उज्जैन के सती गेट के पास स्थित प्रसिद्ध खड़े हनुमान मंदिर इन दिनों लगातार सुर्खियों में है। मंदिर से जुड़ी कार्रवाई और प्रतिमा को हटाने से संबंधित कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद यहां श्रद्धालुओं की संख्या तेजी से बढ़ी है। इसी बीच मंदिर के आसपास कुछ लंगूर दिखाई देने से भी श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के बीच चर्चा शुरू हो गई है। मंदिर की प्रतिमा को लेकर सोशल मीडिया पर तरह-तरह के दावे किए जा रहे हैं। कई वीडियो और रील्स में प्रतिमा के कथित तौर पर नहीं हटने को लेकर अलग-अलग कहानियां दिखाई जा रही हैं। इंस्टाग्राम, यूट्यूब समेत दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ऐसे वीडियो तेजी से प्रसारित हो रहे हैं। इन वायरल वीडियो का असर मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या पर भी दिखाई दे रहा है। बताया जा रहा है कि पिछले चार दिनों में 8 हजार से ज्यादा श्रद्धालु मंदिर पहुंच चुके हैं। मध्य प्रदेश के अलावा गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान से भी लोग दर्शन के लिए उज्जैन पहुंच रहे हैं।
दर्शन के साथ सोशल मीडिया पर बना रहे रील
मंदिर पहुंचने वाले कई श्रद्धालु दर्शन के बाद खड़े हनुमान की प्रतिमा के वीडियो और रील बनाकर सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे हैं। इसके चलते मंदिर से जुड़े वीडियो लगातार अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर पहुंच रहे हैं। इसी दौरान मंदिर के आसपास लंगूरों की मौजूदगी ने भी लोगों का ध्यान खींचा है। मंदिर परिसर और आसपास मौजूद श्रद्धालुओं के बीच लंगूरों को लेकर चर्चा होती रही। हालांकि, लंगूरों के मंदिर पहुंचने को लेकर प्रशासन की ओर से किसी विशेष धार्मिक या अन्य दावे की पुष्टि नहीं की गई है।
मंदिर के आसपास का इलाका तोड़ा गया, प्रतिमा टेंट में विराजमान
मंदिर के आसपास का बड़ा हिस्सा पिछले करीब एक सप्ताह में हटाया जा चुका है। फिलहाल हनुमानजी की प्रतिमा को टेंट के भीतर रखा गया है। प्रतिमा को हटाए जाने की कार्रवाई को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। वायरल वीडियो में किए जा रहे दावों और वास्तविक प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर भी लोगों के बीच चर्चा बनी हुई है। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए मंदिर के आसपास बैरिकेडिंग की गई है और पुलिस बल की तैनाती भी की गई है। सुबह से शाम तक मंदिर में दर्शन के लिए लोगों का आना-जाना जारी है। खास बात यह है कि इस समय कोई बड़ा धार्मिक त्योहार नहीं है, इसके बावजूद मंदिर में लगातार भीड़ देखने को मिल रही है।
चार दिन में 8 हजार से ज्यादा श्रद्धालु पहुंचे
आमतौर पर मंदिरों में भीड़ त्योहार और विशेष वार के अनुसार बढ़ती है। मंगलवार को हनुमान मंदिरों में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने की परंपरा भी देखी जाती है। लेकिन उज्जैन का खड़े हनुमान मंदिर इन दिनों किसी बड़े त्योहार के बिना ही बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रहा है। कई श्रद्धालु इस मंदिर को अपनी आस्था से जुड़ा विशेष स्थान मानते हैं। स्थानीय स्तर पर यहां मिलने वाले ताबीज और झड़नी को लेकर भी कई तरह की मान्यताएं प्रचलित हैं। इन्हीं धार्मिक मान्यताओं के चलते स्थानीय लोगों के अलावा दूसरे राज्यों से भी श्रद्धालु यहां पहुंच रहे हैं। हालांकि, इन मान्यताओं को चिकित्सा संबंधी प्रमाण के तौर पर नहीं देखा जा सकता।
मंदिर हटाने को लेकर क्या कह रहे हैं श्रद्धालु?
गुरुवार को आजतक की ओर से मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं से बातचीत कर मंदिर को हटाए जाने के मुद्दे पर उनकी राय जानी गई। स्थानीय और दूसरे राज्यों से पहुंचे कई श्रद्धालुओं ने मंदिर को इसी स्थान पर बनाए रखने की मांग की। श्रद्धालुओं का कहना है कि विकास कार्य जरूरी हैं, लेकिन इसके साथ लोगों की धार्मिक भावनाओं का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। उनका दावा है कि उज्जैन में विकास कार्यों के दौरान अब तक 60 से ज्यादा मंदिरों को दूसरी जगह स्थानांतरित किया जा चुका है। ऐसे में उनकी मांग है कि खड़े हनुमान मंदिर को यथासंभव इसी स्थान पर रखा जाए। फिलहाल मंदिर को लेकर प्रशासनिक कार्रवाई, सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो और बढ़ती श्रद्धालुओं की भीड़ ने इसे उज्जैन के चर्चित धार्मिक स्थलों में शामिल कर दिया है। आने वाले दिनों में प्रशासन की अगली कार्रवाई और मंदिर की स्थिति पर सभी की नजर बनी हुई है।
मंदिर का ढांचा टूटा, हनुमान प्रतिमा नहीं हिली... उज्जैन में विस्थापन को लेकर संतों और प्रशासन आमने-सामने
उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण के बीच अति प्राचीन खड़े हनुमान मंदिर की प्रतिमा को हटाने का मामला लगातार तूल पकड़ रहा है। मंदिर परिसर के बाहर साधु-संतों, हिंदू संगठनों और श्रद्धालुओं की भीड़ जुट रही है। प्रतिमा को हटाने के प्रशासन के कई प्रयास सफल नहीं हुए हैं। इसे लेकर संत और श्रद्धालु इसे आस्था से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतिमा की संरचना और उसके आधार की तकनीकी स्थिति को समझना जरूरी है। कंठाल चौराहे से छत्री चौक तक चल रहे सड़क चौड़ीकरण कार्य की जद में आने के बाद मंदिर के मुख्य ढांचे और गर्भगृह को हटाया जा चुका है। हालांकि, मंदिर में स्थापित प्राचीन हनुमान प्रतिमा को दूसरी जगह ले जाना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
चार प्रयासों के बाद भी नहीं हट सकी प्रतिमा
प्रशासन की ओर से प्रतिमा को सुरक्षित तरीके से हटाने के लिए कई बार प्रयास किए गए। बताया जा रहा है कि अब तक करीब चार प्रयास हो चुके हैं, लेकिन प्रतिमा अपने स्थान से नहीं हट सकी। मंदिर का ढांचा हटाए जाने के बाद प्रतिमा को फिलहाल कैनोपी लगाकर सुरक्षित रखा गया है। मंदिर के बाहर स्थानीय श्रद्धालुओं ने एक चेतावनी पोस्टर भी लगाया है, जिसमें प्रतिमा को किसी तरह का नुकसान होने पर प्रशासन को जिम्मेदार ठहराने की बात कही गई है। इस बीच बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंच रहे हैं। कुछ श्रद्धालु प्रतिमा के न हट पाने को चमत्कार से जोड़ रहे हैं और मंदिर से जुड़े अपने अनुभव भी साझा कर रहे हैं।
पुरातत्वविद् ने बताई प्रतिमा की खासियत
विक्रम विश्वविद्यालय से जुड़े पुरातत्वविद् प्रो. डॉ. रमण सोलंकी के मुताबिक, यह प्रतिमा मालवा क्षेत्र में पाए जाने वाले विशेष बेसाल्ट पत्थर से निर्मित है। उनका मानना है कि इसकी शिल्पकला परमार काल और राजा भोज के दौर की कला परंपरा से समानताएं दिखाई देती हैं। डॉ. सोलंकी के अनुसार, प्रतिमा के लंबे समय से एक ही स्थान पर मजबूती से टिके रहने के पीछे उसकी संरचनात्मक बनावट और आधार महत्वपूर्ण हो सकता है। उनका कहना है कि प्राचीन निर्माण तकनीकों में पत्थरों को विशेष तरीके से जोड़कर संरचनाओं को मजबूत बनाया जाता था। उनके मुताबिक, प्रतिमा को हटाने से पहले उसकी संरचना और आधार का वैज्ञानिक अध्ययन किया जाना चाहिए।
ASI और पुरातत्व विभाग से सलाह लेने की बात
पुरातत्वविद् ने सुझाव दिया है कि प्रतिमा को हटाने या दोबारा स्थापित करने की प्रक्रिया में मध्यप्रदेश पुरातत्व विभाग और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के विशेषज्ञों से सलाह ली जाए। उनका तर्क है कि प्राचीन प्रतिमाओं के संरक्षण और पुनर्स्थापना के लिए इन संस्थानों के पास तकनीकी विशेषज्ञता और अनुभव उपलब्ध है। विशेषज्ञों की निगरानी में कार्रवाई करने से प्रतिमा को नुकसान पहुंचने का खतरा कम किया जा सकता है।
क्यों हटाई जा रही है प्रतिमा?
दरअसल, उज्जैन में कंठाल चौराहे से छत्री चौक तक सड़क को चौड़ा करने का काम चल रहा है। इसी परियोजना के दायरे में खड़े हनुमान मंदिर का हिस्सा आया है। सड़क निर्माण के लिए मंदिर का ढांचा हटाया गया, लेकिन प्रतिमा को दूसरी जगह स्थानांतरित करना अब सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। प्रशासन की योजना प्रतिमा को सुरक्षित तरीके से टंकी चौक पर स्थापित करने की बताई जा रही है।
अब स्कैनिंग रिपोर्ट का इंतजार
प्रतिमा के नीचे के आधार की स्थिति समझने के लिए करीब डेढ़ फीट तक खुदाई भी की गई है। हालांकि, अब प्रशासन जल्दबाजी में प्रतिमा हटाने के बजाय तकनीकी विशेषज्ञों की मदद लेने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। अत्याधुनिक मशीनों के जरिए प्रतिमा के आधार, उसकी अंदरूनी संरचना और आसपास की मिट्टी की जांच की जाएगी। इस स्कैनिंग की रिपोर्ट मिलने के बाद ही यह तय किया जाएगा कि प्रतिमा को किस तकनीक से सुरक्षित तरीके से हटाया या स्थानांतरित किया जा सकता है। फिलहाल मामला आस्था, विरासत संरक्षण और सड़क विकास—तीनों पहलुओं के बीच संतुलन का बन गया है। प्रशासन के अगले कदम पर संतों, श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की नजर बनी हुई है।
MP में RGPV अब तीन यूनिवर्सिटी में बंटेगी, राजीव गांधी का नाम हटेगा; कांग्रेस ने जताया विरोध
भोपाल: मध्य प्रदेश की तकनीकी शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में भोपाल स्थित राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (RGPV) के पुनर्गठन को मंजूरी दे दी गई है। अब मौजूदा विश्वविद्यालय को तीन क्षेत्रीय तकनीकी एवं कौशल विश्वविद्यालयों में बांटा जाएगा। इसके साथ ही नए विश्वविद्यालयों के नाम से पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का नाम भी हटा दिया जाएगा। सरकार के मुताबिक, इस पुनर्गठन का उद्देश्य तकनीकी शिक्षा को क्षेत्रीय जरूरतों के अनुरूप मजबूत करना, प्रशासनिक व्यवस्था को आसान बनाना और प्रदेश में तकनीकी शिक्षा का क्षेत्रीय संतुलन बेहतर करना है।
भोपाल, उज्जैन और जबलपुर में होंगे ३ विश्वविद्यालय
नई व्यवस्था के तहत तीन क्षेत्रीय विश्वविद्यालय बनाए जाएंगे... भोपाल: मध्य भारत प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय, उज्जैन: मालवा प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय, जबलपुर: महाकौशल प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय...भोपाल वाला विश्वविद्यालय मौजूदा RGPV के पुनर्गठन से अस्तित्व में आएगा, जबकि उज्जैन और जबलपुर में मौजूदा स्वशासी इंजीनियरिंग कॉलेजों को नए विश्वविद्यालयों के रूप में विकसित किया जाएगा। तीनों संस्थानों के संचालन के लिए अलग-अलग कानून बनाए जाएंगे।
संभागों के हिसाब से बंटेगा क्षेत्राधिकार
तीनों विश्वविद्यालयों के अंतर्गत तकनीकी संस्थानों का क्षेत्राधिकार भी अलग-अलग तय किया गया है। भोपाल स्थित विश्वविद्यालय के अधीन भोपाल, नर्मदापुरम, चंबल और ग्वालियर संभाग रहेंगे। उज्जैन विश्वविद्यालय में उज्जैन और इंदौर संभाग के तकनीकी संस्थान शामिल होंगे। वहीं जबलपुर विश्वविद्यालय के दायरे में जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग आएंगे।
3.83 लाख से ज्यादा छात्रों पर पड़ेगा असर
RGPV प्रदेश की तकनीकी शिक्षा व्यवस्था का एक बड़ा केंद्र है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान विश्वविद्यालय के तहत 13 पाठ्यक्रम, 585 संस्थान और 3.83 लाख से अधिक विद्यार्थी जुड़े हुए हैं। ऐसे में तीन विश्वविद्यालयों में पुनर्गठन के बाद बड़ी संख्या में छात्रों और तकनीकी संस्थानों की प्रशासनिक व्यवस्था नए ढांचे में आएगी। सरकार ने उज्जैन और जबलपुर के नए विश्वविद्यालयों के लिए कुलगुरु, कुलसचिव, परीक्षा नियंत्रक, उप कुलसचिव और वित्त अधिकारी जैसे प्रमुख पदों के गठन को भी मंजूरी दी है।
राजीव गांधी का नाम हटाने पर कांग्रेस का हमला
विश्वविद्यालय का नाम बदलने के फैसले ने राजनीतिक विवाद भी खड़ा कर दिया है। कांग्रेस नेताओं ने सरकार के फैसले पर सवाल उठाते हुए इसे राजनीतिक कदम बताया है। कांग्रेस नेता मुकेश नायक ने आरोप लगाया कि सरकार आधुनिक भारत के निर्माण में राजीव गांधी के योगदान को नजरअंदाज कर रही है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय से राजीव गांधी का नाम हटाने का फैसला स्वीकार्य नहीं है। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि नाम बदलने से इतिहास नहीं बदला जा सकता। उन्होंने सरकार से विश्वविद्यालय के नाम से राजीव गांधी का नाम नहीं हटाने की मांग की। वहीं कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भी सरकार के फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया दी और इसे लेकर बीजेपी सरकार पर निशाना साधा।
सरकार ने बताया क्या है मकसद?
सरकार का कहना है कि RGPV का दायरा काफी बड़ा होने के कारण तकनीकी शिक्षा के संचालन और प्रशासन को क्षेत्रीय स्तर पर मजबूत करने की जरूरत है। तीन अलग-अलग विश्वविद्यालय बनने से विद्यार्थियों और संस्थानों के लिए प्रशासनिक पहुंच आसान होगी तथा स्थानीय जरूरतों के मुताबिक तकनीकी और कौशल शिक्षा को विकसित किया जा सकेगा। इस फैसले के साथ मध्य प्रदेश की तकनीकी शिक्षा व्यवस्था में करीब तीन दशक पुराने RGPV के मौजूदा ढांचे में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। अब आगे की प्रक्रिया में नए विश्वविद्यालयों के गठन, अलग-अलग अधिनियम और प्रशासनिक ढांचे को लागू किया जाएगा।