।
बिग बास्केट इस वक्त भारत के 2 दर्जन से ज्यादा शहरों में बिजनेस कर रही है। इसकी स्थापना 2011 में हुई थी। इसके मौजूदा निवेशकों में अलीबाबा और एक्टिस शामिल हैं। अलीबाबा और एक्टिस की बिगबास्केट में क्रमश: 30 और 17 फीसदी हिस्सेदारी है। ये दोनों निवेशक अपने शेयर टाटा डिजिटल को बेचेंगे। टाटा ने बिग बास्केट में हिस्सेदारी खरीदने का फैसला प्राइमरी और सेकेंडरी शेयर परचेज के जरिये करने का फैसला किया है। इसके अलावा टाटा डिजिटल अबराज ग्रुप और आईएफसी जैसे निवेशकों से भी हिस्सेदारी खरीद सकता है।
टाटा डिजिटल के बारे में
टाटा डिजिटल लिमिटेड का पूरी तरह मालिकाना हक टाटा संस के पास है। यह टाटा सन्स प्राइवेट लिमिटेड के पूर्ण स्वामित्व वाली सब्सिडियरी कंपनी है। टाटा डिजिटल आइडेंटिटी व एक्सेस मैनेजमेंट, लॉयल्टी प्रोग्राम, ऑफर व पेमेंट्स से जुड़ी टेक्नोलॉजी सेवाएं उपलब्ध कराती है। निश्चित सीमा से अधिक के सौदे के लिए भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग से मंजूरी लेने की जरूरत होती है।
काफी सस्ती कीमत में लॉन्च हुआ boAt की ट्रू वायरलेस Earbuds, एक बार चार्ज होकर चलेगा 22 घंटे
ईयरबड्स (Earbuds) कुछ ही समय में लोगों के बीच में काफी पॉपुलर हो गए हैं. इनका इस्तेमाल स्पोर्ट्स,ऑफिस या कार चलाते वक़्त ज्यादा किया जाता है. अगर आप भी ट्रू वायरलेस ईयरबड्स (wireless Earbuds) खरीदने की सोच रहे हैं तो आपको बता दें की ऑडियो ब्रांड boAt ने भारत में बोट्स एयरडॉप्स 701 (boAt Airdopes 701 ANC) को लॉन्च कर दिया. ये लेटेस्ट ईयरबड्स एक्टिव नॉइस कैंसिलेशन फीचर के साथ आते हैं जिन्हें ग्राहक ई-कॉमर्स साइट Amazon और boAt की ऑफिशियल वेबसाइट से खरीद सकते हैं. ये कंपनी का सबसे सस्ता ट्रू wireless ईयरबड्स है जो ANC फीचर के साथ आता है.
boAt के इस ट्रू वायरलेस ईयरबड्स की ब्लूटूथ कनेक्टिविटी रेंज 15 मीटर की है जिसे म्यूज़िक प्लेयर, लैपटॉप, Android, iOS और अन्य ब्लूटूथ डिवाइस के साथ जोड़ा जा सकता है. इसमें कंपनी ने लौ लेटेंसी गेमिंग एक्सपीरियंस के लिए बीस्ट मोड,एनसी मोड और एंबियंट साउंड के लिए क्रिस्टल मोड दिए है. ये boAt ईयरबड्स 9mm ड्राइवर्स के साथ आते हैं.
Xiaomi के पॉपुलर नोट 10 प्रो की बड़ी सेल आज, मिलेगा 120Hz का डिस्प्ले और 5020mAh की बैटरी
अगर आप अभी तक शियोमी रेडमी 10 सीरीज़ के रेडमी नोट 10 प्रो (Redmi Note 10 Pro) को नहीं खरीद पाएं हैं, तो आज (21 अप्रैल) आपके लिए अच्छा मौका है. दरअसल अमेज़न पर आज दोपहर 12 बजे नोट 10 प्रो की फ्लैश सेल रखी गई है. इस फोन की सबसे खास बात इसकी 8GB RAM, 64 मेगापिक्सल कैमरा और इसकी 5020mAh की बैटरी है. कीमत की बात करें तो कंपनी ने अपने इस फोन की शुरुआती कीमत सिर्फ 15,999 रुपये रखी है लेकिन यहां से ग्राहक फोन पर ऑफर का फायदा भी पा सकते हैं
इस फोन में 8 जीबी तक की LPDDR4x रैम दी गई है. फोन 128 जीबी के UFS 2.2 इंटरनल स्टोरेज के साथ आता है. फोन की मेमोरी माइक्रो एसडी कार्ड की मदद से 512जीबी तक बढ़ाई जा सकती है.
शियोमी के इस नए फोन रेडमी नोट 10 प्रो में 6.67 इंच का फुल एचडी+ सुपर AMOLED डिस्प्ले दिया गया है. इसका डिस्प्ले 120Hz के रिफ्रेश रेट और HDR10 सपोर्ट के साथ आता है. ये ड्यूल नैनो-सिम सपोर्ट के साथ आता है. प्रोसेसर के तौर पर इस फोन में स्नैपड्रैगन 732G SoC दिया गया है. मिलेगा 64 मेगापिक्सल कैमरा कैमरे के तौर पर इस फोन में एलईडी फ्लैश के साथ क्वॉड रियर कैमरा सेटअप दिया गया है. इसमें 64 मेगापिक्सल के प्राइमरी कैमरे के साथ एक 8 मेगापिक्सल का अस्ट्रा-वाइड ऐंगल लेंस, एक 5 मेगापिक्सल का सुपर मैक्रो लेंस और एक 2 मेगापिक्सल का डेप्थ सेंसर दिया गया है.
फोन के फ्रंट में सेल्फी के लिए 16 मेगापिक्सल का कैमरा दिया गया है. पावर के लिए इस स्मार्टफोन में 5020mAh की बैटरी दी गई है, जो 33 वॉट की फास्ट चार्जिंग सपोर्ट के साथ आती है.
Redmi Note 10 Pro की कीमत रेडमी नोट 10 प्रो 15,999 रुपये की शुरुआती कीमत में आता है, जो कि इसके 6GB+64GB वेरिएंट के लिए है. इसके अलावा इसके 6GB+128GB वेरिएंट की कीमत 16,999 रुपये और 8GB+128GB मॉडल की कीमत 18,999 रुपये रखी गई है.
इस साल लॉन्चिंग को तैयार iPhone 13 की अहम जानकारी लीक! मिल सकती है 1TB तक की स्टोरेज
दिग्गज अमेरिकी टेक कंपनी Apple अपने स्मार्टफोन iPhone 13 सीरीज़ को मार्केट में लाने की तैयारी में है. इस मॉडल की कई डिटेल्स लीक हुई है, अब एक और इससे जुड़ी जानकारी आ रही है जो iPhone के चाहने वालो को बेहद पसंद आएगी. जानकारों के अनुसार, कंपनी अपने इस मॉडल में स्टोरेज को बढ़ाने जा रही है. यूज़र्स की स्टोरेज के प्रति बढ़ते हुए क्रेज को देखते हुए कंपनी अपने नेक्स्ट iPhone 13 मॉडल का 1TB स्टोरेज वेरिएंट को लॉन्च कर सकती है.
एंड्रायड यूज़र्स को कंपनिया स्टोरेज को बढ़ाने का ऑप्शन देती है, लेकिन iPhone में ऐसा कोई विकल्प नहीं होता है, जिससे आप उसके स्टोरेज को बढ़ा सकें. रिसर्च फर्म कॉउंटरपॉइंट के अनुसार, हाई स्टोरेज ऑप्शंस की डिमांड में Apple से आगे केवल सिर्फ टेक दिग्गज Huawei ही है.
कोरोनाकाल में करें Gold में निवेश.. ये 3 ऑप्शन है सबसे बेहतर, होगा तगड़ा मुनाफा
नई दिल्ली. कोरोनाकाल में अगर आप निवेश करने की योजना बना रहे हैं तो आप सोना (Gold) में निवेश कर सकते हैं. सोना दुनिया भर में निवेशकों के लिए सुरक्षित विकल्प के तौर पर उभरा है. लोग सोने में हर तरीके से निवेश (Gold investment) करना चाहते हैं, अगर आप सोने में निवेश करने के बारे में सोच रहे हैं तो आपके लिए यह अच्छा मौका है. बता दें कि अभी सोने के भाव में तेजी है. आने वाले समय में सोना और महंगा होगा. पिछले दो माह सोना 4000 महंगा हुआ है. ऐसे में निवेशकों का मानना है कि इस समय निवेश करना बेहतर रहेगा. आइए हम आपको बताते हैं कि कोरोना वायरस (Corona virus pandemic) के इस संकट काल में सोना खरीदने या निवेश करने के लिए 3 बेस्ट ऑप्शन (Type Of gold investment) कौन-से हैं.
क्यों करना चाहिए गोल्ड में निवेश? सोने में वह सभी गुण हैं जो एक पारंपरिक निवेशक एक एसेट क्लास में देखता है. गोल्ड पर मिलने वाला निवेश हमेशा से महंगाई को हराने में कामयाब रहा है.दूसरे जीवन में इमरजेंसी कभी भी आ सकती है. इसलिए ऐसी इमरजेंसी के लिए आर्थिक रूप से तैयार रहना जरूरी है. आप इस मामले में अपने सोने के निवेश पर भरोसा कर सकते हैं क्योंकि यह बाजार में जल्दी से लिक्विड (बेच कर पैसा मिलना) हो जाता है. जानें, तीन तरीकों के बारे में... 1.फिजिकल गोल्ड खरीदना फिजिकल गोल्ड खरीदने का एक विकल्प अपने पड़ोस का ज्वैलर है जिस पर आप विश्वास भी करें. गोल्ड ज्वेलरी खरीदने से पहले उसकी शुद्धता को ठीक से जांच लें.शुद्धता चेक करने के लिए हॉलमार्किंग सबसे आसान तरीका है. बीआईएस सोने के आभूषणों के लिए सर्टिफिकेशन और हॉलमार्किंग संस्था है. अगर आप सोने की ज्वेलरी बनवाएं तो इस पर 6% से 14% के बीच चार्ज लगता है. कुछ ज्वेलर्स इसके लिए फिक्स्ड मेकिंग चार्ज लेते हैं.