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जतिन दास: 63 दिनों की भूख हड़ताल, देश की आजादी के लिए जेल में दे दी जान

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में कई क्रांतिकारियों ने देश की आजादी के लिए अपना जीवन न्योछावर किया। जतिन दास भी उन्हीं वीरों में शामिल थे, जिन्होंने अंग्रेजों की जेल में राजनीतिक बंदियों के अधिकारों के लिए आखिरी सांस तक संघर्ष किया। लाहौर जेल में 63 दिनों तक भूख हड़ताल करने के बाद 13 सितंबर 1929 को उनका निधन हो गया। उनका बलिदान ब्रिटिश शासन की जेल व्यवस्था और भारतीय कैदियों के साथ होने वाले भेदभाव के खिलाफ देशव्यापी विरोध का प्रतीक बन गया।

कौन थे जतिन दास?

जतिन दास का पूरा नाम जतिंद्रनाथ दास था। उनका जन्म 27 अक्टूबर 1904 को कलकत्ता, वर्तमान कोलकाता में हुआ था। बचपन से ही उनमें देश के प्रति लगाव और अंग्रेजी शासन से मुक्ति की भावना थी। महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन ने भी उन्हें प्रभावित किया। आगे चलकर वे क्रांतिकारी गतिविधियों से जुड़ गए और स्वतंत्रता की लड़ाई में सक्रिय भूमिका निभाने लगे।

जतिन दास बंगाल के क्रांतिकारी संगठनों से जुड़े थे। बाद में उन्होंने हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA) के लिए भी काम किया। इस संगठन से भगत सिंह, सुखदेव और चंद्रशेखर आजाद जैसे क्रांतिकारी जुड़े हुए थे। जतिन दास को रसायन विज्ञान और विस्फोटक बनाने की तकनीक का ज्ञान था, जिसका इस्तेमाल क्रांतिकारी गतिविधियों में किया गया।

जेल में भारतीय कैदियों के साथ होता था भेदभाव

1929 में लाहौर षड्यंत्र मामले के सिलसिले में जतिन दास को गिरफ्तार कर लाहौर जेल में रखा गया। वहां उन्होंने भारतीय कैदियों की खराब हालत को करीब से देखा। भारतीय बंदियों को खराब खाना, गंदे कपड़े और अस्वच्छ वातावरण जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता था। इसके अलावा, उन्हें किताबें और अखबार पढ़ने जैसी बुनियादी सुविधाएं भी पर्याप्त रूप से नहीं मिलती थीं। क्रांतिकारियों का कहना था कि राजनीतिक मामलों में गिरफ्तार किए गए लोगों के साथ सामान्य अपराधियों जैसा व्यवहार नहीं होना चाहिए। वे बेहतर भोजन, साफ कपड़े, स्वच्छ रहने की जगह और पढ़ने-लिखने की सुविधाएं चाहते थे। जब उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो जेल के भीतर विरोध शुरू हुआ। भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त समेत कई क्रांतिकारियों ने भूख हड़ताल का रास्ता अपनाया।

13 जुलाई 1929 से शुरू हुई ऐतिहासिक भूख हड़ताल

जतिन दास 13 जुलाई 1929 को भूख हड़ताल में शामिल हुए। उनका उद्देश्य जेल प्रशासन पर दबाव बनाना था, ताकि राजनीतिक बंदियों के साथ सम्मानजनक और समान व्यवहार किया जाए। दिन बीतने के साथ उनकी सेहत बिगड़ती चली गई। जेल प्रशासन ने भूख हड़ताल खत्म कराने के लिए जबरन भोजन कराने की कोशिशें भी कीं। इसके बावजूद जतिन दास अपनी मांगों से पीछे नहीं हटे। उनकी हालत गंभीर होने लगी, लेकिन उन्होंने संघर्ष जारी रखा। यह भूख हड़ताल केवल जेल की सुविधाओं का मामला नहीं रह गई थी। इसने ब्रिटिश शासन की दमनकारी नीतियों और भारतीय कैदियों के साथ होने वाले व्यवहार को राष्ट्रीय बहस का विषय बना दिया।

63 दिनों तक संघर्ष, फिर देश के लिए शहादत

13 सितंबर 1929 को लाहौर जेल में जतिन दास का निधन हो गया। उनकी उम्र उस समय केवल 24 वर्ष थी। लगातार 63 दिनों तक भूख हड़ताल करने के कारण उनका शरीर बेहद कमजोर हो चुका था। उनकी मृत्यु की खबर फैलते ही देशभर में शोक और आक्रोश का माहौल बन गया। राजनीतिक बंदियों के अधिकारों की मांग को व्यापक समर्थन मिलने लगा। जतिन दास ने अपने संघर्ष के जरिए यह सवाल उठाया कि किसी व्यक्ति को जेल में रखने का मतलब क्या उसके बुनियादी अधिकार और मानवीय सम्मान छीन लेना भी है? उनकी शहादत ने स्वतंत्रता आंदोलन को भावनात्मक और राजनीतिक स्तर पर गहरा प्रभावित किया।

अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब

जतिन दास के निधन के बाद उनके पार्थिव शरीर को लाहौर से कलकत्ता ले जाया गया। रास्ते में कई रेलवे स्टेशनों पर लोग उनके अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे। कलकत्ता में भी उनकी अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया। इस यात्रा में सुभाष चंद्र बोस की महत्वपूर्ण भूमिका रही। जतिन दास के अंतिम संस्कार में उमड़ी भीड़ ने दिखाया कि उनका बलिदान केवल क्रांतिकारी संगठनों तक सीमित नहीं था, बल्कि आम जनता के दिलों को भी छू चुका था। उनकी शहादत ने ब्रिटिश शासन के प्रति असंतोष और स्वतंत्रता सेनानियों के प्रति सम्मान को और मजबूत किया।

जतिन दास की शहादत पर विधानसभा में भी उठा सवाल

जतिन दास की मौत के बाद राजनीतिक बंदियों के साथ होने वाले व्यवहार का मुद्दा केंद्रीय विधायी सभा में भी उठा। मोतीलाल नेहरू ने जेल में क्रांतिकारियों की स्थिति को लेकर निंदा प्रस्ताव पेश किया। ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, यह प्रस्ताव 55 के मुकाबले 47 मतों से पारित हुआ। इस घटनाक्रम ने जेलों की परिस्थितियों और राजनीतिक बंदियों के अधिकारों पर बहस को और तेज किया। हालांकि, क्रांतिकारियों की सभी मांगें तत्काल स्वीकार नहीं की गईं, लेकिन उनकी भूख हड़ताल ने जेल सुधार और मानवीय व्यवहार के सवाल को राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुखता दिलाई।

भगत सिंह के साथी ही नहीं, अपने आप में एक महान क्रांतिकारी

जतिन दास को अक्सर भगत सिंह और अन्य क्रांतिकारियों के साथ याद किया जाता है, लेकिन उनका योगदान स्वतंत्र पहचान रखता है। उन्होंने जेल के भीतर अमानवीय परिस्थितियों के खिलाफ ऐसा संघर्ष किया, जिसकी गूंज पूरे देश में सुनाई दी। उनकी लड़ाई इस विचार पर आधारित थी कि स्वतंत्रता का अर्थ केवल अंग्रेजों को देश से बाहर करना नहीं, बल्कि अन्याय और भेदभाव के खिलाफ खड़ा होना भी है। उनका बलिदान राजनीतिक बंदियों के अधिकारों और मानवीय गरिमा की रक्षा के संघर्ष का अहम अध्याय है।

आज भी प्रासंगिक है जतिन दास का संदेश

जतिन दास की कहानी आज भी याद दिलाती है कि किसी भी परिस्थिति में इंसान की गरिमा और बुनियादी अधिकारों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए। जेल में बंद व्यक्ति भी सम्मानजनक व्यवहार, स्वच्छ वातावरण और जरूरी सुविधाओं का हकदार है। उन्होंने अपने सिद्धांतों के लिए जिस दृढ़ता से संघर्ष किया, वह आज की पीढ़ी को भी अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने की प्रेरणा देता है। जतिन दास का जीवन छोटा था, लेकिन उनका बलिदान भारतीय इतिहास में अमिट छाप छोड़ गया। 63 दिनों की भूख हड़ताल ने उन्हें उस क्रांतिकारी के रूप में स्थापित किया, जिसने राजनीतिक बंदियों के सम्मान और अधिकारों के लिए अपने प्राण तक न्योछावर कर दिए।


E20 पेट्रोल के विरोध पर नितिन गडकरी का बड़ा बयान, बोले- ‘पैसे देकर चलाया गया अभियान’

पेट्रोल में 20 फीसदी एथेनॉल मिलाने यानी E20 ईंधन को लेकर उठे विरोध पर केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसे ‘पैसे देकर चलाया गया अभियान’ बताया। साथ ही, उन्होंने एथेनॉल के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के पीछे विदेशी ईंधन पर भारत की निर्भरता कम करने और विदेशी मुद्रा बचाने का तर्क दिया।

E20 ईंधन के विरोध पर क्या बोले गडकरी?

भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) के एक कार्यक्रम में मंगलवार को बोलते हुए नितिन गडकरी ने कहा कि कुछ महीने पहले E20 पेट्रोल को लेकर काफी विरोध देखने को मिला था। उनके मुताबिक, अब इस मुद्दे पर नाराजगी पहले जैसी नहीं रही है। गडकरी ने दावा किया कि E20 के खिलाफ चलाया गया विरोध अभियान पैसे देकर संचालित किया गया था। हालांकि, इस दावे के समर्थन में उन्होंने कार्यक्रम के दौरान कोई सार्वजनिक प्रमाण पेश किया या नहीं, इसकी पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती। E20 पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल और शेष पेट्रोल होता है। सरकार एथेनॉल मिश्रण को बढ़ावा देकर कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटाने की दिशा में काम कर रही है।

एथेनॉल से विदेशी मुद्रा बचाने पर जोर

गडकरी ने कहा कि भारत को जीवाश्म ईंधन के आयात पर होने वाले खर्च को कम करने की जरूरत है। एथेनॉल जैसे वैकल्पिक ईंधन का इस्तेमाल बढ़ने से देश की विदेशी मुद्रा बचाने में मदद मिल सकती है। इसी बीच, केंद्र सरकार ने केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में संशोधन अधिसूचित किए हैं। इन संशोधनों के तहत E100 तक एथेनॉल पर चलने वाले फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए नियामकीय अनुमति का प्रावधान किया गया है। फ्लेक्स-फ्यूल वाहन अलग-अलग अनुपात में पेट्रोल और एथेनॉल वाले ईंधन पर चलने के लिए डिजाइन किए जाते हैं। हालांकि, किसी वाहन की वास्तविक अनुकूलता उसके इंजन और निर्माता की निर्धारित विशिष्टताओं पर निर्भर करती है।

खराब सड़कों पर भी गडकरी ने दिया भरोसा

कार्यक्रम के दौरान गडकरी ने राष्ट्रीय राजमार्गों की गुणवत्ता का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया पर सड़कों की खराब हालत को लेकर मिली शिकायतों के बाद उन्होंने हाल में करीब 700 से 800 परियोजनाओं की समीक्षा की है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि राजमार्गों की गुणवत्ता से समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने भरोसा जताया कि अगले दो वर्षों में राजमार्गों पर यात्रा करने वाले लोगों को असुविधा का सामना नहीं करना पड़ेगा।

E20 पर बहस के बीच क्या है अहम सवाल?

E20 को लेकर बहस में एक तरफ सरकार का तर्क है कि एथेनॉल मिश्रण से तेल आयात पर निर्भरता घटाने और घरेलू ईंधन विकल्पों को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है। दूसरी तरफ, उपभोक्ताओं की चिंताओं में वाहन की अनुकूलता, माइलेज और लंबे समय में इंजन पर संभावित असर जैसे मुद्दे शामिल हैं। ऐसे में एथेनॉल मिश्रण के फायदे और उससे जुड़ी चिंताओं का आकलन तकनीकी प्रमाणों और विश्वसनीय आंकड़ों के आधार पर किया जाना जरूरी है। गडकरी का बयान इस मुद्दे पर सरकार का पक्ष सामने रखता है, लेकिन E20 को लेकर उपभोक्ताओं के सभी सवालों का जवाब अलग-अलग तकनीकी तथ्यों से ही मिल सकता है।


देवास में 13 संदिग्ध मौतों पर सियासत तेज, उमंग सिंघार ने उठाए सवाल; 10 लोग गिरफ्तार

देवास: मध्य प्रदेश के देवास जिले के चंदाना और बिंजाना गांवों में हुई 13 लोगों की संदिग्ध मौतों का मामला राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गया है। मृतकों के परिजनों ने कथित तौर पर शराब पीने के बाद तबीयत बिगड़ने की बात कही है, जबकि जिला प्रशासन ने जहरीली शराब से मौत होने के दावों पर सवाल उठाए हैं। मामले की जांच के बीच पुलिस ने अवैध शराब की बिक्री के आरोप में 10 लोगों को गिरफ्तार किया है।

सोमवार को मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार चंदाना गांव पहुंचे और मृतकों के परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने घटना को लेकर प्रशासन और आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। सिंघार ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से फोन पर बातचीत कर मामले की जानकारी देने और प्रभावित परिवारों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराने की मांग की।

उमंग सिंघार ने आबकारी विभाग और प्रशासन पर उठाए सवाल

मृतकों के परिजनों से बातचीत के बाद उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि गांव में लंबे समय से अवैध शराब की बिक्री हो रही थी। उन्होंने परिजनों के हवाले से दावा किया कि कुछ मृतकों ने स्थानीय स्तर पर बेची जा रही शराब का सेवन किया था, जिसके बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई। सिंघार ने आबकारी विभाग और जिला प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर अवैध शराब की बिक्री हो रही थी, तो उसे रोकने के लिए समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई। उन्होंने मामले में जिम्मेदार लोगों की पहचान करने और पूरे नेटवर्क की जांच कराने की मांग की। हालांकि, शराब के सेवन और सभी मौतों के बीच संबंध की आधिकारिक पुष्टि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी।

मुख्यमंत्री से तत्काल हस्तक्षेप की मांग

नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से फोन पर बात कर प्रभावित परिवारों की स्थिति और मामले की गंभीरता से अवगत कराने की बात कही। उन्होंने कहा कि जांच अपनी जगह जरूरी है, लेकिन जिन परिवारों ने अपने सदस्यों को खोया है, उन्हें तत्काल आर्थिक सहायता भी मिलनी चाहिए। सिंघार ने प्रत्येक मृतक के परिवार को 25 लाख रुपये का मुआवजा देने की मांग की। उन्होंने प्रशासन की ओर से राहत पहुंचाने में देरी होने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार को प्रभावित परिवारों की मदद के लिए तुरंत कदम उठाने चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस इस मामले को विधानसभा में उठाएगी, ताकि मौतों के कारणों और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़े सवालों पर चर्चा हो सके।

आबकारी आयुक्त को लेकर भी की टिप्पणी

सिंघार ने प्रदेश के आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना को लेकर भी टिप्पणी की और उनके मुख्यमंत्री से कथित पुराने संबंधों का जिक्र किया। उन्होंने सवाल उठाया कि राज्य में अवैध शराब की बिक्री के आरोप सामने आने पर संबंधित विभाग और अधिकारियों की जवाबदेही कैसे तय की जाएगी। यह बयान विपक्ष की ओर से सरकार और आबकारी विभाग पर लगाए गए आरोपों का हिस्सा है। मामले में संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने के लिए जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे।

अवैध शराब की बिक्री के मामले में 10 गिरफ्तार

मामले में सोमवार को पुलिस ने 10 लोगों को गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों में चंदाना निवासी विनोद जायसवाल के अलावा शराब दुकानों के मैनेजर और सेल्समैन भी शामिल हैं। पुलिस ने कार्रवाई के दौरान 54 लीटर देशी शराब, एक कार, 10 मोबाइल फोन और 10 हजार रुपये नकद जब्त किए। जब्त सामान की कुल कीमत लगभग 7.25 लाख रुपये बताई गई है। पुलिस का कहना है कि शराब की कथित अवैध बिक्री से जुड़े मामले में आगे की जांच जारी है। 

सिंघार ने आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद शराब की आपूर्ति के स्रोत और गांवों तक उसके पहुंचने के रास्ते की जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि यह पता लगाना जरूरी है कि कथित अवैध कारोबार में और कौन-कौन शामिल था। ध्यान देने वाली बात यह है कि अवैध शराब की बिक्री के मामले में हुई गिरफ्तारियां अपने आप में यह साबित नहीं करतीं कि जब्त शराब ही सभी मौतों की वजह थी। इस संबंध की पुष्टि जांच और फॉरेंसिक रिपोर्ट से होनी बाकी है।

मौतों के कारण पर प्रशासन और परिजनों के दावे अलग-अलग

चंदाना और बिंजाना गांवों में सितंबर के अंत से अक्टूबर के मध्य के बीच 13 मौतें होने की खबर सामने आई थी। परिजनों और कुछ ग्रामीणों ने आशंका जताई कि मृतकों की तबीयत शराब पीने के बाद बिगड़ी थी। कुछ मामलों में उल्टी, चक्कर और आंखों की रोशनी प्रभावित होने की शिकायतें भी सामने आईं। दूसरी ओर, जिला प्रशासन ने जहरीली शराब से मौत होने के दावों को खारिज किया है। अधिकारियों के मुताबिक, मौतों के पीछे वृद्धावस्था, बीमारियों और अन्य कारणों की जानकारी सामने आई है। प्रशासन ने यह भी बताया कि कुछ मामलों में पोस्टमार्टम और विसरा जांच की प्रक्रिया अपनाई गई है। विवाद के बीच राज्य सरकार ने मामले की विस्तृत जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति गठित की है। समिति को मौतों के कारणों और उनसे जुड़े अन्य पहलुओं की जांच कर 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट देने को कहा गया है। 

कांग्रेस ने पीड़ित परिवारों के लिए सहायता की घोषणा की

परिवारों से मुलाकात के दौरान उमंग सिंघार ने कांग्रेस की ओर से प्रत्येक प्रभावित परिवार को 50-50 हजार रुपये की सहायता देने की घोषणा भी की। इसके साथ ही उन्होंने सरकार से अलग से मुआवजा देने की मांग दोहराई। फिलहाल इस पूरे मामले में तीन सवाल अहम बने हुए हैं—मौतों के वास्तविक कारण क्या थे, कथित अवैध शराब की आपूर्ति कहां से हुई और क्या किसी स्तर पर लापरवाही बरती गई? जांच समिति की रिपोर्ट और फॉरेंसिक नतीजों से इन सवालों के जवाब मिलने की उम्मीद है।


Cyclone Arnab: आंध्र प्रदेश में लैंडफॉल की तैयारी, क्या दिल्ली-NCR में भी होगी बारिश? जानें मौसम का अपडेट

नई दिल्ली: बंगाल की खाड़ी में सक्रिय चक्रवात अर्नब (Cyclone Arnab) को लेकर मौसम विभाग की नजर बनी हुई है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के 26 अक्टूबर के बुलेटिन के मुताबिक, यह तूफान 28 अक्टूबर की सुबह आंध्र प्रदेश और यानम के तट से टकरा सकता है। लैंडफॉल के समय इसकी अधिकतम निरंतर हवा की रफ्तार 115 से 125 किलोमीटर प्रति घंटा रहने और झोंके 140 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंचने का अनुमान है।

इस तूफान का प्रभाव केवल तटीय इलाकों तक सीमित रहने की संभावना नहीं है। इसके आगे बढ़ने और कमजोर पड़ने के दौरान ओडिशा, छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में बारिश हो सकती है। हालांकि, दिल्ली-NCR में भीषण बारिश या बाढ़ की आशंका को लेकर कोई निष्कर्ष निकालने से पहले मौसम विभाग का ताजा पूर्वानुमान देखना जरूरी है।

28 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश के तट से टकरा सकता है तूफान

IMD के अनुसार, चक्रवात अर्नब बंगाल की खाड़ी के पश्चिम-मध्य हिस्से में सक्रिय है और उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर बढ़ रहा है। पूर्वानुमान के मुताबिक, यह बापटला और विशाखापत्तनम के बीच, यानम के आसपास, तट पार कर सकता है।

लैंडफॉल के दौरान तेज हवाओं के साथ भारी बारिश और समुद्र में ऊंची लहरों का खतरा रहेगा। तटीय आंध्र प्रदेश और दक्षिणी ओडिशा के प्रभावित इलाकों में प्रशासन की तैयारियों और मौसम संबंधी चेतावनियों पर नजर रखना जरूरी है। 

कैसे बना Cyclone Arnab?

मौसम विभाग के बुलेटिन के मुताबिक, बंगाल की खाड़ी में अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में विकसित हुआ कम दबाव का क्षेत्र धीरे-धीरे मजबूत हुआ। यह पहले डिप्रेशन और फिर डीप डिप्रेशन में बदला। 26 अक्टूबर को इसने चक्रवाती तूफान का रूप ले लिया। इसके बाद तूफान की तीव्रता बढ़ने का अनुमान जताया गया। IMD ने 27 अक्टूबर तक इसके बहुत प्रचंड चक्रवाती तूफान की श्रेणी में पहुंचने और अगले दिन आंध्र प्रदेश के तट को पार करने का पूर्वानुमान जारी किया था। 

लैंडफॉल के बाद किन राज्यों में हो सकती है बारिश?

तट से टकराने के बाद चक्रवात धीरे-धीरे कमजोर हो सकता है, लेकिन इसके साथ मौजूद नमी कई इलाकों में बारिश करा सकती है। मौसम पूर्वानुमानों में ओडिशा, छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में बारिश की संभावना जताई गई है। बारिश की तीव्रता और उसका दायरा तूफान की वास्तविक दिशा, उसकी गति और कमजोर पड़ने की प्रक्रिया पर निर्भर करेगा। इसलिए अलग-अलग राज्यों के लिए जारी मौसम चेतावनियों को ध्यान से देखना जरूरी है।

क्या दिल्ली-NCR तक पहुंचेगा Cyclone Arnab का असर?

दिल्ली-NCR में बारिश को लेकर फिलहाल सावधानी से आकलन करने की जरूरत है। किसी चक्रवात के अवशेष उत्तर भारत तक पहुंचने का मतलब यह नहीं है कि राजधानी में भारी बारिश या बाढ़ आना तय है। दिल्ली के मौसम पर असर इस बात से निर्भर करेगा कि तूफान कमजोर पड़ने के बाद उसकी नमी कितनी दूर तक पहुंचती है और उस समय उत्तर भारत में अन्य मौसमी प्रणालियां कैसी स्थिति में होती हैं। पश्चिमी विक्षोभ के साथ संभावित टकराव की बात भी ताजा मौसम पूर्वानुमान से पुष्ट होनी चाहिए। इसलिए दिल्ली-NCR में बारिश की संभावना, उसकी तीव्रता या किसी तरह के अलर्ट के बारे में जानकारी के लिए IMD के दिल्ली मौसम पूर्वानुमान और आधिकारिक चेतावनियों को प्राथमिकता दें।

आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में सतर्कता जरूरी

चक्रवात के संभावित लैंडफॉल को देखते हुए तटीय इलाकों में तेज हवाओं, भारी बारिश और समुद्र में ऊंची लहरों से खतरा पैदा हो सकता है। कमजोर मकानों, बिजली के खंभों, पेड़ों और परिवहन व्यवस्था को नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है। प्रभावित क्षेत्रों के निवासियों को प्रशासन के निर्देशों का पालन करना चाहिए। समुद्र में जाने से बचें और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचें। घर में पीने का पानी, जरूरी दवाइयां, सूखा भोजन, टॉर्च और मोबाइल चार्ज रखने जैसी तैयारियां भी उपयोगी हो सकती हैं।

मौसम विभाग के अपडेट पर रखें नजर

चक्रवात की दिशा और तीव्रता में बदलाव होने से बारिश का पूर्वानुमान भी बदल सकता है। ऐसे में सोशल मीडिया पर प्रसारित अपुष्ट दावों के आधार पर घबराने के बजाय IMD और स्थानीय प्रशासन की जानकारी पर भरोसा करना चाहिए। फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण चुनौती आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्रों में संभावित लैंडफॉल से निपटना है। उत्तर भारत और दिल्ली-NCR में इसके असर को लेकर किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक मौसम अपडेट का इंतजार करना जरूरी है।


PM मोदी ने संस्कृत श्लोक के जरिए दिया सफलता का मंत्र, कहा- चुनौतियों का सामना करने से मिलती है कामयाबी

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर संस्कृत के एक सुभाषित के माध्यम से जीवन में साहस और जोखिम उठाने के महत्व को रेखांकित किया। इस श्लोक का संदेश है कि बड़ी उपलब्धियां हासिल करने के लिए व्यक्ति को अनिश्चितताओं और चुनौतियों का सामना करने का साहस रखना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने जो संस्कृत श्लोक साझा किया, वह है—

“न संशयमनारुह्य नरो भद्राणि पश्यति।
संशयं पुनरारुह्य यदि जीवति पश्यति॥”

इसका भावार्थ है कि बिना जोखिम उठाए व्यक्ति बड़ी सफलता या श्रेष्ठ परिणाम हासिल नहीं कर सकता। जो इंसान कठिन परिस्थितियों का सामना करने का साहस दिखाता है और उनसे सुरक्षित निकलने में सफल रहता है, वही आगे चलकर उपलब्धियों का आनंद ले पाता है।

महाभारत के शांतिपर्व से जुड़ा है श्लोक

साझा किए गए सुभाषित का संबंध महाभारत के शांतिपर्व के 138वें अध्याय के 34वें श्लोक से बताया गया है। इसमें जीवन की अनिश्चितताओं के बीच आगे बढ़ने और जोखिम का सामना करने के महत्व को समझाया गया है। श्लोक का मूल भाव यह है कि किसी बड़े लक्ष्य तक पहुंचने के लिए केवल सुरक्षित रास्ते पर चलते रहना पर्याप्त नहीं होता। कई बार सफलता पाने के लिए मुश्किल फैसले लेने और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों से गुजरने की जरूरत पड़ती है।

साहस के साथ विवेक भी जरूरी

इस संदेश को जीवन के अलग-अलग क्षेत्रों से जोड़कर देखा जा सकता है। शिक्षा, करियर, कारोबार, शोध या किसी नए काम की शुरुआत में अनिश्चितताएं सामने आ सकती हैं। ऐसे समय में सोच-समझकर निर्णय लेना और कठिनाइयों के बावजूद प्रयास जारी रखना महत्वपूर्ण होता है। हालांकि, जोखिम उठाने का अर्थ बिना विचार किए खतरा मोल लेना नहीं है। किसी भी चुनौती का सामना करते समय परिस्थितियों का आकलन, उचित तैयारी और सावधानी भी उतनी ही जरूरी हैं।

क्या है श्लोक का संदेश?

प्रधानमंत्री द्वारा साझा किए गए इस सुभाषित का केंद्रीय संदेश है कि कठिनाइयों से घबराकर पीछे हटने के बजाय उनका सामना करने की क्षमता विकसित करनी चाहिए। सफलता की राह में अनिश्चितताएं आ सकती हैं, लेकिन साहस, धैर्य और विवेक के साथ आगे बढ़ने से लक्ष्य हासिल करने की संभावनाएं बेहतर हो सकती हैं।

यह श्लोक व्यक्ति को याद दिलाता है कि प्रगति के लिए प्रयास करना और चुनौतियों का सामना करना जरूरी है, लेकिन हर कदम पर समझदारी और सावधानी बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।


दिल्ली-NCR में 28 अक्टूबर को परिवहन मेला, पुराने ट्रक और बसों को बदलने के लिए मिलेंगे कई विकल्प

नई दिल्ली: दिल्ली-NCR में पुराने व्यावसायिक वाहनों को नए और पर्यावरण के अनुकूल विकल्पों से बदलने के लिए 28 अक्टूबर 2026 को परिवहन मेला आयोजित किया जाएगा। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, दिल्ली सरकार के सहयोग से ‘परिवर्तन’ योजना के तहत इस मेले का आयोजन करेगा। कार्यक्रम सुबह 9:30 बजे उत्तरी दिल्ली के बुराड़ी स्थित जिला परिवहन कार्यालय (DTO) के पास वाहन निरीक्षण इकाई में शुरू होगा।

इस पहल का उद्देश्य पुराने ट्रक और बसों के मालिकों को वाहन स्क्रैपिंग, नए वाहन खरीदने, ऋण और वित्तीय सहायता से जुड़ी जानकारी एक ही स्थान पर उपलब्ध कराना है। मेले में वाहन मालिकों को योजना के तहत मिलने वाले प्रोत्साहनों और आवेदन प्रक्रिया को समझने का भी अवसर मिलेगा।

वाहन कंपनियों से लेकर बैंकों तक के प्रतिनिधि होंगे मौजूद

परिवहन मेले में वाहन निर्माता कंपनियों (OEM) और उनके डीलरों के साथ पंजीकृत वाहन स्क्रैपिंग केंद्रों (RVSF) के प्रतिनिधि शामिल होंगे। इसके अलावा बैंक, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (NBFC), तेल विपणन कंपनियां और योजना से जुड़े सिटी गैस वितरक भी हिस्सा लेंगे। वाहन मालिक इन संस्थाओं से पुराने वाहन को स्क्रैप कराने की प्रक्रिया, नए वाहन के लिए वित्तीय सहायता, ऋण की शर्तों और उपलब्ध प्रोत्साहनों की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। इसका मकसद वाहन बदलने की प्रक्रिया को आसान बनाना और मालिकों को उपलब्ध विकल्पों से परिचित कराना है।

पुराने वाहनों की जगह नए वाहन लाने पर प्रोत्साहन

‘परिवर्तन’ योजना के जरिए दिल्ली-NCR में पुराने ट्रकों और बसों को अपेक्षाकृत कम प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों से बदलने को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके तहत पात्र वाहन मालिकों को आर्थिक प्रोत्साहन और अन्य सुविधाएं देने का प्रावधान बताया गया है। योजना में वाहन खरीदने की लागत कम करने और वित्तीय बोझ घटाने के लिए विभिन्न लाभ शामिल हैं। हालांकि, इनका फायदा संबंधित पात्रता शर्तों और योजना के लागू नियमों के अनुसार मिलेगा।

8 प्रतिशत अतिरिक्त छूट और ऋण पर 5 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, योजना के तहत वाहन निर्माता की छूट के अतिरिक्त कम से कम 8 प्रतिशत की छूट का प्रावधान है। इसके अलावा वाहन ऋण पर 5 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी और 10 साल तक 100 प्रतिशत रोड टैक्स छूट की सुविधा बताई गई है। इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए एकमुश्त प्रोत्साहन, मासिक ईंधन वाउचर और पात्र मामलों में पंजीकरण शुल्क से छूट जैसे लाभ भी शामिल हैं। वाहन खरीदने से पहले मालिकों को संबंधित विभाग या योजना के अधिकृत प्रतिनिधियों से इन सुविधाओं की पात्रता, शर्तों और वास्तविक लाभ की पुष्टि करनी चाहिए।

परिवर्तन पोर्टल पर 40 हजार पंजीकरण का दावा

मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, ‘परिवर्तन’ पोर्टल पर अब तक लगभग 40,000 लाभार्थी पंजीकरण करा चुके हैं। परिवहन मेले के माध्यम से योजना की पहुंच बढ़ाने और अधिक वाहन मालिकों को इससे जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। मेले में उपलब्ध मार्गदर्शन से वाहन मालिक स्क्रैपिंग की प्रक्रिया समझने, वित्तीय विकल्पों की तुलना करने और नए वाहन की खरीद से संबंधित जरूरी जानकारी हासिल कर सकेंगे।

कहां और कब पहुंचे वाहन मालिक?

परिवहन मेले में शामिल होने के इच्छुक वाहन मालिक इन जानकारियों के आधार पर कार्यक्रम स्थल तक पहुंच सकते हैं:

तारीख: 28 अक्टूबर 2026, बुधवार

समय: सुबह 9:30 बजे से

स्थान: वाहन निरीक्षण इकाई, जिला परिवहन कार्यालय (DTO) के पास, बुराड़ी, उत्तरी दिल्ली

आयोजन: सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और दिल्ली सरकार के सहयोग से

इस पहल के जरिए पुराने व्यावसायिक वाहनों को बदलने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी देने और परिवहन क्षेत्र में स्वच्छ विकल्पों को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया जा रहा है।


ESTIC 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज करेंगे उद्घाटन, AI से बायोटेक्नोलॉजी तक 12 क्षेत्रों पर होगी चर्चा

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को भारत मंडपम में इमर्जिंग साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन कॉन्क्लेव (ESTIC) 2026 का उद्घाटन करेंगे। कार्यक्रम शाम 5:30 बजे निर्धारित है। तीन दिन तक चलने वाला यह सम्मेलन 29 अक्टूबर तक आयोजित होगा। इसमें देश-विदेश के वैज्ञानिक, शोधकर्ता, शिक्षाविद, उद्योग प्रतिनिधि, स्टार्टअप संस्थापक और नीति-निर्माता विज्ञान एवं तकनीक के भविष्य पर विचार-विमर्श करेंगे। प्रधानमंत्री इस अवसर पर सम्मेलन में शामिल प्रतिभागियों को संबोधित भी करेंगे। आयोजन का मुख्य उद्देश्य उभरती प्रौद्योगिकियों को भारत की वैज्ञानिक प्राथमिकताओं, अनुसंधान और नवाचार से जोड़ना है।

AI से ऊर्जा तक, 12 क्षेत्रों पर होगा फोकस

ESTIC 2026 में विज्ञान और तकनीक से जुड़े 12 विषयगत क्षेत्रों पर चर्चा की जाएगी। इनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), बायोटेक्नोलॉजी, एडवांस्ड मैटेरियल्स, आधुनिक विनिर्माण, स्वास्थ्य सेवाएं, ऊर्जा, जलवायु और महासागर विज्ञान जैसे क्षेत्र शामिल हैं। सम्मेलन में इस बात पर जोर रहेगा कि शोध और वैज्ञानिक खोजों को वास्तविक जरूरतों के अनुरूप कैसे विकसित किया जाए। इसके साथ ही भारत की तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करने और अनुसंधान के परिणामों को व्यावहारिक उपयोग तक पहुंचाने के तरीकों पर भी विचार किया जाएगा।

150 डीप-टेक स्टार्टअप दिखाएंगे अपनी तकनीक

सम्मेलन के दौरान विज्ञान और नवाचार पर आधारित प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। इसमें भारतीय वैज्ञानिक उपलब्धियों के साथ नई तकनीकों और उनके संभावित इस्तेमाल को प्रदर्शित किया जाएगा। आयोजकों के मुताबिक, प्रदर्शनी में लगभग 150 डीप-टेक स्टार्टअप अपने स्टॉल लगाएंगे। यहां आगंतुकों को विभिन्न क्षेत्रों में विकसित तकनीकी समाधानों को समझने और उनके संभावित अनुप्रयोगों के बारे में जानने का अवसर मिलेगा।

AR और VR से समझ सकेंगे तकनीकी विकास

विज्ञान को आम लोगों के लिए अधिक सुलभ और रोचक बनाने के उद्देश्य से आयोजन में थीम आधारित वीडियो, डॉक्यूमेंट्री, तकनीकी प्रदर्शन और सूचना कियोस्क भी शामिल किए जाएंगे। इसके अलावा, आगंतुक ऑगमेंटेड रियलिटी (AR) और वर्चुअल रियलिटी (VR) के माध्यम से तकनीक आधारित अनुभव ले सकेंगे। इन गतिविधियों का उद्देश्य वैज्ञानिक खोजों और उनके व्यावहारिक उपयोगों के प्रति लोगों की समझ बढ़ाना है।

ग्लोबल कनेक्ट में जुटेंगे 300 से अधिक प्रतिभागी

ESTIC 2026 के तहत ग्लोबल कनेक्ट नाम से नेटवर्किंग कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा। इसमें भारत और अन्य देशों के शैक्षणिक संस्थानों, अनुसंधान संगठनों और उद्योग जगत से 300 से अधिक आमंत्रित प्रतिभागियों के शामिल होने की योजना है। इस पहल के जरिए अंतरराष्ट्रीय शोध सहयोग को प्रोत्साहित करने और शिक्षा जगत तथा उद्योग के बीच साझेदारी के नए अवसर तलाशने पर ध्यान दिया जाएगा।

लैब से बाजार तक नवाचार पहुंचाने की तैयारी

सम्मेलन में एक प्रमुख मुद्दा यह भी रहेगा कि प्रयोगशालाओं में विकसित तकनीकों को व्यावसायिक उपयोग और बाजार तक कैसे पहुंचाया जाए। इसके लिए अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान साझेदारी, उद्योग-अकादमिक सहयोग और नवाचारों के व्यावहारिक इस्तेमाल पर चर्चा होगी। ESTIC 2026 का व्यापक उद्देश्य भारत में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के विकास को बढ़ावा देना और नई खोजों को राष्ट्रीय जरूरतों से जोड़ना है। सम्मेलन से अनुसंधान संस्थानों, स्टार्टअप और उद्योग जगत के बीच सहयोग के नए रास्ते तलाशने की उम्मीद है।


दिल्ली के 48 गांवों का बदलेगा दर्जा, शहरी विकास की योजना में होंगे शामिल; जानें किन इलाकों को मिलेगा फायदा

नई दिल्ली: दिल्ली के ग्रामीण इलाकों के विकास को लेकर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व वाली सरकार ने 48 गांवों को शहरीकृत करने का फैसला किया है। इस पहल के तहत इन गांवों की मौजूदा ग्रामीण स्थिति को बदलकर उन्हें राजधानी की शहरी विकास योजना के दायरे में लाने की तैयारी है। सरकार का कहना है कि इससे संबंधित क्षेत्रों में सड़क, पानी, सीवर, जल निकासी और दूसरी बुनियादी सुविधाओं की जरूरतों का आकलन करने में मदद मिलेगी।

इस कदम का उद्देश्य दिल्ली के तेजी से बदलते शहरी स्वरूप के बीच गांवों के विकास को व्यवस्थित करना और भविष्य की जरूरतों के मुताबिक योजनाएं तैयार करने का आधार बनाना है। हालांकि, वास्तविक विकास कार्य संबंधित नियमों, स्वीकृत योजनाओं और जरूरी मंजूरियों के अनुसार ही किए जाएंगे।

दिल्ली के किन 48 गांवों का होगा शहरीकरण?

सरकार की ओर से शहरीकृत किए जाने वाले गांवों की सूची में उत्तर, उत्तर-पश्चिम, दक्षिण-पश्चिम और शाहदरा सहित दिल्ली के अलग-अलग क्षेत्रों के गांव शामिल हैं।

प्रस्तुत जानकारी के अनुसार, इन 48 गांवों के नाम इस प्रकार हैं:

बकौली
हमीदपुर
पल्ला
कुलकपुर
सिंघोला
सुंगरपुर दिल्ली
सुंगरपुर शाहदरा
ताजपुर कलां
टिहरी दौलतपुर
राजपुर कलां
औचंदी
मुंगेशपुर
शाहपुर गढ़ी
निजामपुर रसिदपुर
चटेसर
पुर दिल्ली
जगतपुर दिल्ली
सुल्तानपुर माजरा
पुर शाहदरा
सबापुर दिल्ली
बदरपुर खादर
बाकीआबाद
खानपुर खानी
जाफराबाद
जगतपुर शाहदरा
बदरपुर माजरा बुराड़ी
फतेहपुर बेरी
चंदनहोला
बदूसराय
देवराला
घुम्मनहेड़ा
जैनपुर
झटिकरा
कांगनहेड़ी
राघोपुर
रावता
शिकारपुर
बिजवासन
नानक हेड़ी
बकरगढ़
ढांसा
गालिबपुर
इस्सापुर
कैर
मुंडेला कलां
मुंडेला खुर्द
सुरखपुर
चक चिल्ला

किस कानून के तहत बदलेगा गांवों का दर्जा?

इस पहल के लिए दिल्ली नगर निगम अधिनियम, 1957 की धारा 507(ए) का उल्लेख किया गया है। इस प्रावधान के तहत संबंधित क्षेत्रों को शहरीकृत घोषित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है। शहरीकरण की अधिसूचना जारी होने के बाद गांवों की प्रशासनिक और कानूनी स्थिति में बदलाव आएगा। इससे इन क्षेत्रों के लिए शहरी विकास से जुड़ी योजनाओं पर विचार करने और भविष्य की जरूरतों का आकलन करने का आधार तैयार होगा। हालांकि, शहरी दर्जा मिलने का अर्थ यह नहीं है कि सभी निर्माण गतिविधियों या भूमि उपयोग में बदलाव की स्वतः अनुमति मिल जाएगी। ऐसे मामलों में लागू कानूनों, भवन संबंधी नियमों और आवश्यक स्वीकृतियों का पालन करना होगा।

सड़क, पानी और सीवर जैसी सुविधाओं की योजना पर जोर

गांवों को शहरी विकास की योजना में शामिल करने से वहां मौजूद बुनियादी सुविधाओं की स्थिति का व्यवस्थित आकलन किया जा सकेगा। इसमें आंतरिक सड़कों, संपर्क मार्गों और यातायात से जुड़ी जरूरतों के साथ जलापूर्ति तथा सीवर नेटवर्क की स्थिति भी शामिल होगी। इसके अलावा, जल निकासी, स्वच्छता, कचरा प्रबंधन और स्ट्रीट लाइट जैसी सुविधाओं के विस्तार के लिए भी योजनाएं तैयार करने का अवसर मिलेगा। संबंधित नागरिक एजेंसियां अपनी जिम्मेदारियों, उपलब्ध संसाधनों और स्वीकृत योजनाओं के आधार पर आगे की कार्रवाई कर सकेंगी। सरकार के मुताबिक, इस प्रक्रिया से विभिन्न विभागों के बीच समन्वय मजबूत करने और गांवों की विकास संबंधी जरूरतों को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिल सकती है।

मास्टर प्लान 2041 से क्या है संबंध?

दिल्ली के भविष्य के विकास की योजना तैयार करने के लिहाज से इन गांवों का शहरीकरण महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस पहल से मास्टर प्लान 2041 के मसौदे के संदर्भ में संबंधित क्षेत्रों की विकास संभावनाओं और बुनियादी जरूरतों का आकलन करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, किसी क्षेत्र को शहरीकृत घोषित करने और वहां विकास परियोजनाओं को मंजूरी मिलने की प्रक्रियाएं अलग-अलग हो सकती हैं। जमीन के इस्तेमाल, निर्माण और बुनियादी ढांचे से जुड़े फैसले संबंधित वैधानिक प्रावधानों और स्वीकृत योजनाओं के अनुसार ही लिए जाएंगे।

मुख्यमंत्री ने क्या कहा?

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के अनुसार, दिल्ली के गांव राजधानी की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। सरकार का उद्देश्य इन क्षेत्रों की विरासत को बनाए रखते हुए उनकी विकास संबंधी जरूरतों पर योजनाबद्ध तरीके से काम करना है। सरकार की ओर से इस पहल को दिल्ली के संतुलित और समावेशी विकास की दिशा में उठाया गया कदम बताया गया है। शहरीकरण के बाद संबंधित गांवों की जरूरतों का आकलन कर नागरिक सुविधाओं के नियोजन और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय को बेहतर बनाने पर जोर रहेगा। फिलहाल, इन गांवों में विकास कार्यों की वास्तविक समयसीमा और परियोजनाओं का स्वरूप संबंधित अधिसूचनाओं, मंजूरियों तथा विभागीय योजनाओं के आधार पर स्पष्ट होगा।


हाईकोर्ट से याचिका खारिज, नेहा बोरा ने पीस बॉन्ड पर हस्ताक्षर करने से किया इनकार

by डेस्क न्यूज़

दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के बाद AISA अध्यक्ष नेहा बोरा ने कहा कि पीस बॉन्ड पर हस्ताक्षर करना शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों पर रोक लगाने की कार्रवाई को स्वीकार करने जैसा होगा। उन्होंने नोटिस जारी किए जाने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। AISA अध्यक्ष नेहा बोरा ने पीस बॉन्ड पर हस्ताक्षर नहीं करने का ऐलान किया है। दिल्ली हाईकोर्ट से अपनी याचिका खारिज होने के बाद उन्होंने कहा कि इस तरह के बॉन्ड पर हस्ताक्षर करना लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों को रोकने के लिए इसके इस्तेमाल को स्वीकार करने जैसा होगा। दरअसल, नेहा बोरा ने स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) की ओर से जारी उस नोटिस को चुनौती दी थी, जिसमें उनसे 10 हजार रुपये का बॉन्ड भरने और शांति बनाए रखने के लिए कहा गया था। इस नोटिस के खिलाफ दाखिल उनकी याचिका को दिल्ली हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया।

लोकतांत्रिक अधिकारों का दिया हवाला

नेहा बोरा ने अपने बयान में कहा कि लोकतंत्र में नागरिकों के लिए मतदान करना और अपने अधिकारों के खिलाफ होने वाली कार्रवाई पर आवाज उठाना, दोनों ही अहम अधिकार हैं। उनके मुताबिक, यदि लोगों के मतदान के अधिकार पर असर पड़ता है, तो उसके खिलाफ शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराना नागरिकों की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि इसी सोच के तहत लोग विरोध प्रदर्शन करने के लिए सड़कों पर उतरे थे। नेहा ने पीस बॉन्ड की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसे कदमों से शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों पर असर पड़ सकता है।

पुलिस की कार्रवाई पर भी उठाए सवाल

नेहा बोरा ने विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की कार्रवाई को लेकर भी आरोप लगाए। उनका दावा है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के बजाय प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग किया गया। उन्होंने महिला प्रदर्शनकारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार और प्रदर्शन की कवरेज कर रहे पत्रकारों के साथ हुई कार्रवाई का भी जिक्र किया। उन्होंने नोटिस जारी किए जाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें बताया गया था कि पुलिस को आशंका है कि उनकी गतिविधियों से शांति भंग हो सकती है। नेहा के अनुसार, उन्हें इस संबंध में किसी FIR की कॉपी नहीं दी गई और नोटिस में शांति भंग होने की आशंका का उल्लेख किया गया। नेहा बोरा के बयान के बाद यह मामला शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन, नागरिक अधिकारों और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली कानूनी प्रक्रियाओं को लेकर चर्चा में है। हालांकि, पुलिस की कार्रवाई और प्रदर्शन के दौरान कथित घटनाओं से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि के लिए संबंधित पक्षों का पक्ष और उपलब्ध आधिकारिक रिकॉर्ड देखना जरूरी है।


दिल्ली एयर कार्गो में ₹8.12 करोड़ की हाइड्रोपोनिक भांग जब्त, तस्करी के आरोप में एक और गिरफ्तारी

नई दिल्ली: दिल्ली सीमा शुल्क विभाग ने नई दिल्ली के एयर कार्गो कॉम्प्लेक्स में कार्रवाई करते हुए 23.220 किलोग्राम हाइड्रोपोनिक भांग जब्त की है। अधिकारियों के अनुसार, जब्त पदार्थ का अनुमानित मूल्य ₹8.12 करोड़ है, जबकि भारत में इसका अनुमानित बाजार मूल्य करीब ₹23 करोड़ बताया गया है। इस मामले में एक और व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है। मामले की जांच जारी है। सीमा शुल्क अधिकारियों ने बताया कि 21 और 22 अक्टूबर 2026 की दरमियानी रात को की गई कार्रवाई के दौरान संदिग्ध आयात खेप की जांच की गई। शुरुआती परीक्षण में बरामद पदार्थ की पहचान हाइड्रोपोनिक मारिजुआना के रूप में हुई। जब्त मादक पदार्थ और उससे संबंधित पैकेजिंग सामग्री को स्वापक औषधि एवं मनःप्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985 (NDPS Act) के तहत जब्त किया गया।

लकड़ी के पैलेट में छिपाकर रखे गए थे पैकेट

अधिकारियों के मुताबिक, बैंकॉक से आई एक संदिग्ध खेप के बारे में खुफिया जानकारी मिलने के बाद उसकी जांच शुरू की गई। खेप में लैंप बताए गए थे। आयातक की मौजूदगी में सामान की विस्तृत जांच की गई, जिसमें लकड़ी के पैलेट पर कई लैंप लगे मिले। पहली नजर में सामान सामान्य दिखाई दे रहा था, लेकिन एक्स-रे इमेजिंग के दौरान कुछ असामान्य पैटर्न नजर आए। इसके बाद अधिकारियों ने लकड़ी के पैलेट के आधार की जांच की। इस दौरान पैलेट के भीतर छिपाए गए 23 वैक्यूम-सील्ड पैकेट बरामद हुए। इनमें संपीड़ित हरे पत्तेदार पदार्थ भरे हुए थे, जिसकी शुरुआती जांच में हाइड्रोपोनिक भांग के रूप में पहचान की गई।

पिछली बरामदगी से जुड़कर आगे बढ़ी जांच

सीमा शुल्क विभाग के अनुसार, इस कार्रवाई से पहले बैंकॉक से आई एक अन्य खेप से 148.675 किलोग्राम गांजा जब्त किया गया था। उस मामले में मिली खुफिया जानकारी के आधार पर आगे की जांच की गई। विभाग के मुताबिक, पिछली बरामदगी के बाद तीन राज्यों में 11 स्थानों पर समन्वित कार्रवाई की गई। 15 अक्टूबर 2026 को पहली कार्रवाई के दौरान गिरफ्तार किए गए व्यक्ति से जुड़े एक अन्य व्यक्ति से पूछताछ के बाद नई खेप की जांच आगे बढ़ाई गई। जांच एजेंसियां अब दोनों बरामदगियों के बीच संभावित संबंधों और कथित तस्करी नेटवर्क की भूमिका की पड़ताल कर रही हैं।

22 अक्टूबर को एक और व्यक्ति गिरफ्तार

अधिकारियों के अनुसार, ताजा कार्रवाई में 22 अक्टूबर 2026 को एक और व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया। उसे उसी दिन देर शाम संबंधित मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया। मामले में आगे की जांच जारी है। सीमा शुल्क विभाग का कहना है कि ताजा बरामदगी को शामिल करने पर इस जांच से जुड़ी कार्रवाई में कुल मिलाकर लगभग 172 किलोग्राम मादक पदार्थ जब्त किए गए हैं और दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है। जांच का उद्देश्य कथित तस्करी नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों, खेप के स्रोत और मादक पदार्थों की आपूर्ति से संबंधित कड़ियों का पता लगाना है। मामले में आगे की जानकारी जांच पूरी होने और आधिकारिक पुष्टि के बाद सामने आ सकती है।


हिमाचल प्रदेश में बढ़ेंगी 320 पीजी मेडिकल सीटें, केंद्र से ₹415 करोड़ की मंजूरी

हिमाचल प्रदेश में मेडिकल की उच्च शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में केंद्र सरकार ने 320 नई स्नातकोत्तर (PG) मेडिकल सीटों को मंजूरी दी है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा के अनुसार, इन सीटों के लिए केंद्र सरकार करीब 415 करोड़ रुपये का अनुदान देगी। यह विस्तार राज्य के छह सरकारी मेडिकल कॉलेजों में किया जाएगा। इस फैसले से हिमाचल प्रदेश के मेडिकल विद्यार्थियों को राज्य में ही विशेषज्ञता हासिल करने के अधिक अवसर मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा, विभिन्न चिकित्सा क्षेत्रों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या बढ़ने से स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने में भी मदद मिल सकती है।

छह सरकारी मेडिकल कॉलेजों में बढ़ेंगी सीटें

केंद्र सरकार की मंजूरी के तहत हिमाचल प्रदेश के छह सरकारी मेडिकल कॉलेजों में नई पीजी सीटें आवंटित की गई हैं। कॉलेजवार वितरण इस प्रकार है:

शिमला: 91 सीटें

टांडा: 57 सीटें

हमीरपुर: 57 सीटें

मंडी: 55 सीटें

नाहन: 32 सीटें

चंबा: 28 सीटें

इन सभी सीटों को मिलाकर कुल संख्या 320 होती है। इस विस्तार से सर्जरी, हड्डी रोग, स्त्री एवं प्रसूति रोग, बाल रोग और कैंसर चिकित्सा समेत विभिन्न विशेषज्ञताओं में प्रशिक्षण की क्षमता बढ़ाने का लक्ष्य है। हालांकि, विद्यार्थियों को इन सीटों पर प्रवेश कब से मिलेगा, यह संबंधित कॉलेजों में जरूरी प्रक्रियाओं, संसाधनों और शैक्षणिक तैयारियों पर निर्भर करेगा।

जून में मिला था प्रस्ताव, अक्टूबर में मंजूरी की घोषणा

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के मुताबिक, हिमाचल प्रदेश सरकार ने 23 जून 2026 को नई पीजी मेडिकल सीटों के लिए प्रस्ताव भेजा था। इसके बाद 6 अक्टूबर को एम्स बिलासपुर के दीक्षांत समारोह के दौरान इस विषय पर मुख्यमंत्री के साथ भी चर्चा हुई। नड्डा ने बताया कि केंद्र सरकार ने राज्य की ओर से प्रस्तावित सभी 320 सीटों को मंजूरी दे दी है। उन्होंने राज्य सरकार से आवश्यक कदम समय पर उठाने की अपील की, ताकि इस फैसले का लाभ मेडिकल विद्यार्थियों और आम लोगों तक पहुंच सके।

मेडिकल शिक्षा के विस्तार पर केंद्र सरकार का जोर

जेपी नड्डा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में मेडिकल शिक्षा के अवसर बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। उनके अनुसार, केंद्र सरकार ने अगले पांच वर्षों में देशभर में 10,000 नई स्नातक और स्नातकोत्तर मेडिकल सीटें बढ़ाने की योजना को मंजूरी दी है। इस योजना की घोषित लागत 15,000 करोड़ रुपये है। हिमाचल प्रदेश के लिए स्वीकृत 320 पीजी सीटों को भी मेडिकल शिक्षा के विस्तार से जुड़ी इसी पहल का हिस्सा बताया गया है। मेडिकल सीटों की संख्या बढ़ने से विद्यार्थियों के लिए उच्च चिकित्सा शिक्षा के अवसर बढ़ सकते हैं। साथ ही, विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता में सुधार होने पर मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।

स्वास्थ्य सेवाओं और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की जरूरत

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने राज्य में केंद्र सरकार के सहयोग से चल रही स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे से जुड़ी परियोजनाओं में भी तेजी लाने पर जोर दिया। उन्होंने क्रिटिकल केयर ब्लॉक्स और जन स्वास्थ्य प्रयोगशालाओं से जुड़े कार्यों को समय पर पूरा करने की जरूरत बताई। नड्डा ने चंडीगढ़-बद्दी और भानुपल्ली-बिलासपुर रेल परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए राज्य सरकार से भूमि संबंधी लंबित मामलों और अन्य आवश्यक प्रक्रियाओं के समाधान में तेजी लाने का आग्रह भी किया। उनका कहना है कि विकास परियोजनाओं को समय पर पूरा करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय जरूरी है।

युवाओं और मरीजों को क्या होगा फायदा?

हिमाचल प्रदेश में 320 नई पीजी मेडिकल सीटों की मंजूरी से दो प्रमुख क्षेत्रों में लाभ मिलने की संभावना है। पहला, मेडिकल स्नातकों को विशेषज्ञता की पढ़ाई के लिए अधिक सीटें उपलब्ध हो सकती हैं। दूसरा, समय के साथ प्रशिक्षित विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या बढ़ने से प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूती मिल सकती है। हालांकि, वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि सीटें कब शुरू होती हैं, संबंधित कॉलेजों में शिक्षकों और अन्य सुविधाओं की उपलब्धता कैसी रहती है और विशेषज्ञ डॉक्टर स्वास्थ्य सेवाओं में किस स्तर तक योगदान दे पाते हैं।


विश्व पोलियो दिवस 2026: टीकाकरण और जनभागीदारी से पोलियो-मुक्त दुनिया की मुहिम

हर बच्चे को पोलियो से सुरक्षित रखना केवल स्वास्थ्य व्यवस्था की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज का साझा संकल्प है। हर साल 24 अक्टूबर को मनाया जाने वाला विश्व पोलियो दिवस इसी संदेश को आगे बढ़ाता है। इस अवसर पर दुनिया भर में टीकाकरण, जनजागरूकता और पोलियो उन्मूलन के लिए किए जा रहे प्रयासों पर ध्यान केंद्रित किया जाता है। कभी पोलियो बच्चों में स्थायी लकवे और गंभीर शारीरिक दिव्यांगता का प्रमुख कारण था। लेकिन वैज्ञानिक अनुसंधान, प्रभावी टीकों और बड़े पैमाने पर चलाए गए टीकाकरण अभियानों ने इस बीमारी के प्रसार को काफी हद तक कम किया है। भारत का पोलियो-मुक्त दर्जा इस दिशा में सामूहिक प्रयासों की बड़ी उपलब्धि है। हालांकि, दुनिया से पोलियो का पूरी तरह उन्मूलन अभी बाकी है। इसलिए नियमित टीकाकरण और वायरस की निगरानी आज भी महत्वपूर्ण हैं।

विश्व पोलियो दिवस का इतिहास और महत्व

विश्व पोलियो दिवस की शुरुआत रोटरी इंटरनेशनल ने पोलियो वैक्सीन के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले वैज्ञानिक डॉ. जोनास साल्क की स्मृति में की थी। साल्क का जन्म 28 अक्टूबर 1914 को हुआ था। उन्होंने पोलियो के खिलाफ प्रभावी इंजेक्टेबल वैक्सीन विकसित करने में अहम भूमिका निभाई। बाद में वैज्ञानिक अल्बर्ट साबिन ने ओरल पोलियो वैक्सीन यानी मुंह से दी जाने वाली वैक्सीन के विकास में योगदान दिया। वर्ष 1988 में विश्व स्वास्थ्य सभा के संकल्प के बाद वैश्विक पोलियो उन्मूलन पहल (Global Polio Eradication Initiative) शुरू हुई। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), यूनिसेफ, रोटरी इंटरनेशनल और अन्य साझेदारों ने इस अभियान को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस वैश्विक पहल के बाद दुनिया में जंगली पोलियो वायरस के मामलों में 99 प्रतिशत से अधिक की कमी दर्ज की गई। इसके बावजूद कुछ क्षेत्रों में वायरस का प्रसार जारी है। विश्व पोलियो दिवस इसी अधूरे लक्ष्य को पूरा करने और बच्चों को टीकाकरण से सुरक्षित रखने की जरूरत याद दिलाता है।

पोलियो क्या है और यह कैसे फैलता है?

पोलियो, जिसे पोलियोमाइलाइटिस भी कहा जाता है, पोलियो वायरस से होने वाली एक संक्रामक बीमारी है। यह मुख्य रूप से पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों को प्रभावित करती है, लेकिन किसी भी उम्र का व्यक्ति संक्रमित हो सकता है। यह वायरस आमतौर पर संक्रमित व्यक्ति के मल से दूषित पानी या भोजन के जरिए शरीर में प्रवेश करता है। संक्रमित व्यक्ति के संपर्क और दूषित वातावरण के माध्यम से भी इसका प्रसार हो सकता है। शरीर में पहुंचने के बाद वायरस आंतों में बढ़ता है और कुछ मामलों में तंत्रिका तंत्र पर हमला कर सकता है।

यदि वायरस मांसपेशियों की गतिविधियों को नियंत्रित करने वाली तंत्रिकाओं को नुकसान पहुंचाता है, तो मरीज को लकवा हो सकता है। कई संक्रमित लोगों में स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते, फिर भी वे संक्रमण फैलाने में सक्षम हो सकते हैं। इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर संक्रमण के जोखिम का आकलन करना पर्याप्त नहीं है।

पोलियो के लक्षण और गंभीर परिणाम

पोलियो के लक्षण हर व्यक्ति में एक जैसे नहीं होते। कुछ संक्रमित लोगों में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखाई देते, जबकि अन्य में बुखार, थकान, सिरदर्द, उल्टी, गर्दन में अकड़न और हाथ-पैरों में दर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं। गंभीर संक्रमण में वायरस तंत्रिका तंत्र को नुकसान पहुंचा सकता है। इससे मांसपेशियों में अचानक कमजोरी या लकवा हो सकता है, जो अक्सर पैरों को प्रभावित करता है। कुछ मामलों में सांस लेने वाली मांसपेशियां भी प्रभावित हो सकती हैं, जिससे स्थिति जानलेवा बन सकती है। पोलियो से होने वाला लकवा स्थायी हो सकता है। इसके कारण व्यक्ति को जीवनभर चलने-फिरने और रोजमर्रा के काम करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। पोलियो का कोई विशिष्ट इलाज नहीं है, लेकिन टीकाकरण के जरिए इससे बचाव संभव है। यही कारण है कि बच्चों को निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार पोलियो की सभी जरूरी खुराक दिलाना बेहद महत्वपूर्ण है।

भारत का पोलियो-मुक्त होना: सामूहिक प्रयासों की उपलब्धि

भारत में पोलियो उन्मूलन का अभियान सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जाता है। वर्ष 1990 के दशक में शुरू किए गए व्यापक टीकाकरण प्रयासों ने इस दिशा में निर्णायक भूमिका निभाई। पल्स पोलियो कार्यक्रम के तहत पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों को पोलियो की बूंदें पिलाने के लिए देशव्यापी और विशेष अभियान चलाए गए। इस अभियान में सरकारी स्वास्थ्यकर्मियों के साथ आशा कार्यकर्ताओं, आंगनवाड़ी कर्मियों, स्वयंसेवकों और स्थानीय समुदायों ने भागीदारी की। घर-घर जाकर बच्चों को टीका देना, टीकाकरण केंद्रों पर व्यवस्था करना और अभिभावकों को जागरूक करना अभियान के अहम हिस्से रहे। भारत में जंगली पोलियो वायरस का आखिरी मामला 13 जनवरी 2011 को पश्चिम बंगाल के हावड़ा में दर्ज किया गया था। इसके बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन के दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र को 27 मार्च 2014 को पोलियो-मुक्त प्रमाणित किया गया। इस क्षेत्रीय प्रमाणन में भारत भी शामिल था।  यह उपलब्धि बताती है कि व्यापक टीकाकरण, मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था और जनभागीदारी से गंभीर संक्रामक बीमारियों पर नियंत्रण पाया जा सकता है। हालांकि, पोलियो-मुक्त प्रमाणन का अर्थ यह नहीं है कि भविष्य में संक्रमण का जोखिम पूरी तरह समाप्त हो गया है।

पोलियो से बचाव में टीकाकरण की भूमिका

पोलियो से सुरक्षा के लिए मुख्य रूप से दो तरह के टीकों का इस्तेमाल किया जाता है।

1. ओरल पोलियो वैक्सीन (OPV): यह मुंह से बूंदों के रूप में दी जाती है। बड़े पैमाने पर चलाए जाने वाले पोलियो अभियानों में इसका महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

2. इनएक्टिवेटेड पोलियो वैक्सीन (IPV): यह इंजेक्शन के माध्यम से दी जाती है और पोलियो वायरस के खिलाफ प्रतिरक्षा विकसित करने में मदद करती है।

दोनों टीकों की अपनी भूमिका है। बच्चों को राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के अनुसार निर्धारित खुराक दिलानी चाहिए। किसी बच्चे की खुराक छूट गई हो या टीकाकरण को लेकर कोई सवाल हो, तो नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या योग्य स्वास्थ्यकर्मी से सलाह लेना उचित है। नियमित टीकाकरण के साथ विशेष पोलियो अभियान भी जरूरी हैं। इनके माध्यम से उन बच्चों तक पहुंचने में मदद मिलती है, जो किसी कारणवश पहले टीकाकरण से वंचित रह गए हों।

पोलियो उन्मूलन में स्वास्थ्यकर्मियों और समाज का योगदान

पोलियो उन्मूलन के लिए केवल वैक्सीन उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है। यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि टीका हर बच्चे तक पहुंचे। दूरदराज के गांवों, शहरी झुग्गियों, प्रवासी परिवारों और स्वास्थ्य सुविधाओं से दूर रहने वाले समुदायों तक पहुंचना कई बार चुनौतीपूर्ण होता है। ऐसे में स्वास्थ्यकर्मियों और स्थानीय स्वयंसेवकों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। टीकाकरण को लेकर फैली गलत जानकारी और अफवाहें भी अभियान की पहुंच को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए अभिभावकों को सही जानकारी देना, स्थानीय समुदायों के साथ संवाद बनाए रखना और स्वास्थ्य सेवाओं पर भरोसा मजबूत करना आवश्यक है। परिवारों की सक्रिय भागीदारी यह सुनिश्चित करने में मदद करती है कि कोई बच्चा जरूरी टीकाकरण से वंचित न रह जाए।

वैश्विक पोलियो उन्मूलन के सामने चुनौतियां

पोलियो उन्मूलन की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति के बावजूद कुछ चुनौतियां अभी बनी हुई हैं। जिन क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सीमित है या संघर्ष के कारण टीकाकरण अभियान बाधित होते हैं, वहां बच्चों तक वैक्सीन पहुंचाना मुश्किल हो सकता है। इसके अतिरिक्त, कम टीकाकरण वाले समुदायों में वायरस के प्रसार का खतरा बना रहता है। कुछ परिस्थितियों में ओरल पोलियो वैक्सीन में इस्तेमाल किया गया कमजोर वायरस भी लंबे समय तक कम प्रतिरक्षित आबादी में फैलने के दौरान ऐसे रूप में बदल सकता है, जो संक्रमण और लकवे का कारण बन सके। इसे वैक्सीन-व्युत्पन्न पोलियो वायरस कहा जाता है। यह जोखिम टीकाकरण रोकने का कारण नहीं, बल्कि पर्याप्त टीकाकरण कवरेज बनाए रखने की जरूरत को रेखांकित करता है।

वायरस की पहचान के लिए संदिग्ध मामलों की जांच, प्रयोगशाला परीक्षण और पर्यावरणीय निगरानी भी महत्वपूर्ण हैं। भारत जैसे पोलियो-मुक्त देशों को भी नियमित टीकाकरण और निगरानी व्यवस्था बनाए रखनी होती है, ताकि वायरस के संभावित प्रवेश या प्रसार का समय रहते पता लगाया जा सके।

विश्व पोलियो दिवस का संदेश: हर बच्चे तक पहुंचे सुरक्षा

विश्व पोलियो दिवस केवल अतीत की उपलब्धियों को याद करने का अवसर नहीं है, बल्कि वैश्विक पोलियो उन्मूलन के अधूरे लक्ष्य को पूरा करने की प्रतिबद्धता दोहराने का दिन भी है। भारत की सफलता व्यापक टीकाकरण और सामूहिक भागीदारी का उदाहरण है। इस उपलब्धि को बनाए रखने के लिए नियमित टीकाकरण, सतर्क निगरानी और सही जानकारी का प्रसार जरूरी है। सरकारों, स्वास्थ्य संस्थानों, स्वास्थ्यकर्मियों और आम नागरिकों के संयुक्त प्रयासों से ही यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि कोई बच्चा पोलियो के खतरे से असुरक्षित न रहे। पोलियो-मुक्त दुनिया का सपना तभी पूरा होगा, जब हर बच्चे को समय पर टीका मिले और सभी देश मिलकर इस बीमारी के उन्मूलन के लिए काम करें।


मेंढर के कसबालारी इलाके में तलाशी के दौरान मिले टेप से लिपटे सात संदिग्ध कंटेनर, LMG की मैगजीन और अन्य सामान; मामले की जांच जारी

जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में सुरक्षा बलों ने आतंकवाद-रोधी अभियान के तहत सलानी और आसपास के इलाकों में तलाशी के दौरान संदिग्ध विस्फोटक सामग्री और अन्य सामान बरामद किया है। अधिकारियों के मुताबिक, यह कार्रवाई मेंढर सब-डिवीजन के कसबालारी इलाके में मिली खुफिया जानकारी के आधार पर की गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार, 156 टेरिटोरियल आर्मी से मिले इनपुट के बाद 6 सेक्टर राष्ट्रीय राइफल्स के तहत 37 राष्ट्रीय राइफल्स ने इलाके में सर्च ऑपरेशन चलाया। तलाशी के दौरान कई संदिग्ध वस्तुएं मिलीं, जिनकी प्रकृति और इस्तेमाल की जांच की जा रही है।

तलाशी में क्या-क्या मिला?

सुरक्षा बलों को भूरे रंग के टेप से लिपटे छह कंटेनर और नीले टेप से लिपटा एक अन्य कंटेनर मिला। इन सातों कंटेनरों के संदिग्ध इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) होने की आशंका जताई गई है। हालांकि, इनके IED होने की अंतिम पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। इसके अलावा, तलाशी में एक काला बैग, एक कॉम्बैट पाउच, एक लोहे का काला बॉक्स और 7.62 मिमी लाइट मशीन गन (LMG) की एक मैगजीन भी बरामद हुई। अधिकारियों ने लोहे के बॉक्स के मैगजीन कंटेनर होने की आशंका जताई है। मौके से एक एल्युमीनियम कंटेनर, दो पावर एडॉप्टर, एक पावर सोर्स और एक टिफिन भी मिला। बरामद सामग्री के स्रोत और संभावित इस्तेमाल का पता लगाने के लिए आगे की जांच की जा रही है।

हंदवाड़ा में पोस्टर मामले में एक आरोपी गिरफ्तार

इस बीच, उत्तरी कश्मीर के हंदवाड़ा इलाके में पुलिस ने सार्वजनिक स्थान पर कथित तौर पर देश-विरोधी और भड़काऊ पोस्टर लगाने के मामले में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने 22 अक्टूबर को बताया कि इस संबंध में हंदवाड़ा थाने में FIR दर्ज की गई है। पुलिस के अनुसार, जांच के दौरान कथित साजिश में ओवरग्राउंड वर्कर्स (OGWs) और अन्य लोगों की संभावित भूमिका सामने आई है। अन्य संदिग्धों की पहचान और गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं। मामले की जांच अभी जारी है। पुंछ में हुई बरामदगी और हंदवाड़ा का पोस्टर मामला अलग-अलग घटनाक्रम हैं। फिलहाल, दोनों के बीच किसी सीधे संबंध की आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।


भारतीय जनसंघ के संस्थापक के जीवन और राजनीतिक सफर पर बनेगी फिल्म, 2027 में शुरू हो सकती है शूटिंग

फिल्म निर्माता और निर्देशक मधुर भंडारकर अब भारतीय इतिहास की एक अहम राजनीतिक शख्सियत डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन को बड़े पर्दे पर प्रस्तुत करने की तैयारी में हैं। उनकी आगामी फिल्म का नाम ‘श्यामा – द मिसिंग चैप्टर’ रखा गया है। फिल्म का निर्माण आदित्य कुमार हलवासिया के साथ भंडारकर एंटरटेनमेंट और एकेएच वेंचर्स के बैनर तले किया जाएगा। निर्माताओं के अनुसार, फिल्म के जरिए डॉ. मुखर्जी के राजनीतिक जीवन, उनके विचारों और स्वतंत्र भारत के शुरुआती दौर में उनकी भूमिका को दर्शकों तक पहुंचाने की कोशिश की जाएगी।

शिक्षा से राजनीति तक का सफर दिखाएगी फिल्म

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी शिक्षाविद और राजनेता थे। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय के सबसे युवा कुलपति के रूप में कार्य किया और स्वतंत्र भारत की पहली केंद्रीय मंत्रिपरिषद में जवाहरलाल नेहरू के साथ काम किया। फिल्म में सरकार के साथ उनके वैचारिक मतभेदों, मंत्रिमंडल से इस्तीफे और वर्ष 1951 में भारतीय जनसंघ की स्थापना जैसे महत्वपूर्ण घटनाक्रमों को जगह दी जाएगी। इसके अलावा, जम्मू-कश्मीर में लागू परमिट व्यवस्था के विरोध में 1953 में चलाए गए उनके अभियान और हिरासत के दौरान उनकी मृत्यु से जुड़ी परिस्थितियों को भी कहानी का हिस्सा बनाया जाएगा।

मधुर भंडारकर ने क्या कहा?

‘फैशन’, ‘हीरोइन’ और ‘बबली बाउंसर’ जैसी फिल्मों के निर्देशन के लिए पहचाने जाने वाले मधुर भंडारकर ने इस परियोजना को चुनौतीपूर्ण बताया है। उनका कहना है कि वह भारतीय इतिहास के इस महत्वपूर्ण अध्याय को ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ एक नए दृष्टिकोण से पर्दे पर प्रस्तुत करना चाहते हैं। निर्माता आदित्य कुमार हलवासिया के मुताबिक, फिल्म का उद्देश्य नई पीढ़ी को डॉ. मुखर्जी के जीवन, उनके विचारों और देश के राजनीतिक इतिहास से परिचित कराना है।

कब शुरू होगी शूटिंग?

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, फिल्म की शूटिंग 2027 में शुरू होने की योजना है। फिलहाल कलाकारों की सूची और रिलीज की तारीख को लेकर आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। फिल्म के जरिए डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन के उन राजनीतिक घटनाक्रमों को फिर से चर्चा में लाने की तैयारी है, जिन्होंने स्वतंत्र भारत की शुरुआती राजनीति को प्रभावित किया था।


पीएम मोदी ने चिन्मय अमृत महोत्सव का किया शुभारंभ, बोले- आध्यात्मिक विचारों की विरासत है चिन्मय मिशन

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को भारत मंडपम में आयोजित चिन्मय अमृत महोत्सव वैश्विक सम्मेलन का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने चिन्मय मिशन की आध्यात्मिक परंपरा और उसके विचारों के महत्व पर बात की। प्रधानमंत्री ने कहा कि मिशन की पहचान केवल एक संगठन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी वैचारिक विरासत है, जो लोगों को आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ती है।

मिशन की यात्रा और आध्यात्मिक विरासत का उल्लेख

अपने संबोधन में पीएम मोदी ने चिन्मय मिशन के अमृत महोत्सव में शामिल होने को विशेष अनुभव बताया। उन्होंने संतों से मिले स्नेह और आशीर्वाद के प्रति आभार जताया। प्रधानमंत्री के अनुसार, मिशन की लंबी यात्रा उसके मूल विचारों और संकल्पों को आगे बढ़ाने का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि ‘चिन्मय’ शब्द का भाव अमरता और आध्यात्मिक चेतना से जुड़ा है। इस दृष्टि से अमृत महोत्सव का नाम भी आयोजन के उद्देश्य के अनुरूप है।

स्वामी चिन्मयानंद से मुलाकात की यादें साझा कीं

प्रधानमंत्री ने फरवरी 1993 में बड़ौदा में स्वामी चिन्मयानंद से हुई मुलाकात को याद किया। उन्होंने बताया कि गुरुदेव के साथ हुई बातचीत और उनसे मिले स्नेह की स्मृतियां आज भी उनके लिए महत्वपूर्ण हैं। इस प्रसंग का उल्लेख करते हुए उन्होंने चिन्मय मिशन के सदस्यों का धन्यवाद किया।

शिकागो के विश्व धर्म संसद समारोह से जुड़ा प्रसंग

पीएम मोदी ने बताया कि वह स्वामी चिन्मयानंद को अमेरिका के शिकागो में होने वाले विश्व धर्म संसद के शताब्दी समारोह में आमंत्रित करने गए थे। यह आयोजन स्वामी विवेकानंद के ऐतिहासिक भाषण के सौ वर्ष पूरे होने के अवसर से जुड़ा था। स्वामी चिन्मयानंद ने निमंत्रण स्वीकार किया था और अमेरिका में विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। हालांकि, समारोह से कुछ सप्ताह पहले 3 अगस्त को अमेरिका में उनका निधन हो गया। प्रधानमंत्री ने इस घटना को याद करते हुए उस समय से जुड़ी भावनाएं साझा कीं।

युवा शक्ति के जरिए राष्ट्र निर्माण का संदेश

प्रधानमंत्री ने स्वामी चिन्मयानंद के साथ अपनी अंतिम मुलाकात में हुई चर्चा का जिक्र करते हुए कहा कि युवा शक्ति का विकास और उसके माध्यम से सशक्त भारत का निर्माण महत्वपूर्ण विषय थे। उन्होंने बताया कि स्वामी चिन्मयानंद से मुलाकात के कुछ वर्षों बाद वह गुजरात के मुख्यमंत्री बने। पीएम मोदी के अनुसार, पिछले 25 वर्षों से सरकार के प्रमुख के रूप में देश की सेवा करते हुए उन्हें गुरुदेव के आशीर्वाद का स्मरण रहा है।

चिन्मय मिशन के योगदान को किया याद

सम्मेलन में प्रधानमंत्री के संबोधन का प्रमुख केंद्र आध्यात्मिक मूल्यों, युवाओं की भूमिका और राष्ट्र निर्माण के बीच संबंध रहा। उन्होंने चिन्मय मिशन के सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया और स्वामी चिन्मयानंद के साथ अपने अनुभवों को साझा किया। चिन्मय अमृत महोत्सव के आयोजन के जरिए मिशन की यात्रा और उसके विचारों को याद किया गया। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में आध्यात्मिक विरासत को आगे बढ़ाने और युवा पीढ़ी को सकारात्मक दिशा देने के महत्व पर जोर दिया।


PM मोदी बोले- भारत अब दुनिया का ‘बैक ऑफिस’ ही नहीं, ‘ब्रेन ऑफिस’ भी

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में युवाओं, महिलाओं, किसानों, मछुआNDTV वर्ल्ड समिट 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की तकनीकी क्षमताओं, डिजिटल अर्थव्यवस्था और वैश्विक भूमिका पर बात की। उन्होंने कहा कि भारत अब केवल सेवाएं देने तक सीमित नहीं है, बल्कि नई तकनीक विकसित करने, डिजाइन तैयार करने और नवाचार के क्षेत्र में भी अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 अक्टूबर को नई दिल्ली में आयोजित NDTV वर्ल्ड समिट 2026 को संबोधित किया। ‘द वर्ल्ड बिटवीन ऑर्डर्स’ विषय पर बोलते हुए उन्होंने बदलती वैश्विक व्यवस्था, अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार और दुनिया में भारत की बढ़ती भूमिका पर अपने विचार रखे।

वैश्विक व्यवस्था में बदलाव की जरूरत: PM मोदी

प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया में आर्थिक और तकनीकी बदलाव तेजी से हो रहे हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को भी इन नई परिस्थितियों के अनुरूप खुद को बदलना होगा। उनके मुताबिक, संयुक्त राष्ट्र जैसी बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार और ग्लोबल साउथ के देशों की आवाज को अधिक महत्व देना जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग केवल सामान्य परिस्थितियों में ही नहीं, बल्कि संकट के समय भी प्रभावी रहना चाहिए। व्यापार, तकनीक और समुद्री मार्गों से जुड़े बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों का जिक्र करते हुए उन्होंने समावेशी वैश्विक व्यवस्था की आवश्यकता पर जोर दिया।

‘बैक ऑफिस’ से ‘ब्रेन ऑफिस’ बनने की ओर भारत

प्रधानमंत्री ने भारत की बदलती तकनीकी और आर्थिक भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि देश अब पारंपरिक सेवा क्षेत्र से आगे बढ़कर नवाचार, उत्पाद डिजाइन और नई तकनीक के विकास में योगदान दे रहा है। उन्होंने बताया कि भारत के ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्लाउड कंप्यूटिंग, इंजीनियरिंग, डेटा एनालिटिक्स और उत्पाद विकास जैसे क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र का जिक्र करते हुए कहा कि वैश्विक चिप-डिजाइन कार्यबल का लगभग 20 प्रतिशत भारत में है। उन्होंने यह भी बताया कि भारतीय इंजीनियर 2 से 3 नैनोमीटर तकनीक वाले चिप डिजाइन पर काम कर रहे हैं।

डिजिटल भुगतान और हरित ऊर्जा पर जोर

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने डिजिटल भुगतान, स्टार्टअप, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और हरित ऊर्जा में भारत की प्रगति का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि देश अपनी क्षमताओं को मजबूत करने के साथ वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं को भी सहयोग दे सकता है। उन्होंने गैर-जीवाश्म स्रोतों से बिजली उत्पादन क्षमता के 300 गीगावाट के आंकड़े को पार करने और देश में हाइड्रोजन ट्रेन के संचालन जैसी उपलब्धियों का भी जिक्र किया। 

दवाओं के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा

प्रधानमंत्री ने दवा उद्योग में आत्मनिर्भरता का उदाहरण देते हुए कहा कि आंध्र प्रदेश के काकीनाडा में कई वर्षों बाद पेनिसिलिन-G का घरेलू उत्पादन दोबारा शुरू हुआ है। उन्होंने बताया कि सरकार सक्रिय औषधीय सामग्री (API) की घरेलू आपूर्ति शृंखला विकसित करने पर भी काम कर रही है। उनके अनुसार, उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना (PLI) के तहत इस दिशा में निवेश को बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि दवा निर्माण के लिए दूसरे देशों पर निर्भरता कम की जा सके।

विकसित भारत के लक्ष्य पर जोर

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में युवाओं, महिलाओं, किसानों, मछुआरों और मध्यम वर्ग की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने रोजगार, निर्यात, शोध और नवाचार से जुड़े आंकड़े साझा करते हुए कहा कि भारत अपनी आर्थिक और तकनीकी क्षमताओं को बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने विकसित भारत के लक्ष्य को दोहराते हुए कहा कि देश की प्रगति को वैश्विक विकास और समृद्धि से जोड़ना जरूरी है। प्रधानमंत्री के मुताबिक, भारत का लक्ष्य केवल अपनी क्षमताओं को मजबूत करना नहीं, बल्कि दुनिया की प्रगति में भी योगदान देना है।


गुरुग्राम में बिजली संकट: 7 घंटे में 5,500 से ज्यादा शिकायतें, कई इलाकों में सप्लाई प्रभावित

गुरुग्राम में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल के बीच कई शहरी और ग्रामीण इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित होने की खबर है। इसका असर पानी की सप्लाई और रोजमर्रा के कामकाज पर भी पड़ा है। बिजली निगम की हेल्पलाइन पर रात 12 बजे से सुबह 7 बजे के बीच 5,500 से अधिक शिकायतें दर्ज की गईं। हरियाणा के गुरुग्राम में बिजली कटौती के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, शहर के कई इलाकों में गुरुवार रात कुछ समय के लिए बिजली बहाल हुई, लेकिन रात 12 बजे के आसपास फिर से आपूर्ति बाधित हो गई। इसके बाद कई क्षेत्रों से बिजली गुल होने की शिकायतें सामने आईं।

इन इलाकों से मिलीं बिजली कटौती की शिकायतें

सेक्टर-2 के ब्लॉक-बी, अशोक विहार फेज-2 और फेज-3, सेक्टर-4, सेक्टर-5, दयानंद कॉलोनी, भीमगढ़ खेड़ी, पालम विहार, सेक्टर-23, राजेंद्र पार्क, रतन विहार, विष्णु गार्डन और सेक्टर-105 समेत कई इलाकों में बिजली आपूर्ति प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है। बिजली नहीं होने से घरेलू कामकाज और पानी की उपलब्धता पर भी असर पड़ने की शिकायतें हैं। सोहना और फरुखनगर के कई गांवों तथा कॉलोनियों से भी बिजली आपूर्ति बाधित होने की खबरें मिली हैं।

हेल्पलाइन पर सात घंटे में 5,500 से अधिक शिकायतें

बिजली संकट के बीच दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN) की हेल्पलाइन पर रात 12 बजे से सुबह 7 बजे तक 5,500 से अधिक शिकायतें दर्ज होने की जानकारी दी गई है। शिकायतों की संख्या से प्रभावित उपभोक्ताओं की परेशानी का अंदाजा लगाया जा सकता है। इस स्थिति के बीच बिजली आपूर्ति बनाए रखने के लिए की गई तैयारियों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। कर्मचारियों की हड़ताल की पूर्व सूचना होने के बावजूद वैकल्पिक इंतजाम कितने प्रभावी रहे, यह जांच और प्रशासन की ओर से मिलने वाली जानकारी के बाद स्पष्ट हो सकेगा।

बिजली संबंधी शिकायत के लिए हेल्पलाइन नंबर

गुरुग्राम जिला प्रशासन की ओर से बिजली आपूर्ति से जुड़ी शिकायतें दर्ज कराने के लिए निम्नलिखित नंबर साझा किए गए हैं:

इलेक्ट्रिसिटी हेल्पलाइन: 1912

टोल-फ्री हेल्पलाइन: 1800-180-4334

WhatsApp हेल्पलाइन: 8813999708

WhatsApp हेल्पलाइन: 9540954768

बिजली कटौती, तकनीकी खराबी या आपूर्ति से संबंधित समस्या होने पर उपभोक्ता इन नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं। नंबरों की वर्तमान उपलब्धता और संबंधित शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया की पुष्टि बिजली निगम या जिला प्रशासन से कर लें।


राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने माता हासी देवी की 200वीं जयंती पर जारी किया 200 रुपये का स्मारक सिक्का

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में पूज्य माता साहिब हासी देवी जी के सम्मान में 200 रुपये का स्मारक सिक्का जारी किया। इस मौके पर छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय समेत कई जनप्रतिनिधि और सिंधी समाज के प्रतिनिधि मौजूद रहे। यह स्मारक सिक्का पूज्य शदाणी दरबार की पांचवीं पीठाधीश माता साहिब हासी देवी जी की 200वीं जयंती के अवसर पर केंद्रीय वित्त मंत्रालय की ओर से जारी किया गया है। सिक्के पर माता हासी देवी की छवि अंकित है। इसके एक तरफ अशोक स्तंभ का सिंह शीर्ष और 200 रुपये का मूल्यवर्ग दर्शाया गया है।

इस पहल का उद्देश्य माता हासी देवी के जीवन, विचारों और आध्यात्मिक योगदान को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना है। सिंधी समाज के लिए भी इसे विशेष महत्व का अवसर माना जा रहा है। कार्यक्रम में स्वागत भाषण पूज्य शदाणी दरबार रायपुर के पीठाधीश संत डॉ. युधिष्ठिर लाल जी ने दिया। समारोह में सांसद बृजमोहन अग्रवाल, विधायक पुरंदर मिश्रा, सुनील सोनी और मोतीलाल साहू सहित कई जनप्रतिनिधि एवं वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

कार्यक्रम में राज्य की प्रथम महिला रानी डेका काकोटी, मुख्य सचिव विकासशील, पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम और राज्यपाल के सचिव डॉ. सी. आर. प्रसन्ना समेत अन्य गणमान्य लोग भी उपस्थित रहे।

राष्ट्रपति के रायपुर पहुंचने पर राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने उनका स्वागत किया। स्मारक सिक्के के अनावरण के बाद इसकी बुकिंग शदाणी दरबार की विभिन्न इकाइयों के माध्यम से उपलब्ध कराने की जानकारी दी गई है। माता हासी देवी के सम्मान में जारी यह सिक्का उनकी स्मृति और आध्यात्मिक विरासत को संरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।


त्रिपुरा के युवक पर कथित नस्लीय टिप्पणी का मामला: इन्फ्लुएंसर आमिर शौकीन के खिलाफ FIR, वीडियो वायरल होने पर विवाद

नई दिल्ली: पुरानी दिल्ली में त्रिपुरा के एक युवक के साथ कथित तौर पर नस्लीय और अपमानजनक व्यवहार किए जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला तूल पकड़ गया है। इस मामले में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर आमिर शौकीन के खिलाफ त्रिपुरा पुलिस ने FIR दर्ज की है। त्रिपुरा के IG ने ‘आज तक’ को बताया कि मामले में कार्रवाई की जाएगी।

क्या है पूरा मामला?

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में आमिर शौकीन पूर्वोत्तर राज्य त्रिपुरा के एक युवक से बातचीत करते दिखाई देते हैं। वीडियो में युवक के अपने राज्य के बारे में बताने के बाद आमिर की ओर से कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणियां की जाती हैं। वीडियो सामने आने के बाद कई सोशल मीडिया यूजर्स ने उनके व्यवहार की आलोचना की और पुलिस कार्रवाई की मांग उठाई। मामले ने राजनीतिक स्तर पर भी ध्यान खींचा है। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने वीडियो साझा करते हुए कार्रवाई की मांग की। वहीं, त्रिपुरा के मुख्यमंत्री ने राज्य के डीजीपी को दिल्ली पुलिस के साथ समन्वय बनाकर मामले में आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इस बीच, बीजेपी की त्रिपुरा इकाई ने दावा किया है कि आमिर शौकीन कांग्रेस से जुड़े कार्यकर्ता हैं। यह आरोप राजनीतिक दल की ओर से लगाया गया है।

वायरल वीडियो के बाद आमिर ने मांगी माफी

विवाद बढ़ने के बाद आमिर शौकीन का एक दूसरा वीडियो भी सामने आया, जिसमें वह माफी मांगते दिखाई देते हैं। उन्होंने दावा किया कि विवादित वीडियो स्क्रिप्टेड था और वह कंटेंट क्रिएटर के तौर पर इस तरह के मजाकिया वीडियो बनाते हैं। आमिर ने कहा कि यदि उनके वीडियो से किसी को ठेस पहुंची है, तो उन्हें माफ कर दिया जाए। हालांकि, उनके इस स्पष्टीकरण के बावजूद मामले में कार्रवाई की मांग जारी है। वीडियो को स्क्रिप्टेड बताना आमिर का अपना दावा है; इसकी स्वतंत्र पुष्टि सामने दी गई जानकारी में नहीं है।

दिल्ली पुलिस की साइबर यूनिट कर रही जांच

मामले की जानकारी दिल्ली पुलिस की स्पेशल पुलिस यूनिट फॉर नॉर्थ ईस्ट रीजन तक पहुंची थी। इसके बाद यूनिट ने दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की साइबर सेल को इसकी जानकारी दी। फिलहाल साइबर सेल की IFSO यूनिट मामले की जांच कर रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि वायरल वीडियो के संदर्भ में क्या कार्रवाई की जानी चाहिए। त्रिपुरा पुलिस की FIR और दिल्ली पुलिस की जांच से जुड़े अगले कदम मामले के तथ्यों और जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेंगे।

आमिर के भाई ने भी दी प्रतिक्रिया

विवाद पर आमिर शौकीन के भाई आलीशान का बयान भी सामने आया है। उन्होंने कहा कि वह आमिर से 20 साल बड़े हैं और यदि कोई इस तरह का वीडियो बनाता है, तो यह जाहिर तौर पर गलत होगा। फिलहाल इस मामले में पुलिस जांच जारी है। वायरल वीडियो, आमिर की ओर से दी गई सफाई और संबंधित अधिकारियों की कार्रवाई के आधार पर आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।


INS विक्रांत से उड़ान भरेंगे राफेल-M! गोवा में शुरू हुए ट्रायल, जानिए भारत की नौसैनिक ताकत के लिए क्यों अहम है यह कदमg

Rafale-Marine Fighter Jet: भारतीय नौसेना अपने स्वदेशी विमानवाहक पोत INS विक्रांत से आधुनिक लड़ाकू विमानों के संचालन की तैयारी में जुटी है। इसी दिशा में फ्रांस में बने राफेल-Marine लड़ाकू विमानों से जुड़े परीक्षण गोवा में किए जा रहे हैं। इनका उद्देश्य यह जांचना है कि विमान को INS विक्रांत से संचालित करने के लिए किन तकनीकी बदलावों की जरूरत होगी। भारत और फ्रांस के बीच 26 राफेल-M विमानों की खरीद का समझौता हो चुका है, जिनकी डिलीवरी 2028 के अंत या 2029 की शुरुआत तक होने की उम्मीद है।

गोवा में क्यों हो रहे हैं राफेल-M के ट्रायल?

राफेल-M फ्रांसीसी कंपनी Dassault Aviation का नौसैनिक लड़ाकू विमान है, जिसे विमानवाहक पोतों से संचालन के लिए तैयार किया गया है। यह फ्रांसीसी नौसेना में पहले से इस्तेमाल हो रहा है। भारतीय नौसेना गोवा में यह जांच रही है कि विमान को INS विक्रांत से उड़ान भरने और उस पर सुरक्षित उतरने के लिए किस तरह अनुकूल बनाया जा सकता है। विमानवाहक पोत से संचालन के लिए सामान्य रनवे से उड़ान भरने की तुलना में अलग तकनीकी व्यवस्थाओं और प्रक्रियाओं की जरूरत होती है।
ये परीक्षण इसलिए महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि INS विक्रांत पर राफेल-M के संचालन की तैयारी पूरी करने से पहले विमान और पोत की प्रणालियों के बीच अनुकूलता का आकलन करना जरूरी है। 

26 लड़ाकू विमानों के लिए करीब 63,000 करोड़ रुपये का समझौता

भारत ने 28 अप्रैल 2025 को फ्रांस के साथ भारतीय नौसेना के लिए 26 राफेल विमानों की खरीद का अंतर-सरकारी समझौता किया था। इस सौदे की कीमत लगभग 63,000 करोड़ रुपये बताई गई है।

 रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस पैकेज में शामिल हैं:

22 सिंगल-सीटर लड़ाकू विमान
4 ट्विन-सीटर विमान
पायलटों का प्रशिक्षण और फ्लाइट सिम्युलेटर
हथियार और संबंधित उपकरण
रखरखाव एवं लॉजिस्टिक्स सहायता
भारतीय वायु सेना के मौजूदा राफेल बेड़े के लिए अतिरिक्त उपकरण

समझौते में भारत में स्वदेशी हथियारों को राफेल के साथ एकीकृत करने के लिए तकनीक हस्तांतरण का प्रावधान भी शामिल है।

INS विक्रांत और INS विक्रमादित्य से होगा संचालन

भारतीय नौसेना के पास फिलहाल दो विमानवाहक पोत हैं—INS विक्रांत और INS विक्रमादित्य। योजना के मुताबिक, नौसेना के लिए खरीदे जा रहे राफेल-M विमानों का इस्तेमाल दोनों पोतों से किया जा सकेगा। इन विमानों से नौसेना की कई तरह के अभियानों में क्षमता बढ़ाने की उम्मीद है। इनमें हवाई सुरक्षा, समुद्री लक्ष्यों के खिलाफ कार्रवाई, निगरानी और जरूरत पड़ने पर तटीय लक्ष्यों पर हमले जैसे मिशन शामिल हैं। हालांकि, इन क्षमताओं का वास्तविक परिचालन लाभ विमान के नौसेना में शामिल होने, परीक्षणों के नतीजों और प्रशिक्षण की तैयारी पर निर्भर करेगा। 

हिंद महासागर में भारत के लिए क्यों अहम है यह सौदा?

हिंद महासागर में समुद्री व्यापार मार्गों और रणनीतिक क्षेत्रों की सुरक्षा भारत की रक्षा तैयारियों का अहम हिस्सा है। विमानवाहक पोत से संचालित होने वाले आधुनिक लड़ाकू विमान नौसेना को समुद्र में हवाई सुरक्षा और विभिन्न सैन्य अभियानों के लिए अतिरिक्त विकल्प देते हैं। राफेल-M की खरीद से नौसेना की कैरियर-आधारित लड़ाकू विमान क्षमता को मजबूती मिलने की उम्मीद है। INS विक्रांत जैसे स्वदेशी विमानवाहक पोत के साथ इन विमानों का संचालन भारत की समुद्री रक्षा तैयारियों में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। ,फिलहाल गोवा में चल रहे परीक्षण इस दिशा में अहम हैं। इनके नतीजों से यह स्पष्ट होगा कि राफेल-M को INS विक्रांत से संचालित करने के लिए किन बदलावों और प्रक्रियाओं की जरूरत है।

कब तक मिलेंगे भारत को राफेल-M विमान?

रक्षा अधिकारियों के मुताबिक, 26 विमानों की डिलीवरी 2028 के अंत या 2029 की शुरुआत तक निर्धारित है। इससे पहले विमान के संचालन, प्रशिक्षण और संबंधित तकनीकी तैयारियों पर काम किया जाएगा।

निष्कर्ष: गोवा में राफेल-M से जुड़े परीक्षण भारतीय नौसेना के कैरियर एविएशन कार्यक्रम के लिए महत्वपूर्ण कदम हैं। फ्रांस से मिलने वाले इन विमानों से नौसेना की समुद्री हवाई क्षमता को विस्तार देने की योजना है, लेकिन INS विक्रांत से उनका परिचालन परीक्षणों और आगे की तैयारियों के सफल होने पर निर्भर करेगा।


SBI Data Leak: 3,897 ग्राहकों की निजी जानकारी डार्क वेब पर मिलने का दावा, जानिए आपका पैसा कितना सुरक्षित है

SBI Data Breach Explained: देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) से जुड़ी डेटा एक्सपोजर की घटना सामने आई है। बैंक ने शुरुआती जांच में डार्क वेब पर उपलब्ध करीब 3.75 लाख रिकॉर्ड में से 3,897 ग्राहक रिकॉर्ड में व्यक्तिगत पहचान से जुड़ी जानकारी मिलने की बात कही है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या ग्राहकों का बैंक बैलेंस, ATM PIN, OTP और नेट बैंकिंग पासवर्ड भी खतरे में हैं? बैंक ने क्या कहा है और ग्राहकों को अब किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? आइए समझते हैं।

SBI डेटा लीक का मामला क्या है?

SBI ने 21 अक्टूबर 2026 को स्टॉक एक्सचेंजों को दी गई जानकारी में बताया कि उसे 16 अक्टूबर को अपने थ्रेट इंटेलिजेंस सेवा प्रदाता, Defence Cyber Agency और भारतीय कंप्यूटर आपात प्रतिक्रिया टीम (CERT-In) से डार्क वेब पर ग्राहक डेटा के संभावित एक्सपोजर को लेकर अलर्ट मिला था। बैंक के मुताबिक, करीब 3.75 लाख रिकॉर्ड की शुरुआती जांच में 3,897 रिकॉर्ड ऐसे मिले जिनमें व्यक्तिगत पहचान संबंधी जानकारी शामिल थी। हालांकि, इन सभी रिकॉर्ड की प्रामाणिकता, पूरी जानकारी और डेटा बाहर आने के संभावित स्रोत का पता लगाने के लिए विस्तृत जांच की जरूरत है।  SBI ने मामले की जांच के लिए CERT-In से सूचीबद्ध एक स्वतंत्र साइबर सुरक्षा एजेंसी को नियुक्त किया है। बैंक ने यह भी कहा कि इस घटना का उसके मुख्य बैंकिंग परिचालन, वित्तीय प्रदर्शन या कारोबार की निरंतरता पर कोई महत्वपूर्ण असर नहीं पड़ा है।
1. कौन-सी जानकारी सामने आने की बात कही गई है?

शुरुआती जांच में मिले रिकॉर्ड में ग्राहकों की कुछ निजी और पहचान संबंधी जानकारियां शामिल होने की बात कही गई है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

ग्राहक का नाम, जन्मतिथि और लिंग

रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी

आवासीय पता

बैंक शाखा और CIF से जुड़े पहचान विवरण

लीड आईडी

लोन या लीड रिकॉर्ड से जुड़ा कुछ मेटाडेटा

CIF यानी Customer Information File बैंक के सिस्टम में ग्राहक की पहचान से जुड़ा विवरण होता है।

यहां ध्यान देने वाली बात है कि 3.75 लाख रिकॉर्ड की जांच और 3,897 रिकॉर्ड में व्यक्तिगत जानकारी मिलने के आंकड़े अलग-अलग हैं। इन संख्याओं को प्रभावित बैंक खातों या अलग-अलग ग्राहकों की अंतिम संख्या नहीं माना जा सकता। बैंक की जांच अभी यह निर्धारित करने के लिए है कि डेटा कितना वास्तविक है और घटना का वास्तविक दायरा क्या है। 

2. क्या SBI ग्राहकों का पैसा खतरे में है?

फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि SBI के सभी ग्राहकों के बैंक खाते खतरे में हैं। बैंक ने अपने मुख्य परिचालन पर किसी महत्वपूर्ण असर से इनकार किया है और Reuters की रिपोर्ट के अनुसार SBI ने ग्राहकों के बैलेंस सुरक्षित होने की बात भी कही है। हालांकि, डेटा एक्सपोजर और बैंक खाते से अनधिकृत लेन-देन दो अलग-अलग स्थितियां हैं। 

इसे आसान भाषा में समझें:

डेटा एक्सपोजर: ग्राहक का नाम, पता या मोबाइल नंबर जैसी जानकारी सामने आना।

खाते तक अनधिकृत पहुंच: किसी दूसरे व्यक्ति का बैंक खाते या डिजिटल बैंकिंग सेवा पर नियंत्रण हासिल करना।

पैसों की चोरी: बिना अनुमति खाते से रकम निकालना या ट्रांसफर करना।

पहली स्थिति सामने आने का मतलब यह नहीं कि दूसरी या तीसरी स्थिति भी हो चुकी है। उपलब्ध रिपोर्टों में ATM PIN, OTP या नेट बैंकिंग पासवर्ड लीक होने अथवा इस घटना के कारण ग्राहकों के खाते से पैसे चोरी होने की पुष्टि नहीं हुई है।

3. लीक हुई जानकारी का गलत इस्तेमाल कैसे हो सकता है?

नाम, मोबाइल नंबर, पता और बैंक से जुड़ी कुछ पहचान संबंधी जानकारी का इस्तेमाल करके साइबर ठग ग्राहकों को निशाना बनाने की कोशिश कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, कोई व्यक्ति फोन करके आपके नाम, बैंक शाखा या लोन से जुड़ी जानकारी का जिक्र कर सकता है। इससे आपको लग सकता है कि फोन करने वाला बैंक का वास्तविक कर्मचारी है। 

ऐसी जानकारी के आधार पर ठग संभावित रूप से:

खाते में समस्या बताकर फर्जी बैंक कॉल कर सकते हैं।
KYC अपडेट करने के नाम पर नकली लिंक भेज सकते हैं।
लोन आवेदन या किस्त का हवाला देकर पैसे मांग सकते हैं।
फर्जी वेबसाइट के जरिए पासवर्ड हासिल करने की कोशिश कर सकते हैं।
अलग-अलग स्रोतों से मिली जानकारी जोड़कर पहचान का गलत इस्तेमाल करने की कोशिश कर सकते हैं।

ये संभावित धोखाधड़ी के तरीके हैं। इन्हें इस घटना के बाद वास्तव में हुई ठगी की पुष्टि नहीं माना जाना चाहिए।

4. क्या ATM PIN और नेट बैंकिंग पासवर्ड तुरंत बदलना जरूरी है?

हर SBI ग्राहक के लिए तुरंत ATM PIN और नेट बैंकिंग पासवर्ड बदलना जरूरी है, ऐसा निष्कर्ष अभी उपलब्ध जानकारी से नहीं निकलता। सामने आए विवरणों में मुख्य रूप से व्यक्तिगत पहचान और ग्राहक रिकॉर्ड का जिक्र है। फिर भी, यदि आपका पासवर्ड कमजोर है, आप एक ही पासवर्ड कई जगह इस्तेमाल करते हैं या आपको संदिग्ध लॉगिन का अलर्ट मिला है, तो पासवर्ड बदलना समझदारी होगी। OTP, ATM PIN, CVV और नेट बैंकिंग पासवर्ड किसी के साथ साझा न करें। बैंक के नाम पर आए संदेश में दिए गए लिंक से लॉगिन करने के बजाय SBI के आधिकारिक ऐप, वेबसाइट या शाखा से जानकारी सत्यापित करें।

5. SBI ग्राहकों को अभी क्या करना चाहिए?

अपने खाते के लेन-देन पर नजर रखें: बैंक स्टेटमेंट और ट्रांजैक्शन अलर्ट नियमित रूप से जांचें। कोई अनजान लेन-देन दिखे तो तुरंत बैंक को सूचना दें। KYC के नाम पर आने वाले लिंक से सावधान रहें: खाता बंद होने या बैंकिंग सेवा रुकने की धमकी देने वाले संदेशों पर बिना जांच भरोसा न करें। 
फोन करने वाले की पहचान सत्यापित करें: केवल आपका नाम, पता या बैंक की जानकारी जानने से कोई व्यक्ति बैंक कर्मचारी साबित नहीं हो जाता। कॉल काटकर बैंक के आधिकारिक नंबर पर संपर्क करें।
ईमेल और मोबाइल सुरक्षित रखें: मजबूत और अलग पासवर्ड इस्तेमाल करें। जहां संभव हो, दो-स्तरीय सुरक्षा चालू रखें।
क्रेडिट रिपोर्ट पर ध्यान दें: यदि आप लोन या क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करते हैं, तो किसी अनजान लोन या क्रेडिट पूछताछ की जांच करें।
ठगी होने पर शिकायत करें: यदि आपके साथ वित्तीय साइबर धोखाधड़ी होती है, तो तुरंत बैंक को सूचित करें और भारत की साइबर वित्तीय धोखाधड़ी हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें। राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज की जा सकती है।

6. बैंक के नाम पर फर्जी कॉल की पहचान कैसे करें?

यदि फोन करने वाला OTP, PIN, CVV या पासवर्ड मांगता है, किसी दूसरे खाते में पैसे भेजने को कहता है या स्क्रीन शेयरिंग ऐप इंस्टॉल करने का दबाव बनाता है, तो सावधान हो जाएं। इसी तरह, खाते को तुरंत बंद करने की धमकी देकर जल्दबाजी में कोई कदम उठाने को कहना भी खतरे का संकेत हो सकता है। ऐसी कॉल पर भरोसा करने के बजाय फोन काटें और बैंक के आधिकारिक माध्यम से संपर्क करें। कॉल करने वाले की ओर से दिए गए नंबर या लिंक का इस्तेमाल करके उसकी पहचान सत्यापित न करें।

7. SBI की जांच में अब क्या पता लगाया जाएगा?

बैंक के मुताबिक, विस्तृत जांच के जरिए डेटा की प्रामाणिकता और पूर्णता, उसके संभावित स्रोत, एक्सपोजर की सीमा और ग्राहकों व बैंक के लिए उससे जुड़े जोखिमों का आकलन किया जाएगा। SBI ने अपने साइबर घटना से निपटने और नियंत्रण संबंधी प्रोटोकॉल सक्रिय करने की भी जानकारी दी है। फिलहाल जांच के नतीजे आने से पहले डेटा बाहर आने के सटीक कारण या उसके पूरे प्रभाव के बारे में अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। 

निष्कर्ष

SBI डेटा एक्सपोजर की घटना गंभीरता से जांच किए जाने का विषय है, लेकिन इसे सभी ग्राहकों के खाते हैक होने या पैसे चोरी होने के बराबर नहीं माना जाना चाहिए।
शुरुआती जांच में 3,897 रिकॉर्ड में व्यक्तिगत पहचान से जुड़ी जानकारी मिलने की बात कही गई है। ATM PIN, OTP और नेट बैंकिंग पासवर्ड लीक होने की पुष्टि उपलब्ध रिपोर्टों में नहीं हुई है। बैंक ने अपने मुख्य परिचालन पर किसी महत्वपूर्ण असर से इनकार किया है और स्वतंत्र साइबर सुरक्षा एजेंसी से जांच कराई जा रही है।

ग्राहकों के लिए सबसे जरूरी है कि वे घबराने के बजाय सतर्क रहें, अपने बैंकिंग अलर्ट जांचें और किसी भी संदिग्ध कॉल या लेन-देन की सूचना तुरंत बैंक को दें। जांच पूरी होने पर ही इस घटना की वास्तविक सीमा और संभावित प्रभाव की अधिक स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।


भारत में CEC विरोधी प्रदर्शनों पर मार्को रुबियो की दोटूक, UN विशेषज्ञों की आलोचना पर उठाए सवाल

Marco Rubio on India Protests: भारत में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हो रहे प्रदर्शनों पर अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार विशेषज्ञों की आलोचना पर सवाल उठाते हुए कहा कि अमेरिका भारत के घरेलू राजनीतिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करेगा। रुबियो के बयान के बीच शांतिपूर्ण विरोध, हिंसक प्रदर्शन और कथित मानवाधिकार उल्लंघनों को लेकर बहस तेज हो गई है।

UN विशेषज्ञों पर रुबियो ने क्या कहा?

भारत में प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की कार्रवाई को लेकर संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार विशेषज्ञों की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए मार्को रुबियो ने उनके दावों पर व्यंग्य किया। उन्होंने 'UN एक्सपर्ट्स' शब्द को ही विरोधाभासी बताते हुए कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है, जहां चुनाव होते हैं और लोग अपनी राजनीतिक राय रख सकते हैं। रुबियो ने स्पष्ट किया कि वह भारत की घरेलू राजनीति पर टिप्पणी नहीं करना चाहते। उनके मुताबिक, लोकतंत्र में अलग-अलग विचारों का सामने आना और लोगों का अपनी बात रखने के लिए प्रदर्शन करना राजनीतिक विमर्श का हिस्सा है।

शांतिपूर्ण प्रदर्शन और हिंसा में अंतर पर दिया जोर

रुबियो ने अपने बयान में शांतिपूर्ण विरोध और हिंसक घटनाओं के बीच अंतर भी स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि लोगों का अपनी राय व्यक्त करना लोकतांत्रिक व्यवस्था में राजनीतिक चर्चा की मौजूदगी को दर्शाता है। उन्होंने यूरोप में हिंसक दंगों का उदाहरण देते हुए कहा कि तोड़फोड़, इमारतों में जबरन घुसना और आगजनी जैसी घटनाओं को शांतिपूर्ण विरोध से अलग देखा जाना चाहिए। क्यूबा का जिक्र करते हुए रुबियो ने कहा कि कुछ देशों में विपक्षी आवाजों को दबाने के लिए जेल या अन्य दमनकारी तरीकों का इस्तेमाल किया जाता है। उनके बयान का मुख्य संदेश यह था कि लोकतंत्र में असहमति जताने की गुंजाइश महत्वपूर्ण है, हालांकि हिंसक गतिविधियों को इससे अलग समझा जाना चाहिए।

UN मानवाधिकार विशेषज्ञों ने क्या आरोप लगाए?

रुबियो की टिप्पणी से पहले संयुक्त राष्ट्र के 20 से अधिक मानवाधिकार विशेषज्ञों ने भारत में प्रदर्शनों के दौरान हुई कार्रवाई पर चिंता जताई थी। उन्होंने कथित मानवाधिकार उल्लंघनों की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की थी। विशेषज्ञों के आरोपों में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ जरूरत से ज्यादा बल का इस्तेमाल, मनमानी हिरासत और सार्वजनिक सभाओं पर प्रतिबंध जैसे मुद्दे शामिल थे। उन्होंने भारतीय अधिकारियों से इन आरोपों की जांच करने और शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले लोगों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने की अपील की थी। इन आरोपों को लेकर भारत और संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों के बीच मतभेद सामने आए हैं। हालांकि, आरोपों और उनकी स्वतंत्र पुष्टि के बीच अंतर करना जरूरी है।

भारत ने अंतरराष्ट्रीय आलोचना पर क्या रुख अपनाया?

प्रदर्शनों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाए गए सवालों के बीच भारत ने अपने आंतरिक मामलों में बाहरी हस्तक्षेप पर आपत्ति जताई है। संयुक्त राष्ट्र में भारतीय राजनयिक बरखा ताम्रकार ने कहा कि मानवाधिकारों के मुद्दों का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव बनाने या चुनिंदा देशों को निशाना बनाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। भारत की ओर से संवैधानिक सुरक्षा उपायों का बचाव करते हुए यह भी कहा गया कि अधूरी जानकारी या अपुष्ट आरोपों के आधार पर देश की नकारात्मक छवि पेश करना उचित नहीं है। इस तरह पूरे विवाद में एक ओर मानवाधिकार विशेषज्ञों ने पुलिस कार्रवाई की जांच की मांग उठाई है, जबकि दूसरी ओर भारत ने आरोपों के आधार और अंतरराष्ट्रीय आलोचना के तरीके पर सवाल खड़े किए हैं।

आखिर क्यों हो रहे हैं CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन?

इन प्रदर्शनों का संबंध मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग से है। विपक्षी दलों और छात्र संगठनों ने चुनाव आयोग की मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। प्रदर्शनकारियों की चिंता है कि मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया में योग्य मतदाताओं के नाम भी प्रभावित हो सकते हैं। इसी मुद्दे को लेकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

दूसरी ओर, चुनाव आयोग का कहना है कि SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाना है। इसके तहत डुप्लीकेट प्रविष्टियों, मृत मतदाताओं, दूसरी जगह स्थानांतरित हो चुके लोगों और अन्य अपात्र प्रविष्टियों की पहचान की जाती है। आयोग के अनुसार, जिन लोगों के नाम सूची से हटाए गए हैं, उनके पास निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपील करने का विकल्प भी है।

रुबियो के बयान के मायने क्या हैं?

मार्को रुबियो का बयान इस मामले में अमेरिका के सीधे हस्तक्षेप से दूरी बनाए रखने का संकेत देता है। उन्होंने भारत की घरेलू राजनीति पर फैसला सुनाने के बजाय लोकतांत्रिक व्यवस्था में राजनीतिक असहमति के महत्व पर जोर दिया। हालांकि, उनका बयान संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार विशेषज्ञों की चिंताओं का स्वतंत्र मूल्यांकन नहीं है। प्रदर्शनकारियों के अधिकारों, पुलिस की कार्रवाई और मतदाता सूची में बदलाव से जुड़े सवालों का समाधान संबंधित तथ्यों, आधिकारिक रिकॉर्ड और निष्पक्ष जांच के आधार पर ही हो सकता है।

फिलहाल, यह विवाद चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया, विरोध प्रदर्शनों के अधिकार और कथित मानवाधिकार उल्लंघनों को लेकर राजनीतिक तथा कूटनीतिक बहस के केंद्र में है।


क्या है SEM कोर्ट, जहां अटकी है सौरव दास और आशुतोष रांका की रिहाई? जानिए सामान्य अदालत से कैसे अलग है इसकी भूमिका

SEM Court Explained: दिल्ली में CJP के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की रिहाई को लेकर SEM कोर्ट चर्चा में है। दोनों की न्यायिक हिरासत की अवधि 21 अक्टूबर 2026 को समाप्त हो रही है। ऐसे में इस मामले की अगली प्रक्रिया और SEM कोर्ट की भूमिका पर सबकी नजर है। आखिर SEM कोर्ट क्या होती है, इसके पास कौन-सी शक्तियां होती हैं और यह सामान्य अदालत से किस तरह अलग है? आइए समझते हैं।

सौरव दास और आशुतोष रांका का मामला SEM कोर्ट तक कैसे पहुंचा?

सौरव दास और आशुतोष रांका को 14 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था का उल्लंघन करने और प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद दोनों को कार्यकारी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया। सोमवार को उनकी हिरासत दो दिन के लिए और बढ़ा दी गई, जिससे कुल अवधि सात दिन हो गई। इस बीच, दोनों नेताओं ने हिरासत बढ़ाने के आदेशों को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। 21 अक्टूबर को हुई सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सवाल उठाया कि जब कानून में अपील और अन्य वैकल्पिक उपाय उपलब्ध हैं, तो याचिकाकर्ताओं ने सीधे संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत अदालत का रुख क्यों किया। इसके बाद दोनों की ओर से याचिका वापस ले ली गई।

अब आगे की प्रक्रिया में SEM यानी स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की भूमिका अहम है। हालांकि, रिहाई का निर्णय संबंधित कानूनी कार्यवाही, हिरासत के आधार और लागू कानून के अनुसार होगा।

क्या होती है SEM कोर्ट?

SEM का पूरा नाम Special Executive Magistrate (स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट) है। आम बोलचाल में इसे SEM कोर्ट कहा जाता है, लेकिन इसकी भूमिका नियमित आपराधिक अदालत से अलग होती है। इसका प्रमुख काम संभावित शांति भंग होने या सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका पर कानून के तहत एहतियाती कार्रवाई करना है। ऐसी कार्यवाही का उद्देश्य किसी व्यक्ति को अपराध का दोषी ठहराना नहीं, बल्कि निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत शांति बनाए रखना होता है। इसी मामले में सौरव दास ने SEM को ‘पुलिस कोर्ट’ कहते हुए इसकी कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे। हालांकि, SEM की कानूनी स्थिति और शक्तियों को समझने के लिए उसके अधिकार क्षेत्र को देखना जरूरी है।

SEM के पास कौन-कौन सी शक्तियां होती हैं?

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 126 से 143 तक शांति बनाए रखने और अच्छे आचरण के लिए सुरक्षा से संबंधित प्रावधान हैं। इन प्रावधानों के तहत संबंधित कार्यकारी मजिस्ट्रेट निर्धारित परिस्थितियों में किसी व्यक्ति से शांति बनाए रखने के लिए बॉन्ड भरने की मांग कर सकता है।
इस प्रक्रिया में संबंधित व्यक्ति को नोटिस देना, उसके पक्ष को सुनना और कानून के अनुसार जांच करना महत्वपूर्ण है। यदि कानूनी शर्तें पूरी होती हैं, तो मजिस्ट्रेट सुरक्षा देने का आदेश कर सकता है। आदेश का पालन नहीं होने पर कानून में आगे की कार्रवाई के प्रावधान भी हैं। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि SEM हर तरह के आपराधिक मामले का ट्रायल कर सकती है। उसकी शक्तियां संबंधित कानून और उसे दिए गए अधिकारों तक सीमित रहती हैं।

थाने में क्यों होती है SEM कोर्ट की सुनवाई?

कुछ जगहों पर कार्यकारी मजिस्ट्रेट का कार्यालय पुलिस स्टेशन या उसके परिसर में स्थित हो सकता है। इसी वजह से लोग इसे संबंधित थाने की SEM कोर्ट कह देते हैं। सौरव दास और आशुतोष रांका के मामले में सुनवाई मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन में स्थित SEM कोर्ट में हुई थी। लेकिन किसी थाने में कार्यालय होने का मतलब यह नहीं है कि वहां बैठने वाला मजिस्ट्रेट केवल उसी थाने से जुड़े हर मामले की सुनवाई करता है। उसका अधिकार क्षेत्र संबंधित प्रशासनिक व्यवस्था और लागू नियमों से तय होता है।

सामान्य अदालत और SEM कोर्ट में क्या अंतर है?

SEM और नियमित आपराधिक अदालत के बीच सबसे बड़ा अंतर उनके काम और अधिकारों का है।

1. काम का उद्देश्य: सामान्य आपराधिक अदालत कानून के अनुसार अपराधों की सुनवाई करती है और साक्ष्यों के आधार पर आरोपी की दोषसिद्धि या बरी होने का फैसला करती है। SEM मुख्य रूप से शांति बनाए रखने के लिए एहतियाती कार्यवाही करती है।

2. कानूनी शक्तियां: नियमित आपराधिक अदालत के पास संबंधित कानून के तहत मुकदमे की सुनवाई और निर्णय देने की शक्तियां होती हैं। SEM की शक्तियां कार्यकारी मजिस्ट्रेट को दिए गए वैधानिक अधिकारों तक सीमित रहती हैं।

3. प्रशासनिक नियंत्रण: न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायिक व्यवस्था का हिस्सा होते हैं और संबंधित उच्च न्यायालय के प्रशासनिक नियंत्रण में काम करते हैं। इसके विपरीत, कार्यकारी मजिस्ट्रेट प्रशासनिक व्यवस्था के अंतर्गत कार्य करते हैं।

4. कार्यवाही का स्वरूप: SEM की कार्यवाही में शांति भंग होने की आशंका और सुरक्षा बॉन्ड जैसे विषय महत्वपूर्ण होते हैं, जबकि नियमित आपराधिक मुकदमे में आरोप, साक्ष्य, गवाह और लागू कानून के अनुसार सुनवाई होती है।

दिल्ली में पुलिस अधिकारियों को भी मिल सकती हैं कार्यकारी मजिस्ट्रेट की शक्तियां

दिल्ली में लागू कानूनी प्रावधानों के तहत कुछ पुलिस अधिकारियों को निर्धारित शर्तों के अनुसार कार्यकारी मजिस्ट्रेट की शक्तियों के इस्तेमाल के लिए अधिकृत किया जा सकता है। हालांकि, ऐसी शक्तियां अपने आप हर पुलिस अधिकारी को नहीं मिल जातीं। इसके लिए संबंधित कानूनी प्रावधान और प्राधिकरण लागू होते हैं। यही वजह है कि SEM की भूमिका को सामान्य न्यायिक अदालत के बराबर मानना सही नहीं होगा। दोनों की जिम्मेदारियां और अधिकार अलग-अलग हैं।

सौरव दास और आशुतोष रांका की रिहाई पर आगे क्या होगा?

दोनों नेताओं की हिरासत की अवधि समाप्त होने के बाद आगे की कार्रवाई इस बात पर निर्भर करेगी कि उनके मामले में किस तरह की कानूनी कार्यवाही लंबित है और संबंधित प्राधिकारी के सामने क्या आदेश या आवेदन रखे जाते हैं। सिर्फ हिरासत की अवधि समाप्त होना अपने आप में हर स्थिति में तत्काल रिहाई की गारंटी नहीं है। वहीं, हिरासत जारी रखने या किसी अन्य तरह की कार्रवाई के लिए भी लागू कानून के अनुसार वैध आधार और प्रक्रिया जरूरी है। इसलिए सौरव दास और आशुतोष रांका की रिहाई को लेकर अंतिम स्थिति संबंधित आदेश और आगे की कानूनी कार्यवाही से ही स्पष्ट होगी।


जम्मू-कश्मीर के उधमपुर में बड़ा सड़क हादसा, बस खाई में फिसली; करीब 10 यात्री घायल

Udhampur Bus Accident: जम्मू-कश्मीर के उधमपुर जिले में बुधवार सुबह एक बस दुर्घटना में करीब 10 यात्री घायल हो गए। हादसा बसंतगढ़-रामनगर मार्ग पर गुल्ली गाला के पास हुआ, जहां पचौंड से रामनगर जा रही बस सड़क से फिसलकर नीचे जा गिरी। घायलों को इलाज के लिए रामनगर के उप-जिला अस्पताल पहुंचाया गया है। घटना के बाद प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य शुरू किया। फिलहाल, किसी की मौत की सूचना नहीं है।

गुल्ली गाला के पास कैसे हुआ हादसा?

प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, बस पचौंड से रामनगर की ओर जा रही थी। इसी दौरान उधमपुर जिले के गुल्ली गाला इलाके में चालक का बस पर से नियंत्रण बिगड़ गया और वाहन सड़क से नीचे उतर गया। हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने यात्रियों को बाहर निकालने में मदद की। घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका उपचार किया जा रहा है। दुर्घटना के कारणों को लेकर विस्तृत जानकारी सामने आना अभी बाकी है।

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने प्रशासन से की बात

उधमपुर में हुए बस हादसे की जानकारी मिलने के बाद केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने जिले के उपायुक्त अनंत द्विवेदी से संपर्क किया। उन्होंने घायलों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने और राहत कार्यों पर ध्यान देने को कहा। जितेंद्र सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया कि उन्होंने हादसे के संबंध में डीसी से बात की है। उनके मुताबिक, स्थानीय लोगों की मदद से यात्रियों को समय रहते बाहर निकाला गया और बचाव दल भी घटनास्थल पर पहुंच गया। उन्होंने यह भी कहा कि घायल यात्रियों को रामनगर के उप-जिला अस्पताल ले जाया जा रहा है। उनका कार्यालय स्थिति पर नजर रखने के लिए प्रशासन के संपर्क में है।

डोडा में भी सड़क दुर्घटना, चार लोग घायल

जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में भी पिछले सप्ताह एक सड़क हादसा सामने आया था। जानकारी के अनुसार, भल्ला इलाके में शेनाई के पास डोडा से भदरवाह जा रही एक मिनी बस दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। इस घटना में कम से कम चार लोग घायल हुए थे। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाई है।

पहाड़ी सड़कों पर हादसों का खतरा क्यों?

जम्मू-कश्मीर के उधमपुर, डोडा, रामबन और किश्तवाड़ जैसे पहाड़ी जिलों में कई सड़क मार्ग चुनौतीपूर्ण भौगोलिक परिस्थितियों से गुजरते हैं। संकरी सड़कें, तीखे मोड़, खड़ी ढलान और खराब मौसम वाहन चालकों के लिए जोखिम बढ़ा सकते हैं। कम दृश्यता और सड़क की खराब स्थिति भी दुर्घटनाओं की वजह बन सकती है। हालांकि, उधमपुर में हुई इस दुर्घटना का वास्तविक कारण जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। फिलहाल, घायलों के उपचार और हादसे से जुड़े आधिकारिक विवरण पर ध्यान केंद्रित है।


दिल्ली हाईकोर्ट में सौरव दास और आशुतोष रांका को मिली राहत, न्यायिक हिरासत के खिलाफ याचिका पर होगी सुनवाई

Delhi High Court: दिल्ली हाईकोर्ट ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) से जुड़े कार्यकर्ता सौरव दास और आशुतोष रांका की याचिका पर बुधवार को तत्काल सुनवाई करने पर सहमति जताई है। दोनों ने अपनी न्यायिक हिरासत बढ़ाने के आदेश को चुनौती दी है। इस मामले की सुनवाई जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद करेंगे। अब हाईकोर्ट के फैसले पर दोनों कार्यकर्ताओं की नजरें टिकी हैं।

न्यायिक हिरासत के आदेश को दी चुनौती

सौरव दास और आशुतोष रांका ने स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) की अदालत के उस आदेश के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया है, जिसमें उनकी न्यायिक हिरासत 21 अक्टूबर तक बढ़ाई गई थी। दोनों कार्यकर्ताओं ने अपनी हिरासत को चुनौती देते हुए तत्काल सुनवाई की मांग की थी।हाईकोर्ट का सुनवाई के लिए तैयार होना फिलहाल उनकी याचिका पर विचार किए जाने का संकेत है। इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि अदालत ने हिरासत के आदेश को रद्द कर दिया है या दोनों को रिहा करने का निर्देश दिया है।

जंतर-मंतर जाने की कोशिश के दौरान हुई थी हिरासत

उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने सौरव दास और आशुतोष रांका को जंतर-मंतर पहुंचने की कोशिश के दौरान हिरासत में लिया था। दोनों पर प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश से संबंधित मामला दर्ज होने की बात कही गई है। शुरुआत में दोनों को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। अवधि समाप्त होने के बाद SEM अदालत ने उनकी हिरासत दो दिन और बढ़ाते हुए 21 अक्टूबर तक रखने का आदेश दिया। इसके बाद दोनों कार्यकर्ताओं ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी।

SEM अदालत ने हिरासत बढ़ाने के पीछे क्या वजह बताई?

स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ऋतु राज की अदालत ने हिरासत बढ़ाने के आदेश में सार्वजनिक शांति और कानून-व्यवस्था से जुड़ी आशंकाओं का उल्लेख किया था। आदेश के अनुसार, जांच अधिकारी ने अदालत के सामने ऐसे साक्ष्य रखे थे, जिनके आधार पर शांति भंग होने की आशंका जताई गई। अदालत ने यह भी कहा था कि दोनों कार्यकर्ताओं ने 11 अक्टूबर को दक्षिण-पश्चिम जिले के SEM के सामने दिए गए मुचलके की शर्तों का कथित रूप से उल्लंघन किया। अदालत ने उनके आचरण को लेकर भी टिप्पणी की थी और प्रतिबंधित क्षेत्रों में प्रदर्शन करने से संबंधित आशंकाएं दर्ज की थीं।

अब हाईकोर्ट में क्या होगा?

दिल्ली हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई के दौरान न्यायिक हिरासत बढ़ाने के आदेश को चुनौती देने वाले पक्ष की दलीलों पर विचार किया जा सकता है। अदालत के सामने यह सवाल होगा कि हिरासत से जुड़े आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर क्या राहत दी जानी चाहिए।

फिलहाल, हाईकोर्ट ने केवल तत्काल सुनवाई के लिए सहमति दी है। हिरासत जारी रहेगी या इसमें कोई बदलाव होगा, यह अदालत की सुनवाई और आगे के आदेश पर निर्भर करेगा।


DDA की आवास योजना को जबरदस्त रिस्पॉन्स, दो घंटे में बुक हुए 2,500 से ज्यादा फ्लैट

नई दिल्ली: दिल्ली में किफायती घर खरीदने की चाह रखने वालों के बीच दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) की आवास निवेश योजना 2026 को शानदार प्रतिक्रिया मिली है। नरेला में कम आय वर्ग (LIG) के लिए पेश किए गए 2,516 फ्लैटों की ऑनलाइन बुकिंग शुरू होने के महज दो घंटे के भीतर 2,500 से अधिक फ्लैट बुक हो गए। इस योजना के तहत खरीदारों को फ्लैटों की कीमत पर 25 फीसदी की छूट दी जा रही है।

डीडीए ने 20 अक्टूबर को दशहरा के अवसर पर दोपहर 12 बजे से बुकिंग की प्रक्रिया शुरू की थी। फ्लैटों का आवंटन ‘पहले आओ, पहले पाओ’ के आधार पर किया जा रहा है। योजना में फ्लैटों की शुरुआती कीमत करीब 14.95 लाख रुपये रखी गई है, जिससे सीमित बजट में घर तलाश रहे लोगों के लिए यह विकल्प आकर्षक बना है।

नरेला में कहां उपलब्ध हैं फ्लैट और क्या है कीमत?

DDA की इस योजना में नरेला के पॉकेट-3 और पॉकेट-6 में कुल 2,516 LIG फ्लैट शामिल किए गए हैं। इनमें पॉकेट-3 में 1,020 और पॉकेट-6 में 1,496 फ्लैट उपलब्ध कराए गए थे।

फ्लैटों की कीमत और उपलब्धता का विवरण इस प्रकार है:

पॉकेट-3: यहां प्रत्येक फ्लैट का आकार 49.90 वर्ग मीटर है। छूट के बाद इसकी संभावित कीमत लगभग 15.01 लाख रुपये बताई गई है।

पॉकेट-6: इस हिस्से में फ्लैटों की संभावित कीमत करीब 14.95 लाख रुपये रखी गई है।

योजना के तहत दी जा रही छूट ने इन फ्लैटों को किफायती आवास के विकल्प के तौर पर चर्चा में ला दिया है। हालांकि, अंतिम कीमत और भुगतान से जुड़ी शर्तों की पुष्टि डीडीए के आधिकारिक दस्तावेजों से करना जरूरी है।

आवासीय क्षेत्र के साथ सुविधाओं पर भी जोर

डीडीए नरेला को केवल आवासीय इलाके तक सीमित रखने के बजाय शिक्षा, संस्थानों और खेल गतिविधियों के केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है। प्राधिकरण के मुताबिक, क्षेत्र में बुनियादी ढांचे और नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने पर ध्यान दिया जा रहा है। कनेक्टिविटी और शहरी सुविधाओं में सुधार से इलाके के विकास को गति मिलने की उम्मीद है। बेहतर बुनियादी ढांचा तैयार होने पर नरेला में आवासीय गतिविधियों के विस्तार को भी बढ़ावा मिल सकता है।

किफायती घरों की मांग का संकेत

डीडीए की योजना को शुरुआती घंटों में मिली प्रतिक्रिया दिल्ली में बजट के भीतर घर खरीदने के विकल्पों की मांग को दर्शाती है। खासकर उन लोगों के लिए यह योजना महत्वपूर्ण हो सकती है जो अपेक्षाकृत कम कीमत पर अपना घर खरीदना चाहते हैं। हालांकि, इच्छुक खरीदारों को बुकिंग से पहले फ्लैट की वास्तविक उपलब्धता, लोकेशन, भुगतान कार्यक्रम, पात्रता और आवंटन की शर्तों की जांच कर लेनी चाहिए। इसके लिए डीडीए की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध योजना संबंधी दस्तावेजों को देखना बेहतर रहेगा।


दिल्ली में दशहरा कार्यक्रम में शामिल होंगे PM मोदी, सुरक्षा के लिए 2,500 जवान तैनात; तीन स्तर का सुरक्षा घेरा

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल्ली में दशहरा और रावण दहन कार्यक्रम में शामिल होंगे। उनके दौरे को देखते हुए सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कार्यक्रम और आसपास के इलाकों में केंद्रीय सशस्त्र बलों तथा दिल्ली पुलिस के करीब 2,500 जवानों की तैनाती की जाएगी। सुरक्षा व्यवस्था में SWAT कमांडो भी शामिल होंगे। कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री की सुरक्षा के लिए तीन स्तरों वाला सुरक्षा घेरा बनाया जाएगा। इसका उद्देश्य कार्यक्रम स्थल पर सुरक्षा बनाए रखना, संभावित खतरों से निपटना और लोगों की आवाजाही को व्यवस्थित करना है।

तीन स्तरों में होगी प्रधानमंत्री की सुरक्षा

रिपोर्ट के मुताबिक, सुरक्षा व्यवस्था के सबसे अंदरूनी घेरे की जिम्मेदारी स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (SPG) के पास होगी। दूसरे घेरे में दिल्ली पुलिस की प्रधानमंत्री सुरक्षा विंग के जवान और कमांडो तैनात रहेंगे, जबकि बाहरी सुरक्षा घेरे की जिम्मेदारी स्थानीय पुलिस संभालेगी। सुरक्षा एजेंसियों की ओर से कार्यक्रम स्थल पर एंटी-सबोटेज जांच भी की गई है। इसके तहत किसी भी संदिग्ध वस्तु की पहचान करने के लिए परिसर की जांच की जाती है।

10 हजार लोगों के पहुंचने की उम्मीद

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, रावण दहन कार्यक्रम में करीब 10,000 लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। रिपोर्ट में बताया गया है कि प्रधानमंत्री के शाम करीब 6:30 बजे कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने का कार्यक्रम है। कार्यक्रम में प्रवेश के लिए आयोजकों की ओर से जारी वैध पास जरूरी होंगे। प्रवेश द्वारों पर लोगों की तलाशी ली जाएगी। सुरक्षा जांच के लिए डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर, हैंड-हेल्ड मेटल डिटेक्टर और बैगेज स्कैनर का इस्तेमाल किया जाएगा।

ड्रोन से निगरानी, ऊंची इमारतों पर भी सुरक्षा

दिल्ली पुलिस के अधिकारियों के मुताबिक, पूर्वी दिल्ली के आईपी एक्सटेंशन मैदान और अन्य दशहरा स्थलों पर सुरक्षा तथा यातायात के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। कार्यक्रम स्थल पर सुरक्षाकर्मियों की तैनाती के साथ ड्रोन के जरिए हवाई निगरानी भी की जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रधानमंत्री के काफिले के निर्धारित मार्ग और कार्यक्रम स्थल के आसपास की ऊंची इमारतों की जांच कर उन्हें सुरक्षित किया गया है। संभावित सुरक्षा जोखिमों को देखते हुए रणनीतिक स्थानों पर विशेष टीमें भी तैनात की गई हैं।
ट्रैफिक व्यवस्था पर भी रहेगा ध्यान

दशहरा कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने यातायात प्रबंधन की भी तैयारी की है। कार्यक्रम स्थल के आसपास वाहनों की आवाजाही और लोगों के प्रवेश को व्यवस्थित रखने के लिए सुरक्षा एजेंसियां समन्वय के साथ काम करेंगी। प्रधानमंत्री के कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा जांच, प्रवेश पास और यातायात संबंधी निर्देशों का पालन करना जरूरी होगा। लोगों को सलाह दी जाती है कि कार्यक्रम स्थल पर जाने से पहले आयोजकों और दिल्ली पुलिस की ओर से जारी आधिकारिक दिशा-निर्देशों की जानकारी ले लें।


मोहन भागवत का बड़ा बयान: ‘भारत में बांग्लादेश-फ्रांस जैसे हालात बनाने की कोशिश’, सत्ता परिवर्तन को लेकर कही ये बात

नागपुर: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने विजयादशमी उत्सव के दौरान अपने संबोधन में भारत की एकता, सामाजिक आंदोलनों, विकास और तकनीक के इस्तेमाल जैसे मुद्दों पर बात की। उन्होंने दावा किया कि दुनिया में ऐसी शक्तियां हैं, जो भारत को दबाना चाहती हैं। भागवत के मुताबिक, इन शक्तियों का उद्देश्य केवल सत्ता परिवर्तन के जरिए हालात सुधारना नहीं, बल्कि अपनी पसंद के लोगों को सत्ता में बैठाना है। भागवत ने यह भी कहा कि भारत में बांग्लादेश और फ्रांस जैसे हालात बनाने की कोशिश हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग भारत और हिंदू समाज को बांटना चाहते हैं और उन्हें कुछ नेताओं का समर्थन भी मिलता है।
RSS प्रमुख नागपुर स्थित संघ मुख्यालय में आयोजित विजयादशमी कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने शस्त्र पूजन भी किया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना 1925 में विजयादशमी के दिन हुई थी और संघ हर साल इस अवसर पर अपना स्थापना दिवस मनाता है।

आंदोलनों का उद्देश्य समाधान होना चाहिए

मोहन भागवत ने कहा कि समाज में समस्याओं के कारण आंदोलन होते हैं, लेकिन उनका मकसद समाधान निकालना होना चाहिए। आंदोलनों के जरिए समाज में द्वेष और विभाजन पैदा करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि कई बार आंदोलनों का इस्तेमाल दूसरे उद्देश्यों के लिए किया जाता है और वे राजनीति का माध्यम बन जाते हैं। भागवत के मुताबिक, देश की समस्याओं का समाधान केवल नेताओं के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। समाज की सक्रिय भागीदारी भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

एकता बनाए रखने से मजबूत रहेगा देश

RSS प्रमुख ने कहा कि दुनिया में ऐसी शक्तियां मौजूद हैं, जो भारत को दबाना चाहती हैं। ऐसे में लोगों को उनके प्रभाव में आकर उत्तेजित होने से बचना चाहिए और आपसी एकता बनाए रखनी चाहिए। उन्होंने बंगाल विभाजन का उल्लेख करते हुए लॉर्ड कर्जन की नीतियों का जिक्र किया। भागवत ने कहा कि बंगाल का विभाजन बाद में वापस लेना पड़ा, लेकिन 1947 में देश का विभाजन नहीं रोका जा सका। उनके मुताबिक, समाज में अलगाव की भावना बढ़ना इसके प्रमुख कारणों में से एक था।

सबको साथ लेकर चलने की जरूरत

भागवत ने कहा कि भारत के लोगों के पूर्वज एक हैं और देश की सांस्कृतिक परंपराओं में भी समानता के सूत्र मौजूद हैं। उन्होंने अलग-अलग पहचान रखने वाले लोगों को साथ लेकर चलने पर जोर दिया। उनके मुताबिक, किसी की अलग पहचान मिटाए बिना समाज में एकता स्थापित की जानी चाहिए। भागवत ने यह भी कहा कि भारतीय परंपराओं और विचारों में दुनिया की समस्याओं का समाधान देने की क्षमता है।

विकास के साथ पर्यावरण की सुरक्षा भी जरूरी

विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन की जरूरत पर जोर देते हुए भागवत ने कहा कि तकनीक को बढ़ावा देना आवश्यक है, लेकिन इसके कारण प्रकृति को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए। उन्होंने नेपाल में आई बाढ़ का उदाहरण देते हुए विकास की ऐसी नीति अपनाने की बात कही, जिसमें अर्थव्यवस्था के साथ पर्यावरण और नैतिक मूल्यों का भी ध्यान रखा जाए।

OTT पर नियम और AI के जिम्मेदार इस्तेमाल पर जोर

मोहन भागवत ने डिजिटल माध्यमों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि आज लोगों तक हर तरह की जानकारी पहुंच रही है, लेकिन सही और गलत की पहचान किए बिना उसका इस्तेमाल नुकसानदेह हो सकता है। उन्होंने OTT प्लेटफॉर्म के लिए नियमों की जरूरत बताई और कहा कि सरकार तथा प्रशासन को इस दिशा में ध्यान देना चाहिए। साथ ही, AI का जिम्मेदारी के साथ इस्तेमाल करने पर जोर दिया।

विजयादशमी कार्यक्रम में कई प्रमुख हस्तियां रहीं मौजूद

नागपुर में आयोजित RSS के विजयादशमी उत्सव में पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और उनकी पत्नी डॉ. सुदेश धनखड़, इजराइल के काउंसल जनरल यानिव रेवाच, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी समेत कई प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं। भागवत का यह संबोधन ऐसे समय में सामने आया है, जब देश में सामाजिक एकता, राजनीतिक प्रतिस्पर्धा, डिजिटल सामग्री और तकनीक के प्रभाव को लेकर लगातार बहस हो रही है। उनके बयान में इन मुद्दों के साथ-साथ राष्ट्रीय एकता और विकास के बीच संतुलन बनाने का संदेश भी प्रमुखता से सामने आया। 


जितेंद्र आव्हाड को फोन पर जान से मारने की धमकी, बोले- ‘घर के बाहर खड़ा हूं, ठोक दूंगा’

महाराष्ट्र में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के विधायक जितेंद्र आव्हाड को कथित तौर पर जान से मारने की धमकी मिली है। जानकारी के अनुसार, रविवार शाम करीब 4:30 बजे एक अज्ञात व्यक्ति ने उन्हें फोन किया। कॉल के दौरान आरोपी ने कथित तौर पर कहा, “मैं घर के बाहर खड़ा हूं, तुम्हें ठोक दूंगा।”

धमकी भरा फोन आने के बाद आव्हाड ने पुलिस को इसकी जानकारी दी। फिलहाल, कॉल करने वाले व्यक्ति की पहचान और धमकी देने के पीछे की वजह स्पष्ट नहीं हुई है। मामले में पुलिस की जांच से जुड़े आधिकारिक विवरण सामने आने का इंतजार है।

कौन हैं जितेंद्र आव्हाड?

डॉ. जितेंद्र आव्हाड महाराष्ट्र की राजनीति का जाना-पहचाना नाम हैं। वह शरद पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) से जुड़े हैं और ठाणे जिले की मुंब्रा-कलवा विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्हें शरद पवार के करीबी नेताओं में गिना जाता है। आव्हाड ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत युवा राजनीति से की थी। वर्ष 1999 में शरद पवार द्वारा राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के गठन के बाद वह पार्टी से जुड़े। इसके बाद उन्होंने संगठन में कई जिम्मेदारियां संभालीं और महाराष्ट्र की राजनीति में अपनी पहचान बनाई। वर्ष 2002 में वह पहली बार महाराष्ट्र विधान परिषद के सदस्य बने। बाद में 2008 में उन्हें विधान परिषद में दोबारा चुना गया। वर्ष 2009 में उन्होंने मुंब्रा-कलवा विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीतकर विधानसभा की राजनीति में प्रवेश किया।

सरकार में भी संभाल चुके हैं अहम जिम्मेदारियां

जितेंद्र आव्हाड महाराष्ट्र की अलग-अलग सरकारों में मंत्री पद पर रह चुके हैं। वर्ष 2014 में वह तत्कालीन पृथ्वीराज चव्हाण सरकार में मंत्री बने। उनके राजनीतिक सफर में चिकित्सा शिक्षा और आवास जैसे विभागों की जिम्मेदारियां शामिल रही हैं। वर्ष 2019 में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महा विकास आघाड़ी सरकार में उन्हें आवास मंत्री बनाया गया। मार्च 2022 में महाराष्ट्र सरकार में मंत्रिमंडल फेरबदल के दौरान उन्हें अल्पसंख्यक विकास और औकाफ विभाग की जिम्मेदारी भी मिली। वर्ष 2023 में NCP में विभाजन के बाद आव्हाड शरद पवार के खेमे में रहे। इस दौरान उन्हें महाराष्ट्र विधानसभा में विपक्ष के नेता की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

धमकी के पीछे क्या है वजह?

फिलहाल, इस धमकी के पीछे किसी राजनीतिक विवाद या अन्य कारण की पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि फोन करने वाला व्यक्ति कौन था और उसने किस वजह से विधायक को धमकी दी। किसी जनप्रतिनिधि को धमकी मिलना सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला है। जांच के जरिए आरोपी की पहचान और घटना की वास्तविक परिस्थितियों का सामने आना जरूरी है।


हरियाणा में जम्मू-कश्मीर जा रही बस पर पथराव, ड्राइवर से मारपीट का आरोप

हरियाणा के करनाल जिले के नीलोखेड़ी में जम्मू-कश्मीर जा रही एक स्लीपर बस पर पथराव और उसके चालक के साथ मारपीट का मामला सामने आया है। बस चालक का आरोप है कि उसे जम्मू-कश्मीर नंबर की गाड़ी चलाने के कारण आतंकवादी कहकर अपमानित किया गया। घटना में बस के शीशे टूटने के साथ एक यात्री और ढाबे के कर्मचारी के घायल होने की भी जानकारी सामने आई है।

ढाबे पर बस रोकने के बाद बढ़ा विवाद

जानकारी के मुताबिक, 17 अक्टूबर की रात दिल्ली से श्रीनगर जा रही बस खाने के लिए एक ढाबे पर रुकी थी। बस चालक वकार चौधरी के अनुसार, कुछ लोगों ने पहले बस हटाने को कहा। इसके बाद कहासुनी बढ़ गई और कथित तौर पर उन्हें आतंकवादी कहा गया। चालक का आरोप है कि विवाद के दौरान कुछ लोगों ने बस पर पथराव किया, शीशे तोड़े और उनके साथ मारपीट की। हालांकि, घटना के पीछे की पूरी वजह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

उमर अब्दुल्ला ने उठाया मामला, दो गिरफ्तार

इस घटना को लेकर जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने हरियाणा सरकार के सामने मामला उठाया। वहीं, पुलिस ने इस प्रकरण में दो लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस की शुरुआती जांच के अनुसार, विवाद की शुरुआत पार्किंग को लेकर हुई कहासुनी से हुई थी। अब जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि विवाद किस तरह बढ़ा और घटना में शामिल लोगों की क्या भूमिका थी।

सवाल सिर्फ एक बस का नहीं, सोच का भी है। किसी वाहन की नंबर प्लेट देखकर उसके चालक की पहचान या उसके चरित्र के बारे में फैसला करना कितना उचित है? अगर पार्किंग को लेकर विवाद हुआ था, तो उसका समाधान कानून और बातचीत के जरिए होना चाहिए था, न कि कथित मारपीट और तोड़फोड़ से। भारत की विविधता उसकी ताकत है। किसी व्यक्ति को उसके क्षेत्र, भाषा या गाड़ी के नंबर के आधार पर संदेह की नजर से देखना सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंचा सकता है। किसी भी विवाद में दोष तय करने का काम कानून का है, न कि भीड़ के फैसले का।


टाइगर श्रॉफ पर फायरिंग: CM फडणवीस का सख्त संदेश, बोले- हमलावरों के आकाओं को भी ढूंढ निकालेंगे

मुंबई: अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर हुई फायरिंग की घटना को महाराष्ट्र सरकार ने गंभीरता से लिया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोमवार को कहा कि हमले में शामिल लोगों के साथ-साथ उनके पीछे बैठे लोगों तक भी पुलिस पहुंचेगी। उन्होंने दावा किया कि मुंबई पुलिस को जांच के दौरान अहम सुराग मिले हैं और कुछ संदिग्धों की पहचान भी की गई है। मुख्यमंत्री के मुताबिक, इस मामले में शामिल अपराधियों के कुछ मददगार महाराष्ट्र के बाहर और विदेश से भी काम कर रहे हो सकते हैं। ऐसे लोगों तक पहुंचने के लिए दूसरे राज्यों की पुलिस और केंद्र सरकार की मदद ली जाएगी। फडणवीस ने भरोसा जताया कि आरोपियों को जल्द गिरफ्तार कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

टाइगर श्रॉफ से फोन पर की बात

फडणवीस ने बताया कि घटना के बाद उन्होंने टाइगर श्रॉफ से फोन पर बातचीत कर उनका हाल जाना था। मुख्यमंत्री ने अभिनेता को भरोसा दिलाया कि सरकार उनके साथ है और मामले में दोषियों को पकड़ने के लिए हर जरूरी कदम उठाए जाएंगे। मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री ने फायरिंग की घटना को गंभीर और निंदनीय बताया। उन्होंने कहा कि मुंबई पुलिस मामले की जांच में जुटी है और अब तक मिले सुरागों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

महाराष्ट्र के बाहर छिपे लोगों पर भी नजर

मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस उन लोगों तक भी पहुंचने की कोशिश कर रही है, जो कथित तौर पर हमलावरों को निर्देश देते हैं। उनके अनुसार, महाराष्ट्र के भीतर से काम करने वाले कुछ आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि बाकी लोगों की तलाश जारी है। फडणवीस ने कहा कि दूसरे राज्यों में मौजूद संदिग्धों के बारे में संबंधित एजेंसियों से संपर्क किया जाएगा। विदेश से गतिविधियां संचालित करने वालों को पकड़ने के लिए केंद्र सरकार की सहायता ली जाएगी। उन्होंने कहा कि अपराधियों की कोशिशों को सफल नहीं होने दिया जाएगा।

विपक्ष के आरोपों पर मुख्यमंत्री का जवाब

इस घटना को लेकर विपक्ष की ओर से उठाए गए सवालों पर भी फडणवीस ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने विपक्ष पर सरकार को निशाना बनाने का आरोप लगाया और पिछली सरकार के कार्यकाल में हुई कुछ आपराधिक घटनाओं का जिक्र किया। मुख्यमंत्री ने मनसुख हिरेन हत्याकांड और उद्योगपति मुकेश अंबानी के आवास के पास विस्फोटक मिलने की घटना का हवाला देते हुए पिछली सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने पुलिस व्यवस्था और तबादलों से जुड़े मामलों को लेकर भी विपक्ष की आलोचना की। फडणवीस ने कहा कि मुंबई पुलिस पर आम लोगों और फिल्म जगत का भरोसा है। उन्होंने दोहराया कि टाइगर श्रॉफ को सुरक्षा और कार्रवाई को लेकर आश्वस्त किया गया है।

क्या है पूरा मामला?

दी गई जानकारी के मुताबिक, रविवार रात फुटबॉल खेलकर लौट रहे टाइगर श्रॉफ पर दो अज्ञात हमलावरों ने पांच राउंड फायरिंग की। घटना में अभिनेता के ड्राइवर को गोली लगने की बात कही गई है, जबकि टाइगर श्रॉफ के घायल होने का भी दावा किया गया है। इस हमले की जिम्मेदारी लॉरेंस बिश्नोई गिरोह ने लेने का दावा किया है। हालांकि, जिम्मेदारी लेने के दावे और हमले में शामिल लोगों की भूमिका की पुष्टि जांच के निष्कर्षों से होनी बाकी है।

फिलहाल पुलिस की जांच हमलावरों की पहचान, घटना के पीछे की वजह और कथित साजिश में शामिल लोगों तक पहुंचने पर केंद्रित है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि मामले में किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा।


NLSIU पहुंचे CJI सूर्यकांत, बोले- कानूनी पेशे में न्याय के लिए खड़े होने का साहस जरूरी

बेंगलुरु: भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने शनिवार को बेंगलुरु स्थित नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (NLSIU) के दीक्षांत समारोह में कानून की पढ़ाई पूरी करने वाले छात्रों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि एक सफल कानूनी पेशेवर बनने के लिए कानून की जानकारी के साथ ईमानदारी, साहस और दूसरों के विचारों को सुनने की क्षमता भी जरूरी है। इस दौरान उन्होंने कार्यक्रम से पहले पैदा हुई अनिश्चितता का भी जिक्र किया।

कार्यक्रम से पहले पैदा हुई थी अनिश्चितता

CJI सूर्यकांत ने अपने संबोधन में बताया कि दीक्षांत समारोह से पहले कुछ अप्रत्याशित परिस्थितियों के कारण कार्यक्रम के आयोजन को लेकर असमंजस की स्थिति बन गई थी। उन्होंने इन परिस्थितियों के पीछे बाहरी ताकतों का जिक्र किया और कहा कि एक समय ऐसा लग रहा था कि समारोह अपेक्षा के अनुरूप आयोजित नहीं हो पाएगा। हालांकि, उनके मुताबिक छात्रों ने इन चुनौतियों के बावजूद अपने संकल्प को बनाए रखा। उन्होंने खुले संवाद और विचारों की अभिव्यक्ति के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि मुश्किल परिस्थितियों में भी संवाद की भावना को कमजोर नहीं पड़ने देना चाहिए।

कानून की जानकारी के साथ साहस भी जरूरी

कानून के छात्रों को भविष्य की जिम्मेदारियों के प्रति आगाह करते हुए मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि कानूनी पेशे में केवल कानून की धाराओं और पुराने अदालती फैसलों का ज्ञान पर्याप्त नहीं है। न्याय के पक्ष में खड़े होने का साहस और उन लोगों की बात सुनने की संवेदनशीलता भी जरूरी है, जिनकी आवाज अक्सर अनसुनी रह जाती है। उन्होंने छात्रों को समझाया कि कानून की पढ़ाई का उद्देश्य सिर्फ कानूनी प्रावधानों को समझना नहीं, बल्कि समाज के अलग-अलग वर्गों के अनुभवों और नजरियों को जानना भी है।

सुविधा के लिए सिद्धांतों से न करें समझौता

CJI सूर्यकांत ने छात्रों को सलाह दी कि अपने पेशेवर जीवन में आसान रास्ता चुनने के लिए नैतिक मूल्यों से समझौता न करें। उन्होंने ईमानदारी को पेशेवर प्रतिष्ठा की बुनियाद बताते हुए कहा कि छात्रों को अपने संस्थान में सीखे गए आदर्शों को जीवनभर याद रखना चाहिए। उनके संदेश का मुख्य जोर इस बात पर रहा कि करियर में सफलता हासिल करने के साथ-साथ अपने सिद्धांतों और जिम्मेदारियों के प्रति प्रतिबद्ध रहना भी जरूरी है।

न्याय और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा की जिम्मेदारी

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि कानूनी पेशे से जुड़े लोगों को अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने, व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा करने और संविधान के मूल्यों को मजबूत बनाने की दिशा में काम करना चाहिए। उन्होंने छात्रों को याद दिलाया कि देश उनसे केवल वकील या कानूनी विशेषज्ञ बनने की उम्मीद नहीं करता, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने की अपेक्षा भी रखता है।

CJI सूर्यकांत के मुताबिक, कानून की शिक्षा पूरी करने के बाद छात्रों की असली परीक्षा उनके पेशेवर जीवन में होगी, जहां उनके फैसले, आचरण और ईमानदारी उनकी पहचान बनाएंगे।


सौरभ राजपूत हत्याकांड: फांसी की सजा के खिलाफ अपील करेगी मुस्कान, सरकारी वकील की तलाश शुरू

मेरठ के चर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड में मौत की सजा सुनाए जाने के बाद मुस्कान अब अदालत के फैसले को चुनौती देने की तैयारी में है। जेल से ही उसने अपील करने की बात कही है। इसके लिए जेल प्रशासन ने कानूनी सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सरकारी वकील के जरिए आगे बढ़ेगी कानूनी लड़ाई वरिष्ठ जेल अधीक्षक वीरेश राज शर्मा के मुताबिक, मुस्कान ने अभी तक अपने परिजनों को कोई पत्र नहीं लिखा है। हालांकि, अदालत के फैसले के खिलाफ अपील करने के लिए उसे कानूनी मदद दिलाने की पहल की गई है। जेल प्रशासन ने स्टेट लीगल सर्विस अथॉरिटी को पत्र लिखकर सरकारी वकील उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है। अब वकील की नियुक्ति के बाद अपील दाखिल करने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी। रविता और अमरदीप के मामले पर भी नजर दूसरी ओर, पति की हत्या के मामले में चर्चा में आए रविता और उसके प्रेमी अमरदीप को लेकर भी खबरें सामने आ रही हैं। आरोप है कि रविता ने अपने पति की हत्या के लिए सांप से डसवाने की साजिश रची थी। इस मामले में दोनों की कानूनी स्थिति और आगे की कार्रवाई पर भी नजर बनी हुई है। फिलहाल, सौरभ राजपूत हत्याकांड में मुस्कान की अपील की तैयारी अगला अहम घटनाक्रम है। अब देखना होगा कि कानूनी सहायता मिलने के बाद वह कब अदालत का रुख करती है।


ओडिशा के छात्रसंघ चुनावों में ABVP का दबदबा, अमित शाह ने दी बधाई

भुवनेश्वर: ओडिशा के विश्वविद्यालयों में हुए छात्रसंघ चुनावों में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) को मिली सफलता पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संगठन के कार्यकर्ताओं को बधाई दी है। उन्होंने इस परिणाम को युवाओं की विचारधारा से जुड़ा संदेश बताते हुए कहा कि छात्र ‘राष्ट्र प्रथम’ की सोच के साथ खड़े हैं।अमित शाह ने शनिवार सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट साझा कर एबीवीपी की जीत पर खुशी जताई। उन्होंने पंजाब विश्वविद्यालय और दिल्ली विश्वविद्यालय में संगठन के प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए ओडिशा के विश्वविद्यालयों में मिली सफलता को भी रेखांकित किया।

अमित शाह ने क्या कहा?

गृह मंत्री ने अपने संदेश में कहा कि पंजाब विश्वविद्यालय और दिल्ली विश्वविद्यालय के बाद ओडिशा के 13 विश्वविद्यालयों में एबीवीपी को मिली जीत युवाओं के रुझान को दर्शाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि युवा झूठ, भ्रम और अराजकता फैलाने वाली ताकतों के बजाय राष्ट्र प्रथम की विचारधारा का समर्थन कर रहे हैं। शाह ने इस परिणाम को उन ताकतों के लिए युवाओं का जवाब बताया, जिन्हें उन्होंने देशविरोधी विचारधारा से जुड़ा हुआ बताया। उनका बयान ओडिशा के छात्रसंघ चुनावों में एबीवीपी के प्रदर्शन के बाद सामने आया।

13 विश्वविद्यालयों में अध्यक्ष और महासचिव के पदों पर जीत

ओडिशा के छात्रसंघ चुनावों में एबीवीपी ने कई महत्वपूर्ण पदों पर सफलता हासिल की। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, संगठन ने 13 विश्वविद्यालयों में अध्यक्ष पद की आठ और महासचिव पद की 11 सीटें जीतीं। इसके अलावा, छह विश्वविद्यालयों में सभी प्रमुख पदों पर जीत दर्ज करने का दावा किया गया है। चुनावी नतीजों के बाद एबीवीपी ने भी सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया दी। संगठन ने कहा कि ओडिशा के छात्रों ने अपने जनादेश के माध्यम से छात्र नेतृत्व और सेवा के प्रति उसकी प्रतिबद्धता पर भरोसा जताया है।

332 उच्च शिक्षण संस्थानों में हुआ मतदान

ओडिशा के उच्च शिक्षा विभाग के अनुसार, गुरुवार को राज्य के 332 उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रसंघ चुनाव के लिए मतदान कराया गया। इनमें लगभग 320 कॉलेज और 13 विश्वविद्यालय शामिल थे। मतदान सुबह आठ बजे शुरू हुआ और दोपहर दो बजे तक चला।
इन चुनावों में कुल 6,696 उम्मीदवारों ने अपनी किस्मत आजमाई। इनमें कॉलेजों से 6,358 और विश्वविद्यालयों से 338 प्रत्याशी शामिल थे। इस तरह राज्य के विभिन्न उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्र प्रतिनिधियों के चयन के लिए व्यापक स्तर पर चुनावी प्रक्रिया आयोजित की गई।

कुछ घटनाओं को छोड़कर मतदान शांतिपूर्ण

उच्च शिक्षा विभाग की जानकारी के मुताबिक, राज्य के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में मतदान की प्रक्रिया अधिकांश स्थानों पर शांतिपूर्ण रही। हालांकि, कुछ जगहों से मामूली हिंसा की घटनाएं सामने आने की जानकारी भी दी गई। छात्रसंघ चुनावों के नतीजों के बाद ओडिशा में विश्वविद्यालय स्तर की राजनीति और छात्र संगठनों की भूमिका एक बार फिर चर्चा में आ गई है। एबीवीपी की ओर से मिली सफलता पर अमित शाह की प्रतिक्रिया ने भी इन चुनावों को राजनीतिक दृष्टि से चर्चा का विषय बना दिया है।


दिल्ली में राजनीतिक प्रदर्शनों पर रोक लगाने की मांग, व्यापारियों ने PM मोदी को लिखा पत्र; 31 जनवरी 2027 तक राहत की अपील

 दिल्ली: राजधानी दिल्ली के व्यापारिक संगठनों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आगामी त्योहारी और विवाह सीजन को ध्यान में रखते हुए 31 जनवरी 2027 तक राजनीतिक प्रदर्शनों को स्थगित कराने के लिए हस्तक्षेप करने की अपील की है। व्यापारियों ने इस संबंध में प्रधानमंत्री को पत्र भेजकर कहा है कि विरोध-प्रदर्शनों के कारण लगने वाले जाम, यातायात प्रतिबंध और रास्तों में रुकावटों से बाजारों का कारोबार प्रभावित होता है। इसका असर व्यापारियों के साथ-साथ ग्राहकों, श्रमिकों और आम नागरिकों पर भी पड़ता है।

त्योहारों और शादी के सीजन में कारोबार को लेकर चिंता

व्यापारिक प्रतिनिधियों ने अपने पत्र में बताया कि दिल्ली देश के प्रमुख व्यापारिक केंद्रों में से एक है। दिल्ली-एनसीआर और आसपास के कई शहरों से बड़ी संख्या में लोग खरीदारी और अन्य व्यावसायिक कार्यों के लिए राजधानी पहुंचते हैं। नवरात्र, दीपावली, गुरुपर्व, क्रिसमस और विवाह समारोहों के दौरान बाजारों में खरीदारी बढ़ जाती है। ऐसे में व्यापारियों के अनुसार, बाजारों तक आसान पहुंच और परिवहन व्यवस्था का सुचारू रहना बेहद जरूरी है। इन दिनों कारोबार प्रभावित होने से दुकानदारों के साथ-साथ कर्मचारियों, माल ढुलाई से जुड़े लोगों और अन्य कामगारों की आय पर भी असर पड़ सकता है।

रास्ते बंद होने से माल की आपूर्ति में बाधा

व्यापारी संगठनों ने चिंता जताई कि राजनीतिक प्रदर्शनों के दौरान यातायात व्यवस्था में बदलाव और सड़कों पर अवरोध पैदा होने से बाजारों तक सामान पहुंचाना मुश्किल हो जाता है। इससे माल की आपूर्ति प्रभावित होने के साथ व्यापारिक गतिविधियों में भी रुकावट आती है। व्यापारियों का कहना है कि कारोबार में गिरावट के बावजूद दुकानदारों को कर्मचारियों का वेतन, दुकान का किराया और दूसरे नियमित खर्च पूरे करने पड़ते हैं। ऐसी परिस्थितियों में छोटे कारोबारियों पर आर्थिक दबाव बढ़ सकता है। इसका असर दिहाड़ी मजदूरों और उन लोगों पर भी पड़ता है, जिनकी रोजी-रोटी बाजारों की गतिविधियों पर निर्भर है।

ट्रैफिक जाम और मेट्रो सेवाओं में व्यवधान से ग्राहक परेशान

पत्र में यह मुद्दा भी उठाया गया कि प्रदर्शनों के दौरान सड़कों पर जाम, मार्ग परिवर्तन और मेट्रो स्टेशनों को बंद किए जाने जैसी परिस्थितियां आम लोगों के लिए मुश्किलें पैदा कर सकती हैं। व्यापारियों के मुताबिक, जब ग्राहकों को बाजार तक पहुंचने में अधिक समय लगता है या परिवहन संबंधी दिक्कतें आती हैं, तो कई लोग खरीदारी के लिए आने से बचते हैं। इससे दुकानों की बिक्री प्रभावित होती है। इन समस्याओं का असर केवल दिल्ली के निवासियों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि दूसरे शहरों से आने वाले खरीदारों को भी परेशानी होती है।

दिल्ली-एनसीआर के कारोबार पर भी पड़ सकता है प्रभाव

व्यापारिक संगठनों ने सोनीपत, पानीपत, गुरुग्राम, फरीदाबाद, नोएडा और गाजियाबाद जैसे शहरों का जिक्र करते हुए कहा कि इन क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग दिल्ली के बाजारों में खरीदारी करने आते हैं। यदि प्रमुख मार्गों पर यातायात बाधित होता है, तो ग्राहकों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है। इससे बाजारों में खरीदारों की संख्या घटने और कारोबार में नुकसान की आशंका रहती है। व्यापारियों के अनुसार, ऐसे व्यवधानों का प्रभाव दुकानदारों से लेकर परिवहन और अन्य संबंधित क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों तक पहुंचता है।

31 जनवरी 2027 तक प्रदर्शन स्थगित करने की अपील

व्यापारी संगठनों ने प्रधानमंत्री से अनुरोध किया है कि व्यापारिक गतिविधियों, जनसुविधाओं और लाखों परिवारों की आजीविका को ध्यान में रखते हुए संबंधित पक्षों के साथ बातचीत की जाए। उनकी मांग है कि 31 जनवरी 2027 तक राजनीतिक प्रदर्शनों को स्थगित कराने के लिए आवश्यक पहल की जाए, ताकि महत्वपूर्ण कारोबारी अवधि में बाजार सामान्य रूप से संचालित हो सकें। व्यापारिक प्रतिनिधियों का मानना है कि संवाद और समन्वय के माध्यम से इस समस्या का व्यावहारिक समाधान निकाला जा सकता है।

प्रदर्शन के अधिकार और आम जनता की सुविधा में संतुलन जरूरी

व्यापारी प्रतिनिधियों ने अपने पत्र में लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध-प्रदर्शन के अधिकार के महत्व को भी स्वीकार किया। हालांकि, उन्होंने कहा कि इस अधिकार के इस्तेमाल के दौरान आम नागरिकों की सुविधाओं और आर्थिक गतिविधियों पर पड़ने वाले प्रभावों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, ऐसी व्यवस्था विकसित करने की जरूरत है, जिससे लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति का अधिकार बना रहे और साथ ही यातायात, सार्वजनिक सुविधाओं तथा बाजारों के संचालन में होने वाली परेशानियों को कम किया जा सके।

व्यापारिक प्रतिनिधियों ने पत्र पर किए हस्ताक्षर

प्रधानमंत्री को भेजे गए पत्र पर व्यापारी संगठनों की ओर से महामंत्री राकेश यादव, प्रदीप गुप्ता और हेमंत गुप्ता ने हस्ताक्षर किए हैं।
व्यापारिक प्रतिनिधियों ने उम्मीद जताई है कि सरकार उनकी मांग पर विचार करेगी और संबंधित पक्षों के साथ समन्वय स्थापित कर कोई व्यावहारिक रास्ता निकालेगी। उनका कहना है कि बाजारों में सामान्य गतिविधियां बनाए रखना व्यापारियों के साथ-साथ ग्राहकों, कर्मचारियों और राजधानी की अर्थव्यवस्था से जुड़े अन्य वर्गों के हित में भी महत्वपूर्ण है।


जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे व्यापारी, LG से भी की शिकायत; कारोबार प्रभावित होने का दावा

नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शनों को लेकर दिल्ली के व्यापारियों ने विरोध जताया है। कनॉट प्लेस, पालिका बाजार, जनपथ और खान मार्केट के व्यापारी संगठनों ने दिल्ली के उपराज्यपाल को संयुक्त पत्र लिखकर जंतर-मंतर को नियमित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने की मांग की है। वहीं, खान मार्केट एसोसिएशन और दिल्ली किराना कमेटी ने भी प्रदर्शन से जुड़े मुद्दों को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। व्यापारी संगठनों का कहना है कि प्रदर्शनों के दौरान बैरिकेडिंग, सड़कें बंद होने और ट्रैफिक का रास्ता बदलने से बाजारों तक ग्राहकों की पहुंच प्रभावित होती है। इससे दुकानों, होटलों और रेस्टोरेंट के कारोबार पर असर पड़ता है। व्यापारियों ने प्रदर्शन के लिए किसी बड़े और खुले मैदान को विकल्प के तौर पर इस्तेमाल करने का सुझाव दिया है।

प्रदर्शन से कारोबार प्रभावित होने का दावा

व्यापारियों ने उपराज्यपाल को लिखे पत्र में कहा है कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान आसपास के इलाकों में आवाजाही मुश्किल हो जाती है। इसका असर ग्राहकों के साथ-साथ दुकानदारों, कर्मचारियों और सामान की डिलीवरी करने वालों पर भी पड़ता है। पत्र में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी चिंता जताई गई है। व्यापारियों के मुताबिक, भीड़ के बीच भगदड़, आग लगने या किसी दूसरी आपात स्थिति में लोगों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। ऐसी स्थिति में एंबुलेंस और दमकल की गाड़ियों को मौके तक पहुंचने में भी परेशानी हो सकती है। व्यापारी संगठनों ने जुलाई 2026 में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन और 10 अक्टूबर 2026 को हुए विरोध प्रदर्शनों का भी जिक्र किया है। पत्र के मुताबिक, 23 जुलाई को कनॉट प्लेस के कारोबारियों को शाम 6:30 बजे तक दुकानें और दूसरे प्रतिष्ठान बंद करने की सलाह दी गई थी। व्यापारियों का दावा है कि इससे उनके कारोबार पर असर पड़ा। हालांकि, व्यापारियों ने स्पष्ट किया है कि वे शांतिपूर्ण प्रदर्शन और लोगों के अपनी बात रखने के अधिकार के खिलाफ नहीं हैं। उनका कहना है कि प्रदर्शन के अधिकार के साथ आम लोगों की सुरक्षा, आवाजाही और व्यापारियों की आजीविका का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।

जंतर-मंतर की जगह रामलीला मैदान का सुझाव

व्यापारी संगठनों ने जंतर-मंतर के बजाय किसी बड़े और खुले मैदान में प्रदर्शन आयोजित करने का सुझाव दिया है। इसके लिए रामलीला मैदान और बुराड़ी के उपयुक्त मैदानों पर विचार करने की बात कही गई है। उपराज्यपाल को लिखे पत्र में व्यापारियों ने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं। जंतर-मंतर पर सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण और आपातकालीन व्यवस्था की तत्काल समीक्षा की जाए। जंतर-मंतर को नियमित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने और प्रदर्शनों को किसी दूसरे उपयुक्त खुले मैदान में स्थानांतरित करने की कानूनी प्रक्रिया शुरू की जाए। व्यापारी संगठनों के प्रतिनिधिमंडल को मुलाकात का समय दिया जाए और उनकी मांगों पर उचित समय के भीतर फैसला लिया जाए। यह पत्र नई दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन समेत कनॉट प्लेस, पालिका बाजार, जनपथ और खान मार्केट के व्यापारी संगठनों की ओर से भेजा गया है। इसकी प्रतियां दिल्ली पुलिस कमिश्नर, दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव और केंद्रीय गृह मंत्रालय को भी भेजी गई हैं।

छोटे दुकानदारों की आजीविका पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर दिल्ली किराना कमेटी ने भी सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC) ने सेंट्रल पार्क बंद कर दिया है। याचिकाकर्ता के मुताबिक, इससे वहां कारोबार करने वाले रेहड़ी-पटरी वालों और छोटे व्यापारियों को नुकसान हो सकता है।सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि दिल्ली हाई कोर्ट पहले से ही इस मामले पर सुनवाई कर रहा है। जस्टिस बागची ने भी कहा कि ये याचिकाएं एक-दूसरे से मिलती-जुलती हैं। एक पक्ष प्रदर्शन करना चाहता है, जबकि दूसरा पक्ष इसका विरोध कर रहा है। मुख्य न्यायाधीश ने उम्मीद जताई कि सभी पक्ष समझदारी से काम लेंगे। उन्होंने छोटे दुकानदारों की आजीविका का मुद्दा उठाते हुए कहा कि उनकी कमाई इसी कारोबार पर निर्भर करती है और इससे उनके परिवारों पर पड़ने वाले असर को समझना जरूरी है। अदालत ने कहा कि कारोबार को हुए नुकसान का मुद्दा 26 अक्टूबर को उठाया जा सकता है। इस पर याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि NDMC के आदेश से सेंट्रल पार्क बंद रहने के कारण व्यापारियों का कामकाज ठप हो सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि NDMC के आदेश के कारण कारोबार को नुकसान होता है, तो अदालत इस पर विचार कर सकती है। कोर्ट ने यह भी कहा कि टॉर्ट कानून के तहत मुआवजा देने का आदेश दिया जा सकता है।

प्रदर्शन स्थल बदलने की मांग पर बढ़ी चर्चा

जंतर-मंतर पर प्रदर्शनों को लेकर अब व्यापारियों ने प्रशासन और अदालत, दोनों स्तरों पर अपनी मांग उठाई है। एक ओर व्यापारी संगठनों ने बाजारों में आवाजाही, सुरक्षा और कारोबार पर असर का हवाला देते हुए प्रदर्शन स्थल बदलने की मांग की है। दूसरी ओर, सुप्रीम कोर्ट में छोटे दुकानदारों की आजीविका और सेंट्रल पार्क बंद होने से संभावित नुकसान का मुद्दा भी सामने आया है। अब इस मामले में आगे की सुनवाई और प्रशासन के फैसले पर नजर रहेगी।


CJP का पहले से तैयार था ‘प्लान B’! अभिजीत दिपके की हिरासत के बाद अजिंक्य शिंदे संभाल रहे आंदोलन की कमान, जानिए कौन हैं

नई दिल्ली: दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन से पहले पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके और उनके साथियों को हिरासत में लिए जाने के बाद आंदोलन की कमान अजिंक्य शिंदे को सौंपने का ऐलान किया गया है। दिपके ने एक प्री-रिकॉर्डेड वीडियो के जरिए बताया कि अब शिंदे प्रदर्शन का नेतृत्व करेंगे। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या CJP ने अपने प्रमुख नेताओं की हिरासत की आशंका के बीच पहले से वैकल्पिक नेतृत्व की तैयारी कर रखी थी?

कौन हैं अजिंक्य शिंदे?

अजिंक्य शिंदे CJP के राष्ट्रीय संगठन प्रभारी हैं। पार्टी की राष्ट्रीय टीम के ऐलान के दौरान उन्हें यह जिम्मेदारी दी गई थी। 35 वर्षीय शिंदे महाराष्ट्र के अलीबाग के रहने वाले हैं। उनका परिवार किसान पृष्ठभूमि से जुड़ा है। उनके पिता किसान हैं और बाद में उनका परिवार लातूर में बस गया। राजनीति में सक्रिय होने से पहले शिंदे आईटी क्षेत्र में काम कर चुके हैं। उन्होंने कंप्यूटर साइंस में स्नातक की पढ़ाई की और पुणे की आईटी कंपनियों में कई साल तक नौकरी की। इसके बाद उन्होंने नौकरी छोड़कर राजनीति में सक्रिय भूमिका निभानी शुरू की।

AAP की युवा इकाई से भी जुड़े रहे

अजिंक्य शिंदे इससे पहले आम आदमी पार्टी (AAP) की युवा इकाई में संयोजक और सह-प्रभारी की भूमिका निभा चुके हैं। वह पार्टी की राष्ट्रीय संगठन निर्माण टीम से भी जुड़े रहे। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, शिंदे 6 अगस्त 2026 को आधिकारिक तौर पर CJP में शामिल हुए और राष्ट्रीय संगठन प्रभारी की जिम्मेदारी संभाली। इससे पहले जुलाई में हुए CJP के प्रदर्शन के दौरान भी उन्होंने पर्दे के पीछे रहकर आयोजन की जिम्मेदारी संभाली थी।

अभिजीत दिपके समेत ३ नेता पहले ही हिरासत में

10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन के लिए दिल्ली पहुंचे CJP संस्थापक अभिजीत दिपके, सौरभ दास और आशुतोष रांका को हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई थी। दिपके को मुंबई से दिल्ली पहुंची फ्लाइट के अंदर ही हिरासत में लिए जाने की जानकारी दी गई। इसके बाद दिपके ने वीडियो संदेश के जरिए आंदोलन की जिम्मेदारी अजिंक्य शिंदे को सौंपने की बात कही। पार्टी का कहना है कि नेताओं की हिरासत के बावजूद विरोध जारी रहेगा।

क्या CJP के पास पहले से था प्लान B?

प्रमुख नेताओं की हिरासत के बाद वैकल्पिक नेतृत्व की घोषणा से यह सवाल उठ रहा है कि क्या पार्टी ने पहले से इसकी तैयारी की थी। शिंदे की संगठनात्मक भूमिका और जुलाई के प्रदर्शन में उनकी भागीदारी इस संदर्भ में अहम है। हालांकि, पार्टी की ओर से पहले से तैयार किसी औपचारिक ‘प्लान B’ के बारे में स्पष्ट पुष्टि के बिना इसे स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता। CJP ने मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के विरोध में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन का आह्वान किया था। दिल्ली पुलिस ने कम समय में आवेदन मिलने और कानून-व्यवस्था संबंधी चिंताओं का हवाला देते हुए अनुमति देने से इनकार कर दिया था। अब आंदोलन की अगुवाई अजिंक्य शिंदे कैसे करते हैं और CJP अपनी आगे की रणनीति किस तरह तय करती है, इस पर नजर रहेगी।


जंतर-मंतर प्रदर्शन: अरविंद केजरीवाल और ममता बनर्जी हिरासत में, 1,000 से ज्यादा प्रदर्शनकारी पुलिस की कस्टडी में

नई दिल्ली: दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए जा रहे पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और ममता बनर्जी को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। प्रदर्शन के दौरान राजधानी के अलग-अलग इलाकों में तनाव की स्थिति बनी रही। जंतर-मंतर, कनॉट प्लेस और मिंटो ब्रिज समेत विभिन्न स्थानों से अब तक 1,000 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों को कस्टडी में लिए जाने की जानकारी सामने आई है। प्रदर्शन के दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की बैरिकेडिंग तोड़ दी। इसके बाद पुलिस ने उन्हें खदेड़कर हिरासत में लिया। इस दौरान एक प्रदर्शनकारी के सिर में चोट लगने की भी खबर है। वहीं, इम्तियाज अली मार्ग पर आकाशवाणी भवन के पास प्रदर्शनकारियों द्वारा बैरिकेड पार करने और पुलिस पर पत्थर फेंकने का मामला सामने आया। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, इस घटना में दो पुलिसकर्मी घायल हुए हैं।

अभिजीत दीपके को फ्लाइट के अंदर हिरासत में 

प्रदर्शन से पहले CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके को मुंबई से दिल्ली पहुंची फ्लाइट के अंदर ही हिरासत में ले लिया गया। उनके साथ CJP नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को भी पुलिस अपने साथ ले गई। इसके बाद अभिजीत दीपके ने एक प्री-रिकॉर्डेड वीडियो जारी किया, जिसमें उन्होंने कहा कि अब आंदोलन की कमान अजिंक्य शिंदे संभालेंगे। 

SIR के विरोध और EC के इस्तीफे की मांग

CJP ने मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के विरोध में 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का आह्वान किया था। संगठन की प्रमुख मांग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा है। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने कम समय में प्रदर्शन की जानकारी दिए जाने का हवाला देते हुए इसकी अनुमति देने से इनकार कर दिया था। इसके बावजूद प्रदर्शनकारियों के जुटने की कोशिश के बीच पुलिस ने कई स्थानों पर सुरक्षा बढ़ाई और कार्रवाई की। फिलहाल प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या, घायलों की स्थिति और पुलिस की आगे की कार्रवाई से जुड़े अपडेट पर नजर बनी हुई है। 


दिल्ली में 10 अक्टूबर के प्रदर्शन से पहले सुरक्षा सख्त, 25 हजार से ज्यादा जवान तैनात; ट्रेनों पर भी असर

नई दिल्ली: दिल्ली में 10 अक्टूबर को प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और कुछ छात्र संगठनों ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का आह्वान किया है। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने इस प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। इसके बाद पुलिस राजधानी के कई इलाकों में गश्त कर रही है और लाउडस्पीकर के जरिए लोगों को प्रतिबंधों की जानकारी दे रही है। उत्तर-पूर्वी दिल्ली के हर्ष विहार समेत कई इलाकों में पुलिस लोगों से प्रदर्शन में शामिल न होने की अपील कर रही है। पुलिस के मुताबिक, जंतर-मंतर पर प्रस्तावित कार्यक्रम को अनुमति नहीं मिली है और नई दिल्ली क्षेत्र में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू है। प्रतिबंधों का उल्लंघन करने पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

प्रदर्शन की अनुमति क्यों नहीं मिली?

दिल्ली पुलिस की नई दिल्ली रेंज की संयुक्त पुलिस आयुक्त नूपुर प्रसाद के अनुसार, प्रदर्शन के लिए आवेदन निर्धारित समय से काफी कम पहले दिया गया था। पुलिस का कहना है कि नियमानुसार प्रदर्शन की सूचना कम से कम 10 दिन पहले दी जानी चाहिए। पुलिस अधिकारी ने यह भी बताया कि पहले CJP को प्रदर्शन की अनुमति दी गई थी, लेकिन उस दौरान संगठन ने पुलिस के निर्देशों और अपने आश्वासनों का पालन नहीं किया। पुलिस ने कानून-व्यवस्था की स्थिति को ध्यान में रखते हुए इस बार अनुमति नहीं देने का फैसला किया है।

राजधानी में 25 हजार से ज्यादा सुरक्षाकर्मी तैनात

प्रदर्शन के मद्देनजर दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों में 25 हजार से अधिक सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है। इनमें अर्धसैनिक बलों के जवान भी शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था का उद्देश्य किसी भी अप्रिय घटना को रोकना और राजधानी में कानून-व्यवस्था बनाए रखना है। पुलिस ने स्थानीय लोगों से अपील की है कि वे प्रतिबंधों की जानकारी अपने परिवार और आसपास के लोगों तक भी पहुंचाएं, ताकि किसी तरह की अव्यवस्था से बचा जा सके।

57 मेट्रो स्टेशनों को बंद करने का अनुरोध

प्रदर्शन से पहले दिल्ली पुलिस ने दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) से 57 मेट्रो स्टेशनों को बंद करने का अनुरोध किया है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि प्रदर्शन की आशंका के आधार पर दिल्ली मेट्रो और रेल सेवाओं को पूरी तरह रोकना उचित नहीं होगा। अदालत ने केंद्र और संबंधित अधिकारियों से सेवाएं नियंत्रित तरीके से जारी रखने को कहा, ताकि आम यात्रियों को अनावश्यक परेशानी न हो।

दिल्ली आने-जाने वाली ट्रेनों पर भी असर

प्रदर्शन से पहले कई रेल सेवाओं को रद्द करने और उनके समय में बदलाव किए जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। उत्तर पश्चिम रेलवे ने 9 और 10 अक्टूबर को दिल्ली आने-जाने वाली 13 रेल सेवाएं रद्द करने की जानकारी दी है। वहीं, मध्य और पश्चिम रेलवे ने भी मुंबई से दिल्ली आने वाली कुछ लंबी दूरी की ट्रेनों को रद्द या पुनर्निर्धारित किया है। रेलवे ने इन फैसलों के पीछे परिचालन संबंधी कारणों और नई दिल्ली तथा हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशनों के आसपास भारी यातायात की आशंका का हवाला दिया है। दूसरी ओर, CJP और विपक्षी दलों ने ट्रेनों को रद्द किए जाने पर सवाल उठाए हैं। तृणमूल कांग्रेस के नेता डेरेक ओ'ब्रायन ने आरोप लगाया कि सरकार युवाओं से डर रही है। वहीं, माकपा महासचिव एमए बेबी ने प्रदर्शन से पहले लगाई गई पाबंदियों और रेल सेवाओं पर पड़ने वाले असर को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।

CEC के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन

CJP और कुछ छात्र संगठन मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के दौरान अनियमितताएं हुई हैं। इस विवाद के बीच 25 सितंबर को प्रकाशित एक रिपोर्ट भी चर्चा में है। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार ऐसे फैसलों और आदेशों पर आपत्ति जताई थी, जो कथित तौर पर उनकी जानकारी या सिफारिश के बिना जारी किए गए थे। हालांकि, इन दावों और आरोपों को संबंधित पक्षों के आधिकारिक पक्ष के साथ देखना जरूरी है। 10 अक्टूबर के प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले सुरक्षा, मेट्रो और रेल सेवाओं को लेकर उठे कदमों ने इस पूरे मामले को और संवेदनशील बना दिया है।


सेवा के 25 साल: गुजरात से दिल्ली तक मोदी का सफर....विकास मॉडल से 'विकसित भारत' के विजन तक

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7 अक्टूबर 2026 को सरकार के प्रमुख के रूप में अपने 25 साल पूरे कर लिए। 7 अक्टूबर 2001 को उन्होंने पहली बार गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। इसके बाद करीब 13 साल गुजरात के मुख्यमंत्री रहने के बाद मई 2014 में उन्होंने देश के प्रधानमंत्री का पद संभाला। 2019 और 2024 में लगातार दो बार चुनाव जीतने के बाद वह तीसरी बार प्रधानमंत्री बने। मोदी के 25 साल के इस राजनीतिक सफर को भारतीय राजनीति में एक लंबी निरंतरता के तौर पर देखा जा रहा है। केंद्र सरकार और भाजपा इस यात्रा को 'जनसेवा' और 'राष्ट्र प्रथम' के दृष्टिकोण से जोड़ते हैं। वहीं, उनके कार्यकाल के दौरान लिए गए कई बड़े फैसले राजनीतिक बहस का विषय भी रहे हैं।

गुजरात से शुरू हुआ राजनीतिक सफर

नरेंद्र मोदी ने ऐसे समय गुजरात के मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली थी, जब राज्य जनवरी 2001 के भूकंप, सूखे, जल संकट और बिजली की चुनौतियों से जूझ रहा था। प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, मोदी ने अपने कार्यकाल के शुरुआती वर्षों में प्रशासन, बिजली, पानी, कृषि और औद्योगिक निवेश को प्राथमिकता दी। 2003 में वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट की शुरुआत हुई। इसका उद्देश्य गुजरात में निवेश और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देना था। इसी दौर में प्रशासन में तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ाने के लिए SWAGAT जैसे कार्यक्रम भी शुरू किए गए। प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक, SWAGAT की शुरुआत 2003 में हुई थी और इसमें नागरिक सीधे मुख्यमंत्री के सामने अपनी शिकायतें रखते थे।

बिजली और पानी पर जोर

गुजरात में ज्योतिग्राम योजना के जरिए कृषि और घरेलू बिजली आपूर्ति के लिए अलग-अलग फीडर की व्यवस्था की गई। प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, इस मॉडल का उद्देश्य ग्रामीण इलाकों में बिजली आपूर्ति को बेहतर करना और कृषि क्षेत्र के लिए बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित करना था। बाद में इसी तरह की पहलों को राष्ट्रीय स्तर की नीतियों से भी जोड़ा गया। नर्मदा नहर नेटवर्क के विस्तार, जल संरक्षण और सूक्ष्म सिंचाई जैसी पहलों को भी गुजरात के विकास मॉडल का हिस्सा बनाया गया। मोदी ने अपने भाषणों में गुजरात के सूखा प्रभावित इलाकों में पानी और बिजली की समस्याओं को उस समय की प्रमुख चुनौतियों के रूप में याद किया है।

2014 में दिल्ली की सत्ता तक पहुंचे

2013 में भाजपा ने नरेंद्र मोदी को 2014 लोकसभा चुनाव के लिए प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया। 2014 के चुनाव में भाजपा ने 282 सीटें जीतकर अपने दम पर बहुमत हासिल किया और 26 मई 2014 को मोदी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। इसके बाद 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने 303 और 2024 में 240 सीटें जीतीं। 2024 में भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए ने सरकार बनाई और मोदी ने लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली।

जनधन, नोटबंदी और GST से बदली आर्थिक नीति की दिशा

प्रधानमंत्री के रूप में मोदी सरकार ने वित्तीय समावेशन के लिए प्रधानमंत्री जनधन योजना शुरू की। इसका उद्देश्य बैंकिंग सेवाओं से वंचित लोगों को औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ना था। इसके बाद 8 नवंबर 2016 को केंद्र सरकार ने ₹500 और ₹1,000 के पुराने नोटों को चलन से बाहर करने की घोषणा की। सरकार ने इसके पीछे काले धन, नकली मुद्रा और आतंकवाद की फंडिंग पर रोक लगाने जैसे कारण बताए थे। नोटबंदी के आर्थिक प्रभाव और इसके परिणामों को लेकर उस समय व्यापक बहस भी हुई। 1 जुलाई 2017 को GST लागू किया गया। इसका उद्देश्य केंद्र और राज्यों के विभिन्न अप्रत्यक्ष करों को एक साझा कर व्यवस्था में लाना था।

राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति पर बड़ा फोकस

मोदी सरकार के कार्यकाल में राष्ट्रीय सुरक्षा भी प्रमुख राजनीतिक मुद्दा रहा। 2016 में उरी आतंकी हमले के बाद भारत ने नियंत्रण रेखा के पार सर्जिकल स्ट्राइक की घोषणा की। 2019 में पुलवामा हमले के बाद भारतीय वायुसेना ने बालाकोट में एयर स्ट्राइक की। इन कार्रवाइयों को सरकार ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी नीति का हिस्सा बताया। इन फैसलों के बाद भारत की सुरक्षा नीति और पाकिस्तान के साथ संबंधों को लेकर देश में व्यापक राजनीतिक बहस हुई।

अनुच्छेद 370 से राम मंदिर तक

मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर से जुड़े अनुच्छेद 370 के विशेष प्रावधानों को हटाने का फैसला लिया गया। इसके साथ जम्मू-कश्मीर को पुनर्गठित कर दो केंद्रशासित प्रदेश—जम्मू-कश्मीर और लद्दाख—बनाए गए। अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण भी मोदी सरकार के कार्यकाल के महत्वपूर्ण राजनीतिक और सांस्कृतिक मुद्दों में रहा। नवंबर 2019 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राम मंदिर निर्माण का रास्ता साफ हुआ और जनवरी 2024 में अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा हुई। इसके अलावा मोदी सरकार ने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और तीन तलाक पर कानून जैसे महत्वपूर्ण फैसले भी किए, जिन पर देश में राजनीतिक और सामाजिक बहस हुई।

महिला आरक्षण और EWS कोटा

2023 में संसद ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित किया। कानून के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण का प्रावधान किया गया है। इसका क्रियान्वयन जनगणना और परिसीमन की प्रक्रिया से जुड़ा है। वहीं 2019 में संविधान संशोधन के जरिए आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी EWS के लिए शिक्षा और सरकारी नौकरियों में 10 फीसदी आरक्षण का प्रावधान किया गया।

गुजरात मॉडल से विकसित भारत तक

मोदी के 25 साल के राजनीतिक सफर में एक महत्वपूर्ण बदलाव यह रहा कि गुजरात में प्रशासन और विकास को लेकर जिस मॉडल को उन्होंने आगे बढ़ाया, उसे बाद में राष्ट्रीय स्तर पर कई योजनाओं और नीतियों से जोड़ने की कोशिश की गई। केंद्र सरकार के अनुसार, गुजरात में शुरू हुई SWAGAT जैसी पहल से लेकर केंद्र में PRAGATI जैसे प्लेटफॉर्म तक प्रशासन में तकनीक और सीधे निगरानी की व्यवस्था को बढ़ाया गया। इसी तरह ज्योतिग्राम जैसे गुजरात के अनुभवों को भी राष्ट्रीय स्तर की नीतियों के संदर्भ में पेश किया गया है। अब मोदी के राजनीतिक सफर का अगला बड़ा लक्ष्य 'विकसित भारत' का विजन है। प्रधानमंत्री लगातार 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की बात करते रहे हैं। 25 साल पूरे होने के मौके पर भी उनके संदेश में भविष्य की दिशा के रूप में विकसित भारत का लक्ष्य प्रमुख रहा। 2001 में गुजरात से शुरू हुआ सफर 2026 में 25 साल पूरा कर चुका है। इस दौरान मोदी के नेतृत्व में कई बड़े आर्थिक, सामाजिक, प्रशासनिक और राजनीतिक फैसले हुए। इन फैसलों ने जहां उनके समर्थकों के बीच मजबूत नेतृत्व की छवि बनाई, वहीं विपक्ष और आलोचकों ने कई नीतियों पर सवाल भी उठाए।  अब इस लंबे राजनीतिक सफर के अगले अध्याय का केंद्र विकसित भारत 2047 का लक्ष्य है—और आने वाले वर्षों में इस लक्ष्य को लेकर सरकार की नीतियां किस दिशा में जाती हैं, यह मोदी के राजनीतिक सफर का अगला महत्वपूर्ण पड़ाव होगा।


Asian Games 2026 Day 12 LIVE: नीरू ढांडा और कीनन चेनाई की जोड़ी ने जीता गोल्ड, भारत की झोली में आया एक और स्वर्ण

by न्यूज डेस्क

Asian Games 2026: आइची-नागोया एशियन गेम्स में 30 सितंबर का दिन भारतीय खिलाड़ियों के लिए बेहद अहम है। भारत की नजरें तीरंदाजी, शूटिंग, बॉक्सिंग, कुश्ती और महिला हॉकी समेत कई खेलों में पदकों पर हैं। इसी बीच शूटिंग में नीरू ढांडा और कीनन चेनाई की जोड़ी ने ट्रैप मिक्स्ड टीम इवेंट में शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत को स्वर्ण पदक दिलाया।

नीरू ढांडा-कीनन चेनाई की जोड़ी ने रचा इतिहास

ट्रैप मिक्स्ड टीम के फाइनल में नीरू ढांडा और कीनन चेनाई ने बेहतरीन निशानेबाजी करते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया। इस जीत के साथ भारत के पदक अभियान में एक और स्वर्ण जुड़ गया। इस इवेंट में भारतीय जोड़ी ने नया एशियन गेम्स रिकॉर्ड भी बनाया। नीरू ढांडा के लिए यह एशियन गेम्स खास तौर पर शानदार रहा है। इससे पहले वह महिला ट्रैप के व्यक्तिगत मुकाबले में भी स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं। यानी इस प्रतियोगिता में नीरू के खाते में अब दो गोल्ड मेडल हो चुके हैं।

तीरंदाजी में भी भारत का दबदबा

30 सितंबर को भारत को तीरंदाजी में भी बड़ी सफलता मिली। ज्योति सुरेखा वेन्नम, चिकिथा तनिपार्थी और पृथिका प्रदीप की भारतीय महिला कंपाउंड टीम ने चीन को हराकर स्वर्ण पदक जीता। भारतीय टीम ने फाइनल में 238-234 से जीत दर्ज की और इस दौरान विश्व रिकॉर्ड स्कोर की बराबरी भी की। इसके अलावा कंपाउंड मिक्स्ड टीम और पुरुष टीम के मुकाबलों में भी भारतीय तीरंदाज पदक की दौड़ में हैं। महिला हॉकी में भारत का सामना सेमीफाइनल में दक्षिण कोरिया से होना है। यह मुकाबला भारतीय टीम के लिए सिर्फ फाइनल में पहुंचने के लिहाज से ही अहम नहीं है, बल्कि इसके साथ 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक के सीधे क्वालिफिकेशन का मौका भी जुड़ा है।

बॉक्सिंग और कुश्ती में भी पदक की उम्मीद

बॉक्सिंग में प्रिया घंघास 60 किग्रा, लवलीना बोरगोहेन 75 किग्रा और कपिल पोखरिया 90 किग्रा वर्ग के सेमीफाइनल मुकाबलों में उतरेंगे। वहीं कुश्ती में निशा दहिया 68 किग्रा महिला वर्ग और सुनील कुमार 87 किग्रा ग्रीको-रोमन वर्ग में भारत की चुनौती पेश करेंगे। इसके अलावा भारत के खिलाड़ी शूटिंग, स्क्वैश, गोल्फ, टेनिस, साइक्लिंग और अन्य खेलों में भी मैदान पर उतर रहे हैं। एशियन गेम्स 2026 में भारत के लिए 30 सितंबर का दिन कई पदक जीतने के लिहाज से अहम है। शूटिंग और तीरंदाजी में गोल्ड मिलने के बाद अब नजरें बॉक्सिंग, कुश्ती और महिला हॉकी के मुकाबलों पर हैं।


Bank Strike: रविवार को खुलेंगे बैंक या नहीं? सरकार के फैसले के बाद भी कन्फ्यूजन, 28 से 30 सितंबर तक हड़ताल

by न्यूज डेस्क

देशभर के बैंक ग्राहकों के लिए अगले कुछ दिन अहम रहने वाले हैं। बैंक यूनियनों ने 28 से 30 सितंबर 2026 तक तीन दिन की राष्ट्रव्यापी हड़ताल का ऐलान किया है। इससे पहले 26 सितंबर को शनिवार और 27 सितंबर को रविवार की छुट्टी है। ऐसे में लगातार पांच दिनों तक बैंकिंग सेवाएं प्रभावित होने की आशंका थी। ग्राहकों की परेशानी को देखते हुए सरकार ने 27 सितंबर, रविवार को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSB) और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRB) को सामान्य रूप से खोलने का फैसला किया है। भारतीय रिजर्व बैंक ने भी इस दिन बैंक शाखाओं, कार्यालयों, ATM से जुड़ी शाखाओं और करेंसी चेस्ट को संचालित करने की मंजूरी दी है। हालांकि, रविवार को बैंक खोलने के फैसले के बावजूद कर्मचारियों की मौजूदगी को लेकर पेच फंस गया है।

रविवार को बैंक खुलेंगे, फिर कन्फ्यूजन क्यों?

सरकार की ओर से 27 सितंबर को बैंक खोलने का फैसला साफ है, लेकिन ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन (AIBOA) ने अपने सदस्यों से रविवार को ड्यूटी पर नहीं आने की सलाह दी है। संगठन का कहना है कि 27 सितंबर छुट्टी का दिन है। यही वजह है कि ग्राहकों के सामने यह सवाल है कि सरकार के निर्देश के बावजूद उनकी संबंधित शाखा में कर्मचारी उपलब्ध होंगे या नहीं। कुछ बैंकों ने रविवार को शाखाएं खोलने की जानकारी भी दी है। उदाहरण के तौर पर SBI ने अपनी सभी शाखाओं को 27 सितंबर को खोलने की घोषणा की है। इसलिए ग्राहक अगर रविवार को बैंक जाने की योजना बना रहे हैं तो अपनी संबंधित शाखा की सूचना पहले चेक कर लें।

सरकार ने रविवार को बैंक खोलने का फैसला क्यों लिया?

दरअसल, 26 और 27 सितंबर के सप्ताहांत के तुरंत बाद 28 से 30 सितंबर तक बैंक हड़ताल प्रस्तावित है। अगर रविवार को भी बैंक बंद रहते, तो ग्राहकों को लगातार पांच दिनों तक शाखा आधारित बैंकिंग सेवाओं में परेशानी का सामना करना पड़ सकता था। इसी को देखते हुए वित्त मंत्रालय ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को 27 सितंबर को सामान्य रूप से काम करने को कहा है। सरकार और बैंक प्रबंधन का उद्देश्य हड़ताल शुरू होने से पहले ग्राहकों को जरूरी बैंकिंग काम निपटाने का एक अतिरिक्त दिन देना है।

28 से 30 सितंबर तक क्यों है बैंक हड़ताल?

यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) और उससे जुड़े बैंक कर्मचारी संगठनों ने 28 से 30 सितंबर तक देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है। बैंक यूनियनों की प्रमुख मांगों में पांच दिन की बैंकिंग व्यवस्था लागू करना शामिल है। फिलहाल बैंक कर्मचारियों को महीने के दूसरे और चौथे शनिवार को छुट्टी मिलती है, जबकि बाकी शनिवारों को सामान्य तौर पर बैंक खुले रहते हैं। यूनियनें सभी शनिवार को अवकाश घोषित करने की मांग कर रही हैं। इसके अलावा परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) और कर्मचारियों से जुड़े अन्य मुद्दे भी विवाद का हिस्सा हैं। सरकार की ओर से यूनियनों से हड़ताल टालने की अपील की गई है, लेकिन UFBU ने फिलहाल 28 से 30 सितंबर की प्रस्तावित हड़ताल जारी रखने की बात कही है।

ग्राहकों पर क्या पड़ेगा असर?

हड़ताल का सबसे ज्यादा असर बैंक की शाखाओं में होने वाले कामकाज पर पड़ सकता है। कैश जमा या निकासी, चेक से जुड़े काम, अकाउंट संबंधी सेवाएं और अन्य ब्रांच-आधारित काम प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि, UPI, इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग और ATM जैसी डिजिटल सेवाएं सामान्य रूप से उपलब्ध रहने की उम्मीद है। SBI समेत कुछ बैंकों ने ग्राहकों को जरूरी बैंकिंग काम हड़ताल से पहले पूरा करने की सलाह दी है।

ग्राहकों के लिए क्या जरूरी है?

अगर आपको बैंक शाखा में कोई जरूरी काम है, तो उसे 27 सितंबर या उससे पहले पूरा करना बेहतर रहेगा। खासकर चेक जमा करने, बड़े कैश ट्रांजैक्शन, दस्तावेज जमा करने या अकाउंट से जुड़े जरूरी काम को आखिरी समय तक न टालें। यानी रविवार 27 सितंबर को बैंक खोलने का सरकारी फैसला है, लेकिन कर्मचारी संगठनों के रुख के कारण हर शाखा में सेवा मिलने की स्थिति एक जैसी हो, यह अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। इसलिए रविवार को जाने से पहले अपनी बैंक शाखा की स्थिति जरूर जांच लें।


CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस का देशव्यापी प्रदर्शन, पटना-लखनऊ समेत कई शहरों में कार्यकर्ता सड़क पर

by न्यूज डेस्क

नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लेकर कांग्रेस और चुनाव आयोग के बीच विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। कांग्रेस ने शुक्रवार, 25 सितंबर को ज्ञानेश कुमार के खिलाफ देशभर में विरोध प्रदर्शन किया। पार्टी कार्यकर्ताओं ने कई राज्यों में सड़कों पर उतरकर उनके इस्तीफे की मांग की। कांग्रेस का यह प्रदर्शन चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों से जुड़ी एक मीडिया रिपोर्ट के बाद शुरू हुआ है। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों के दौरान मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR से जुड़े कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर कई बार आपत्ति दर्ज कराई थी। हालांकि, चुनाव आयोग ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि आयोग के फैसले सर्वसम्मति से लिए जा रहे हैं और व्यक्तिगत स्तर पर हुई चर्चाओं या विचार-विमर्श को आयोग के अंतिम फैसले से अलग करके नहीं देखा जाना चाहिए।

कई राज्यों में कांग्रेस का प्रदर्शन

कांग्रेस के आह्वान पर दिल्ली, पटना, लखनऊ, चंडीगढ़, कोलकाता, गुवाहाटी, देहरादून और अन्य जगहों पर प्रदर्शन किए गए। पार्टी कार्यकर्ताओं ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग उठाई। चंडीगढ़ में यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन के दौरान CEC ज्ञानेश कुमार का पुतला भी जलाया। प्रदर्शनकारियों ने मतदाता सूची, चुनावी प्रक्रिया और आयोग के कामकाज में पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि चुनाव आयोग के भीतर फैसले लेने की प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं और मुख्य चुनाव आयुक्त पर अन्य चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों को नजरअंदाज करने के आरोप लगे हैं। पार्टी इसी मुद्दे को लेकर ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रही है।

पटना में प्रदर्शन के दौरान पुलिस से झड़प

पटना में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर मार्च करने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। पुलिस द्वारा बैरिकेडिंग लगाए जाने के बाद प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बनी। कुछ कार्यकर्ताओं ने बैरिकेड पार करने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की भी जानकारी सामने आई है। पटना में कांग्रेस इससे पहले भी CEC के खिलाफ प्रदर्शन कर चुकी है। 23 सितंबर को हुए प्रदर्शन में पार्टी नेताओं ने SIR और चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाते हुए ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की थी।

लखनऊ में बारिश के बीच प्रदर्शन

लखनऊ में भी कांग्रेस कार्यकर्ता बारिश के बावजूद सड़क पर उतरे। पार्टी कार्यकर्ताओं ने प्रदेश कांग्रेस कार्यालय से आगे बढ़ने की कोशिश की और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर नारेबाजी की। कांग्रेस कार्यकर्ताओं की मांग है कि ज्ञानेश कुमार अपने पद से इस्तीफा दें। प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस बल की तैनाती की गई और कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ने से रोकने के लिए बैरिकेडिंग की गई। लखनऊ में प्रदर्शन के दौरान ज्ञानेश कुमार को लेकर एक विवादित होर्डिंग भी सामने आया, जिसके बाद राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो गई।

देशव्यापी आंदोलन का ऐलान क्यों?

कांग्रेस ने 25 सितंबर को देशभर में राज्य चुनाव आयोगों के कार्यालयों तक विरोध मार्च निकालने का ऐलान किया था। पार्टी की ओर से कहा गया था कि इन प्रदर्शनों के जरिए CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े फैसलों की स्वतंत्र समीक्षा की मांग उठाई जाएगी। विवाद की शुरुआत उस मीडिया रिपोर्ट से हुई, जिसमें चुनाव आयोग के भीतर SIR से जुड़े मुद्दों पर दो चुनाव आयुक्तों की कथित आपत्तियों का जिक्र किया गया था। विपक्ष ने इसे चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और स्वतंत्रता से जोड़कर सवाल उठाए हैं, जबकि चुनाव आयोग ने रिपोर्ट में लगाए गए दावों को खारिज किया है। फिलहाल CEC ज्ञानेश कुमार को लेकर कांग्रेस और चुनाव आयोग के बीच टकराव जारी है और देश के अलग-अलग हिस्सों में कांग्रेस के प्रदर्शन के कारण यह मुद्दा राजनीतिक बहस के केंद्र में बना हुआ है।


'सबके खिलाफ एंटी-इनकंबेंसी आई, BJP के खिलाफ क्यों नहीं?' राहुल गांधी ने चुनावी प्रक्रिया पर उठाए सवाल

by न्यूज डेस्क

कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को चुनावी प्रक्रिया और चुनाव आयोग को लेकर केंद्र सरकार और बीजेपी पर कई गंभीर आरोप लगाए। प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने सवाल उठाया कि लंबे समय तक सत्ता में रहने वाली सरकारों के खिलाफ आमतौर पर एंटी-इनकंबेंसी देखने को मिलती है, लेकिन बीजेपी के मामले में ऐसा क्यों नहीं दिखाई दे रहा है। राहुल गांधी ने हरियाणा, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और गुजरात समेत कई राज्यों का उदाहरण देते हुए चुनावी प्रक्रिया को लेकर अपनी आपत्तियां दोहराईं। उन्होंने दावा किया कि पिछले कुछ वर्षों से वह चुनावों में कथित अनियमितताओं और मतदाता सूची में बदलाव को लेकर सवाल उठाते रहे हैं।

'वोट से संविधान को मिलती है ताकत'

राहुल गांधी ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में वोट की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। उनके मुताबिक, जनता का वोट ही सरकार चुनता है और इसी के जरिए संसद, विधानसभा और दूसरी लोकतांत्रिक संस्थाओं का गठन होता है। उन्होंने आरोप लगाया कि कथित तौर पर वोटों को प्रभावित करने के बाद कानून और संस्थाओं को भी प्रभावित करने की कोशिश की गई। राहुल गांधी ने इसे 'वोट चोरी, कानून चोरी और संस्था चोरी' बताया। हालांकि, ये राहुल गांधी के राजनीतिक आरोप हैं। चुनाव आयोग ने चुनावी प्रक्रिया में हेरफेर के आरोपों को खारिज किया है और कहा है कि आयोग के फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं।

चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों का मुद्दा

राहुल गांधी ने चुनाव आयोग के भीतर कथित असहमति को भी अपने आरोपों के समर्थन में उठाया। हाल ही में सामने आई एक रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने करीब 10 महीनों के दौरान आयोग के कुछ फैसलों पर 14 बार आपत्ति दर्ज की थी। इन आपत्तियों में मतदाता सूची, फॉर्म-6 में बदलाव, चुनावी डेटा के केंद्रीकरण और SIR प्रक्रिया से जुड़े कुछ मुद्दे शामिल बताए गए हैं। हालांकि, चुनाव आयोग के सूत्रों ने इन रिपोर्टों के बाद कहा कि SIR समेत आयोग के सभी फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से लिए गए थे।

ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति पर भी सवाल

राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति ऐसी प्रक्रिया से होनी चाहिए, जिसमें कार्यपालिका का प्रभाव न हो। राहुल गांधी ने दावा किया कि चयन प्रक्रिया के दौरान उन्होंने अपनी असहमति दर्ज कराई थी और उनकी आपत्ति को नजरअंदाज किया गया।

'10 महीने में 14 आपत्तियां'

प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने दो चुनाव आयुक्तों की कथित आपत्तियों का जिक्र करते हुए कहा कि 10 महीने में 14 बार रिकॉर्ड पर आपत्ति दर्ज की गई। उन्होंने इसे अपने पुराने सवालों से जोड़ते हुए कहा कि अब चुनावी प्रक्रिया को लेकर उठाए गए उनके सवालों पर नए सिरे से चर्चा हो रही है। राहुल गांधी ने यह भी दावा किया कि 2024 के लोकसभा चुनाव और कुछ विधानसभा चुनावों में गड़बड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में इन आरोपों की तस्वीर और स्पष्ट होगी। फिलहाल, चुनावी प्रक्रिया और SIR को लेकर विपक्ष तथा चुनाव आयोग के बीच राजनीतिक और संवैधानिक बहस तेज है। आयोग अपने फैसलों और प्रक्रिया का बचाव कर रहा है, जबकि विपक्ष स्वतंत्र जांच और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहा है।


बीजेपी ने 36 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए प्रभारी किए नियुक्त, यूपी की जिम्मेदारी विनोद तावड़े को

by न्यूज डेस्क

नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने संगठन में बड़ा फेरबदल करते हुए राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए नए प्रभारी और सह-प्रभारी नियुक्त किए हैं। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की ओर से 23 सितंबर 2026 को नियुक्तियों की घोषणा की गई। नई सूची में 28 राज्यों और 8 केंद्रशासित प्रदेशों के लिए संगठनात्मक जिम्मेदारियां तय की गई हैं। सबसे अहम नियुक्तियों में उत्तर प्रदेश का प्रभारी विनोद तावड़े को बनाया गया है। उनके साथ जगदीश पटेल, मेधा कुलकर्णी, प्रदीप वर्मा और अनंत ओझा को सह-प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं दिल्ली का प्रभारी विनय सहस्रबुद्धे को बनाया गया है। जामयांग त्सेरिंग नामग्याल और दर्शना जरदोश सह-प्रभारी होंगी।

इन नेताओं को मिली अहम जिम्मेदारियां

हरियाणा: स्मृति ईरानी, छत्तीसगढ़: स्मृति ईरानी, महाराष्ट्र: बैजयंत जय पांडा, राजस्थान: संजय भाटिया, पंजाब: सतीश पूनिया, जम्मू-कश्मीर: सतीश पूनिया, पश्चिम बंगाल: सुनील बंसल, तेलंगाना: सुनील बंसल, उत्तराखंड: राम माधव, तमिलनाडु: राम माधव, गुजरात: तरुण चुघ, बिहार: हरीश द्विवेदी, मध्य प्रदेश: बिप्लब कुमार देब, झारखंड: गजेंद्र पटेल, हिमाचल प्रदेश: श्रीकांत शर्मा, महाराष्ट्र में बैजयंत जय पांडा के साथ अमित मालवीय, सदानंद शेट तानावड़े और कमलजीत सहरावत को सह-प्रभारी बनाया गया है। राजस्थान में कविता पाटीदार और कुलजीत चहल सह-प्रभारी होंगे। 

पश्चिम बंगाल में सुनील बंसल के साथ लाल सिंह आर्य, राजेंद्र सिंह और पिंकी कुशवाहा को सह-प्रभारी की जिम्मेदारी मिली है। तेलंगाना के लिए अभय पाटिल और रेखा शर्मा सह-प्रभारी नियुक्त किए गए हैं। पार्टी ने गोवा और नगालैंड की जिम्मेदारी अनिल एंटनी को दी है। वहीं संगठन में कुछ नेताओं को एक से अधिक राज्यों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह फेरबदल ऐसे समय हुआ है जब कई राज्यों में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर बीजेपी का संगठनात्मक फोकस बढ़ रहा है। बीजेपी की ओर से जारी सूची में कुल 36 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए प्रभारी और सह-प्रभारी नियुक्त किए गए हैं। पार्टी के मुताबिक ये सभी नियुक्तियां तत्काल प्रभाव से लागू होंगी।


स्टेट बार काउंसिल में महिलाओं को 30% आरक्षण पर SC में सुनवाई, CJI ने उठाए ये सवाल

by न्यूज डेस्क

Supreme Court: स्टेट बार काउंसिल में महिलाओं को 30 फीसदी प्रतिनिधित्व देने के मामले पर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को सुनवाई हुई। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ कर रही है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने स्टेट बार काउंसिल में महिलाओं के लिए 30 फीसदी प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था। सुप्रीम कोर्ट के दिसंबर 2025 के आदेश के मुताबिक, स्टेट बार काउंसिल की कुल सीटों में 30 फीसदी प्रतिनिधित्व महिलाओं का होना है। इनमें 20 फीसदी सीटें चुनाव के जरिए और 10 फीसदी सीटें को-ऑप्शन के जरिए भरे जाने का प्रावधान किया गया था।

बार काउंसिल के चुनाव और महिला आरक्षण पर सुनवाई

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता शोभा गुप्ता ने कोर्ट को बताया कि पहले सुप्रीम कोर्ट ने स्टेट बार काउंसिल के चुनाव दो सप्ताह के भीतर पूरा कराने का निर्देश दिया था। अब अदालत के सामने दाखिल आवेदन महिलाओं के लिए तय 30 फीसदी प्रतिनिधित्व और बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) की संरचना से जुड़े मुद्दों पर है। इस दौरान कोर्ट में बार-बार दाखिल हो रहे आवेदनों का भी जिक्र हुआ। CJI ने सवाल किया कि क्या महिलाओं के 30 फीसदी प्रतिनिधित्व से संबंधित पहले दिए गए आदेश को वापस लेने की जरूरत है?

महिला वकीलों के विरोध का भी उठा मुद्दा

सुनवाई के दौरान CJI ने एक पत्र का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि उन्हें कुछ महिला वकीलों की ओर से पत्र मिला है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि सुप्रीम कोर्ट बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अधिकार अपने हाथ में ले रहा है। पत्र में अदालत के इस रुख के खिलाफ प्रदर्शन किए जाने की बात भी कही गई है। इस पर वरिष्ठ अधिवक्ता शोभा गुप्ता ने कहा कि महिला वकीलों की ओर से लगाए गए ये आरोप सही नहीं हैं। उन्होंने अदालत को बताया कि बांटे गए पर्चों में सुप्रीम कोर्ट के आदेश को असंवैधानिक बताया गया है।

जस्टिस बागची ने दिया लॉर्ड डेनिंग का उदाहरण

मामले की सुनवाई कर रही पीठ में शामिल जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह राय का विषय है। उन्होंने ब्रिटिश जज लॉर्ड डेनिंग से जुड़ा एक उदाहरण भी दिया। जस्टिस बागची ने कहा कि जब लॉर्ड डेनिंग को 'ओल्ड फूल' कहा गया था, तब उन्होंने 'ओल्ड' को तथ्य और 'फूल' को राय का विषय बताया था।

महिलाओं के 30% प्रतिनिधित्व पर पहले क्या हुआ था?

सुप्रीम कोर्ट ने 8 दिसंबर 2025 के आदेश में कहा था कि स्टेट बार काउंसिल की कुल सीटों में 30 फीसदी प्रतिनिधित्व महिलाओं का होना चाहिए। इनमें 20 फीसदी सीटें चुनाव के जरिए और 10 फीसदी सीटें को-ऑप्शन के जरिए भरी जानी थीं। अदालत ने यह भी कहा था कि जहां महिलाएं 20 फीसदी आरक्षित सीटों के लिए चुनाव नहीं लड़तीं, वहां बाकी सीटों को भी को-ऑप्शन के जरिए भरा जा सकता है, ताकि 30 फीसदी प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने इस व्यवस्था से जुड़े कई पहलुओं पर स्पष्टीकरण भी दिए हैं। सितंबर 2026 में कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि स्टेट बार काउंसिल में को-ऑप्शन के लिए वरिष्ठ महिला वकील का 'सीनियर एडवोकेट' के तौर पर नामित होना जरूरी नहीं है।

अब आगे क्या?

मंगलवार की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं के प्रतिनिधित्व, स्टेट बार काउंसिल के चुनाव और BCI की भूमिका से जुड़े मुद्दों पर सुनवाई की। अदालत इस मामले में आगे भी सुनवाई करेगी। 30 फीसदी महिला प्रतिनिधित्व की व्यवस्था को लेकर सुप्रीम कोर्ट के पहले के आदेश और उसके बाद दाखिल विभिन्न अर्जियों के चलते इस मामले पर आगे की कार्यवाही महत्वपूर्ण रहेगी।


रूस, इजराइल और तुर्किये एशियन गेम्स में क्यों नहीं खेलते? 97% तुर्किये और 75% रूस एशिया में, फिर भी तीनों की अलग कहानी

by न्यूज डेस्क

Asian Games 2026: एशियन गेम्स को एशिया का ओलंपिक कहा जाता है। इस प्रतियोगिता में एशिया के अलग-अलग देशों के खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि रूस, तुर्किये और इजराइल जैसे देश, जिनका एशिया से भौगोलिक या ऐतिहासिक जुड़ाव है, इन खेलों का हिस्सा क्यों नहीं हैं? इस सवाल का जवाब सिर्फ नक्शे और भूगोल में नहीं छिपा है। किसी देश की एशियन गेम्स में भागीदारी उसके खेल संगठनों की सदस्यता, इतिहास, अंतरराष्ट्रीय संबंधों और राजनीतिक परिस्थितियों पर भी निर्भर करती है। यही वजह है कि इन तीनों देशों की स्थिति एक-दूसरे से अलग है।

इजराइल: राजनीतिक विवादों ने बदला खेलों का रास्ता

इजराइल पहले एशियन गेम्स में हिस्सा लेता था। उसने 1954 से 1974 तक इन खेलों में भागीदारी की। हालांकि, पश्चिम एशिया में बढ़ते राजनीतिक तनाव का असर खेलों पर भी पड़ा। 1962 के जकार्ता एशियन गेम्स में इंडोनेशिया ने इजराइल को आमंत्रित नहीं किया था। कई अरब देशों की ओर से इजराइली खिलाड़ियों के साथ मुकाबले को लेकर आपत्तियां जताई गई थीं। बाद में 1981 में ओलंपिक काउंसिल ऑफ एशिया (OCA) के गठन के समय भी इजराइल इसका सदस्य नहीं बना। इसके बाद इजराइल का खेलों में यूरोपीय संस्थाओं के साथ जुड़ाव बढ़ता गया। फुटबॉल में इजराइल की राष्ट्रीय टीम यूरोपीय फुटबॉल संघ (UEFA) के अंतर्गत खेलती है।

क्या इजराइल भविष्य में एशियन गेम्स में लौट सकता है?

पश्चिम एशिया के राजनीतिक संबंधों में समय के साथ बदलाव जरूर हुए हैं। 2020 के अब्राहम समझौते के बाद इजराइल के संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन के साथ औपचारिक संबंध बने। मोरक्को के साथ भी संबंध सामान्य हुए। हालांकि, इन राजनयिक बदलावों को एशियन गेम्स में इजराइल की वापसी की प्रक्रिया नहीं माना जा सकता। इसके लिए खेल संस्थाओं और सदस्यता से जुड़े अलग-अलग फैसले जरूरी होंगे।

तुर्किये: एशिया में जमीन, लेकिन यूरोपीय खेल ढांचा

तुर्किये का लगभग 97% भूभाग एशिया में स्थित है। इसका एशियाई हिस्सा अनातोलिया कहलाता है, जबकि एक छोटा हिस्सा यूरोप में है। इसके बावजूद तुर्किये ने राजनीतिक, आर्थिक और खेल संस्थाओं में यूरोप के साथ मजबूत संबंध बनाए हैं। 1923 में आधुनिक तुर्किये के गठन के बाद पश्चिमी संस्थाओं के साथ उसका जुड़ाव बढ़ा। 
खेलों में भी तुर्किये यूरोपीय प्रतियोगिताओं में भाग लेता है। फुटबॉल में उसकी राष्ट्रीय टीम UEFA के अंतर्गत खेलती है। बास्केटबॉल, वॉलीबॉल और एथलेटिक्स जैसे खेलों में भी उसका यूरोपीय खेल ढांचे से जुड़ाव है।

क्या तुर्किये एशियन गेम्स में खेल सकता है?

किसी देश का अधिकांश भूभाग एशिया में होने का मतलब यह नहीं है कि उसे स्वतः एशियन गेम्स में भाग लेने का अधिकार मिल जाता है। इसके लिए संबंधित खेल संस्थाओं की सदस्यता और भागीदारी के नियम महत्वपूर्ण होते हैं। तुर्किये की एशियन गेम्स में संभावित भागीदारी के लिए OCA की सदस्यता या किसी विशेष भागीदारी व्यवस्था से जुड़े फैसले जरूरी होंगे।

रूस: 75% जमीन एशिया में, लेकिन खेलों में यूरोपीय जुड़ाव

रूस दुनिया के सबसे बड़े देशों में से एक है और उसका लगभग 75% भूभाग एशिया में स्थित है। हालांकि, उसकी बड़ी आबादी यूरोपीय हिस्से में रहती है। मॉस्को और सेंट पीटर्सबर्ग जैसे प्रमुख शहर भी यूरोपीय रूस में हैं। रूस की खेल पहचान लंबे समय से यूरोपीय संस्थाओं से जुड़ी रही है। सोवियत दौर से ही उसकी खेल संरचना का यूरोपीय प्रतियोगिताओं के साथ महत्वपूर्ण संबंध रहा है। फुटबॉल में भी रूस यूरोपीय खेल व्यवस्था का हिस्सा रहा है।

क्या रूस एशियन गेम्स में शामिल हो सकता है?

रूस की एशियन गेम्स में भागीदारी का सवाल केवल उसके भौगोलिक क्षेत्र से तय नहीं होता। इसके लिए OCA की सदस्यता, खेल संगठनों के नियम और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लिए गए फैसले महत्वपूर्ण हैं। रूस के एशियाई क्षेत्रों में एशियाई खेल गतिविधियों से जुड़ाव के कुछ उदाहरण जरूर हैं। याकूतिया में आयोजित चिल्ड्रन ऑफ एशिया गेम्स में विभिन्न देशों के युवा खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं। हालांकि, इस तरह के आयोजनों में भागीदारी और एशियन गेम्स में राष्ट्रीय दल के रूप में हिस्सा लेना अलग-अलग विषय हैं।
ऑस्ट्रेलिया: एशिया का हिस्सा नहीं, फिर भी खेलों में मजबूत जुड़ाव

ऑस्ट्रेलिया भौगोलिक रूप से एशिया का हिस्सा नहीं है, लेकिन खेलों के क्षेत्र में उसका एशिया से गहरा संबंध है। 2006 में ऑस्ट्रेलिया ने ओशिनिया फुटबॉल परिसंघ छोड़कर एशियन फुटबॉल परिसंघ (AFC) की सदस्यता हासिल की। इस बदलाव के पीछे विश्व कप क्वालिफिकेशन से जुड़े अवसर भी एक महत्वपूर्ण कारण थे। ओशिनिया की टीमों के लिए विश्व कप तक पहुंचने का रास्ता लंबे समय तक इंटर-कॉन्टिनेंटल प्लेऑफ से जुड़ा रहा, जबकि एशियाई क्षेत्र में क्वालिफिकेशन के अलग अवसर उपलब्ध थे।
क्या ऑस्ट्रेलिया एशियन गेम्स खेल सकता है?

AFC की सदस्यता का मतलब यह नहीं है कि ऑस्ट्रेलिया को एशियन गेम्स में स्वतः भाग लेने का अधिकार मिल गया है। एशियन गेम्स OCA के तहत आयोजित होते हैं और इसमें भागीदारी के लिए अलग नियम लागू होते हैं। हालांकि, OCA की ओर से ओशिनिया के देशों को कुछ आयोजनों में अतिथि के रूप में शामिल करने के उदाहरण मौजूद हैं। 2017 के एशियन विंटर गेम्स में ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड को अतिथि राष्ट्रीय ओलंपिक समितियों के रूप में शामिल किया गया था। ऑस्ट्रेलिया का एशियाई खेल बाजार से जुड़ाव केवल खेल तक सीमित नहीं है। फुटबॉल और प्रसारण अधिकारों के जरिए भी एशिया के साथ उसके संबंध मजबूत हुए हैं।

सिर्फ भूगोल नहीं, खेल संस्थाएं भी तय करती हैं भागीदारी

रूस, तुर्किये और इजराइल की कहानी बताती है कि किसी देश का एशिया में स्थित होना अपने आप उसे एशियन गेम्स का हिस्सा नहीं बनाता। किसी देश की भागीदारी के पीछे भूगोल के साथ-साथ इतिहास, अंतरराष्ट्रीय संबंध, खेल संगठनों की सदस्यता और राजनीतिक परिस्थितियां भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इसी वजह से एशियन गेम्स में कौन-सा देश हिस्सा लेता है और कौन नहीं, इसे समझने के लिए केवल नक्शा देखना पर्याप्त नहीं है।


नितिन नबीन बोले- युवा रील नहीं, रियल लाइफ जिएं: मेरठ में छात्रों को नशे और शॉर्टकट से बचने की सलाह, 25 JCB से हुआ फूलों का स्वागत

by न्यूज डेस्क

Nitin Nabin Meerut Visit: बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन सोमवार को अपने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के पहले दौरे पर मेरठ पहुंचे। यहां उन्होंने सुभारती यूनिवर्सिटी में आयोजित युवा सम्मेलन में छात्रों से संवाद किया और युवाओं को नशे तथा शॉर्टकट की मानसिकता से दूर रहने की सलाह दी। इस दौरान उनके साथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी भी मंच पर मौजूद रहे।

'रील नहीं, रियल लाइफ जिएं'

युवा सम्मेलन में छात्रों को संबोधित करते हुए नितिन नबीन ने कहा कि आज के समय में युवाओं को नशे और शॉर्टकट की सोच से सबसे ज्यादा प्रभावित होने से बचना चाहिए। उन्होंने युवाओं से वास्तविक जीवन पर ध्यान देने और राष्ट्र को प्राथमिकता देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि युवा रील नहीं, बल्कि रियल लाइफ जिएं और राष्ट्र प्रथम की भावना को आगे बढ़ाएं। नितिन नबीन ने नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियानों का भी जिक्र किया।

25 JCB से फूलों की बारिश, क्रेन से पहनाई गई माला

नितिन नबीन के मेरठ पहुंचने पर बीजेपी कार्यकर्ताओं ने उनका जोरदार स्वागत किया। सोमवार सुबह करीब 10:45 बजे वह काशी टोल प्लाजा पहुंचे, जहां लगभग 3 हजार बीजेपी कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया। स्वागत के दौरान 25 बुलडोजरों से करीब 5 क्विंटल फूल बरसाए गए। इसके अलावा क्रेन की मदद से उन्हें माला पहनाई गई। कार्यकर्ताओं ने बुलडोजरों पर चढ़कर ढोल-नगाड़े बजाए और 'जय श्री राम' के नारे लगाए। नितिन नबीन ने मंच से हाथ जोड़कर कार्यकर्ताओं का अभिवादन स्वीकार किया। इस दौरान उन्होंने राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार सोमेंद्र तोमर के गाल पर हाथ रखकर उनका अभिवादन किया।

शक्ति केंद्र सम्मेलन में 5 हजार संयोजक होंगे शामिल

मेरठ दौरे के दौरान नितिन नबीन दोपहर 1:45 बजे शक्ति केंद्र सम्मेलन में शामिल होंगे। इस बैठक में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के शक्ति केंद्र संयोजकों और मंडल अध्यक्षों के साथ संगठनात्मक मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। बताया गया है कि सम्मेलन में करीब 5 हजार संयोजक शामिल होंगे। बीजेपी की ओर से यह दौरा संगठन को जमीनी स्तर पर सक्रिय करने और कार्यकर्ताओं के साथ संवाद बढ़ाने के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

सपा नेता गौरव गुर्जर हाउस अरेस्ट

नितिन नबीन के मेरठ दौरे के बीच पुलिस ने सपा नेता गौरव गुर्जर को हाउस अरेस्ट कर लिया है। इस कार्रवाई के कारणों और इससे जुड़ी विस्तृत जानकारी की पुष्टि आधिकारिक स्तर पर किया जाना बाकी है। 

यूपी चुनाव की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा दौरा

नितिन नबीन के पश्चिमी यूपी दौरे को बीजेपी की संगठनात्मक गतिविधियों और आगामी चुनावी तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। पार्टी के स्तर पर कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों के साथ बैठकें कर जमीनी संगठन को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। हालांकि, इस दौरे को लेकर राजनीतिक विश्लेषकों की अलग-अलग व्याख्याएं सामने आ रही हैं। आगामी चुनावों के संदर्भ में बीजेपी की रणनीति और प्राथमिकताओं का आकलन पार्टी के आधिकारिक फैसलों और आगे की गतिविधियों से किया जा सकेगा।


Asian Games: भारत की मेडल टैली में 6 पदक, शूटिंग में शानदार प्रदर्शन; हिमांशु को सिल्वर, रुद्रांक्ष को ब्रॉन्ज

by न्यूज डेस्क

Asian Games 2026: जापान के नगोया में आयोजित हो रहे एशियन गेम्स में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन जारी है। भारत ने अब तक 6 मेडल अपने नाम किए हैं, जिनमें 5 पदक शूटिंग और 1 मेडल मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स में आया है। सोमवार को 10 मीटर एयर राइफल इवेंट में हिमांशु ढिल्लों ने सिल्वर और रुद्रांक्ष पाटिल ने ब्रॉन्ज मेडल जीतकर भारत की पदक संख्या बढ़ाई।

10 मीटर एयर राइफल में भारत को दो पदक

मेंस 10 मीटर एयर राइफल के व्यक्तिगत मुकाबले में भारत के हिमांशु ढिल्लों ने 252.4 अंक हासिल कर सिल्वर मेडल जीता। वहीं, रुद्रांक्ष पाटिल 230.9 अंकों के साथ ब्रॉन्ज मेडल जीतने में सफल रहे। चीन के शेंग लिहाओ ने 254.2 अंक हासिल करते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया। टीम इवेंट में भी भारतीय निशानेबाजों ने अच्छा प्रदर्शन किया। पार्थ माने, रुद्रांक्ष पाटिल और हिमांशु ढिल्लों की भारतीय टीम ने कुल 1890.1 अंक हासिल कर सिल्वर मेडल जीता। इस मुकाबले में चीन 1899.9 अंकों के साथ पहले और दक्षिण कोरिया 1884.2 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर रहा।

भारत मेडल टैली में 10वें स्थान पर

एशियन गेम्स की मेडल टैली में भारत फिलहाल 10वें स्थान पर है। भारतीय दल के खाते में 4 सिल्वर समेत कुल 6 मेडल हैं। वहीं, चीन 15 गोल्ड सहित कुल 24 मेडल के साथ पहले स्थान पर है। जापान 6 गोल्ड समेत 23 मेडल के साथ दूसरे और दक्षिण कोरिया 4 गोल्ड सहित 17 मेडल के साथ तीसरे स्थान पर है।

रुद्रांक्ष पाटिल कौन हैं?

रुद्रांक्ष बालासाहेब पाटिल भारत के प्रमुख युवा राइफल निशानेबाजों में शामिल हैं। उनका जन्म 16 दिसंबर 2003 को महाराष्ट्र के ठाणे में हुआ था। वह 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में हिस्सा लेते हैं। साल 2022 में उन्होंने काहिरा वर्ल्ड चैंपियनशिप में व्यक्तिगत और टीम स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीता था। व्यक्तिगत विश्व खिताब जीतने वाले वह अभिनव बिंद्रा के बाद दूसरे भारतीय निशानेबाज बने थे। इसी वर्ष वह 10 मीटर एयर राइफल में वर्ल्ड नंबर-1 भी रहे।

पार्थ माने: जूनियर वर्ल्ड चैंपियन

पार्थ राकेश माने का जन्म 13 नवंबर 2007 को हुआ था। वह 10 मीटर एयर राइफल के निशानेबाज हैं। 2024 में पेरू के लीमा में आयोजित ISSF जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप में उन्होंने गोल्ड मेडल जीतकर जूनियर विश्व खिताब हासिल किया। इसके अलावा, उन्होंने उसी वर्ष जूनियर वर्ल्ड कप में सिल्वर और एशियन चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज मेडल भी जीता। 

हिमांशु ढिल्लों का भी शानदार प्रदर्शन

हिमांशु ढिल्लों भारत के उभरते हुए राइफल निशानेबाज हैं। उनका जन्म 29 सितंबर 2005 को हुआ था। 2025 में उन्होंने ISSF जूनियर वर्ल्ड कप में 2 गोल्ड और 1 ब्रॉन्ज मेडल जीता था। इसके बाद 2026 की एशियन चैंपियनशिप में भी उन्होंने 2 गोल्ड मेडल अपने नाम किए। म्यूनिख में आयोजित 2026 सीनियर वर्ल्ड कप में हिमांशु 9वें स्थान पर रहे थे। इस प्रतियोगिता के क्वालिफिकेशन राउंड में उन्होंने 635.7 अंक हासिल किए थे।

मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स में भी भारत को पदक

शूटिंग के अलावा भारत को मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स में भी सफलता मिली है। सुचिका तारियाल ने ब्रॉन्ज मेडल जीतकर भारतीय पदक तालिका में एक और पदक जोड़ा। शूटिंग में लगातार पदक जीतने के साथ भारतीय खिलाड़ियों ने एशियन गेम्स में अपनी मौजूदगी मजबूत की है।


साहिल की मौत पर बवाल के बीच IIT बॉम्बे ने मांगी माफी, प्रोफेसर पर कार्रवाई, डायरेक्टर के इस्तीफे की खबर को बताया झूठा

by न्यूज डेस्क

IIT Bombay News: आईआईटी बॉम्बे में छात्र साहिल की मौत को लेकर जारी विवाद के बीच संस्थान ने अपने पुराने बयान पर सार्वजनिक रूप से माफी मांगी है। प्रशासन ने माना कि पुलिस जांच पूरी होने से पहले घटना की परिस्थितियों या कारणों पर टिप्पणी करना अनुचित था। इस बीच, छात्रों की मांगों और कैंपस में जारी विरोध के बीच संबंधित प्रोफेसर के खिलाफ कार्रवाई की गई है। वहीं, आईआईटी बॉम्बे के डायरेक्टर के इस्तीफे को लेकर चल रही खबरों को संस्थान ने खारिज कर दिया है। आइए जानते हैं पूरा मामला।

क्या है पूरा मामला?

आईआईटी बॉम्बे के छात्र साहिल की अचानक मौत के बाद कैंपस में विरोध और आक्रोश का माहौल बन गया। घटना के बाद संस्थान की ओर से जारी शुरुआती बयान में कुछ ऐसी परिस्थितियों का उल्लेख किया गया था, जिनकी आधिकारिक पुष्टि जांच के स्तर पर नहीं हुई थी। जांच जारी रहने के दौरान संस्थान के बयान पर सवाल उठने लगे। छात्रों और अन्य लोगों की आपत्तियों के बीच आईआईटी बॉम्बे ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल 'X' पर माफी जारी की।

IIT बॉम्बे ने माफी में क्या कहा?

संस्थान ने अपने आधिकारिक 'X' हैंडल पर साझा किए गए बयान में कहा कि वह साहिल की दुर्भाग्यपूर्ण मृत्यु से जुड़ी परिस्थितियों के संबंध में अपने पिछले संचार में किए गए कथनों के लिए माफी मांगता है। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि घटना से जुड़ी परिस्थितियां अभी संबंधित अधिकारियों की जांच का विषय हैं। जांच पूरी होने और उचित प्रक्रिया के जरिए तथ्यों की पुष्टि होने से पहले घटना का विवरण देना या उसे किसी विशेष रूप में परिभाषित करना अनुचित था। संस्थान के इस बयान को शुरुआती संचार पर अपनी गलती स्वीकार करने के रूप में देखा जा रहा है।

प्रोफेसर के खिलाफ भी कार्रवाई

साहिल की मौत के मामले को लेकर कैंपस में विरोध के बीच संबंधित प्रोफेसर के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई की गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, प्रोफेसर को निलंबित किया गया है। छात्रों की ओर से प्रशासन के रवैये और कथित लापरवाही को लेकर सवाल उठाए गए थे। विरोध के बीच संस्थान ने जांच प्रक्रिया और आगे की कार्रवाई को लेकर कदम उठाए हैं। हालांकि, कार्रवाई के संबंध में पूरी जानकारी और जांच के अंतिम निष्कर्ष आधिकारिक रूप से स्पष्ट होना बाकी है। 

डायरेक्टर के इस्तीफे की खबर को IIT बॉम्बे ने बताया गलत

कैंपस में विरोध प्रदर्शनों के बीच सोशल मीडिया पर आईआईटी बॉम्बे के डायरेक्टर के इस्तीफे की खबरें भी सामने आईं। संस्थान ने इन खबरों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि डायरेक्टर ने इस्तीफा नहीं दिया है। आईआईटी बॉम्बे ने अपने बयान में कहा कि डायरेक्टर के इस्तीफे से जुड़ी खबरें पूरी तरह गलत हैं।

18 सूत्रीय मांगों के साथ छात्र कर रहे प्रदर्शन

साहिल की मौत के बाद कैंपस में छात्रों का विरोध जारी है। छात्र अपनी 18 सूत्रीय मांगों के साथ प्रशासन के सामने विभिन्न मुद्दे उठा रहे हैं। इनमें डायरेक्टर के इस्तीफे की मांग भी शामिल बताई जा रही है। फिलहाल, मामले की जांच संबंधित अधिकारी कर रहे हैं। साहिल की मौत की वास्तविक परिस्थितियां और इसके पीछे की वजह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी।


भारत का प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन वैश्विक औसत से आधे से भी कम, PM मोदी ने जलवायु संरक्षण पर गिनाईं उपलब्धियां

by न्यूज डेस्क

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण संरक्षण को लेकर भारत के प्रयासों और उपलब्धियों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत का प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन वैश्विक औसत के आधे से भी कम है और विकसित देशों की तुलना में करीब छह गुना कम है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत इन आंकड़ों को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मजबूती से रखता है और दुनिया के साथ मिलकर पर्यावरण संरक्षण के नए मानक स्थापित करने की दिशा में काम कर रहा है।

वैश्विक पर्यावरण अभियानों में भारत की भूमिका

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इंटरनेशनल सोलर एलायंस, ग्लोबल बायोफ्यूल एलायंस, इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस और मिशन लाइफ (LiFE) जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच भारत की पर्यावरण प्रतिबद्धता को आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत अपनी पारंपरिक पर्यावरणीय सोच को आधुनिक तकनीक और नीतियों के साथ जोड़कर सतत विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। पीएम मोदी के मुताबिक, पिछले 12 वर्षों में पर्यावरण से जुड़े कई क्षेत्रों में भारत ने महत्वपूर्ण प्रगति की है। उन्होंने विशेष रूप से अक्षय ऊर्जा, सौर ऊर्जा और कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने के प्रयासों का उल्लेख किया।

सौर ऊर्जा क्षमता में बड़ा इजाफा

प्रधानमंत्री ने बताया कि करीब 12 वर्ष पहले भारत की सौर ऊर्जा क्षमता लगभग 2 गीगावॉट थी, जो अब बढ़कर 160 गीगावॉट से अधिक हो चुकी है। उन्होंने कहा कि पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत 50 लाख से ज्यादा घरों में रूफटॉप सोलर पैनल लगाए जा चुके हैं। उन्होंने यह भी बताया कि योजना के तहत सरकार की ओर से घरों को करीब 80 हजार रुपये तक की आर्थिक सहायता दी गई है। वहीं, पीएम-कुसुम योजना के तहत किसानों के खेतों में सोलर पंप लगाने का काम किया जा रहा है। सरकार के अनुसार, भारत ने अपने पेरिस समझौते के तहत निर्धारित कुछ जलवायु लक्ष्यों को तय समय से पहले हासिल किया है। इनमें गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता और अर्थव्यवस्था की उत्सर्जन तीव्रता से जुड़े लक्ष्य शामिल हैं।

वन ग्रिड और एलईडी बल्ब का जिक्र

पीएम मोदी ने कहा कि वन नेशन, वन ग्रिड परियोजना को पूरा किया गया है। इसके अलावा, देशभर में करोड़ों एलईडी बल्ब पहुंचाए गए हैं, जिससे ऊर्जा की बचत और उत्सर्जन में कमी लाने में मदद मिली है। उन्होंने दावा किया कि अकेले सौर ऊर्जा के इस्तेमाल से भारत में करीब 20 करोड़ टन कार्बन उत्सर्जन को रोकने में सफलता मिली है।
श्री अन्न और प्राकृतिक खेती पर जोर

प्रधानमंत्री ने पर्यावरण संरक्षण के साथ कृषि क्षेत्र में टिकाऊ तरीकों को अपनाने पर भी जोर दिया। उन्होंने श्री अन्न यानी मिलेट्स को कम पानी में उगाई जाने वाली फसलों का विकल्प बताया। पीएम मोदी के अनुसार, भारत में मिलेट्स का निर्यात बढ़कर करीब 1.5 लाख टन हो गया है। भारत की पहल के बाद संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2023 को अंतरराष्ट्रीय मिलेट वर्ष के रूप में मनाया था। उन्होंने प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में लगभग 12.5 लाख हेक्टेयर भूमि पर 24 हजार क्लस्टर बनाए जाने की जानकारी दी। साथ ही, करीब तीन हजार जलवायु अनुकूल फसल किस्मों के विकास का भी उल्लेख किया।

वन क्षेत्र और पेड़ लगाने के अभियान का जिक्र

प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में बहुत घने वन क्षेत्र में 22 प्रतिशत से अधिक वृद्धि हुई है। उन्होंने ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान का भी उल्लेख किया और बताया कि इसके तहत करोड़ों पेड़ लगाए गए हैं। इस अभियान का उद्देश्य लोगों को पर्यावरण संरक्षण और वृक्षारोपण से जोड़ना है।

प्लास्टिक कचरे से निपटने की कोशिश

प्लास्टिक प्रदूषण पर बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि भारत ने सिंगल यूज प्लास्टिक पर रोक लगाने के साथ-साथ रिड्यूस, रीयूज और रिसाइकिल के सिद्धांतों को बढ़ावा दिया है। उन्होंने कहा कि गोवर्धन योजना के माध्यम से गोबर और अन्य जैविक कचरे को उपयोगी संसाधनों में बदलने की दिशा में काम किया जा रहा है। इससे कचरा प्रबंधन और वैकल्पिक ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने का प्रयास है।

‘पर्यावरण संरक्षण भारत की सोच का हिस्सा’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि पर्यावरण से जुड़े ये आंकड़े केवल भारत के विकास की कहानी नहीं बताते, बल्कि मानवता के भविष्य के लिए देश के योगदान को भी दर्शाते हैं। उन्होंने धरती को मां मानने वाली भारतीय परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि इसी सोच के आधार पर भारत जिम्मेदार और टिकाऊ भविष्य के निर्माण की दिशा में काम कर रहा है। स्रोत: प्रधानमंत्री के वक्तव्य और सरकारी आंकड़ों के आधार पर। आंकड़ों की सटीक तारीख और संबंधित योजनाओं की नवीनतम स्थिति के लिए आधिकारिक रिकॉर्ड देखना जरूरी है।


नंदीग्राम उपचुनाव में बड़ा मोड़, ममता बनर्जी ने कांग्रेस प्रत्याशी को दिया समर्थन

by न्यूज डेस्क

पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव में शुक्रवार को बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस गुट की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने अपना नामांकन वापस ले लिया। इसके कुछ ही समय बाद ममता बनर्जी ने नंदीग्राम सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने का ऐलान किया। ममता बनर्जी ने साफ किया कि उनका गुट अब इस सीट पर कोई नया उम्मीदवार नहीं उतारेगा। उन्होंने इसे विपक्षी एकजुटता से जोड़ते हुए कहा कि सभी मिलकर चुनाव लड़ेंगे। यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है, जब नंदीग्राम उपचुनाव को लेकर टीएमसी के दोनों गुटों के बीच पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर भी विवाद चल रहा है।
शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात के बाद वापस लिया नामांकन

संचिता प्रधान डे ने 18 सितंबर को अपना नामांकन वापस लिया। नामांकन वापस लेने से पहले उनकी पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री और नंदीग्राम से विधायक शुभेंदु अधिकारी से नबन्ना में मुलाकात हुई थी। इस मुलाकात के कुछ घंटे बाद उनके चुनावी मैदान से हटने की खबर सामने आई। हालांकि, संचिता प्रधान डे ने सार्वजनिक रूप से अपने नामांकन वापस लेने की वजह स्पष्ट नहीं की है। उनके इस फैसले के बाद नंदीग्राम के चुनावी समीकरण में अचानक बदलाव आ गया है।

राहुल गांधी के फोन का ममता ने किया जिक्र

नामांकन वापसी के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में ममता बनर्जी ने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने उनसे फोन पर बातचीत की थी। उन्होंने INDIA गठबंधन के प्रति एकजुटता जताते हुए कहा कि विपक्षी दल मिलकर लड़ाई लड़ेंगे। ममता ने यह भी कहा कि नंदीग्राम में उनका गुट कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान का समर्थन करेगा। इस तरह अब नंदीग्राम में ममता बनर्जी के गुट का कोई उम्मीदवार चुनाव मैदान में नहीं रहेगा।

चुनाव आयोग पर ममता के गंभीर आरोप

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग और बीजेपी पर भी कई आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि चुनावी प्रक्रिया में उनकी पार्टी को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई। ममता ने SIR और EVM को लेकर भी सवाल उठाए और चुनाव आयोग की भूमिका पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं पर दबाव बनाया जा रहा है और कई कार्यकर्ता जेल में हैं। इन आरोपों पर संबंधित पक्षों की प्रतिक्रियाएं अलग-अलग हो सकती हैं। इसलिए इन दावों को ममता बनर्जी के आरोप के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

टीएमसी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर भी विवाद

नंदीग्राम का यह घटनाक्रम टीएमसी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर चल रहे विवाद के बीच सामने आया है। चुनाव आयोग ने उपचुनाव के लिए ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को 'Mamata All India Trinamool Congress' नाम और 'फुटबॉल खिलाड़ी' चुनाव चिह्न आवंटित किया है। वहीं दूसरे गुट को 'Democratic Trinamool Congress' नाम और 'लिफाफा' चुनाव चिह्न दिया गया है। दोनों गुटों को उपचुनाव के दौरान पुराने 'All India Trinamool Congress' नाम और 'जोड़ा घास फूल' चुनाव चिह्न के इस्तेमाल से रोक दिया गया है। ममता बनर्जी ने इस फैसले को अंतरिम बताते हुए कानूनी चुनौती जारी रखने की बात कही है।

नंदीग्राम में अब कौन-कौन मैदान में?

नंदीग्राम उपचुनाव के लिए ममता गुट ने पहले 13 सितंबर को स्कूल शिक्षिका संचिता प्रधान डे को उम्मीदवार बनाया था। हालांकि, अब उन्होंने नामांकन वापस ले लिया है। 
बीजेपी ने नंदीग्राम से हसीरानी रथ को उम्मीदवार बनाया है। वह शुभेंदु अधिकारी के पूर्व निजी सहायक चंद्रनाथ रथ की मां हैं। वहीं कांग्रेस ने मिलन प्रधान को उम्मीदवार बनाया है। दूसरे टीएमसी गुट की ओर से मोहम्मद एतेशामुल हक मैदान में हैं।

6 अक्टूबर को होगा मतदान

नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर 2026 को उपचुनाव होना है, जबकि मतगणना 9 अक्टूबर को होगी। नंदीग्राम सीट शुभेंदु अधिकारी के सीट छोड़ने के बाद खाली हुई थी। वहीं रेजीनगर सीट एजेयूपी नेता हुमायूं कबीर के इस्तीफे के बाद रिक्त हुई। नंदीग्राम में ममता गुट के उम्मीदवार के नामांकन वापस लेने और इसके बाद कांग्रेस को समर्थन देने के ऐलान ने उपचुनाव की तस्वीर को अचानक बदल दिया है। अब चुनावी मुकाबला किन मुद्दों और समीकरणों के साथ आगे बढ़ता है, इस पर सभी की नजर रहेगी।


निठारी कांड में बरी हुए सुरेंद्र कोली की हरिद्वार में मौत, चाय की दुकान में फंदे से लटका मिला शव, मौके पर पहुंच जांच में जुटी पुलिस

by न्यूज डेस्क

हरिद्वार: नोएडा के चर्चित निठारी कांड में आरोपी रहे सुरेंद्र कोली की शुक्रवार को हरिद्वार में मौत हो गई। पुलिस के मुताबिक, उसका शव भूपतवाला इलाके में एक चाय की दुकान के अंदर फंदे से लटका मिला। कोली पिछले कुछ समय से इसी इलाके में रह रहा था और चाय की दुकान चला रहा था। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार, घटना की सूचना शुक्रवार सुबह करीब 11:30 बजे मिली। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पहचान के लिए मिले दस्तावेजों की जांच के बाद मृतक की पहचान सुरेंद्र कोली के रूप में की गई। मौत की परिस्थितियों की जांच की जा रही है और फिलहाल आत्महत्या के कारण का पता नहीं चल पाया है। कुछ रिपोर्टों के मुताबिक, मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला।

सुप्रीम कोर्ट से नवंबर 2025 में मिली थी राहत

सुरेंद्र कोली निठारी कांड से जुड़े कई मामलों में आरोपी रहा था। वर्षों तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 11 नवंबर 2025 को उसके खिलाफ लंबित अंतिम मामले में क्यूरेटिव याचिका स्वीकार करते हुए उसे बरी कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट के फैसले में कहा गया था कि इस मामले में कोली की दोषसिद्धि का आधार बने साक्ष्यों को कानूनी कसौटी पर बनाए रखना संभव नहीं था। कोर्ट ने यह भी दर्ज किया कि इसी साक्ष्य के आधार पर जुड़े अन्य मामलों में भी उसे बरी किया जा चुका था।

2005-06 में सामने आया था निठारी कांड

नोएडा के निठारी इलाके में वर्ष 2005-06 के दौरान बच्चों और महिलाओं के लापता होने के कई मामले सामने आए थे। जांच के दौरान 29 दिसंबर 2006 को पुलिस सेक्टर-31 स्थित कारोबारी मोनिंदर सिंह पंढेर के घर D-5 तक पहुंची। घर के पीछे नाले और आसपास तलाशी के दौरान मानव अवशेष, कपड़े और अन्य सामान मिलने के बाद मामला देशभर में चर्चा में आ गया। इसके बाद मोनिंदर सिंह पंढेर और उसके घरेलू सहायक सुरेंद्र कोली को गिरफ्तार किया गया। जनवरी 2007 में मामले की जांच CBI को सौंप दी गई। जांच के दौरान कई अलग-अलग FIR दर्ज हुईं और कोली पर हत्या, दुष्कर्म, अपहरण तथा सबूत मिटाने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए। सुरेंद्र कोली को अलग-अलग मामलों में दोषी ठहराया गया था और उसे कई बार मौत की सजा भी सुनाई गई। बाद में न्यायिक प्रक्रिया के दौरान कई मामलों में उसकी दोषसिद्धियां खत्म हुईं और अंततः नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने अंतिम लंबित मामले में भी उसे बरी कर दिया। निठारी कांड में सह-आरोपी रहे मोनिंदर सिंह पंढेर को भी अलग-अलग मामलों में अदालतों से राहत मिली थी और अक्टूबर 2023 में जेल से रिहा किया गया था।


Semicon India 2026: PM मोदी ने बताया भारत का फ्यूचर मंत्र, बोले- दुनिया का भारत पर बढ़ रहा भरोसा

by न्यूज डेस्क

नई दिल्ली: भारत में सेमीकंडक्टर उद्योग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित Semicon India 2026 की शुरुआत हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 सितंबर को इस तीन दिवसीय कार्यक्रम का उद्घाटन किया। यह आयोजन 17 से 19 सितंबर तक चलेगा, जिसमें दुनिया के कई देशों की कंपनियां, निवेशक, शोधकर्ता और छात्र हिस्सा ले रहे हैं। कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के बढ़ते सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम, युवाओं की भूमिका और तकनीकी क्षेत्र में देश की संभावनाओं पर बात की। उन्होंने कहा कि दुनियाभर में भारत के प्रति भरोसा लगातार मजबूत हो रहा है।

भारत के विकास और वैश्विक भरोसे पर PM मोदी का जोर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में भारत की तेज आर्थिक और तकनीकी प्रगति का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कम समय में किसी देश के लिए इस स्तर का विकास हासिल करना आसान नहीं होता। पीएम मोदी ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र में सरकार, उद्योग, निवेशकों और अन्य भागीदारों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने भारत में फैबलेस सेमीकंडक्टर कंपनियों के विकास और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इकोसिस्टम को मजबूत करने की दिशा में चल रहे प्रयासों पर भी बात की।

एक लाख छात्रों को ट्रेनिंग देने का लक्ष्य

प्रधानमंत्री मोदी ने सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए कुशल युवाओं की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत में हर साल बड़ी संख्या में इंजीनियर तैयार होते हैं और इस प्रतिभा का इस्तेमाल चिप डिजाइन तथा अन्य तकनीकी क्षेत्रों में किया जा सकता है। सरकार ने एक लाख छात्रों को सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री के लिए प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा है। प्रधानमंत्री ने युवा शोधकर्ताओं को आगे आने और रिसर्च एवं इनोवेशन में योगदान देने का आह्वान किया। इस पहल का उद्देश्य सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए जरूरी तकनीकी कौशल और विशेषज्ञता को बढ़ावा देना है।

सेमीकॉन इंडिया 2026 में क्या खास है?

इस साल के कार्यक्रम की थीम ‘सिलिकॉन से सिस्टम तक: इकोसिस्टम का निर्माण’ रखी गई है। आयोजन में सेमीकंडक्टर की पूरी वैल्यू चेन को प्रदर्शित किया जा रहा है। 
इसमें चिप डिजाइन से लेकर सेमीकंडक्टर मटेरियल, फैब्रिकेशन और एडवांस्ड पैकेजिंग तक की प्रक्रियाओं को दिखाया जाएगा। इसका उद्देश्य लोगों को चिप निर्माण और उससे जुड़े पूरे तकनीकी इकोसिस्टम की जानकारी देना है। कार्यक्रम में ‘सैंड टू सिलिकॉन टू सिस्टम’ अनुभव के जरिए सेमीकंडक्टर के विकास की पूरी प्रक्रिया को समझाने पर भी जोर दिया गया है।

52 देशों की कंपनियों की भागीदारी

आयोजन में विभिन्न देशों की कंपनियां और प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। कार्यक्रम में जापान, दक्षिण कोरिया, मलेशिया, नीदरलैंड, सिंगापुर और स्वीडन के छह कंट्री पवेलियन भी मौजूद हैं। इसके अलावा, 12 स्टेट बूथ, स्टार्टअप पवेलियन, इनोवेशन शोकेस, स्टूडेंट हैकाथॉन और वर्कफोर्स डेवलपमेंट पवेलियन जैसे हिस्से भी शामिल किए गए हैं। 
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस आयोजन में 600 से अधिक कंपनियों और स्टार्टअप के शामिल होने की उम्मीद है। करीब 50 हजार विजिटर्स और 52 देशों से 400 से अधिक एग्जीक्यूटिव्स की भागीदारी का अनुमान है। कार्यक्रम में 150 से अधिक स्पीकर्स भी शामिल होंगे।

सेमीकंडक्टर क्या है और क्यों जरूरी है?

सेमीकंडक्टर एक ऐसा पदार्थ है, जिसकी विद्युत चालकता को नियंत्रित किया जा सकता है। सिलिकॉन इसका सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला उदाहरण है। सेमीकंडक्टर से बनी चिप्स का इस्तेमाल मोबाइल फोन, कंप्यूटर, कार, मेडिकल उपकरण और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी तकनीकों में होता है। चिप के अंदर मौजूद अरबों छोटे ट्रांजिस्टर इलेक्ट्रिकल सिग्नल को नियंत्रित और प्रोसेस करने में मदद करते हैं। यही वजह है कि आधुनिक तकनीक और डिजिटल अर्थव्यवस्था में सेमीकंडक्टर उद्योग की अहम भूमिका है।

भारत के लिए सेमीकंडक्टर सेक्टर क्यों महत्वपूर्ण?

सेमीकंडक्टर क्षेत्र में निवेश और उत्पादन बढ़ने से भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, तकनीकी रोजगार, रिसर्च और सप्लाई चेन के क्षेत्र में अवसर मिल सकते हैं। 
Semicon India 2026 के जरिए भारत सरकार उद्योग, वैश्विक कंपनियों और युवा प्रतिभाओं के बीच सहयोग को बढ़ावा देने पर ध्यान दे रही है। प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन में तकनीकी आत्मनिर्भरता, कुशल युवा और भारत के बढ़ते सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को प्रमुखता दी गई।


गुरुग्राम हिट एंड रन: 2 किलोमीटर तक बाइकर का पीछा करने का आरोप, SIT जांच में सामने आए कई अहम तथ्य

by न्यूज डेस्क

गुरुग्राम: गोल्फ कोर्स रोड पर महिला बाइकर शिवानी चौहान उर्फ सिया को कार से टक्कर मारने के मामले की जांच तेज हो गई है। पुलिस ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। जांच में सीसीटीवी फुटेज और बाइकर्स द्वारा रिकॉर्ड किए गए वीडियो को अहम सबूत माना जा रहा है। पुलिस के अनुसार, आरोपी कल्याण बैंसला और उसके चचेरे भाई लवनीश को दो दिन की पुलिस रिमांड में भेजा गया है।

शराब के नशे में होने के आरोप, मेडिकल रिपोर्ट का इंतजार

मामले से जुड़ी रिपोर्टों में दावा किया गया है कि घटना के समय आरोपी शराब के नशे में था। हालांकि, उसके नशे में होने की पुष्टि के लिए पुलिस ने ब्लड और यूरिन सैंपल जांच के लिए भेजे हैं। इसकी रिपोर्ट आने के बाद ही इस संबंध में स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। आरोप है कि कार में आरोपी के साथ तीन अन्य लोग मौजूद थे। पुलिस अब घटना के समय कार में सवार सभी लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।

सीसीटीवी फुटेज में पीछा करने और कहासुनी की जांच

जांच एजेंसियां घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, टक्कर से पहले कार और बाइकर्स के बीच कहासुनी हुई थी।पीड़िता शिवानी ने आरोप लगाया है कि आरोपी ने उनका पीछा किया और जानबूझकर बाइक को टक्कर मारी। वहीं, आरोपी की ओर से टक्कर को दुर्घटना बताया गया है। पुलिस अब वीडियो फुटेज और अन्य सबूतों के आधार पर घटना का क्रम स्पष्ट करने की कोशिश कर रही है।

आरोपी और उसके चचेरे भाई की पुलिस रिमांड

गुरुग्राम की अदालत ने कल्याण बैंसला और उसके चचेरे भाई लवनीश को दो दिन की पुलिस रिमांड में भेज दिया है। पुलिस ने क्राइम सीन को दोबारा रीक्रिएट करने और जांच आगे बढ़ाने के लिए रिमांड मांगी थी। अदालत ने पुलिस की मांग स्वीकार कर ली। मामले में अगली सुनवाई 18 सितंबर को निर्धारित की गई है।

SIT करेगी मामले की विस्तृत जांच

गुरुग्राम पुलिस कमिश्नर ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल गठित किया है। SIT का नेतृत्व एसीपी (क्राइम अगेंस्ट वुमन) सुशीला देवी कर रही हैं। जांच में डिजिटल वीडियो, सीसीटीवी फुटेज और घटनास्थल से जुड़े साक्ष्यों को शामिल किया जा रहा है। पुलिस का उद्देश्य टक्कर से पहले और बाद की घटनाओं का क्रम समझना और आरोपों की जांच करना है।

पीड़िता ने अन्य आरोपियों पर भी कार्रवाई की मांग की

शिवानी चौहान ने मामले में आरोपी के साथ कार में मौजूद अन्य लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की है। पुलिस उनकी भूमिका की जांच कर रही है। मामले में हत्या के प्रयास और पीछा करने समेत कई धाराएं जोड़ी गई हैं। हालांकि, इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा। गुरुग्राम हिट एंड रन मामले में SIT जांच और पुलिस रिमांड के बाद अब सीसीटीवी फुटेज, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य डिजिटल सबूतों पर नजर है।


दिल्ली SIR पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, 33 लाख मतदाताओं को नोटिस का मामला पहुंचा अदालत

by न्यूज डेस्क

नई दिल्ली: दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। इस प्रक्रिया के दौरान करीब 33 लाख मतदाताओं को ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ और ‘अनमैप्ड’ जैसी श्रेणियों के तहत जांच के लिए नोटिस दिए जाने का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। याचिका में चुनाव आयोग की प्रक्रिया और नोटिस से जुड़ी जानकारी को लेकर सवाल उठाए गए हैं। मामले पर मंगलवार को सुनवाई प्रस्तावित है।

33 लाख मतदाताओं को क्यों भेजे जा रहे नोटिस?

दिल्ली में SIR के तहत मतदाता सूची में दर्ज नामों और पुराने रिकॉर्ड के बीच मिलान किया जा रहा है। इस दौरान कुछ मतदाताओं के नामों के सामने ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ यानी रिकॉर्ड में तार्किक विसंगति और ‘अनमैप्ड’ जैसी श्रेणियां दर्ज की गई हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, करीब 33.1 लाख मतदाता इस जांच के दायरे में हैं। इनमें 19.33 लाख मतदाताओं को 11 प्रकार की लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी के तहत चिह्नित किया गया है, जबकि 13.79 लाख से अधिक मतदाता अनमैप्ड श्रेणी में हैं।

याचिका में चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सवाल

मामले को चुनौती देने वाली याचिका में आरोप लगाया गया है कि नोटिस से संबंधित जरूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा रही है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि मतदाताओं को यह स्पष्ट रूप से पता चलना चाहिए कि उनके नाम के सामने विसंगति किस आधार पर दर्ज की गई है। याचिका में यह भी दावा किया गया है कि आयोग की वेबसाइट पर संबंधित मतदाताओं के नाम और नोटिस से जुड़ी जानकारी पर्याप्त रूप से उपलब्ध नहीं है। इससे लोगों को अपनी स्थिति समझने और समय पर जवाब देने में परेशानी हो सकती है।

मतदाता सूची से नाम हटने की चिंता

SIR प्रक्रिया के तहत किसी मतदाता के रिकॉर्ड में विसंगति पाए जाने का अर्थ अपने आप यह नहीं है कि उसका नाम गलत या फर्जी है। हालांकि, संबंधित मतदाताओं को आवश्यक दस्तावेजों के साथ अपनी स्थिति स्पष्ट करनी पड़ सकती है। इस प्रक्रिया को लेकर चिंता जताई जा रही है कि यदि लोगों को नोटिस का कारण स्पष्ट नहीं होगा, तो वे अपने दावे और आपत्तियां प्रभावी ढंग से दर्ज नहीं करा पाएंगे।

मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

दिल्ली SIR से जुड़ा यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट के समक्ष है। याचिका में नोटिस जारी करने की प्रक्रिया और चुनाव आयोग की ओर से अपनाए जा रहे नियमों पर सवाल उठाए गए हैं। मंगलवार को होने वाली सुनवाई में अदालत के समक्ष इन मुद्दों पर आगे की कार्रवाई और प्रक्रिया से जुड़े निर्देशों पर चर्चा हो सकती है। हालांकि, सुनवाई से पहले अदालत के संभावित फैसले को लेकर कोई निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।


PM मोदी के 76वें जन्मदिन पर देशभर में जश्न, अमित शाह बोले- ‘तप, त्याग और अटूट संकल्प की गाथा है प्रधानमंत्री का जीवन’

by न्यूज डेस्क

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज, 17 सितंबर को अपना 76वां जन्मदिन मना रहे हैं। इस मौके पर देशभर से उन्हें शुभकामनाएं मिल रही हैं। भारतीय जनता पार्टी (BJP) और विभिन्न राज्यों में प्रधानमंत्री के जन्मदिन के अवसर पर सेवा एवं जनकल्याण से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। बीजेपी ने प्रधानमंत्री के 25 वर्षों के सार्वजनिक जीवन को चिह्नित करने के लिए 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक ‘सेवा संकल्प अभियान’ शुरू किया है। इस दौरान देशभर में सामाजिक सेवा, जनसंपर्क और जनकल्याण से जुड़े कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

अमित शाह ने दी जन्मदिन की बधाई

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने प्रधानमंत्री के सार्वजनिक जीवन और राष्ट्रसेवा के प्रति उनके समर्पण का उल्लेख किया। अमित शाह ने अपने संदेश में प्रधानमंत्री मोदी के जीवन को “तप, त्याग और अटूट संकल्प की गाथा” बताया। उन्होंने प्रधानमंत्री के अच्छे स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना करते हुए विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में देश की प्रगति की बात कही।

राजनाथ सिंह ने विकास कार्यों का किया जिक्र

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी प्रधानमंत्री मोदी को जन्मदिन की बधाई दी। अपने संदेश में उन्होंने बुनियादी ढांचे, डिजिटल कनेक्टिविटी, गरीब कल्याण, नवाचार और उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में हुई प्रगति का उल्लेख किया। राजनाथ सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत विकसित भारत के लक्ष्य की ओर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री के उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना की।

नितिन नवीन ने राष्ट्रसेवा और आत्मनिर्भरता को लेकर कही बात

बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने प्रधानमंत्री को शुभकामनाएं देते हुए उनके राष्ट्रसेवा और सुशासन के प्रति समर्पण का उल्लेख किया। उन्होंने अपने संदेश में ‘नेशन फर्स्ट’ की भावना और भारत की विकास यात्रा पर जोर दिया। साथ ही, प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में देश के आत्मनिर्भरता और विकास के क्षेत्र में आगे बढ़ने की बात कही।

सीएम योगी ने वाराणसी से सेवा अभियान का किया जिक्र

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री मोदी को जन्मदिन की बधाई दी। उन्होंने प्रधानमंत्री के 25 वर्षों के सार्वजनिक जीवन और जनसेवा का उल्लेख करते हुए वाराणसी से सेवा संकल्प अभियान के शुभारंभ की जानकारी साझा की। योगी आदित्यनाथ ने विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर लखनऊ में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों का भी जिक्र किया। इनमें विश्वकर्मा स्वरोजगार एवं स्वदेशी मेला 2026, विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को सहायता और श्रमिकों से जुड़े कार्यक्रम शामिल हैं।

CM पुष्कर सिंह धामी ने दी शुभकामनाएं

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जन्मदिन की बधाई दी। उन्होंने प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत के विकास, नवाचार और वैश्विक स्तर पर देश की पहचान का उल्लेख किया। धामी ने प्रधानमंत्री के अच्छे स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना करते हुए कहा कि देश विकास के रास्ते पर आगे बढ़ता रहे।

अखिलेश यादव ने भी पीएम मोदी को बधाई दी

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने प्रधानमंत्री के स्वस्थ, सक्रिय और सार्थक जीवन की कामना की।

देशभर में आयोजित हो रहे कार्यक्रम

प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन के अवसर पर देश के अलग-अलग हिस्सों में सेवा और जनकल्याण से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इनमें रक्तदान शिविर, स्वास्थ्य शिविर, स्वच्छता अभियान और दीप प्रज्ज्वलन जैसे कार्यक्रम शामिल हैं। बीजेपी के सेवा संकल्प अभियान के तहत 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक विभिन्न राज्यों और क्षेत्रों में कार्यक्रम प्रस्तावित हैं। प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर नेताओं की शुभकामनाओं के साथ देशभर में आयोजित कार्यक्रमों के जरिए सेवा और जनकल्याण पर भी जोर दिया जा रहा है।


गुरुग्राम हिट एंड रन: महिला बाइक सवार को कार से टक्कर मारने वाला आरोपी गिरफ्तार, हत्या के प्रयास की धारा भी लगी

by न्यूज डेस्क

गुरुग्राम के गोल्फ कोर्स रोड पर महिला बाइक सवार सिया को कार से टक्कर मारने के मामले में पुलिस ने आरोपी कल्याण बैंसला को गिरफ्तार कर लिया है। वायरल वीडियो के बाद सामने आए इस मामले में पुलिस ने कार्रवाई तेज करते हुए आरोपी को हिरासत में लिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने अब हत्या के प्रयास की धारा भी जोड़ दी है।

गोल्फ कोर्स रोड पर क्या हुआ था?

यह घटना रविवार को गुरुग्राम के गोल्फ कोर्स रोड पर हुई थी। सिया अपने कुछ अन्य बाइक सवार दोस्तों के साथ जा रही थीं। इसी दौरान एक कार ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी। टक्कर के बाद सिया सड़क पर गिर गईं और कुछ दूरी तक घिसटती हुई चली गईं। पूरी घटना उनके बाइक पर लगे कैमरे में रिकॉर्ड हो गई थी, जिसके बाद वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। सिया का आरोप है कि कार चालक ने पहले उनका पीछा किया और उन्हें रुकने का इशारा किया। इसके बाद कार ने उनकी बाइक को टक्कर मारी और मौके से निकल गई। सिया ने घटना को गंभीर बताते हुए सवाल उठाया था कि अगर यह महज दुर्घटना थी तो कार चालक ने रुककर उनकी मदद क्यों नहीं की।

आरोपी ने क्या कहा?

गिरफ्तारी से पहले मीडिया से बातचीत में कल्याण बैंसला ने जानबूझकर बाइक को टक्कर मारने के आरोप से इनकार किया था। उसका दावा था कि सड़क पर कई बाइक सवार उसकी कार को ओवरटेक कर रहे थे और इसी दौरान बाइक और कार के बीच टक्कर हुई। उसने यह भी कहा था कि वह डर की वजह से मौके पर नहीं रुका, क्योंकि उसे बाइक सवारों से हमला होने का डर था ... हालांकि, सिया ने आरोपी के इस बचाव को खारिज किया और कहा कि वायरल वीडियो में घटना से पहले कार के उनके पीछे आने और टक्कर की स्थिति को देखा जा सकता है।

अब आगे क्या होगा?

आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब घटना की पूरी परिस्थितियों की जांच करेगी। पुलिस वायरल वीडियो, घटनास्थल से जुड़े साक्ष्यों और दोनों पक्षों के बयानों के आधार पर यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि टक्कर किन परिस्थितियों में हुई थी। फिलहाल इस मामले में सबसे बड़ा अपडेट यह है कि जिस आरोपी की गिरफ्तारी को लेकर सिया ने पुलिस से सवाल किए थे, उसे अब गिरफ्तार कर लिया गया है और केस में हत्या के प्रयास की धारा भी जोड़ दी गई है।


केदारनाथ यात्रा तीसरे दिन भी बंद, 500 से ज्यादा यात्री फंसे; 5 राज्यों में बारिश का अलर्ट

by न्यूज डेस्क

उत्तराखंड में खराब मौसम और पहाड़ी से लगातार गिर रहे पत्थरों के चलते केदारनाथ धाम की पैदल यात्रा लगातार तीसरे दिन भी रोक दी गई है। चीरबासा के पास रास्ते में पहाड़ी से पत्थर गिरने की घटनाओं को देखते हुए प्रशासन ने यात्रियों की सुरक्षा के लिए यह फैसला लिया है। हालांकि, केदारनाथ के लिए हेली सेवा मंगलवार से शुरू कर दी गई है। सुरक्षा बलों और रेस्क्यू टीमों ने अब तक करीब 7 हजार तीर्थयात्रियों को सुरक्षित निकालकर गौरीकुंड की तरफ भेजा है। इसके बावजूद 500 से अधिक यात्रियों के अभी भी रास्ते में फंसे होने की जानकारी सामने आई है। पैदल मार्ग पूरी तरह सुरक्षित होने तक यात्रा शुरू करने को लेकर कोई फैसला नहीं लिया गया है।

बिहार में 49 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित

बिहार में भी लगातार बारिश और नदियों के बढ़े जलस्तर ने चिंता बढ़ा दी है। राज्य के 15 जिलों में 49.67 लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित बताए जा रहे हैं। वहीं, प्रदेश की पांच प्रमुख नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। मौसम विभाग ने मंगलवार को बिहार के 22 जिलों में यलो अलर्ट जारी किया है। प्रशासन की ओर से बाढ़ प्रभावित इलाकों में स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

यूपी समेत कई राज्यों में बारिश का अलर्ट

मौसम विभाग ने उत्तर प्रदेश के 72 जिलों में बारिश की संभावना जताई है। वहीं राजस्थान में 17 सितंबर तक बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया गया है। हिमाचल प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में हल्की बारिश होने की संभावना है। हरियाणा के 8 जिलों में यलो अलर्ट है, जबकि पंजाब के 18 जिलों में आज बारिश होने का अनुमान है। लगातार बारिश के कारण पहाड़ी राज्यों में भूस्खलन और सड़क बाधित होने का खतरा बना हुआ है। ऐसे में प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीमें संवेदनशील क्षेत्रों पर नजर बनाए हुए हैं।

सिक्किम में लैंडस्लाइड के बाद 128 लोगों को सुरक्षित निकाला गया

सिक्किम के ग्यालशिंग जिले के रिंबी इलाके में भारी बारिश और भूस्खलन के बाद 28 घरों में रहने वाले 128 लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया है। सिक्किम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SSDMA) के अनुसार, 14 सितंबर को भारी बारिश और बाढ़ के बाद इलाके का दोबारा निरीक्षण किया गया। इसके बाद प्रभावित लोगों को रिंबी ग्राम पंचायत केंद्र में शिफ्ट किया गया। वहीं, सिंगलिटाम में सात प्रभावित परिवारों के लिए राहत केंद्र बनाया गया है। इस केंद्र में 33 से अधिक लोग रह रहे हैं, जिनमें बुजुर्ग और बच्चे भी शामिल हैं। बारिश और भूस्खलन के चलते उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और सिक्किम जैसे पहाड़ी राज्यों में यात्रा और सड़क संपर्क प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है। प्रशासन ने लोगों से मौसम की स्थिति को देखते हुए सावधानी बरतने की अपील की है।


PM मोदी ने पुतिन को गिफ्ट की तिरुक्कुरल की रूसी कॉपी, जानिए इस किताब का रूस से क्या है कनेक्शन

by न्यूज डेस्क

नई दिल्ली में BRICS सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को एक खास किताब भेंट की। भारत मंडपम में BRICS शिखर सम्मेलन की औपचारिक शुरुआत से पहले हुई मुलाकात के दौरान पीएम मोदी ने पुतिन को महान तमिल कृति ‘तिरुक्कुरल’ का रूसी भाषा में अनुवाद गिफ्ट किया। किताब भेंट करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने इसके महत्व के बारे में पुतिन को जानकारी दी। उन्होंने कहा कि संत तिरुवल्लुवर की यह रचना मानव जीवन के कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रकाश डालती है। पीएम मोदी ने उम्मीद जताई कि रूसी भाषा में तिरुक्कुरल का अनुवाद भारत और रूस के बीच लोगों के आपसी संपर्क और सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करने में मदद करेगा।

क्या है तिरुक्कुरल?

तिरुक्कुरल तमिल साहित्य की सबसे प्रसिद्ध और प्राचीन रचनाओं में से एक है। इसे कई बार ‘तमिल वेद’ के नाम से भी जाना जाता है। इस महान कृति के रचयिता कवि और दार्शनिक तिरुवल्लुवर माने जाते हैं। करीब दो हजार साल से भी अधिक पुरानी इस रचना में कुल 133 अध्याय और 1,330 दोहे हैं। इसमें नैतिकता, सदाचार, प्रेम, सामाजिक जीवन, शासन और मानवीय मूल्यों जैसे विषयों पर गहरी बातें कही गई हैं।  तिरुक्कुरल की खासियत यह है कि इसके संदेश किसी एक दौर या समाज तक सीमित नहीं हैं। यही वजह है कि इसका दुनिया की कई भाषाओं में अनुवाद किया जा चुका है।

तमिल संस्कृति में खास स्थान

तिरुक्कुरल को तमिल संस्कृति और साहित्य की महत्वपूर्ण पहचान माना जाता है। तमिलनाडु में इसे स्कूलों में पढ़ाया जाता है और तिरुवल्लुवर को संत, कवि और दार्शनिक के रूप में विशेष सम्मान दिया जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी अपने कई भाषणों में तिरुवल्लुवर और उनकी शिक्षाओं का उल्लेख कर चुके हैं। कन्याकुमारी में स्थापित तिरुवल्लुवर की विशाल प्रतिमा भी उनके सम्मान और तमिल संस्कृति में उनके महत्व को दर्शाती है। महात्मा गांधी और रूसी साहित्यकार लियो टॉल्स्टॉय जैसे कई प्रसिद्ध व्यक्तित्व भी तिरुक्कुरल की शिक्षाओं से प्रभावित रहे हैं।

तिरुक्कुरल का रूस से क्या कनेक्शन है?

तिरुक्कुरल को पुतिन को रूसी भाषा में भेंट किए जाने के पीछे भारत-रूस के पुराने साहित्यिक और सांस्कृतिक संबंधों की भी झलक मिलती है। भारतीय दर्शन और साहित्य में रूसी विद्वानों की रुचि लंबे समय से रही है। यूरोपीय भाषाओं में हुए अनुवादों के जरिए तिरुक्कुरल की शिक्षाएं रूस के साहित्यिक और बौद्धिक जगत तक भी पहुंचीं। रूसी साहित्यकार लियो टॉल्स्टॉय के संदर्भ में भी तिरुक्कुरल का उल्लेख मिलता है। माना जाता है कि उन्होंने 19वीं सदी में इसके अनुवाद के जरिए इस तमिल कृति को जाना था। तिरुक्कुरल में सदाचार, करुणा और अहिंसा जैसे मूल्यों पर दिए गए जोर को टॉल्स्टॉय के विचारों से भी जोड़ा जाता है। यही वजह है कि पीएम मोदी की ओर से पुतिन को तिरुक्कुरल का रूसी अनुवाद भेंट करना सिर्फ एक किताब का उपहार नहीं, बल्कि भारत और रूस के बीच पुराने सांस्कृतिक संबंधों और साझा साहित्यिक विरासत की ओर भी एक प्रतीकात्मक संकेत माना जा रहा है।


BRICS Summit Menu: विदेशी मेहमानों को परोसा जाएगा भारत के 6 क्षेत्रों का स्वाद, निमकी से मुरुक्कू तक खास मेन्यू तैयार

by न्यूज डेस्क

नई दिल्ली में होने वाले 18वें BRICS शिखर सम्मेलन को लेकर तैयारियां तेज हैं। भारत इस बार BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और सम्मेलन में शामिल होने वाले विदेशी नेताओं और प्रतिनिधिमंडलों के स्वागत के लिए सुरक्षा से लेकर खानपान तक विशेष इंतजाम किए गए हैं। विदेशी मेहमानों को भारतीय संस्कृति और खानपान की विविधता से रूबरू कराने के लिए दिल्ली के प्रमुख लग्जरी होटलों में खास मेन्यू तैयार किया गया है। 12 और 13 सितंबर को भारत मंडपम में होने वाले सम्मेलन में ब्राजील, रूस, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इंडोनेशिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात समेत कई देशों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। मेहमानों के ठहरने के लिए दिल्ली के प्रमुख होटलों में विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं।

ताज महल होटल में दिखेगी भारत की पाक विविधता

विदेशी प्रतिनिधिमंडलों के लिए Taj Mahal, New Delhi ने खास तौर पर भारतीय पारंपरिक व्यंजनों को अपने मेन्यू में जगह दी है। होटल की ओर से ‘Tradition to Table’ थीम के तहत ऐसा मेन्यू तैयार किया गया है, जिसमें भारत के अलग-अलग हिस्सों के पारंपरिक स्वाद को शामिल किया गया है। होटल के शेफ ने इन व्यंजनों को तैयार करते समय अपनी पारिवारिक और घरेलू पाक परंपराओं से प्रेरणा ली है। इसका उद्देश्य विदेशी मेहमानों को सिर्फ खाना परोसना नहीं, बल्कि भारतीय खानपान की विविधता और मेहमाननवाजी का अनुभव कराना है। मेन्यू में देश के छह अलग-अलग क्षेत्रों के लोकप्रिय स्नैक्स शामिल किए गए हैं। इनमें कश्मीर के मसालेदार अखरोट, पुरानी दिल्ली का मैदा काजू, राजस्थान की मिनी कचौरी, बंगाल की क्रिस्पी कुचो निमकी, महाराष्ट्र की कुरकुरी भाकरवाड़ी और तमिलनाडु का मुरुक्कू शामिल हैं।

ललित होटल के मेन्यू में कबाब से लेकर बाजरे की डिश तक

The LaLiT New Delhi ने भी BRICS प्रतिनिधिमंडल के लिए भारतीय पाक विरासत को केंद्र में रखते हुए खास मेन्यू तैयार किया है। होटल के मेन्यू में गलौटी कबाब, तंदूरी रोटियां और बाजरे से तैयार पारंपरिक व्यंजन शामिल किए गए हैं। इसके साथ ही विदेशी मेहमानों के स्वाद को ध्यान में रखते हुए कुछ अंतरराष्ट्रीय प्रभाव वाले व्यंजन भी तैयार किए गए हैं। इनमें मिसो पेस्ट के साथ ब्रेज्ड बैंगन, धीमी आंच पर पकाई गई चाइनीज पत्ता गोभी और एम्बर सॉस के साथ जापानी शैली की मीठी राजमा डिश को भी खास जगह दी गई है।

'द लीला' में भी तैयारियां पूरी

The Leela Palace New Delhi की ओर से भी BRICS मेहमानों के लिए विशेष खानपान की तैयारी की गई है। यहां भारतीय स्वाद के साथ मिलेट्स से तैयार व्यंजनों को भी मेन्यू में शामिल किए जाने की तैयारी है। इस तरह BRICS सम्मेलन के दौरान विदेशी मेहमानों को भारत के अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों के पारंपरिक स्वाद का अनुभव कराने की कोशिश की जा रही है।

BRICS सम्मेलन के लिए सुरक्षा के भी कड़े इंतजाम

खानपान और मेहमानों के स्वागत के साथ सम्मेलन की सुरक्षा को लेकर भी व्यापक इंतजाम किए गए हैं। भारत मंडपम और आसपास के इलाकों में बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है। जानकारी के मुताबिक, सुरक्षा व्यवस्था में करीब 15 हजार पुलिसकर्मी, 200 पैरामिलिट्री कंपनियां और 500 से ज्यादा CCTV कैमरे लगाए गए हैं। सम्मेलन को देखते हुए दिल्ली में कई मार्गों पर ट्रैफिक प्रतिबंध भी लागू किए गए हैं। भारत की मेजबानी में होने वाले इस BRICS सम्मेलन में जहां वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होगी, वहीं विदेशी मेहमानों के सामने भारत की पाक कला, संस्कृति और अतिथि सत्कार की झलक भी पेश की जाएगी।


केदारनाथ में बादल फटने से लैंडस्लाइड, पैदल मार्ग बंद; यूपी-बिहार में बाढ़, MP में भी बिगड़े हालात

by न्यूज डेस्क

देश के कई राज्यों में लगातार बारिश ने मुश्किलें बढ़ा दी हैं। उत्तराखंड के केदारनाथ में शुक्रवार को बादल फटने के बाद लैंडस्लाइड हुई, जिससे पहाड़ों से बड़े-बड़े बोल्डर गिरने के कारण केदारनाथ पैदल मार्ग बंद हो गया। वहीं उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश के कई इलाकों में भी बारिश और बाढ़ से हालात गंभीर बने हुए हैं।

केदारनाथ में बादल फटने के बाद रास्ता बंद

उत्तराखंड के केदारनाथ क्षेत्र में शुक्रवार को बादल फटने के बाद अचानक मलबा और बोल्डर नीचे आ गए। लैंडस्लाइड के कारण केदारनाथ जाने वाला पैदल मार्ग प्रभावित हुआ है। मार्ग पर बड़े पत्थर और मलबा जमा होने से आवाजाही बाधित हो गई है। मौसम विभाग ने उत्तराखंड के सभी जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना जताई है। राज्य में यलो अलर्ट जारी किया गया है। देहरादून, टिहरी, रुद्रप्रयाग, चमोली, नैनीताल, बागेश्वर और पिथौरागढ़ में कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है।

यूपी में 26 जिले बाढ़ की चपेट में

उत्तर प्रदेश में लगातार हो रही बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर ने कई जिलों में परेशानी बढ़ा दी है। गंगा और यमुना समेत 10 से ज्यादा नदियां उफान पर हैं। बाढ़ की वजह से राज्य के करीब 26 जिले प्रभावित बताए जा रहे हैं, जबकि 4 लाख से ज्यादा लोगों पर इसका असर पड़ा है। मिर्जापुर में बाढ़ के पानी के कारण एक पुल प्रभावित हुआ है। वहीं फर्रुखाबाद में हाईवे तक पानी पहुंच गया है, जिससे आवागमन पर असर पड़ा है। कई निचले इलाकों में पानी भरने के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

मध्य प्रदेश में फिर सक्रिय हुआ मानसून

मध्य प्रदेश में करीब तीन दिन के अंतराल के बाद मानसून सिस्टम एक बार फिर सक्रिय हुआ है। मौसम विभाग ने शुक्रवार को राज्य के 12 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। गुरुवार रात भोपाल, नर्मदापुरम और विदिशा समेत कई इलाकों में बारिश हुई। दमोह में बारिश के बाद बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। शहर की कई कॉलोनियों में पानी भरने से जनजीवन प्रभावित हुआ है। मौसम विभाग ने लोगों को भारी बारिश के दौरान सावधानी बरतने और जलभराव वाले इलाकों में अनावश्यक आवाजाही से बचने की सलाह दी है।

बिहार में 44 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित

बिहार में भी नदियों का जलस्तर लगातार चिंता बढ़ा रहा है। राज्य की 8 नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। करीब 14 जिले बाढ़ की स्थिति से जूझ रहे हैं।  बाढ़ से लगभग 2,360 गांव प्रभावित बताए जा रहे हैं और करीब 44 लाख लोगों पर इसका असर पड़ा है। प्रशासन की ओर से प्रभावित इलाकों में राहत एवं बचाव कार्य जारी है। करीब 27,954 लोग राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं।

कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट

उत्तराखंड के अलावा देश के कई हिस्सों में मानसूनी गतिविधियां सक्रिय हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में भारी बारिश के साथ लैंडस्लाइड का खतरा बना हुआ है, जबकि मैदानी इलाकों में नदियों के बढ़ते जलस्तर और जलभराव से परेशानी बढ़ रही है। फिलहाल प्रशासन और मौसम विभाग की ओर से लोगों से सतर्क रहने की अपील की जा रही है। खासकर नदी, नाले और जलभराव वाले इलाकों में रहने वाले लोगों को मौसम की स्थिति पर नजर रखने की सलाह दी गई है।


प्रधानमंत्री मोदी और भारत के रुख की चीन में तारीफ, शी जिनपिंग के दौरे पर चीनी मीडिया की नजर

by न्यूज डेस्क

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग शनिवार से रविवार तक नई दिल्ली में होने वाले 18वें ब्रिक्स सम्मेलन में हिस्सा लेने भारत पहुंचेंगे। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने गुरुवार को उनके दौरे की आधिकारिक जानकारी दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर हो रही यह यात्रा करीब सात साल बाद शी जिनपिंग का भारत दौरा होगा। ऐसे में इसे भारत और चीन के रिश्तों में नई शुरुआत की संभावनाओं से जोड़कर देखा जा रहा है। शी जिनपिंग के भारत दौरे को लेकर चीन की सरकारी मीडिया में भी काफी चर्चा है। चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में भारतीय और चीनी विशेषज्ञों के हवाले से भारत के रुख और इस यात्रा के संभावित प्रभावों पर सकारात्मक टिप्पणी की है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में शी जिनपिंग के दौरे को एक अहम कूटनीतिक पहल के तौर पर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि इस यात्रा से दोनों देशों के बीच लंबे समय से चल रहे तनाव को कम करने और द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर करने की कोशिशों को गति मिल सकती है। भारतीय थिंक टैंक से जुड़े मोहम्मद साकिब ने कहा कि चीनी राष्ट्रपति की मौजूदगी से इस बार ब्रिक्स सम्मेलन का महत्व और बढ़ गया है। वहीं, सिंघुआ यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञ छ्यान फंग ने कहा कि भारत इस दौरे को दोनों देशों के रिश्तों में सुधार के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर के रूप में देख रहा है। दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय मुलाकात की संभावना भी जताई जा रही है।

सीमा वार्ता को भी अहम माना

नई दिल्ली में ब्रिक्स सम्मेलन की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। राजधानी में जगह-जगह सम्मेलन से जुड़े पोस्टर और बैनर लगाए गए हैं। सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई है। सम्मेलन स्थल भारत मंडपम में सजावट और अन्य तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। चीनी विशेषज्ञ छ्यान फंग ने अगस्त में हुई भारत-चीन सीमा वार्ता का भी उल्लेख किया। दोनों देशों के बीच हुई 25वें दौर की विशेष प्रतिनिधि स्तर की बातचीत में आठ सूत्री सहमति बनी थी। इसे द्विपक्षीय संबंधों में सुधार की दिशा में एक सकारात्मक संकेत माना गया है।

भारत-चीन व्यापार पर भी जोर

ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट में भारत की आर्थिक स्थिति और चीन के साथ उसके व्यापारिक संबंधों का भी जिक्र किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की अर्थव्यवस्था के करीब 6.8 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान है। इसी अवधि में भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय व्यापार करीब 151 अरब डॉलर तक पहुंचने की बात कही गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस व्यापारिक आंकड़े के साथ चीन भारत के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में शामिल हो गया है। मोहम्मद साकिब ने भारत की बदलती विदेश नीति पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि नई परिस्थितियों में भारत अपनी रणनीति पर दोबारा विचार कर रहा है। उनके मुताबिक, केवल अमेरिका के साथ करीबी संबंधों के जरिए भारत के विकास को आगे बढ़ाने की धारणा पर्याप्त साबित नहीं हुई है। साकिब ने भारत और चीन के बीच सदियों पुराने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों का भी उल्लेख किया। ऐसे में शी जिनपिंग का भारत दौरा केवल ब्रिक्स सम्मेलन तक सीमित न रहकर दोनों एशियाई देशों के बीच रिश्तों की आगे की दिशा तय करने के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


लाल किले के पास धमाका आत्मघाती हमला था? NIA चार्जशीट में उमर उन नबी को लेकर बड़ा दावा

by न्यूज डेस्क

दिल्ली के लाल किले के पास 10 नवंबर 2025 को हुए धमाके की जांच में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने अपनी चार्जशीट में कई अहम दावे किए हैं। एजेंसी के मुताबिक, यह घटना सामान्य IED विस्फोट नहीं बल्कि कथित तौर पर आत्मघाती हमला था। NIA का दावा है कि धमाके के समय आरोपी उमर उन नबी (A-1) कार के अंदर ही मौजूद था और उसी ने कार में लगाए गए IED को एक विशेष कमांड मैकेनिज्म के जरिए सक्रिय किया। जांच एजेंसी ने चार्जशीट में कथित आतंकी मॉड्यूल की विचारधारा, उसके नेटवर्क और हमले की तैयारियों से जुड़े कई पहलुओं का उल्लेख किया है। NIA के अनुसार, मॉड्यूल से जुड़े आरोपी कट्टरपंथी विचारों से प्रभावित थे और हिंसक गतिविधियों की तैयारी में जुटे थे।

‘लोन मुजाहिद पॉकेट बुक’ का भी जिक्र

NIA ने अपनी चार्जशीट में बरामद कथित प्रचार सामग्री का भी उल्लेख किया है। एजेंसी के मुताबिक, ‘लोन मुजाहिद पॉकेट बुक’ नाम की सामग्री में आतंकवादी गतिविधियों से संबंधित वैचारिक और ऑपरेशनल जानकारी मौजूद थी। चार्जशीट के अनुसार, इस सामग्री में विस्फोटकों और रिमोट तरीके से विस्फोट करने जैसी तकनीकों से जुड़ी जानकारी के साथ निगरानी, सुरक्षा एजेंसियों से बचने और गुप्त तरीके से गतिविधियां संचालित करने जैसे विषयों का उल्लेख था। NIA का आरोप है कि ऐसी सामग्री का इस्तेमाल कथित मॉड्यूल के सदस्यों को हिंसक गतिविधियों के लिए तैयार करने और अपनी गतिविधियों को सुरक्षा एजेंसियों से छिपाने के लिए किया जा रहा था।

हिंसक संघर्ष को धार्मिक कर्तव्य के तौर पर पेश करने का आरोप

चार्जशीट में एक अन्य प्रचार दस्तावेज का भी जिक्र किया गया है। NIA के मुताबिक, इसमें लोकतांत्रिक और मौजूदा राजनीतिक व्यवस्थाओं के खिलाफ हिंसक संघर्ष की विचारधारा को बढ़ावा दिया गया था। जांच एजेंसी का दावा है कि दस्तावेज में मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था को कथित तौर पर अत्याचारी बताया गया और उसे हिंसक तरीके से खत्म करने की विचारधारा को जगह दी गई थी। NIA के अनुसार, इस सामग्री में मुस्लिम समुदाय के सम्मान को कथित तौर पर ‘जिहाद’ से जोड़ने और लगातार हथियारबंद संघर्ष को धार्मिक कर्तव्य के रूप में पेश करने की कोशिश की गई थी। एजेंसी का मानना है कि ऐसी विचारधारा ने कथित मॉड्यूल को वैचारिक आधार प्रदान किया।
गजवा-ए-हिंद के नाम पर हिंसा का समर्थन करने का आरोप

जांच एजेंसी ने बरामद सामग्री में ‘गजवा-ए-हिंद’ के नाम पर हिंसक गतिविधियों को सही ठहराने का भी आरोप लगाया है। चार्जशीट के मुताबिक, कुछ दस्तावेजों में इराक, अफगानिस्तान और अमेरिका में हुए विभिन्न विद्रोही आंदोलनों का उल्लेख किया गया था। NIA का कहना है कि बरामद सामग्री केवल वैचारिक प्रचार तक सीमित नहीं थी, बल्कि कथित तौर पर हिंसक गतिविधियों की तैयारी और संचालन से संबंधित जानकारी भी उपलब्ध कराती थी। एजेंसी ने इन दस्तावेजों को कथित मॉड्यूल की विचारधारा और उसकी गतिविधियों को समझने के लिए महत्वपूर्ण सबूतों में शामिल किया है।

हमले की तैयारी को लेकर भी कई दावे

चार्जशीट में NIA ने कथित तौर पर सुरक्षा एजेंसियों से बचने के लिए अपनाई जाने वाली रणनीतियों का भी उल्लेख किया है। एजेंसी के मुताबिक, इसमें पहचान छिपाना, गुप्त तरीके से किसी स्थान में प्रवेश करना और अलग-अलग फर्जी पहचान का इस्तेमाल करना शामिल था। इसके अलावा, चार्जशीट में घात लगाकर हमला करने, अकेले हमलावर के जरिए ऑपरेशन और फिदायीन अथवा आत्मघाती हमलों से संबंधित रणनीतियों का भी उल्लेख किया गया है। NIA का आरोप है कि इस तरह की सामग्री का इस्तेमाल कथित मॉड्यूल के सदस्यों को आतंकवादी गतिविधियों के लिए मानसिक और व्यावहारिक रूप से तैयार करने में किया जा रहा था।

AGuH मॉड्यूल की भूमिका की भी जांच

लाल किले के पास हुए धमाके की जांच में NIA ने अंसार ग़ज़वत-उल-हिंद (AGuH) से जुड़े कथित मॉड्यूल की भूमिका पर भी फोकस किया है। एजेंसी ने चार्जशीट में विचारधारा, प्रचार सामग्री और कथित ऑपरेशनल दस्तावेजों को जांच की अलग-अलग कड़ियों के तौर पर पेश किया है। NIA इन सभी पहलुओं को जोड़कर धमाके के पीछे मौजूद कथित नेटवर्क और उसकी गतिविधियों की तस्वीर सामने लाने की कोशिश कर रही है।

उमर उन नबी को लेकर क्या है NIA का दावा?

चार्जशीट का सबसे अहम हिस्सा आरोपी उमर उन नबी से जुड़ा है। NIA के मुताबिक, 10 नवंबर 2025 को धमाके के वक्त उमर कार के अंदर मौजूद था और उसी ने कार में लगाए गए IED को सक्रिय किया। एजेंसी के इस दावे के आधार पर जांच में धमाके को कथित आत्मघाती हमला माना गया है। साथ ही, मामले में कथित आतंकी नेटवर्क और हमले की योजना को लेकर जांच को आगे बढ़ाया गया है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि चार्जशीट में लगाए गए आरोप अभी न्यायिक रूप से सिद्ध नहीं हुए हैं। आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत में चलने वाली सुनवाई और पूरी न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।


दिल्ली में अवैध PG और हॉस्टलों पर चलेगा बुलडोजर, CM रेखा गुप्ता ने दिए जांच के आदेश; सत्य निकेतन हादसे में 5 गिरफ्तार

by न्यूज डेस्क

दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में पांच मंजिला PG बिल्डिंग के ढहने के बाद राजधानी में अवैध निर्माण और असुरक्षित इमारतों को लेकर प्रशासन सख्त हो गया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दिल्ली नगर निगम (MCD) को अवैध रूप से संचालित हो रहे PG और हॉस्टलों की जांच करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही नियमों का उल्लंघन करने वाली इमारतों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा गया है। सरकार के निर्देश के बाद MCD ने सत्य निकेतन में हादसे वाली इमारत के आसपास मौजूद कुछ निर्माणों पर कार्रवाई शुरू कर दी है। इनमें एक गर्ल्स PG भी शामिल है। कार्रवाई की आशंका के बीच वहां रह रही छात्राओं को PG खाली कर दूसरी जगह शिफ्ट किया जा रहा है। मंगलवार तक कुल 24 संपत्तियों के खिलाफ तोड़फोड़ की कार्रवाई की जा चुकी थी, जबकि 7 अवैध ढांचों को सील किया गया था।

PG हादसे में 7 लोगों की मौत, अब तक 5 गिरफ्तार

सत्य निकेतन में 6 सितंबर को पांच मंजिला PG इमारत अचानक भरभराकर गिर गई थी। हादसे में 7 लोगों की जान चली गई। मामले की जांच के दौरान पुलिस ने अब तक पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें PG मालिक, संचालक और लेबर कॉन्ट्रैक्टर समेत अन्य आरोपी शामिल हैं। दिल्ली पुलिस ने बुधवार को सुधांशु नाम के युवक को भी गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, वह ‘हॉस्टल डेज’ नाम से इस इमारत में PG संचालित कर रहा था। उसका पार्टनर शुभम त्यागी फिलहाल फरार बताया जा रहा है। जांच में सामने आया है कि दोनों ने अगस्त 2025 में यह इमारत लीज पर ली थी। इससे पहले पुलिस ने बिल्डिंग मालिक हरिराम बंसल, उनकी पत्नी उर्मिला, बेटे महेश और लेबर कॉन्ट्रैक्टर सनोज को गिरफ्तार किया था।

कोर्ट में पेश किए गए आरोपी

सोमवार रात हरिराम बंसल, उर्मिला और उनके बेटे महेश को पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया। सुनवाई के बाद हरिराम और उर्मिला को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया, जबकि महेश को दो दिन की पुलिस हिरासत मिली। पुलिस पूछताछ में महेश ने बताया कि PG संचालित करने वाली कंपनी की शिकायत के बाद बेसमेंट में जमा पानी और सीलन की समस्या को दूर करने के लिए मरम्मत का काम कराया जा रहा था। पुलिस की जांच में यह भी सामने आया है कि बेसमेंट से पानी निकालने के बाद निर्माण कार्य के दौरान पावर ट्रॉवेल मशीन का इस्तेमाल किया जा रहा था। जांच एजेंसियों को आशंका है कि मशीन से पैदा हुई कंपन और पहले से कमजोर बिल्डिंग स्ट्रक्चर के बीच संबंध हो सकता है। हालांकि, हादसे की अंतिम वजह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

पड़ोस के गर्ल्स PG की दीवारों में भी दिखी थीं दरारें

सत्य निकेतन में ‘हॉस्टल डेज’ PG के बगल में मौजूद ‘कनक लता गर्ल्स PG’ पर भी प्रशासन की कार्रवाई हुई है। इस हॉस्टल में रहने वाली छात्राओं ने हादसे से पहले अपने कमरों की दीवारों और छत में दिखाई दे रही दरारों के वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किए थे। बताया गया कि दिल्ली विश्वविद्यालय की सेकेंड ईयर की छात्राएं अर्निका और मानसी ने हादसे से कुछ मिनट पहले अपने कमरे का वीडियो रिकॉर्ड किया था। वीडियो में दीवार और छत पर दरारें नजर आ रही थीं। वीडियो में अर्निका को यह कहते हुए सुना गया कि इमारत गिरने जैसी स्थिति लग रही है।

सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला

सत्य निकेतन PG हादसे का मामला अब सुप्रीम कोर्ट भी पहुंच चुका है। मामले पर सुनवाई के दौरान जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने संकेत दिया कि भवनों की सुरक्षा का मुद्दा सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं रखा जाएगा। अदालत देशभर में जर्जर और अवैध इमारतों की स्थिति की समीक्षा कर सकती है। 
सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त एमिकस क्यूरी सीनियर एडवोकेट अजीत सिन्हा ने अदालत के सामने 6 सितंबर को सत्य निकेतन में हुई दुर्घटना का उल्लेख किया था। वह अवैध और असुरक्षित इमारतों से जुड़े एक पुराने मामले में अदालत की सहायता कर रहे हैं। अदालत पहले भी देशभर में अवैध और असुरक्षित निर्माण को लेकर दिशा-निर्देश जारी कर चुकी है। अब इन निर्देशों के पालन की स्थिति पर भी नजर रखी जा रही है।

अवैध PG और जर्जर इमारतों पर बढ़ेगी निगरानी

सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली में अवैध PG, हॉस्टल और कमजोर इमारतों की सुरक्षा को लेकर सवाल और गंभीर हो गए हैं। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद MCD की जांच और कार्रवाई का दायरा बढ़ने की संभावना है। आने वाले दिनों में यह देखा जाएगा कि राजधानी में कितने PG और हॉस्टल नियमों के मुताबिक संचालित हो रहे हैं और कितने भवन सुरक्षा मानकों का उल्लंघन कर रहे हैं। 


धरती पर ‘सूरज’ बनाने की दिशा में भारत की बड़ी छलांग, PRAGYA टोकामक में पहली बार बना प्लाज्मा

by न्यूज डेस्क

भारत में न्यूक्लियर फ्यूजन यानी परमाणु संलयन तकनीक को लेकर प्राइवेट सेक्टर ने एक अहम उपलब्धि हासिल की है। बेंगलुरु की फ्यूजन टेक्नोलॉजी स्टार्टअप प्रनोस फ्यूजन ने अपने टोकामक PRAGYA में पहली बार प्लाज्मा पैदा करने में सफलता हासिल की है। कंपनी के मुताबिक, यह उपलब्धि भारत में निजी क्षेत्र की फ्यूजन रिसर्च के लिए एक महत्वपूर्ण शुरुआती कदम है। करीब 40 सेंटीमीटर रेडियस वाले PRAGYA टोकामक को लगभग आठ महीने में तैयार किया गया है। फिलहाल इसका उद्देश्य सीधे बिजली पैदा करना नहीं है, बल्कि फ्यूजन से जुड़ी तकनीकों पर प्रयोग करना, प्लाज्मा को नियंत्रित करने के तरीके विकसित करना और अलग-अलग प्रणालियों का परीक्षण करना है। 

क्या है PRAGYA टोकामक?

PRAGYA को एक प्रयोगात्मक फ्यूजन मशीन के तौर पर विकसित किया गया है। इस पर लंबे समय तक प्लाज्मा से जुड़े प्रयोग किए जाने की योजना है। कंपनी इसे करीब 20 वर्षों तक संचालित करने का लक्ष्य लेकर चल रही है। इस दौरान हर साल लगभग 3,000 प्लाज्मा शॉट लेने की योजना है। यानी औसतन प्रतिदिन करीब 10 से 12 बार प्लाज्मा पैदा कर उसके व्यवहार से जुड़ा डेटा जुटाया जा सकता है। वैज्ञानिकों के लिए यह डेटा भविष्य में बड़े और ज्यादा उन्नत फ्यूजन रिएक्टर विकसित करने में उपयोगी साबित हो सकता है।

आखिर टोकामक होता क्या है?

टोकामक एक विशेष प्रकार की मशीन है, जिसका इस्तेमाल बेहद गर्म प्लाज्मा को मजबूत चुंबकीय क्षेत्र की मदद से नियंत्रित करने के लिए किया जाता है। फ्यूजन प्रक्रिया में गैस को अत्यधिक तापमान तक गर्म किया जाता है। इस स्थिति में गैस प्लाज्मा में बदल जाती है। इसके बाद छोटे परमाणु नाभिकों को आपस में जोड़कर ऊर्जा हासिल करने की कोशिश की जाती है। यही प्रक्रिया प्राकृतिक रूप से सूर्य के भीतर भी होती है, जहां परमाणु संलयन से भारी मात्रा में ऊर्जा पैदा होती है। वैज्ञानिक लंबे समय से इसी प्रक्रिया को धरती पर नियंत्रित तरीके से दोहराकर स्वच्छ और बड़े पैमाने पर ऊर्जा उत्पादन का रास्ता तलाश रहे हैं।

PRAGYA में किस तरह के प्रयोग होंगे?

PRAGYA पर शुरुआती फोकस प्लाज्मा को स्थिर और बेहतर तरीके से नियंत्रित करने पर रहेगा। इसके साथ टोकामक के डिजाइन, प्लाज्मा कंट्रोल सिस्टम और प्लाज्मा की निगरानी एवं जांच से जुड़ी तकनीकों का भी परीक्षण किया जाएगा। कंपनी हाई टेम्परेचर सुपरकंडक्टिंग यानी HTS मैग्नेट तकनीक पर भी काम करने की योजना बना रही है। ऐसे सुपरकंडक्टिंग मैग्नेट भविष्य की फ्यूजन मशीनों में प्लाज्मा को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। लगातार प्रयोगों से मिलने वाला डेटा कंपनी को फ्यूजन तकनीक की अलग-अलग चुनौतियों को समझने में मदद करेगा। यही अनुभव आगे बड़े रिएक्टर के डिजाइन और तकनीकी सिस्टम को विकसित करने में इस्तेमाल किया जा सकता है।

2030 तक बड़े रिएक्टर का लक्ष्य

प्रनोस फ्यूजन ने PRAGYA के बाद के चरणों के लिए भी महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किए हैं। कंपनी की योजना वर्ष 2027 तक HTS मैग्नेट सिस्टम को सक्रिय करने की है। इसके बाद कंपनी वर्ष 2030 तक PraniQ नाम का नेट एनर्जी गेन रिएक्टर विकसित करने का लक्ष्य रखती है। नेट एनर्जी गेन का सरल अर्थ है कि फ्यूजन प्रक्रिया से हासिल होने वाली ऊर्जा, उस प्रक्रिया को संचालित करने में खर्च की गई ऊर्जा से अधिक हो। हालांकि, यह फिलहाल कंपनी का निर्धारित लक्ष्य है और इसे हासिल करने के लिए आगे कई तकनीकी चुनौतियों का समाधान करना होगा। महत्वपूर्ण बात यह है कि PRAGYA खुद नेट एनर्जी गेन रिएक्टर नहीं है। यह मुख्य रूप से प्रयोग और तकनीक विकसित करने के लिए तैयार की गई मशीन है।

फ्यूजन वैज्ञानिकों को तैयार करने पर भी जोर

प्रनोस फ्यूजन का फोकस केवल मशीन और तकनीक तक सीमित नहीं है। कंपनी फ्यूजन रिसर्च के लिए वैज्ञानिकों, प्लाज्मा फिजिसिस्ट और छात्रों को प्रशिक्षित करने की दिशा में भी काम करना चाहती है। PRAGYA पर लंबे समय तक होने वाले प्रयोगों के जरिए शोधकर्ताओं और छात्रों को वास्तविक फ्यूजन सिस्टम के साथ काम करने और प्लाज्मा फिजिक्स को समझने का अवसर मिल सकता है। कंपनी को उम्मीद है कि इससे भारत में फ्यूजन रिसर्च के लिए एक मजबूत प्रतिभा आधार तैयार करने में मदद मिलेगी।
भारत के फ्यूजन मिशन के लिए क्यों अहम है यह कदम?

धरती पर सूर्य जैसी फ्यूजन प्रक्रिया को नियंत्रित करना दुनिया की सबसे चुनौतीपूर्ण वैज्ञानिक परियोजनाओं में से एक माना जाता है। इसके लिए बेहद गर्म प्लाज्मा को नियंत्रित रखना और उससे लगातार ऊर्जा हासिल करना बड़ी तकनीकी चुनौती है। ऐसे में PRAGYA में पहली बार प्लाज्मा बनना अंतिम मंजिल नहीं, बल्कि एक शुरुआती पड़ाव है। आने वाले वर्षों में इस मशीन पर होने वाले प्रयोगों और उनसे मिलने वाले डेटा से यह तय होगा कि प्रनोस फ्यूजन अपने बड़े रिएक्टर के लक्ष्य की दिशा में कितनी तेजी से आगे बढ़ पाती है। अगर कंपनी अपने निर्धारित चरणों को सफलतापूर्वक पूरा करती है, तो इससे भारत के निजी फ्यूजन रिसर्च सेक्टर को मजबूती मिलने के साथ भविष्य की फ्यूजन ऊर्जा तकनीक में देश की भूमिका भी बढ़ सकती है।


बनभूलपुरा में 3500 से ज्यादा मकान, मस्जिद-मदरसे और बुलडोजर का डर... रेलवे जमीन विवाद पर आज सुप्रीम कोर्ट में अहम फैसला

by न्यूज डेस्क

हल्द्वानी के बनभूलपुरा में रेलवे की जमीन पर कथित अतिक्रमण का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। सुप्रीम कोर्ट आज इस विवाद से जुड़े अहम पहलू पर फैसला सुनाने वाला है। फैसले से पहले इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस बल की तैनाती की गई है। इस विवाद के केंद्र में हजारों घर, धार्मिक स्थल और करीब 50 हजार लोगों की आबादी बताई जा रही है। बनभूलपुरा में रेलवे की करीब 30 हेक्टेयर यानी लगभग 78 एकड़ जमीन पर अतिक्रमण का विवाद लंबे समय से अदालत में चल रहा है। इलाके में 3500 से अधिक मकान होने के साथ-साथ मस्जिदें और मदरसे भी मौजूद हैं। स्थानीय लोगों और रेलवे के दावों में जमीन के मालिकाना हक को लेकर बड़ा मतभेद है।

कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?

मामले की शुरुआत गौला नदी में अवैध खनन से संबंधित एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान हुई। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने अतिक्रमण हटाने को लेकर निर्देश दिए थे। इसके बाद रेलवे ने विवादित जमीन पर अपना अधिकार जताते हुए वहां रहने वाले लोगों को जमीन खाली करने के नोटिस जारी किए। रेलवे की कार्रवाई के खिलाफ स्थानीय लोग सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। इसके बाद मामला सिर्फ जमीन के स्वामित्व तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें हजारों परिवारों के पुनर्वास और उन्हें मिलने वाली राहत का मुद्दा भी जुड़ गया।

रेलवे के दस्तावेज क्या कहते हैं?

रेलवे का कहना है कि उसके पास जमीन पर अधिकार साबित करने वाले कई पुराने रिकॉर्ड मौजूद हैं। इनमें 1959 का नोटिफिकेशन, 1971 के राजस्व रिकॉर्ड और 2017 में कराए गए सर्वे से जुड़े दस्तावेज शामिल हैं। रेलवे इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर करीब 78 एकड़ जमीन पर अपना दावा करता है। दूसरी तरफ स्थानीय निवासियों का तर्क है कि शुरुआत में विवाद सीमित क्षेत्र को लेकर था, लेकिन बाद में रेलवे ने पूरे 78 एकड़ इलाके पर दावा कर दिया। स्थानीय लोगों का कहना है कि उनके परिवार यहां कई दशकों से रह रहे हैं और इस जमीन को राज्य सरकार की नजूल भूमि माना जाना चाहिए। उनकी मांग है कि लंबे समय से रह रहे परिवारों को उजाड़ने के बजाय सरकार जमीन को फ्रीहोल्ड करने या उनके आवास को नियमित करने का रास्ता निकाले।

नजूल जमीन आखिर होती क्या है?

नजूल जमीन का मतलब आम तौर पर ऐसी सरकारी जमीन से है, जिसका स्वामित्व सरकार के पास रहता है और जिसे अलग-अलग उद्देश्यों के लिए लीज पर दिया जा सकता है। ऐसी जमीन पर कब्जे या निर्माण के अधिकार सामान्य निजी जमीन की तरह नहीं होते। ऐतिहासिक रूप से ब्रिटिश शासन के दौरान जब्त की गई कई जमीनें बाद में सरकारी नियंत्रण में आ गईं। स्वतंत्रता के बाद ऐसी जमीनों का इस्तेमाल विभिन्न सार्वजनिक और आवासीय जरूरतों के लिए किया गया। कई मामलों में इन्हें लंबी अवधि की लीज पर दिया जाता है और संबंधित नियमों के तहत लीज का नवीनीकरण भी किया जा सकता है।

8 फरवरी 2024 की हिंसा ने बढ़ाया तनाव

बनभूलपुरा जमीन विवाद उस समय बेहद गंभीर हो गया, जब 8 फरवरी 2024 को अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान इलाके में हिंसा भड़क गई थी। प्रशासन और नगर निगम की टीम कार्रवाई के लिए पहुंची थी, जिसके बाद पथराव, आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाएं हुईं। हिंसा में सरकारी और नगर निगम की संपत्तियों को नुकसान पहुंचा। बाद की कार्रवाई में नगर निगम ने मुख्य आरोपी बताए गए अब्दुल मलिक से करीब 2.45 करोड़ रुपये के नुकसान की भरपाई की मांग की थी। हिंसा के बाद इलाके में कर्फ्यू जैसे हालात रहे और बड़ी संख्या में परिवारों के दूसरी जगह जाने की खबरें सामने आई थीं। तनाव के बीच कई परिवार अपना सामान लेकर इलाके से निकलते दिखाई दिए थे।

प्रभावित परिवारों के पुनर्वास का मुद्दा भी अहम

इस विवाद में सबसे बड़ा सवाल उन परिवारों का है, जिनके मकान रेलवे की जमीन पर बताए जा रहे हैं। अदालत की कार्यवाही के दौरान यह मुद्दा भी सामने आया कि अगर परिवारों को जमीन से हटाया जाता है तो उनके पुनर्वास और आर्थिक सहायता की व्यवस्था कैसे होगी। कोर्ट ने पात्र प्रभावित परिवारों की पहचान करने और उन्हें राहत उपलब्ध कराने से जुड़े निर्देश दिए थे। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत पात्र परिवारों को सीमित अवधि के लिए मासिक आर्थिक सहायता देने और स्थायी पुनर्वास की दिशा में प्रशासन, रेलवे तथा राजस्व अधिकारियों को मिलकर काम करने की बात कही गई थी।

आज के फैसले पर क्यों टिकी हैं नजरें?

बनभूलपुरा मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसका सीधा असर हजारों परिवारों के भविष्य पर पड़ सकता है। एक तरफ रेलवे जमीन पर अपना अधिकार और उससे जुड़ी योजनाओं को लेकर आगे बढ़ना चाहता है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय परिवार लंबे समय से अपने घर और पुनर्वास की मांग उठा रहे हैं। अब सबकी निगाहें सुप्रीम कोर्ट के आज के फैसले पर हैं। अदालत का निर्णय यह तय करने में अहम भूमिका निभाएगा कि विवादित जमीन और वहां रह रहे परिवारों को लेकर आगे की कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई किस दिशा में जाएगी।


PM मोदी के कार्यक्रम से पहले NMACC में दो संदिग्ध हिरासत में, PMO की फर्जी ID और बंदूक बरामद

by न्यूज डेस्क


मुंबई के बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC) स्थित नीता मुकेश अंबानी कल्चरल सेंटर (NMACC) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम से पहले सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। मुंबई पुलिस ने दो संदिग्धों को हिरासत में लिया है। इनमें से एक ने खुद को प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) का अधिकारी बताया था। जांच के दौरान उसके पास से PMO की कथित फर्जी पहचान पत्र बरामद हुआ। पुलिस के मुताबिक, हिरासत में लिए गए शख्स की पहचान 24 वर्षीय रोहन पारेख के रूप में हुई है। वह कथित तौर पर फर्जी पहचान पत्र के जरिए कार्यक्रम स्थल के अंदर प्रवेश करने की कोशिश कर रहा था। सुरक्षा जांच के दौरान उसके पहचान पत्र पर शक हुआ, जिसके बाद पुलिस ने दस्तावेज की जांच की और उसे फर्जी पाया। 

पुलिस ने उसके साथ मौजूद एक अन्य व्यक्ति को भी हिरासत में लिया है। बताया जा रहा है कि वह रोहन पारेख का बॉडीगार्ड था और उसके पास बंदूक मिली है। हथियार के साथ कार्यक्रम स्थल तक पहुंचने और फर्जी पहचान पत्र के जरिए प्रवेश की कोशिश के पीछे क्या मकसद था, इसकी जांच की जा रही है। मामले में BKC पुलिस थाने में दोनों संदिग्धों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। मुंबई क्राइम ब्रांच ने भी जांच शुरू कर दी है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि दोनों किस उद्देश्य से कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे थे और उनके पास फर्जी पहचान पत्र और हथियार कहां से आए। जानकारी के मुताबिक, दोनों आरोपियों को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए मुंबई के मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट कोर्ट में पेश किया जाएगा। फिलहाल पुलिस दोनों से पूछताछ कर मामले की पूरी कड़ी जोड़ने में जुटी है।

आज BKC में PM मोदी का कार्यक्रम

दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को मुंबई के बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स स्थित जियो वर्ल्ड सेंटर में ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026 का उद्घाटन करने वाले हैं। प्रधानमंत्री इस कार्यक्रम को संबोधित भी करेंगे। इसी के चलते कार्यक्रम स्थल और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई है। PM मोदी के कार्यक्रम से कुछ घंटे पहले NMACC में फर्जी PMO पहचान पत्र और हथियार के साथ दो संदिग्धों के पकड़े जाने से सुरक्षा एजेंसियां भी सतर्क हो गई हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि दोनों की कार्यक्रम से कोई सीधी कड़ी थी या वे किसी अन्य उद्देश्य से वहां पहुंचे थे।


PM मोदी के कार्यक्रम से पहले NMACC में दो संदिग्ध हिरासत में, PMO की फर्जी ID और बंदूक बरामद

by न्यूज डेस्क

मुंबई के बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC) स्थित नीता मुकेश अंबानी कल्चरल सेंटर (NMACC) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम से पहले सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। मुंबई पुलिस ने दो संदिग्धों को हिरासत में लिया है। इनमें से एक ने खुद को प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) का अधिकारी बताया था। जांच के दौरान उसके पास से PMO की कथित फर्जी पहचान पत्र बरामद हुआ। पुलिस के मुताबिक, हिरासत में लिए गए शख्स की पहचान 24 वर्षीय रोहन पारेख के रूप में हुई है। वह कथित तौर पर फर्जी पहचान पत्र के जरिए कार्यक्रम स्थल के अंदर प्रवेश करने की कोशिश कर रहा था। सुरक्षा जांच के दौरान उसके पहचान पत्र पर शक हुआ, जिसके बाद पुलिस ने दस्तावेज की जांच की और उसे फर्जी पाया। 

पुलिस ने उसके साथ मौजूद एक अन्य व्यक्ति को भी हिरासत में लिया है। बताया जा रहा है कि वह रोहन पारेख का बॉडीगार्ड था और उसके पास बंदूक मिली है। हथियार के साथ कार्यक्रम स्थल तक पहुंचने और फर्जी पहचान पत्र के जरिए प्रवेश की कोशिश के पीछे क्या मकसद था, इसकी जांच की जा रही है। मामले में BKC पुलिस थाने में दोनों संदिग्धों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। मुंबई क्राइम ब्रांच ने भी जांच शुरू कर दी है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि दोनों किस उद्देश्य से कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे थे और उनके पास फर्जी पहचान पत्र और हथियार कहां से आए। जानकारी के मुताबिक, दोनों आरोपियों को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए मुंबई के मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट कोर्ट में पेश किया जाएगा। फिलहाल पुलिस दोनों से पूछताछ कर मामले की पूरी कड़ी जोड़ने में जुटी है।

आज BKC में PM मोदी का कार्यक्रम

दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को मुंबई के बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स स्थित जियो वर्ल्ड सेंटर में ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026 का उद्घाटन करने वाले हैं। प्रधानमंत्री इस कार्यक्रम को संबोधित भी करेंगे। इसी के चलते कार्यक्रम स्थल और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई है। PM मोदी के कार्यक्रम से कुछ घंटे पहले NMACC में फर्जी PMO पहचान पत्र और हथियार के साथ दो संदिग्धों के पकड़े जाने से सुरक्षा एजेंसियां भी सतर्क हो गई हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि दोनों की कार्यक्रम से कोई सीधी कड़ी थी या वे किसी अन्य उद्देश्य से वहां पहुंचे थे।


अभी जो नाराज फूफा जी हैं, वो चिल्लाएंगे...’, 35 हजार करोड़ की परियोजनाओं के उद्घाटन पर PM मोदी का विपक्ष पर तंज

by न्यूज डेस्क

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को गुजरात के वडोदरा में आयोजित ‘नमो फॉर विकसित भारत’ कार्यक्रम में विपक्ष और सरकार की विकास परियोजनाओं पर सवाल उठाने वालों पर निशाना साधा। इस दौरान पीएम मोदी ने एक बार फिर अपने चर्चित ‘नाराज फूफा जी’ वाले तंज का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि विकास के काम शुरू होते ही कुछ लोग सवाल उठाने लगते हैं और हर परियोजना में कमियां तलाशते हैं। वडोदरा में आयोजित कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने करीब 35 हजार करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इनमें लगभग 2,800 किलोमीटर लंबा डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर भी शामिल है। पीएम मोदी ने इसे 21वीं सदी के भारत की बड़ी उपलब्धियों में से एक बताया।

फ्रेट कॉरिडोर पर पिछली सरकार को घेरा

डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कांग्रेस के नेतृत्व वाली पिछली सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि इस परियोजना की योजना 2004 में तैयार की गई थी, लेकिन 2014 तक इस दिशा में अपेक्षित काम नहीं हो पाया। पीएम मोदी ने कहा कि उनकी सरकार आने के बाद इस परियोजना को तेजी से आगे बढ़ाया गया। उन्होंने बीजेपी और कांग्रेस सरकारों के काम करने के तरीके में अंतर बताते हुए कहा कि वर्तमान सरकार बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को तय समय में पूरा करने पर जोर दे रही है।

‘नाराज फूफा जी’ वाले अंदाज में आलोचकों पर तंज

फ्रेट कॉरिडोर की उपयोगिता पर सवाल उठाने वालों पर कटाक्ष करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ लोग यह पूछेंगे कि इससे ट्रक वालों का क्या होगा और जिन लोगों ने ट्रक खरीदे हैं, उनका क्या होगा। उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा, “अभी जो नाराज फूफा जी हैं, वो चिल्लाएंगे कि ट्रक वालों का क्या होगा? ट्रक कहां जाएंगे? जिन्होंने ट्रक खरीदे, उनका क्या होगा? अब फूफा जी को काम मिल गया।” पीएम मोदी ने कहा कि फ्रेट कॉरिडोर के जरिए उन इलाकों तक भी रेल कनेक्टिविटी पहुंचाई जा रही है, जहां आजादी के बाद लंबे समय तक यह सुविधा उपलब्ध नहीं थी। उनके मुताबिक यह परियोजना देश में मजबूत सप्लाई चेन तैयार करने और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगी।

रेलवे के विकास का भी किया जिक्र

प्रधानमंत्री ने रेलवे के आधुनिकीकरण को लेकर भी अपनी सरकार के कामकाज का जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि 2014 के बाद देश में 50 हजार आधुनिक रेलवे कोच बनाए गए हैं। उन्होंने पिछली सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि उसके 10 साल के कार्यकाल में 50 हजार शौचालय तक नहीं बन पाए थे। पीएम मोदी ने इस तुलना के जरिए अपनी सरकार की विकास योजनाओं और काम की गति को रेखांकित किया।

‘चिप से लेकर जहाज तक’ भारत में मैन्युफैक्चरिंग पर जोर

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत मैन्युफैक्चरिंग के नए दौर में प्रवेश कर रहा है। अब देश में केवल तैयार सामान ही नहीं, बल्कि उसके लिए जरूरी कंपोनेंट्स भी बनाने पर जोर दिया जा रहा है। उन्होंने ‘चिप से लेकर जहाज तक’ का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार देश में मजबूत मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम और भारतीय सप्लाई चेन विकसित करने की दिशा में काम कर रही है। इसका उद्देश्य आयात पर निर्भरता कम करना और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना है।

पिछले भाषण में भी किया था ‘नाराज फूफा जी’ का जिक्र

प्रधानमंत्री मोदी ने ‘नाराज फूफा जी’ मुहावरे का इस्तेमाल पहली बार पिछले सप्ताह श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स के शताब्दी समारोह में किया था। वहां उन्होंने देश की आर्थिक वृद्धि और सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने वाले आलोचकों पर इसी अंदाज में निशाना साधा था। उस दौरान प्रधानमंत्री ने 2026-27 की पहली तिमाही में भारत की 7.8 प्रतिशत GDP ग्रोथ का भी जिक्र किया था। उन्होंने कहा था कि देश में कुछ लोग हर उपलब्धि पर सवाल उठाते हैं और नकारात्मक सोच को आगे बढ़ाने में लगे रहते हैं। उन्होंने कहा था कि समाज में ऐसे दो तरह के लोग मिलते हैं—एक वे जो देश की ताकत को सकारात्मक दिशा में इस्तेमाल करते हैं और दूसरे वे, जो किसी भी काम की शुरुआत होते ही ‘नाराज फूफा’ की भूमिका में आ जाते हैं। वडोदरा के कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने एक बार फिर इसी व्यंग्यात्मक अंदाज का इस्तेमाल करते हुए विपक्ष और सरकार की परियोजनाओं पर सवाल उठाने वालों को निशाने पर लिया।


PM मोदी का गुजरात दौरा आज: वडोदरा में BookMyShow पर शो हाउसफुल, 42 हजार लोग वेटिंग में

by न्यूज डेस्क

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को गुजरात के दौरे पर है। अपने दौरे के दौरान पीएम मोदी वडोदरा और नवसारी में कई कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। इस दौरान 35 हजार करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किए जाने की तैयारी है। प्रधानमंत्री के दौरे को लेकर वडोदरा में खास तैयारियां की गई हैं। शहर की प्रमुख सड़कों और ऐतिहासिक इमारतों को रोशनी से सजाया गया है। जगह-जगह बड़े होर्डिंग और कटआउट लगाए गए हैं। पीएम मोदी के कार्यक्रम को लेकर युवाओं और खासकर Gen-Z के बीच भी खास उत्साह देखने को मिल रहा है।

BookMyShow पर एक घंटे में बुक हुईं 6 हजार सीटें

वडोदरा में 'विकसित भारत के लिए नमो' थीम के तहत एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम में युवाओं और युवा प्रोफेशनल्स की भागीदारी पर खास जोर दिया गया है। कार्यक्रम की खास बात यह है कि पहली बार प्रधानमंत्री के किसी कार्यक्रम के लिए BookMyShow के जरिए मुफ्त डिजिटल रजिस्ट्रेशन की सुविधा उपलब्ध कराई गई। रजिस्ट्रेशन शुरू होने के करीब एक घंटे के भीतर ही सभी 6,000 सीटें बुक हो गईं। गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी के मुताबिक, कार्यक्रम के लिए 42 हजार से ज्यादा लोग वेटिंग लिस्ट में पहुंच गए। कार्यक्रम में शामिल होने वाले लोगों के लिए पूरी एंट्री व्यवस्था QR कोड आधारित होगी। बताया गया है कि कार्यक्रम का लाइव प्रोडक्शन और प्रसारण अंतरराष्ट्रीय स्तर के बड़े खेल आयोजनों की तर्ज पर किया जाएगा। करीब 6 हजार युवा प्रोफेशनल्स कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी युवाओं के साथ सीधा संवाद भी कर सकते हैं।

रेलवे को 20 हजार करोड़ से ज्यादा की परियोजनाओं की सौगात

पीएम मोदी के गुजरात दौरे में रेलवे से जुड़ी कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं भी शामिल हैं। कुल 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक की रेलवे परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया जाएगा। लॉजिस्टिक्स और माल ढुलाई की क्षमता बढ़ाने के लिए वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के तीन हिस्से देश को समर्पित किए जाएंगे। इसके अलावा वडोदरा-रतलाम रेल मार्ग पर तीसरी और चौथी लाइन से जुड़ी परियोजना की आधारशिला रखी जाएगी। विश्वामित्री-डभोई रेल लाइन के दोहरीकरण के साथ वडोदरा-टांडा नई रेल लाइन का उद्घाटन भी प्रस्तावित है। इसके अलावा प्रतापनगर से टांडा के बीच नई MEMU ट्रेन सेवा की शुरुआत की जाएगी।

नवसारी में बीजेपी कार्यालय का उद्घाटन और जनसभा

वडोदरा के कार्यक्रमों के बाद प्रधानमंत्री नवसारी पहुंचेंगे। यहां वह जिला बीजेपी कार्यालय का उद्घाटन करेंगे। इसके बाद एक बड़ी जनसभा को भी संबोधित करेंगे। गुजरात दौरे के बाद पीएम मोदी सूरत से मुंबई के लिए रवाना होंगे। मुंबई में वह 'ग्लोबल फिनटेक फेस्टिवल 2026' में हिस्सा लेंगे। यहां प्रधानमंत्री वित्तीय प्रौद्योगिकी के क्षेत्र से जुड़े वैश्विक विशेषज्ञों और प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधियों को संबोधित करेंगे। इस तरह पीएम मोदी का गुजरात और मुंबई दौरा विकास परियोजनाओं के साथ-साथ युवाओं, रेलवे, लॉजिस्टिक्स और फिनटेक जैसे क्षेत्रों पर केंद्रित रहने वाला है।


सत्य निकेतन हादसे पर HC सख्त, कहा- सिर्फ बिल्डिंग मालिक नहीं, MCD भी जिम्मेदार

by न्यूज डेस्क

नई दिल्ली: दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में PG हॉस्टल के तौर पर इस्तेमाल की जा रही दो इमारतों के ढहने के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने साफ कहा कि ऐसी घटनाओं के लिए केवल बिल्डिंग या PG मालिक को जिम्मेदार ठहराकर मामला खत्म नहीं किया जा सकता। निर्माण नियमों का पालन सुनिश्चित करना संबंधित प्रशासन की भी जिम्मेदारी है। इस मामले में दाखिल जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने दिल्ली सरकार, केंद्र सरकार, MCD, दिल्ली पुलिस, दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) को नोटिस जारी किया है। मामले की अगली सुनवाई 25 तारीख को होगी। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दिल्ली सरकार, केंद्र और MCD की ओर से पेश होने की बात कही। कोर्ट ने सत्य निकेतन में हुई घटना को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए अधिकारियों से प्रभावी और गंभीर कदम उठाने की जरूरत पर जोर दिया।

करीब 50 छात्रों के रहने की बात, 7 की मौत

यह PIL सत्य निकेतन में हुई उस घटना के बाद दायर की गई, जिसमें लड़कों के लिए PG हॉस्टल के रूप में इस्तेमाल की जा रही दो इमारतें अचानक ढह गईं। बताया गया कि इन इमारतों में करीब 50 छात्र रह रहे थे। हादसे में अब तक कम से कम 7 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है। कई छात्रों को मलबे से निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया, जबकि कुछ लोगों के मलबे में फंसे होने की आशंका जताई गई थी।  याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि इस तरह की घटनाएं समय-समय पर सामने आती रहती हैं और इनमें छात्रों समेत निर्दोष लोगों की जान चली जाती है। उन्होंने कहा कि MCD को PG और ऐसे भवनों की सुरक्षा को लेकर ठोस कदम उठाने चाहिए।

DU में हॉस्टल की कमी पर भी कोर्ट ने जताई चिंता

सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने दिल्ली विश्वविद्यालय से जुड़े एक अहम पहलू पर भी सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि सत्य निकेतन और इसके आसपास रहने वाले कई छात्र DU से जुड़े कॉलेजों में पढ़ते हैं। कोर्ट ने कहा कि यह बात सामान्य रूप से सामने आती रही है कि दिल्ली से बाहर के छात्रों के लिए DU और उसके कॉलेजों में पर्याप्त हॉस्टल उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में बड़ी संख्या में छात्रों को PG और किराए के मकानों का सहारा लेना पड़ता है। हाई कोर्ट ने DU से पूछा है कि उसके कॉलेजों में बाहर से आने वाले कितने छात्र पढ़ रहे हैं और विश्वविद्यालय तथा उसके कॉलेजों की ओर से कितने हॉस्टल संचालित किए जा रहे हैं। कोर्ट ने इस संबंध में विस्तृत आंकड़े पेश करने का निर्देश दिया है।
PG चलाने के नियमों पर MCD से जवाब तलब

कोर्ट ने MCD से यह भी पूछा कि क्या PG हॉस्टल चलाने के लिए कोई स्पष्ट नियम और नियामक व्यवस्था मौजूद है। MCD को इस संबंध में विस्तृत जवाब दाखिल करने को कहा गया है। सुनवाई के दौरान जब वकील ने बताया कि छात्र कई बार फ्लैट भी किराए पर लेते हैं, तो कोर्ट ने सवाल किया कि प्रशासन को किस तरह पता चलता है कि किसी सामान्य फ्लैट का इस्तेमाल PG के रूप में किया जा रहा है। हाई कोर्ट ने PG हॉस्टलों में रहने वाले छात्रों की संख्या का डेटा भी उपलब्ध कराने को कहा है।

गिरी इमारतों की वैधता की होगी जांच

हाई कोर्ट ने MCD के शीर्ष कार्यकारी स्तर पर जांच कराने का निर्देश दिया है कि हादसे में ढही दोनों इमारतों का निर्माण वैध अनुमति के तहत हुआ था या नहीं। अगर जांच में सामने आता है कि भवन बिना जरूरी मंजूरी के बनाए गए थे, तो कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने को कहा है। साथ ही ऐसे मामलों में लापरवाही या नियमों के उल्लंघन के लिए अधिकारियों के खिलाफ अब तक की गई कार्रवाई की जानकारी भी मांगी गई है।

दिल्ली के PG हॉस्टलों का होगा ऑडिट

कोर्ट ने MCD को दिल्ली में संचालित PG हॉस्टलों का ऑडिट करने का भी निर्देश दिया है। इस ऑडिट में यह जांचने को कहा गया है कि संबंधित इमारतों का निर्माण स्वीकृत नक्शे, अनुमति और लागू बिल्डिंग बायलॉज के अनुरूप हुआ है या नहीं। कोर्ट का फोकस सिर्फ सत्य निकेतन की घटना तक सीमित नहीं रहा, बल्कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए व्यापक स्तर पर व्यवस्था की जांच करने पर भी रहा।

'जिम्मेदारी सिर्फ PG मालिक की नहीं'

चीफ जस्टिस ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि किसी PG हॉस्टल में इस तरह की घटना होने पर पूरी जिम्मेदारी सिर्फ उसके मालिक की नहीं मानी जा सकती। MCD प्रशासन की भी जवाबदेही है, क्योंकि निर्माण नियमों का पालन सुनिश्चित करना उसकी जिम्मेदारी है। कोर्ट ने कहा कि यदि संबंधित अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों को लेकर सतर्क रहते और समय रहते जरूरी कार्रवाई करते, तो संभव है कि इस तरह की त्रासदी को टाला जा सकता था। हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार, MCD और NHRC से रिपोर्ट और ऑडिट से जुड़ी जानकारी मांगी है। वहीं, MCD, केंद्र और दिल्ली पुलिस की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता द्वारा दिए गए इस आश्वासन को भी कोर्ट ने रिकॉर्ड पर लिया कि घटना के बाद जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। कोर्ट ने उम्मीद जताई कि राहत और बचाव अभियान को और तेज किया जाएगा, ताकि मलबे में फंसे लोगों की जान बचाने की हर संभव कोशिश की जा सके।


असम में 25 साल की रिया की हत्या से सनसनी, पति पर शक; फ्रिज से बरामद हुआ सिर

by न्यूज डेस्क

असम के गुवाहाटी में एक महिला की हत्या का सनसनीखेज मामला सामने आया है। हाटीगांव इलाके के बसिष्ठपुर बाइलेन में 25 वर्षीय महिला का शव मिलने के बाद आसपास के क्षेत्र में हड़कंप मच गया। मृतका की पहचान नूनमती निवासी रिया तालुकदार के तौर पर हुई है। पुलिस को शक है कि इस वारदात में उसके पति रामानुजन गोस्वामी की भूमिका हो सकती है। पुलिस फिलहाल आरोपी पति की तलाश कर रही है।

घर से दुर्गंध आने पर खुला मामला

पुलिस के मुताबिक, मंगलवार को पड़ोसियों को महिला के घर से तेज दुर्गंध महसूस हुई। किसी अनहोनी की आशंका में उन्होंने पुलिस को इसकी सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने जब घर की तलाशी ली तो अंदर का दृश्य देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए। प्रारंभिक जांच में महिला की हत्या किए जाने की बात सामने आई है। पुलिस के अनुसार, हत्या के बाद शव के साथ भीषण तरीके से छेड़छाड़ की गई। आरोप है कि महिला का सिर धड़ से अलग कर उसे काले पॉलीथीन में लपेटकर फ्रिज में छिपाया गया था। महिला की उंगलियां काटे जाने की बात भी शुरुआती जांच में सामने आई है।

पति से विवाद के बाद घर से निकला था रामानुजन

पुलिस की शुरुआती जांच के मुताबिक रिया एक बुटीक में काम करती थी। वह फैंसी बाजार के एसी मार्केट क्षेत्र में स्थित बुटीक में नौकरी करती थी। रिया के माता-पिता नहीं थे और परिवार में उसका एक भाई बताया गया है। जांच में पता चला है कि सोमवार को रिया और उसके पति रामानुजन गोस्वामी के बीच किसी बात को लेकर विवाद हुआ था। बताया जा रहा है कि बहस के बाद रामानुजन रात करीब 8 बजे घर से बाहर चला गया। इसके बाद रिया के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली। अगले दिन घर से दुर्गंध आने के बाद पड़ोसियों ने पुलिस को सूचना दी और मामले का खुलासा हुआ।

हत्या की वजह अभी साफ नहीं

पुलिस का अनुमान है कि महिला की हत्या शव मिलने से करीब एक से दो दिन पहले की गई होगी। हालांकि, हत्या के पीछे वास्तविक वजह क्या थी, यह अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है। पुलिस पति की भूमिका की जांच करने के साथ-साथ वारदात से जुड़े दूसरे पहलुओं को भी खंगाल रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि पति और पत्नी के बीच विवाद किस बात को लेकर हुआ था और उसके बाद घटनाक्रम किस तरह आगे बढ़ा।

पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया शव

पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (GMCH) भेज दिया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मौत के कारण और घटना से जुड़े कई अहम तथ्यों पर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है। फिलहाल पुलिस संदिग्ध पति की तलाश में जुटी है। जांच आगे बढ़ने के साथ हत्या की वजह और वारदात की पूरी कड़ी सामने आने की उम्मीद है।


सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसा: 6 की मौत, CCTV में कैद हुआ खौफनाक मंजर, आसपास के हॉस्टलों पर भी उठे सवाल

by न्यूज डेस्क

दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में बहुमंजिला इमारत के अचानक ढहने से राजधानी में हड़कंप मच गया। PG के तौर पर इस्तेमाल की जा रही इस इमारत के जमींदोज होने से अब तक 6 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 11 लोगों को रेस्क्यू कर सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है। मलबे में कुछ और लोगों के दबे होने की आशंका के चलते राहत और बचाव अभियान जारी है। हादसे का एक CCTV फुटेज भी सामने आया है, जिसमें इमारत गिरने से ठीक पहले का खौफनाक मंजर दिखाई दे रहा है।

कुछ सेकेंड में ढह गई पूरी इमारत

CCTV फुटेज में नजर आता है कि इमारत के नीचे एक बुजुर्ग व्यक्ति अपनी छोटी-सी दुकान लगाकर बैठे हुए थे। अचानक ऊपर से धूल और मलबा गिरना शुरू होता है। खतरा महसूस होते ही बुजुर्ग वहां से भागकर अपनी जान बचाने की कोशिश करते हैं। इसके कुछ ही सेकेंड बाद पूरी इमारत भरभराकर नीचे आ गिरती है। देखते ही देखते आसपास का इलाका धूल के घने गुबार में ढक जाता है। हादसे की भयावहता इस फुटेज में साफ दिखाई देती है। 

हादसे में 6 लोगों की मौत

मोती बाग के पास सत्य निकेतन में हुए इस हादसे में अब तक 6 लोगों की जान जा चुकी है। राहत एवं बचाव टीमों ने 11 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला है। मलबे में कुछ लोगों के फंसे होने की आशंका है, जिनमें छात्र भी शामिल बताए जा रहे हैं। घटनास्थल पर NDRF, CATS एंबुलेंस, दिल्ली पुलिस और प्रशासन की कई टीमें मौजूद हैं। भारी मलबे के बीच रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार चलाया जा रहा है।

AIIMS ने क्या बताया?

AIIMS की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, JPN एपेक्स ट्रॉमा सेंटर में सत्य निकेतन हादसे से घायल 10 मरीजों को लाया गया था। इनमें से 5 मरीजों को अस्पताल पहुंचने पर मृत घोषित किया गया। वहीं, गंभीर रूप से घायल एक अन्य मरीज ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। इस तरह मृतकों की संख्या 6 हो गई। तीन मरीजों को अस्पताल में भर्ती कर इलाज दिया जा रहा है। इनमें एक घायल की हाथ-पैर की सर्जरी भी की गई है। वहीं, एक मरीज को मामूली चोटें आई थीं और ऑब्जर्वेशन के बाद उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

पुलिस को पहले मिली थी बिल्डिंग गिरने की सूचना

एडिशनल डीसीपी अभिमन्यु पोसवाल के मुताबिक, 6 सितंबर को दोपहर करीब 1:30 बजे पुलिस को PCR कॉल के जरिए इमारत गिरने की सूचना मिली थी। सूचना मिलते ही पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे और शुरुआती कार्रवाई करते हुए कुछ छात्रों को मलबे से बाहर निकालकर नजदीकी अस्पताल पहुंचाया। बाद में रेस्क्यू और जांच के दौरान पता चला कि मलबे के नीचे और भी लोग दबे हुए हैं। इसके बाद बचाव अभियान को और तेज किया गया। 

आसपास के हॉस्टलों की सुरक्षा भी सवालों के घेरे में

सत्य निकेतन हादसे के बाद आसपास संचालित हो रहे दूसरे हॉस्टलों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठने लगे हैं। हादसे वाली इमारत से करीब 70 से 80 मीटर की दूरी पर स्थित एक हॉस्टल को लेकर आरोप हैं कि वहां आने-जाने के लिए बेहद संकरा रास्ता है। बताया जा रहा है कि बाहर निकलने वाले रास्ते पर लोहे का गेट लगा है और आसपास बिजली के तार भी असुरक्षित तरीके से लटकते दिखाई देते हैं। हादसे वाली जगह से करीब 100 मीटर की दूरी पर इसी कंपनी से जुड़ा एक और पांच मंजिला हॉस्टल बताया जा रहा है। वहां भी प्रवेश द्वार के आसपास बिजली के खुले और उलझे तार सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हैं। स्थानीय स्तर पर यह भी सवाल उठ रहे हैं कि इलाके में जहां सीमित मंजिलों वाली इमारतों की अनुमति है, वहां चार से पांच मंजिला निर्माण कैसे संचालित हो रहे हैं और छात्रों से भारी किराया वसूला जा रहा है। 

ग्राउंड फ्लोर पर चल रहा था रेनोवेशन, मालिक पर FIR

पुलिस और स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, हादसे के समय इमारत के ग्राउंड फ्लोर पर रेनोवेशन का काम चल रहा था। आरोप है कि निर्माण कार्य के दौरान पिलर और दीवारों के साथ छेड़छाड़ की गई, जिससे इमारत की संरचना कमजोर हुई और वह अचानक ढह गई। इस मामले में दिल्ली पुलिस ने साउथ कैंपस थाने में मकान मालिक हरिराम बंसल समेत अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस के मुताबिक, हरिराम बंसल के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर भी जारी किया गया है। आरोपी की पासपोर्ट संबंधी जानकारी पुलिस के पास मौजूद है। मामले में BNS की धारा 105, 290 और 125(a) के तहत कार्रवाई की गई है। 

आरोपी मकान मालिक की तलाश में छापेमारी

FIR दर्ज होने के बाद पुलिस ने आरोपी मकान मालिक की तलाश तेज कर दी है। साउथ कैंपस थाना पुलिस और क्राइम ब्रांच की कई टीमें दिल्ली-NCR के अलग-अलग ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। पुलिस की टीमें गुरुग्राम समेत कई स्थानों पर आरोपी की तलाश कर चुकी हैं। बताया जा रहा है कि हरिराम बंसल अपने घर से फरार है। जांच एजेंसियां उसके रिश्तेदारों और करीबी लोगों से भी जानकारी जुटा रही हैं। 

CM रेखा गुप्ता समेत कई अधिकारी मौके पर पहुंचे

हादसे की जानकारी मिलते ही दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू, मंत्री कपिल मिश्रा, स्थानीय विधायक और वरिष्ठ अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे। मुख्यमंत्री ने मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव अभियान की स्थिति का जायजा लिया और अधिकारियों को रेस्क्यू ऑपरेशन में तेजी लाने के निर्देश दिए। इसके बाद मुख्यमंत्री AIIMS ट्रॉमा सेंटर भी पहुंचीं, जहां उन्होंने हादसे में घायल और बचाए गए छात्रों से मुलाकात की। उन्होंने डॉक्टरों और स्वास्थ्य अधिकारियों से घायलों की स्थिति की जानकारी ली और पीड़ितों के बेहतर इलाज के निर्देश दिए। 7 सितंबर को दोबारा घटनास्थल का जायजा लेते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आसपास की जर्जर इमारतों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने विशेष रूप से हादसे से सटी इमारत को तत्काल गिराए जाने की बात कही। 

MCD ने पड़ोसी इमारत खाली कराने का नोटिस दिया

हादसे के बाद दिल्ली नगर निगम भी हरकत में आया है। MCD ने हादसे वाली इमारत के ठीक बगल स्थित एक अन्य भवन को लेकर प्रीकॉशनरी नोटिस जारी किया है। नोटिस के मुताबिक, DMC Act 1957 की धारा 348 के तहत मकान नंबर 13 की इमारत को खतरनाक और जर्जर स्थिति में पाया गया है। निगम ने आशंका जताई है कि यह ढांचा वहां रहने वाले लोगों के साथ-साथ आसपास के लोगों और राहगीरों के लिए भी खतरा बन सकता है। MCD ने मालिक और वहां रहने वाले लोगों को तीन दिन के भीतर इमारत को खुद खाली कर ध्वस्त करने का निर्देश दिया है। ऐसा नहीं करने पर निगम की ओर से कार्रवाई की जाएगी और ध्वस्तीकरण का खर्च मकान मालिक से वसूला जाएगा। 

ABVP ने MCD कमिश्नर के इस्तीफे की मांग की

हादसे को लेकर छात्र संगठन ABVP ने भी विरोध दर्ज कराया है। ABVP की नेशनल सोशल मीडिया कन्वीनर प्रेरणा भारद्वाज ने MCD की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कमिश्नर के इस्तीफे की मांग की। उन्होंने कहा कि संगठन के कार्यकर्ता हादसे के बाद से मौके पर मौजूद हैं और छात्रों की सुरक्षा को लेकर जवाबदेही तय किए जाने की जरूरत है। ABVP का कहना है कि जब तक मलबे में फंसे आखिरी छात्र को सुरक्षित बाहर नहीं निकाल लिया जाता, तब तक वे मौके पर डटे रहेंगे। सत्य निकेतन हादसे ने एक बार फिर दिल्ली के छात्र इलाकों में संचालित PG और हॉस्टलों की सुरक्षा व्यवस्था, अवैध निर्माण और जर्जर इमारतों की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब जांच का फोकस इस बात पर भी है कि आखिर इमारत की संरचनात्मक सुरक्षा में कहां चूक हुई और जिम्मेदारी किसकी थी।


‘किताबों और सिलेबस से बाहर निकलें, बच्चों की जिंदगी में उतरें’, PM मोदी की शिक्षकों से खास अपील

by न्यूज डेस्क

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिक्षकों से अपील की है कि वे बच्चों को सिर्फ किताबों और पाठ्यक्रम तक सीमित होकर न पढ़ाएं, बल्कि उनके जीवन, रुचियों, परेशानियों और प्रतिभाओं को भी समझने की कोशिश करें। शिक्षक दिवस से पहले प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित शिक्षकों के साथ बातचीत के दौरान शिक्षा के व्यापक उद्देश्य पर चर्चा की। लोक कल्याण मार्ग स्थित प्रधानमंत्री आवास पर हुई इस बातचीत में पीएम मोदी ने कहा कि शिक्षक की जिम्मेदारी केवल पाठ्यक्रम पूरा कराने या परीक्षा की तैयारी कराने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। उन्हें बच्चों के जीवन से जुड़कर उनकी सोच और जरूरतों को समझना होगा।

‘किताबों और पाठ्यक्रम से बाहर निकलना होगा’

प्रधानमंत्री मोदी ने शिक्षकों से कहा कि बच्चों को समझने के लिए सिर्फ किताबों तक सीमित रहना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने शिक्षकों से पाठ्यक्रम से आगे बढ़कर बच्चों की रोजमर्रा की जिंदगी में उनकी भूमिका निभाने की अपील की। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को बच्चों की जिज्ञासा, रचनात्मकता और खुलेपन को बनाए रखने पर ध्यान देना चाहिए। पीएम मोदी के मुताबिक, बच्चों में सीखने और सवाल पूछने की स्वाभाविक प्रवृत्ति को खत्म नहीं होने देना चाहिए।

पढ़ाई में कमजोर बच्चे की प्रतिभा पहचानें

बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने शिक्षकों से यह भी पूछा कि क्या वे उन बच्चों की छिपी खूबियों को पहचानने का प्रयास करते हैं, जो पढ़ाई में अपेक्षाकृत अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाते। पीएम मोदी ने कहा कि जरूरी नहीं कि हर बच्चा पढ़ाई में अव्वल हो। हर बच्चे में कोई न कोई खास क्षमता या प्रतिभा हो सकती है। शिक्षक की भूमिका उस प्रतिभा को पहचानकर उसे निखारने और सही दिशा देने में महत्वपूर्ण हो जाती है। एक शिक्षक ने बताया कि हर बच्चे की क्षमताएं, चुनौतियां और सीखने का तरीका अलग होता है। ऐसे में शिक्षकों को बच्चों की व्यक्तिगत खूबियों को समझकर उन्हें आगे बढ़ने के अवसर देने चाहिए। शिक्षकों ने यह भी बताया कि बच्चों के आत्मविश्वास और कौशल को बढ़ाने के लिए कक्षा के अलावा अलग-अलग गतिविधियां कराई जाती हैं।

अच्छा वक्ता बनने के लिए क्या जरूरी?

बातचीत के दौरान पीएम मोदी ने एक शिक्षक से प्रभावी तरीके से बोलने और अच्छा वक्ता बनने के बारे में भी सवाल किया। शिक्षक ने बताया कि बेहतर वक्तृत्व के लिए आत्मविश्वास के साथ लगातार अभ्यास करना जरूरी है। इस चर्चा के जरिए बच्चों में संवाद कौशल और आत्मविश्वास विकसित करने की जरूरत पर भी जोर दिया गया।

बच्चों के बढ़ते स्क्रीन टाइम पर भी चिंता

प्रधानमंत्री ने बच्चों के बढ़ते स्क्रीन टाइम को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने शिक्षकों से बच्चों को मोबाइल और दूसरे डिजिटल उपकरणों पर जरूरत से ज्यादा समय बिताने से बचाने के लिए खेल, शारीरिक गतिविधियों और रचनात्मक कामों की ओर प्रेरित करने को कहा। पीएम मोदी ने कहा कि बच्चों को ऐसी गतिविधियों से जोड़ना जरूरी है, जिनसे उनका आत्मविश्वास बढ़े और सामाजिक कौशल विकसित हो। स्कूलों में पढ़ाई के साथ-साथ ऐसी गतिविधियों को भी महत्व देने की जरूरत है।

कैंसर जागरूकता और नशे के खिलाफ अभियान पर चर्चा

राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार विजेताओं के साथ बातचीत में शिक्षा से जुड़े विषयों के अलावा सामाजिक मुद्दों पर भी चर्चा हुई। एक शिक्षिका ने महिलाओं में स्तन कैंसर को लेकर जागरूकता बढ़ाने के अपने प्रयासों के बारे में प्रधानमंत्री को जानकारी दी। उन्होंने बताया कि समय रहते जागरूकता और जांच के जरिए महिलाओं को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं पर उचित चिकित्सकीय सलाह लेने के लिए प्रेरित किया जा सकता है। इसके अलावा छात्रों में नशीली दवाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। पीएम मोदी ने शिक्षकों से कहा कि उन्हें बच्चों के व्यवहार और उनकी गतिविधियों में आने वाले बदलावों पर नजर रखनी चाहिए और जरूरत पड़ने पर उनकी समस्याओं को समझने की कोशिश करनी चाहिए।

शिक्षक सिर्फ पढ़ाने वाला नहीं, मार्गदर्शक भी

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि शिक्षक की भूमिका केवल सिलेबस पूरा कराने और परीक्षा की तैयारी कराने तक सीमित नहीं है। एक शिक्षक को बच्चों की क्षमताओं, रुचियों और चुनौतियों को समझते हुए उन्हें आगे बढ़ने के अवसर देने चाहिए। उन्होंने शिक्षकों से बच्चों में बातचीत करने की क्षमता, रचनात्मक सोच और आत्मविश्वास जैसे कौशल विकसित करने पर जोर दिया। पीएम मोदी ने राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार प्राप्त करने वाले शिक्षकों को बधाई देते हुए कहा कि देश के बच्चों का भविष्य संवारने में शिक्षकों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।


स्वतंत्र भारद्वाज के समर्थन में पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने पहुंचा हिंदू रक्षा दल, FIR पर उठाए सवाल

by न्यूज डेस्क

दिल्ली पुलिस की ओर से स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ दर्ज की गई FIR को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। अब हिंदू रक्षा दल के सदस्य स्वतंत्र के समर्थन में पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने पहुंचे और पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए। संगठन ने FIR को गलत बताते हुए मामले की जांच और कार्रवाई के तरीके पर आपत्ति जताई। हिंदू रक्षा दल के लोगों का कहना है कि स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ जिस आधार पर मामला दर्ज किया गया है, वह उचित नहीं है। संगठन ने पुलिस से मामले को लेकर अपना पक्ष रखा और FIR की कार्रवाई पर पुनर्विचार की मांग की।

POCSO एक्ट के तहत भी दर्ज हुई फिर

इस मामले में दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ POCSO एक्ट के तहत एक अलग FIR दर्ज की थी। पुलिस के मुताबिक, एक नाबालिग की ओर से ऑनलाइन धमकी मिलने की शिकायत सामने आई थी, जिसके आधार पर यह कार्रवाई की गई। शिकायत में स्वतंत्र भारद्वाज का नाम भी शामिल बताया गया है। पुलिस ने इससे पहले दर्ज की गई FIR में SC/ST एक्ट से जुड़ी धाराएं भी जोड़ी हैं। इसके बाद मामले ने और तूल पकड़ लिया है।

पुलिस कार्रवाई को लेकर संगठन ने जताई आपत्ति

हिंदू रक्षा दल का कहना है कि स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ दर्ज मामलों और पुलिस की कार्रवाई को लेकर कई सवाल हैं। संगठन के सदस्य इसी मुद्दे को लेकर पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने पहुंचे और अधिकारियों के सामने अपना पक्ष रखा। फिलहाल मामले में पुलिस की ओर से दर्ज FIR और लगाए गए आरोपों की जांच जारी है। वहीं, स्वतंत्र भारद्वाज के समर्थन में संगठन के थाने पहुंचने के बाद यह मामला राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी चर्चा में आ गया है।


दिल्ली-NCR में बदला मौसम का मिजाज, तेज बारिश से राहत, IMD ने जारी किया रेड अलर्ट

by न्यूज डेस्क

दिल्ली-NCR में शुक्रवार को मौसम ने अचानक करवट ली। राजधानी के कई इलाकों में गरज-चमक के साथ तेज बारिश हुई, जिससे उमस और गर्मी से परेशान लोगों को राहत मिली। बारिश को देखते हुए मौसम विभाग ने दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों के लिए जारी अलर्ट को बढ़ाकर रेड अलर्ट कर दिया है। मौसम विभाग ने लोगों को सतर्क रहने और बेहद जरूरी होने पर ही बारिश के दौरान बाहर निकलने की सलाह दी है। लगातार बारिश होने पर दिल्ली-NCR के निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन सकती है, वहीं कई प्रमुख सड़कों पर ट्रैफिक की रफ्तार भी प्रभावित होने की आशंका है।

नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद में भी बारिश

दिल्ली के अलावा नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद के कई हिस्सों में भी बारिश दर्ज की गई। IMD के अनुमान के मुताबिक राजधानी के ज्यादातर इलाकों में मध्यम बारिश हो सकती है, जबकि कुछ जगहों पर 50 से 100 मिलीमीटर तक भारी बारिश होने की संभावना है। बारिश के साथ गरज-चमक और बिजली गिरने का खतरा भी बना हुआ है। इस दौरान हवा की रफ्तार करीब 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे रह सकती है, जबकि तेज झोंकों की गति 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने का अनुमान है। हालांकि, शुक्रवार को जन्माष्टमी के कारण स्कूल-कॉलेज और कई दफ्तर बंद रहने से सामान्य दिनों के मुकाबले सड़कों पर वाहनों का दबाव कम रहने की उम्मीद है।

उत्तर भारत के दूसरे हिस्सों में भी बारिश का असर

मौसम विभाग के अनुसार, उत्तर मध्य प्रदेश और दक्षिणी उत्तर प्रदेश के आसपास निम्न दबाव का क्षेत्र सक्रिय है। इसके अलावा मानसून की अक्षीय रेखा भी सक्रिय बनी हुई है। यही वजह है कि उत्तर भारत के कई इलाकों में बारिश का दौर जारी है। 

राजस्थान में भी भारी बारिश का अनुमान

राजस्थान के पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी हिस्सों में भी मौसम विभाग ने भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई है। बीते 24 घंटों में पूर्वी राजस्थान के कई क्षेत्रों में अच्छी बारिश हुई। सवाई माधोपुर के खंडार में 130 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो इस अवधि में राज्य में सबसे अधिक रही। इसके अलावा अलवर, भरतपुर, डीग, दौसा, धौलपुर, जयपुर, सीकर, भीलवाड़ा, अजमेर, करौली, टोंक, बारां, कोटा और झालावाड़ समेत कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश रिकॉर्ड की गई। मौसम विभाग के रेड अलर्ट के बीच दिल्ली-NCR समेत प्रभावित इलाकों में लोगों को सावधानी बरतने और मौसम से जुड़े ताजा अपडेट पर नजर रखने की सलाह दी गई है।


सोनिया गांधी की किताब पर बदला प्रकाशक, अब हार्पर कॉलिन्स भारत में करेगा प्रकाशित

by न्यूज डेस्क

कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी की बहुप्रतीक्षित संस्मरण किताब ‘Belonging: A Journey of Love’ को लेकर चल रहा प्रकाशन विवाद अब एक नए पड़ाव पर पहुंच गया है। किताब के भारत में प्रकाशन की जिम्मेदारी अब हार्पर कॉलिन्स इंडिया संभालेगा। प्रकाशक ने शुक्रवार को इसकी घोषणा की। किताब की वैश्विक रिलीज 10 नवंबर को प्रस्तावित है। हार्पर कॉलिन्स ने इसे मौजूदा दौर की चर्चित और बहुप्रतीक्षित राजनीतिक संस्मरण पुस्तकों में शामिल बताया है। किताब में सोनिया गांधी के निजी जीवन से लेकर भारतीय राजनीति में उनके लंबे सफर तक के कई अहम पहलुओं को जगह दी गई है।

इटली के बचपन से भारतीय राजनीति तक का सफर

सोनिया गांधी की यह किताब उनके जीवन के कई महत्वपूर्ण पड़ावों को सामने रखेगी। इसमें युद्ध के बाद के इटली में बीता उनका बचपन, भारत आने का फैसला, पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के साथ विवाह और इसके बाद भारतीय राजनीति के केंद्र में बिताए गए दशकों का जिक्र होगा। प्रकाशक के मुताबिक, संस्मरण में भारत के राजनीतिक और सामाजिक बदलावों को सोनिया गांधी के व्यक्तिगत अनुभवों और नजरिए से समझने का अवसर भी मिलेगा।

पेंगुइन से शुरू हुआ था प्रकाशन विवाद

किताब को लेकर विवाद की शुरुआत तब हुई जब अमेरिका स्थित Alfred A. Knopf, जो Penguin Random House का हिस्सा है, ने इसके 10 नवंबर को वैश्विक प्रकाशन की घोषणा की। हालांकि, इसके बाद Penguin Random House India ने साफ किया कि भारत में किताब का प्रकाशन उसकी ओर से नहीं किया जा रहा है। रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि भारत में किताब प्रकाशित करने को लेकर पांडुलिपि के कुछ हिस्सों में संपादकीय बदलाव और कुछ अंश हटाने को लेकर चर्चा हुई थी। सोनिया गांधी की टीम इन बदलावों पर सहमत नहीं हुई, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच प्रकाशन को लेकर सहमति नहीं बन सकी।

मोदी, RSS और चीन से जुड़े हिस्सों पर भी उठा सवाल

विवाद के दौरान कांग्रेस नेताओं की ओर से आरोप लगाए गए कि किताब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, RSS और भारत-चीन संबंधों से जुड़े कुछ हिस्सों को हटाने का दबाव था। कांग्रेस नेताओं ने इसे बाहरी दबाव से जोड़कर भी सवाल उठाए। हालांकि, Penguin Random House India ने इन आरोपों को खारिज किया था। प्रकाशक का कहना था कि भारत में किताब प्रकाशित नहीं करने का फैसला किसी बाहरी दबाव की वजह से नहीं लिया गया। साथ ही, उसने यह स्वीकार किया था कि प्रकाशन को लेकर बातचीत के दौरान एक महत्वपूर्ण मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन सकी। अब हार्पर कॉलिन्स इंडिया के साथ करार के बाद किताब के भारत में पाठकों तक पहुंचने का रास्ता साफ हो गया है। सोनिया गांधी की निजी जिंदगी और भारतीय राजनीति के उनके लंबे अनुभवों पर आधारित यह संस्मरण रिलीज से पहले ही राजनीतिक और साहित्यिक हलकों में चर्चा का विषय बन चुका है।


कृष्ण जन्माष्टमी आज, आधी रात में होगा कान्हा का जन्म, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, विधि और खास उपाय

by न्यूज डेस्क

देशभर में आज भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव यानी जन्माष्टमी का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है। मंदिरों में विशेष सजावट और झांकियों की तैयारी है, वहीं घरों में भी भक्त लड्डू गोपाल के जन्मोत्सव की तैयारियों में जुटे हैं। जन्माष्टमी पर भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। भक्त दिनभर व्रत रखते हैं और रात में श्रीकृष्ण के जन्म के समय पूजा-अर्चना कर अपना व्रत पूरा करते हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार, जन्माष्टमी हर साल भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है। इसे कृष्णाष्टमी, गोकुलाष्टमी और कृष्ण जयंती जैसे नामों से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि भगवान विष्णु ने इसी दिन श्रीकृष्ण के रूप में धरती पर अवतार लिया था।

रात में इस समय होगी श्रीकृष्ण की पूजा

भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मध्यरात्रि में हुआ था, इसलिए जन्माष्टमी की मुख्य पूजा रात 12 बजे के आसपास की जाती है। इस बार रोहिणी नक्षत्र रात 12 बजकर 29 मिनट से शुरू होकर रात 11 बजकर 4 मिनट तक रहेगा। ऐसे में भक्त मध्यरात्रि में लड्डू गोपाल का जन्मोत्सव मनाकर उनका अभिषेक और श्रृंगार कर सकते हैं। जन्म के समय भगवान की आरती और विशेष भोग लगाने की परंपरा है।

जन्माष्टमी पूजा में ये सामग्री रखें

लड्डू गोपाल की पूजा और श्रृंगार के लिए बाल कृष्ण की प्रतिमा, झूला, नए वस्त्र, मुकुट, बांसुरी और मोरपंख की जरूरत होती है। इसके अलावा पूजा के लिए चंदन, रोली, अक्षत, दीपक, धूप, कपूर और फूल रखे जाते हैं। भगवान के अभिषेक के लिए पंचामृत तैयार किया जाता है। इसमें दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल शामिल होते हैं। भोग के लिए माखन-मिश्री, धनिया पंजीरी, फल और मिठाई रखी जाती है। भगवान श्रीकृष्ण को तुलसी दल अर्पित करने की भी परंपरा है।

ऐसे करें लड्डू गोपाल का अभिषेक और श्रृंगार

जन्माष्टमी के दिन सुबह स्नान करने के बाद स्वच्छ कपड़े पहनकर व्रत का संकल्प लें। इसके बाद घर के मंदिर और पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई कर उसे सजाएं। लड्डू गोपाल के लिए सुंदर झूला भी तैयार करें। रात में जन्म मुहूर्त के समय सबसे पहले भगवान को गंगाजल से स्नान कराएं। इसके बाद पंचामृत से अभिषेक करें। अभिषेक के बाद उन्हें नए वस्त्र पहनाएं और मुकुट, बांसुरी, मोरपंख और चंदन से श्रृंगार करें। श्रृंगार पूरा होने के बाद लड्डू गोपाल को झूले में विराजमान करें और उन्हें झूला झुलाएं। इसके बाद माखन-मिश्री, धनिया पंजीरी, फल, मिठाई और पंचामृत का भोग लगाएं। भोग में तुलसी दल चढ़ाएं। अंत में धूप-दीप जलाकर श्रीकृष्ण की आरती करें और प्रसाद बांटकर व्रत खोलें।

जन्माष्टमी पर करें इन मंत्रों का जाप

ॐ कृष्णाय नमः।

ॐ देवकीनंदनाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो कृष्णः प्रचोदयात्।

ॐ क्लीं कृष्णाय नमः।

ॐ गोकुलनाथाय नमः।

ॐ नमो भगवते श्रीगोविंदाय नमः।

जन्माष्टमी पर किए जाते हैं ये उपाय

केसर वाले दूध से अभिषेक- धार्मिक मान्यता के अनुसार जन्मोत्सव के बाद लड्डू गोपाल का केसर मिले दूध से अभिषेक करना शुभ होता है। माना जाता है कि इससे घर में सुख-समृद्धि आती है। पान का पत्ता अर्पित करें- जन्माष्टमी की रात भगवान कृष्ण को पान का पत्ता चढ़ाने की भी परंपरा है। मान्यता है कि अगले दिन इस पत्ते पर रोली से श्रीयंत्र बनाकर तिजोरी या धन रखने के स्थान पर रखने से आर्थिक परेशानियां कम हो सकती हैं। ध्यान दें- पूजा के मुहूर्त और तिथि में स्थानीय पंचांग के अनुसार अंतर हो सकता है। इसलिए अपने शहर के पंचांग के अनुसार समय की पुष्टि करना उचित रहेगा।


‘बम’ की चिट्ठी मिलने से मचा हड़कंप, को-पायलट पर भी जांच की आंच; अहमदाबाद में Air India Express की इमरजेंसी लैंडिंग का मामला

by न्यूज डेस्क

अहमदाबाद एयरपोर्ट पर Air India Express की दमाम-दिल्ली फ्लाइट की इमरजेंसी लैंडिंग के मामले में जांच का दायरा बढ़ता नजर आ रहा है। 31 अगस्त को विमान में बम से जुड़ी धमकी वाली चिट्ठी मिलने के बाद फ्लाइट को अहमदाबाद में उतारा गया था। अब पुलिस जांच में एयरलाइंस की को-पायलट को लेकर भी संदेह सामने आने की बात कही जा रही है। हालांकि, जांच एजेंसियों ने अभी तक को-पायलट की भूमिका को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है। पुलिस और फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) की टीमें पूरे मामले से जुड़े सबूतों की जांच में जुटी हैं।

विमान में मिली थी धमकी वाली चिट्ठी

यह मामला 31 अगस्त का है, जब दमाम से दिल्ली के लिए उड़ान भरने वाली Air India Express की फ्लाइट में बम को लेकर धमकी भरा संदेश मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट किया गया। किसी भी संभावित खतरे को देखते हुए विमान को अहमदाबाद एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई। विमान के अहमदाबाद पहुंचने के बाद यात्रियों और क्रू मेंबर्स को सुरक्षा जांच से गुजरना पड़ा। पुलिस ने फ्लाइट में मौजूद लोगों से पूछताछ की और यह पता लगाने की कोशिश शुरू की कि धमकी वाली चिट्ठी विमान के भीतर कैसे पहुंची।

को-पायलट पर क्यों हुआ शक?

जांच के दौरान पुलिस सूत्रों के हवाले से को-पायलट पर भी संदेह जताए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, केवल शक के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि धमकी भरे संदेश के पीछे कौन था और इसे विमान तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया क्या रही। पुलिस और FSL की टीमें चिट्ठी समेत मामले से जुड़े अन्य संभावित सबूतों की जांच कर रही हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि धमकी किसने दी और उसका मकसद क्या था।
Air India Express ने क्या कहा?

Air India Express ने इस मामले में कहा है कि वह सुरक्षा से जुड़े इस घटनाक्रम की जांच में कानून प्रवर्तन एजेंसियों को पूरा सहयोग दे रही है। एयरलाइन ने यात्रियों, क्रू और फ्लाइट ऑपरेशन की सुरक्षा से समझौता करने वाले किसी भी व्यवहार की निंदा की है। एयरलाइन के मुताबिक, जांच एजेंसियों के निष्कर्ष सामने आने के बाद मामले में जरूरी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुलिस और FSL की जांच जारी है और पूरे मामले में आगे की कार्रवाई जांच के नतीजों पर निर्भर करेगी।


अभिनंदन वर्तमान ने छोड़ी वायुसेना की नौकरी, अब कमर्शियल पायलट बनकर उड़ाएंगे यात्री विमान

by न्यूज डेस्क

2019 में पाकिस्तान के F-16 को मार गिराने और करीब 60 घंटे तक पाकिस्तानी हिरासत में रहने के बाद देशभर में चर्चित हुए अभिनंदन वर्तमान ने भारतीय वायुसेना को अलविदा कह दिया है। करीब 20 साल तक एयरफोर्स में सेवा देने वाले पूर्व ग्रुप कैप्टन अब कमर्शियल एविएशन में अपनी नई पारी शुरू कर चुके हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अभिनंदन ने 31 मार्च 2026 को भारतीय वायुसेना से रिटायरमेंट लिया था। इसके कुछ महीनों बाद अगस्त में उन्होंने गोवा की निजी एयरलाइन फ्लाई91 का हिस्सा बनकर यात्री विमान उड़ाने की दिशा में कदम बढ़ाया।

2019 में मिग-21 से भरी थी आखिरी नहीं, यादगार उड़ान

अभिनंदन का नाम 27 फरवरी 2019 को भारत-पाकिस्तान के बीच हुई हवाई झड़प के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आया था। उस समय वह भारतीय वायुसेना के MiG-21 बाइसन पर तैनात थे। हवाई मुकाबले के दौरान अभिनंदन ने पाकिस्तानी F-16 को निशाना बनाया। इसी कार्रवाई के दौरान उनका MiG-21 भी मिसाइल की चपेट में आ गया। विमान के क्षतिग्रस्त होने के बाद उन्होंने इजेक्ट किया और पैराशूट से पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के इलाके में जा पहुंचे, वहां पाकिस्तानी सेना ने उन्हें अपने कब्जे में ले लिया।

60 घंटे बाद हुई भारत वापसी

अभिनंदन को करीब ढाई दिन तक पाकिस्तान की हिरासत में रखा गया। उनकी रिहाई को लेकर भारत की ओर से लगातार दबाव बनाया गया। आखिरकार 1 मार्च 2019 को उन्हें अटारी-वाघा सीमा के रास्ते भारत वापस लाया गया। भारत लौटने के बाद अभिनंदन की बहादुरी और संयम की खूब चर्चा हुई। उनकी सैन्य सेवा के सम्मान में उन्हें 2021 में वीर चक्र से सम्मानित किया गया।

2037 तक रह सकते थे एयरफोर्स में

अभिनंदन की उम्र को देखते हुए उनका सामान्य रिटायरमेंट वर्ष 2037 बताया जा रहा था। यानी वह अभी कई वर्षों तक वायुसेना में अपनी सेवाएं जारी रख सकते थे। हालांकि, उन्होंने करीब दो दशक की सैन्य सेवा के बाद इस साल मार्च में एयरफोर्स छोड़ने का फैसला किया। अब उनका अनुभव फाइटर जेट के बजाय कमर्शियल विमान के कॉकपिट में नजर आएगा। फ्लाई91 के साथ जुड़ने के बाद अभिनंदन के करियर ने एक नया मोड़ लिया है—जहां अब उनका मिशन लड़ाकू विमानों के जरिए दुश्मन का मुकाबला करना नहीं, बल्कि यात्रियों को सुरक्षित उनके गंतव्य तक पहुंचाना होगा।


हवा में बिगड़ी क्रू मेंबर की तबीयत, दोहा से बेंगलुरु जा रही IndiGo फ्लाइट मस्कट डायवर्ट

by न्यूज डेस्क

नई दिल्ली: दोहा से बेंगलुरु जा रही IndiGo की फ्लाइट को गुरुवार को अचानक मस्कट डायवर्ट करना पड़ा। उड़ान के दौरान एक क्रू मेंबर की तबीयत बिगड़ने के बाद विमान में मेडिकल इमरजेंसी घोषित की गई। यात्रियों और क्रू की सुरक्षा को देखते हुए पायलट ने विमान को ओमान की राजधानी मस्कट ले जाने का फैसला किया। यह घटना IndiGo की फ्लाइट 6E 1302 में हुई, जो 3 सितंबर को दोहा से बेंगलुरु के लिए रवाना हुई थी। एयरलाइन के मुताबिक, उड़ान के बीच एक क्रू मेंबर को तत्काल चिकित्सा सहायता की जरूरत पड़ी। इसके बाद विमान का रूट बदलकर मस्कट कर दिया गया।

मस्कट एयरपोर्ट पर कराया गया इलाज

मस्कट एयरपोर्ट पर विमान की सुरक्षित लैंडिंग के बाद मेडिकल टीम ने बीमार क्रू मेंबर की जांच की और जरूरी उपचार दिया। IndiGo ने बताया कि फिलहाल उनकी हालत बेहतर है। मेडिकल इमरजेंसी के चलते विमान के मस्कट में रुकने से यात्रियों को भी कुछ समय तक इंतजार करना पड़ा। एयरलाइन की ओर से यात्रियों के लिए रिफ्रेशमेंट की व्यवस्था की गई और उन्हें फ्लाइट की स्थिति के बारे में लगातार जानकारी दी गई।

यात्रियों को बेंगलुरु पहुंचाने की तैयारी

IndiGo ने यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने के लिए वैकल्पिक विमान और नए क्रू की व्यवस्था की है। हालांकि, एयरलाइन की ओर से अभी बेंगलुरु पहुंचने के समय का नया अनुमान जारी नहीं किया गया है। एयरलाइन ने कहा कि फ्लाइट को मस्कट डायवर्ट करने का फैसला पूरी तरह सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया था। IndiGo ने रूट बदलने के कारण यात्रियों को हुई असुविधा पर खेद जताते हुए उनसे माफी भी मांगी है। ऐसे मामलों में विमान को नजदीकी उपयुक्त एयरपोर्ट पर उतारना सामान्य सुरक्षा प्रक्रिया का हिस्सा होता है, ताकि बीमार यात्री या क्रू मेंबर को समय पर चिकित्सा सहायता मिल सके।


OBC क्रीमी लेयर मामले में केंद्र को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं, पुराने आदेश पर रोक से इनकार

by न्यूज डेस्क

नई दिल्ली: अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) में क्रीमी लेयर के निर्धारण को लेकर केंद्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल राहत नहीं मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने 11 मार्च के फैसले पर रोक लगाने से इनकार करते हुए केंद्र की स्पष्टीकरण याचिका पर सभी संबंधित पक्षों को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 17 सितंबर 2026 को होगी। जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने केंद्र सरकार की याचिका पर सुनवाई की। केंद्र की ओर से अदालत से पिछले फैसले के क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगाने की मांग की गई थी, लेकिन कोर्ट ने इस स्तर पर ऐसा कोई आदेश देने से इनकार कर दिया।

सिर्फ माता-पिता की सैलरी से तय नहीं होगी क्रीमी लेयर

सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च को दिए अपने फैसले में कहा था कि OBC क्रीमी लेयर तय करने के लिए केवल माता-पिता की आय या वेतन को आधार नहीं बनाया जा सकता। अदालत के मुताबिक, किसी परिवार की सामाजिक और आर्थिक स्थिति का आकलन करते समय माता-पिता का पद, उनकी सामाजिक स्थिति और नौकरी की श्रेणी जैसे अन्य पहलुओं को भी ध्यान में रखना जरूरी है। इस व्यवस्था का असर खास तौर पर उन परिवारों पर पड़ सकता है जिनके माता-पिता सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, बैंकों या निजी कंपनियों में कार्यरत हैं। अदालत की व्यवस्था के अनुसार, केवल अधिक वेतन होने के आधार पर उनके बच्चों को OBC आरक्षण के लाभ से बाहर नहीं किया जा सकता।
केंद्र ने UPSC 2025 को लेकर जताई चिंता

केंद्र सरकार के कार्मिक मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट में स्पष्टीकरण याचिका दाखिल कर फैसले को लागू करने में सामने आ रही व्यावहारिक दिक्कतों का हवाला दिया है। सरकार की मुख्य चिंता UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 की प्रक्रिया को लेकर है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि UPSC की ओर से अनुशंसित 958 उम्मीदवारों के सर्विस एलोकेशन की प्रक्रिया पुराने नियमों के आधार पर अंतिम चरण में पहुंच चुकी थी। केंद्र का कहना है कि यदि सुप्रीम कोर्ट के मार्च के फैसले को पिछली तारीख से लागू किया गया, तो इससे मेरिट लिस्ट, कैडर आवंटन और ट्रेनिंग की पूरी प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। सरकार के मुताबिक, इसका असर केवल केंद्र सरकार की भर्ती प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहेगा। केंद्र ने अदालत को बताया कि 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चल रही विभिन्न भर्तियों तथा उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रवेश प्रक्रिया पर भी इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।

17 सितंबर को फिर होगी सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल अपने पुराने आदेश के अमल पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। हालांकि, अदालत ने सभी संबंधित पक्षों को अपना जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया है। अब केंद्र सरकार की स्पष्टीकरण याचिका पर अगली सुनवाई 17 सितंबर 2026 को होगी। उस दिन अदालत यह तय कर सकती है कि मार्च के फैसले को लागू करने से जुड़ी केंद्र की व्यावहारिक चिंताओं पर क्या रुख अपनाया जाए।


‘नेपाल को फिर खड़ा करेंगे’, तबाही के बीच पहुंचे सोनू सूद, बोले- दुनिया भर के लोग मदद के लिए आगे आएं

by न्यूज डेस्क

नेपाल में आई भीषण आपदा के बाद तबाही से जूझ रहे इलाकों का जायजा लेने बॉलीवुड अभिनेता सोनू सूद खुद मौके पर पहुंचे। बाढ़ और मलबे से प्रभावित क्षेत्रों में हालात देखकर उन्होंने लोगों से नेपाल की मदद के लिए आगे आने की अपील की। सोनू सूद ने कहा कि वहां की स्थिति बेहद गंभीर है और जितनी मदद की जरूरत है, उसके मुकाबले अभी मदद के लिए आगे आने वाले हाथ कम हैं। सोनू सूद ने ‘आजतक’ से बातचीत में कहा कि मौके पर पहुंचकर ही इस आपदा के असर का सही अंदाजा लगाया जा सकता है। कई लोगों के घर तबाह हो चुके हैं और बड़ी संख्या में परिवार मुश्किल हालात से गुजर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस संकट की घड़ी में सिर्फ नेपाल के लोगों को ही नहीं, बल्कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले लोगों को भी मदद के लिए आगे आना चाहिए। उन्होंने अपील करते हुए कहा कि सभी मिलकर प्रयास करें, ताकि नेपाल को दोबारा अपने पैरों पर खड़ा किया जा सके।

‘अभी भी पानी का असर साफ दिखाई दे रहा है’

सोनू सूद ने आपदा प्रभावित क्षेत्र के हालात बताते हुए कहा कि घटना के करीब एक सप्ताह बाद भी वहां तबाही के निशान साफ नजर आ रहे हैं। जिस जगह वह मौजूद थे, वहां पानी के बहाव और मलबे को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि आपदा के समय स्थिति कितनी भयावह रही होगी। उन्होंने बताया कि पानी का स्तर उस समय काफी ऊपर तक पहुंच गया था और पूरा इलाका जलमग्न हो गया होगा। कई जगहों पर मलबा काफी ऊंचाई तक जमा है। इससे साफ है कि आपदा के कई दिन बीत जाने के बावजूद प्रभावित लोगों की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं।

‘पता लगा रहे हैं कि लोगों को किस चीज की जरूरत है’

नेपाल में राहत और मदद को लेकर अपनी योजना पर सोनू सूद ने कहा कि उनकी टीम और उनके सहयोगी लगातार प्रभावित इलाकों तक पहुंच रहे हैं। उनकी कोशिश है कि पहले यह समझा जाए कि लोगों को तत्काल किस तरह की सहायता की सबसे ज्यादा जरूरत है। उन्होंने कहा कि कई दोस्त और सहयोगी भी मौके पर पहुंच रहे हैं और मिलकर हालात का आकलन किया जा रहा है। इसके बाद ज्यादा से ज्यादा लोगों को राहत अभियान से जोड़ने की कोशिश की जाएगी। सोनू सूद का कहना है कि केवल मौके पर पहुंचना ही काफी नहीं है। जरूरत इस बात की है कि ज्यादा से ज्यादा लोग आगे आएं और प्रभावित परिवारों की मदद करें, ताकि उन्हें जल्द से जल्द सामान्य जिंदगी की ओर लौटने में मदद मिल सके।

एक हफ्ते बाद भी जारी है राहत और बचाव अभियान

दरअसल, नेपाल में आई इस आपदा के बाद कई इलाकों में बड़े पैमाने पर तबाही हुई है। पानी और मलबे के तेज बहाव ने कई घरों, बाजारों और कस्बों को प्रभावित किया। नेपाल-चीन सीमा के पास कस्टम और इमिग्रेशन क्षेत्र से लेकर आसपास के इलाकों तक आपदा का असर देखने को मिला। इसके बाद पानी और मलबा निचले इलाकों की ओर बढ़ता गया। रास्ते में आने वाले कई इलाकों में घरों और दूसरी संरचनाओं को नुकसान पहुंचा। बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए और कई लोगों के लापता होने की खबर सामने आई। सबसे ज्यादा चिंता उन लोगों को लेकर है, जो अभी भी मलबे या प्रभावित क्षेत्रों में फंसे हुए बताए जा रहे हैं। उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने के लिए राहत और बचाव अभियान लगातार चलाया जा रहा है। भारत समेत कई देशों की टीमें और विशेषज्ञ राहत-बचाव कार्य में सहयोग कर रहे हैं। बचाव दलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती समय की है, क्योंकि मलबे में फंसे लोगों तक जल्द पहुंचना बेहद जरूरी है। ऐसे हालात के बीच सोनू सूद ने लोगों से अपील की है कि वे नेपाल के प्रभावित लोगों की मदद के लिए अपनी क्षमता के अनुसार आगे आएं। उनका कहना है कि सामूहिक प्रयासों से ही नेपाल को इस बड़ी त्रासदी से उबरने में मदद मिल सकती है।


SCO Summit: आतंकवाद पर PM मोदी का दो टूक संदेश, बोले- ‘डबल स्टैंडर्ड’ की कोई जगह नहीं, पाकिस्तान को भी साफ संकेत

by न्यूज डेस्क

SCO Summit Latest Update: किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) का 26वां शिखर सम्मेलन चल रहा है। इस अहम बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद के मुद्दे पर बेहद सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में किसी भी तरह के दोहरे मापदंड की गुंजाइश नहीं होनी चाहिए। प्रधानमंत्री ने बिना किसी देश का नाम लिए उन देशों को स्पष्ट संदेश दिया, जो आतंकवाद को अपनी रणनीतिक नीति के तौर पर इस्तेमाल करते हैं या आतंकियों को पनाह और समर्थन देते हैं। पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि आतंकवाद को किसी भी परिस्थिति में रणनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ केवल घटनाओं के बाद प्रतिक्रिया देने के बजाय उसके पूरे नेटवर्क को खत्म करने पर जोर दिया।

आतंकवाद के पूरे इकोसिस्टम पर प्रहार की जरूरत

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आतंकवाद की चुनौती सिर्फ आतंकी हमलों तक सीमित नहीं है। इसके पीछे मौजूद वित्तीय नेटवर्क, आतंकियों की भर्ती, कट्टरपंथ फैलाने वाली गतिविधियां और सुरक्षित ठिकानों को भी निशाना बनाना जरूरी है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होकर निर्णायक कार्रवाई करने की अपील की। पीएम का संदेश साफ था कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई तभी प्रभावी हो सकती है, जब उसके पूरे इकोसिस्टम को एक साथ खत्म किया जाए।

SCO मंच से पाकिस्तान को अप्रत्यक्ष संदेश

प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में पाकिस्तान का सीधे तौर पर नाम नहीं लिया, लेकिन आतंकवाद को लेकर दिया गया उनका संदेश काफी स्पष्ट माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि जो देश आतंकवाद को अपनी नीति का हिस्सा बनाते हैं और आतंकियों को समर्थन या सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराते हैं, उन्हें यह समझना होगा कि ऐसी रणनीति लंबे समय तक स्वीकार नहीं की जा सकती। भारत लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति की वकालत करता रहा है। SCO जैसे बहुपक्षीय मंच पर पीएम मोदी का यह रुख भारत की सुरक्षा प्राथमिकताओं को स्पष्ट करता है।

शी जिनपिंग से मुलाकात, साथ दिखे मोदी

SCO सम्मेलन से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ भी मुलाकात हुई। दोनों नेताओं ने हाथ मिलाया और बैठक स्थल पर एक साथ जाते हुए नजर आए। भारत और चीन के बीच सीमा समेत कई अहम मुद्दे रहे हैं, ऐसे में दोनों नेताओं की मुलाकात को रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने सम्मेलन से जुड़ी एक तस्वीर भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा की।

पुतिन से भी हुई अहम द्विपक्षीय बैठक

SCO Summit से इतर प्रधानमंत्री मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ द्विपक्षीय बैठक की। दोनों नेताओं के बीच भारत-रूस संबंधों, अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और विभिन्न वैश्विक संघर्षों पर चर्चा हुई। बैठक में पीएम मोदी ने युद्ध और संघर्ष की मौजूदा परिस्थितियों के बीच स्थायी शांति की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बातचीत और कूटनीति के जरिए ही विवादों का समाधान निकाला जा सकता है। भारत और रूस के बीच लंबे समय से रणनीतिक संबंध रहे हैं। ऐसे समय में जब वैश्विक स्तर पर कई बड़े भू-राजनीतिक बदलाव हो रहे हैं, मोदी-पुतिन मुलाकात को भारत की संतुलित विदेश नीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

SCO Summit में भारत की तीन बड़ी प्राथमिकताएं

बिश्केक में हो रहे SCO शिखर सम्मेलन में भारत की प्राथमिकताओं में सुरक्षा, क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और ऊर्जा सहयोग प्रमुख हैं। भारत का जोर इस बात पर है कि यूरेशियाई क्षेत्र में आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को बढ़ाया जाए, लेकिन साथ ही राष्ट्रीय हितों और रणनीतिक स्वायत्तता से कोई समझौता न हो। इस सम्मेलन की थीम ‘SCO के 25 साल: टिकाऊ शांति, विकास और समृद्धि की ओर साथ मिलकर’ रखी गई है। यह बैठक संगठन की स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित की जा रही है।
कई देशों के नेताओं से पीएम मोदी की मुलाकात

किर्गिस्तान के दो दिवसीय दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कई देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। इनमें रूस, ईरान, किर्गिज गणराज्य और आर्मेनिया के नेताओं के साथ हुई बैठकें शामिल हैं। इन मुलाकातों में द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने, व्यापार, कनेक्टिविटी, ऊर्जा और साझा हितों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। प्रधानमंत्री ने बिश्केक में आयोजित छठे विश्व नोमैड खेलों के उद्घाटन समारोह में भी हिस्सा लिया। SCO सम्मेलन में चीन, रूस, ईरान समेत संगठन के सदस्य देशों के शीर्ष नेता हिस्सा ले रहे हैं। ऐसे में भारत के लिए यह मंच क्षेत्रीय सुरक्षा के साथ-साथ आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण अवसर है।


7.8% GDP ग्रोथ के बीच PM मोदी का स्वदेशी मंत्र, बोले- जरूरत न हो तो सोना न खरीदें, विदेश में शादी से भी बचें

by न्यूज डेस्क

भारत की अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन करते हुए 7.8 फीसदी की विकास दर दर्ज की है। मजबूत GDP आंकड़ों से उत्साहित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की आर्थिक रफ्तार की सराहना करते हुए इसे आत्मविश्वास बढ़ाने वाला संकेत बताया। साथ ही उन्होंने देशवासियों से विदेशी मुद्रा बचाने और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को मजबूत करने की दिशा में कुछ अहम अपील भी की। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वैश्विक स्तर पर कई चुनौतियां मौजूद होने के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूती के साथ आगे बढ़ रही है। उन्होंने देश की 7.8 फीसदी GDP ग्रोथ को उत्साह बढ़ाने वाला आंकड़ा बताया और कहा कि इस गति को आगे भी बनाए रखने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं।

पीएम मोदी ने दिया 'स्वदेशी' का मंत्र

GDP के आंकड़ों पर खुशी जताने के साथ ही प्रधानमंत्री ने देशवासियों से ऐसी चीजों पर खर्च कम करने की अपील की, जिनसे विदेशी मुद्रा बाहर जाती है। उन्होंने खास तौर पर जरूरत नहीं होने पर सोना खरीदने से बचने की बात कही। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारतीय परिवारों को शादी समारोह के लिए विदेश जाने के बजाय देश में ही आयोजन करने पर विचार करना चाहिए। उनका कहना है कि इस तरह देश की अर्थव्यवस्था में पैसा बना रहेगा और घरेलू कारोबार को भी फायदा मिलेगा। इसके अलावा उन्होंने लोगों से अनावश्यक विदेश यात्राओं से बचने की अपील करते हुए कहा कि आत्मनिर्भरता के जरिए ही 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। इसके लिए देशवासियों को मिलकर संकल्प लेने की जरूरत है।

7.8% GDP ग्रोथ पर PM मोदी ने जताई खुशी

सोमवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत की GDP ग्रोथ 7.8 फीसदी रही। यह आंकड़ा बाजार के अनुमानों और कई विशेषज्ञों की उम्मीदों से बेहतर बताया जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर साझा किए गए एक सेल्फी वीडियो में भी इस उपलब्धि का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि तमाम चुनौतियों और नकारात्मक माहौल के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था ने उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया है। प्रधानमंत्री ने अपने वीडियो के साथ GDP के आंकड़ों को लेकर उत्साह जताते हुए लिखा कि 7.8 फीसदी की ग्रोथ देश के बढ़ते आत्मविश्वास को दर्शाती है।

2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य

प्रधानमंत्री मोदी लगातार 'आत्मनिर्भर भारत' और 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य पर जोर देते रहे हैं। ताजा अपील में भी उन्होंने घरेलू अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और विदेशी मुद्रा के अनावश्यक खर्च को कम करने पर जोर दिया। उनका संदेश साफ है कि देश की आर्थिक वृद्धि को केवल सरकारी नीतियों से नहीं, बल्कि आम लोगों की खरीदारी और खर्च से जुड़े फैसलों से भी मजबूती मिल सकती है।


पीएम मोदी को उज्बेकिस्तान का सर्वोच्च सम्मान, यूरेनियम सप्लाई समेत कई अहम समझौतों पर बनी सहमति

by न्यूज डेस्क

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दो दिवसीय उज्बेकिस्तान यात्रा कई महत्वपूर्ण उपलब्धियों के साथ पूरी हो गई। यात्रा के दौरान भारत और उज्बेकिस्तान के बीच रणनीतिक और आर्थिक सहयोग को बढ़ाने वाले कई फैसले लिए गए। इनमें यूरेनियम की दीर्घकालिक सप्लाई को लेकर बनी सहमति को खास तौर पर अहम माना जा रहा है। वहीं, उज्बेकिस्तान ने प्रधानमंत्री मोदी को अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान से भी सम्मानित किया।

पीएम मोदी को मिला उज्बेकिस्तान का सर्वोच्च सम्मान

उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव ने रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश के सर्वोच्च राज्य सम्मान ‘ओली दाराजली डस्टलिक’ से सम्मानित किया। यह सम्मान दोनों देशों के बीच संबंधों को मजबूत करने में उनके योगदान के लिए दिया गया। इस सम्मान के साथ प्रधानमंत्री मोदी को अब तक मिले अंतरराष्ट्रीय सम्मानों की संख्या 36 हो गई है।

यूरेनियम की सप्लाई पर बड़ा समझौता

यात्रा के दौरान भारत और उज्बेकिस्तान के बीच यूरेनियम की दीर्घकालिक आपूर्ति को लेकर महत्वपूर्ण सहमति बनी। प्रधानमंत्री मोदी ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि यह समझौता भारत की परमाणु ऊर्जा जरूरतों के लिहाज से महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। भारत लगातार अपने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने और परमाणु ऊर्जा की क्षमता बढ़ाने पर जोर दे रहा है। ऐसे में उज्बेकिस्तान से लंबे समय तक यूरेनियम की उपलब्धता भारत की परमाणु ऊर्जा योजनाओं को मजबूती दे सकती है।

सिस्टर सिटी और सिस्टर स्टेट को लेकर भी पहल

दोनों देशों के बीच सहयोग का दायरा परमाणु ऊर्जा तक सीमित नहीं रहा। भारत और उज्बेकिस्तान के बीच ‘सिस्टर सिटी’ और ‘सिस्टर स्टेट’ साझेदारी से जुड़े तीन समझौतों को भी अंतिम रूप दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने जोर दिया कि इन समझौतों को सिर्फ औपचारिक दस्तावेजों तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। इसके लिए स्पष्ट रोडमैप तैयार कर ऐसी परियोजनाओं को बढ़ावा देने की जरूरत है, जिनका सीधा असर जमीन पर दिखाई दे।

‘न्यू ताशकंद’ के लिए GIFT City का मॉडल

बैठक में शहरी विकास और स्मार्ट सिटी से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। उज्बेकिस्तान इन दिनों ‘न्यू ताशकंद’ नाम से एक नए शहर को विकसित कर रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने गुजरात की GIFT City का उदाहरण देते हुए इसे शहरी विकास और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए एक उपयोगी मॉडल बताया। उन्होंने उज्बेकिस्तान के प्रतिनिधिमंडल को भारत आने का न्योता भी दिया, ताकि वे GIFT City की योजना, तकनीक और विकास प्रक्रिया को करीब से समझ सकें।

पहली बार 1 अरब डॉलर के पार पहुंचा व्यापार

उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव ने भारत को ‘विश्वसनीय रणनीतिक साझेदार’ बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार पहली बार पिछले साल 1 अरब डॉलर के आंकड़े को पार कर गया। इसके अलावा दोनों देशों के बीच संयुक्त उद्यमों की संख्या में भी पिछले कुछ वर्षों में करीब सात गुना बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह दोनों देशों के बीच बढ़ते आर्थिक सहयोग का संकेत माना जा रहा है।

भारत-उज्बेकिस्तान के बीच हर सप्ताह 14 सीधी उड़ानें

दोनों देशों के बीच कनेक्टिविटी को भी मजबूत किया गया है। राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के मुताबिक, भारत और उज्बेकिस्तान के बीच फिलहाल हर सप्ताह 14 सीधी उड़ानें संचालित हो रही हैं। कुल मिलाकर प्रधानमंत्री मोदी की उज्बेकिस्तान यात्रा के दौरान परमाणु ऊर्जा, शहरी विकास, व्यापार और कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर रहा। दोनों देशों के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी के लिहाज से इस यात्रा को अहम माना जा रहा है।


एक मंच पर मोदी-जिनपिंग-पुतिन! बिश्केक में SCO समिट, सुरक्षा से लेकर आतंकवाद तक इन मुद्दों पर मंथन

by न्यूज डेस्क

मध्य एशिया में आज दुनिया की नजरें किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक पर टिकी हैं। यहां शंघाई सहयोग संगठन (SCO) का 26वां शिखर सम्मेलन शुरू हो रहा है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत कई देशों के शीर्ष नेता हिस्सा ले रहे हैं। दो दिनों तक चलने वाली इस बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा के साथ वैश्विक राजनीति और आर्थिक सहयोग से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। 31 अगस्त और 1 सितंबर को होने वाले SCO शिखर सम्मेलन को संगठन के लिए भी खास माना जा रहा है, क्योंकि इसी दौरान SCO अपने गठन के 25 साल पूरे होने का अवसर मना रहा है। सम्मेलन में सदस्य देशों के नेता आतंकवाद, अलगाववाद, उग्रवाद और सीमा पार सुरक्षा चुनौतियों के अलावा व्यापार, ऊर्जा, परिवहन संपर्क और डिजिटल सहयोग जैसे विषयों पर विचार-विमर्श कर सकते हैं। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और यूक्रेन युद्ध के साथ बदलते वैश्विक समीकरणों का असर भी इस बैठक में देखने को मिल सकता है। ऐसे में एक ही मंच पर भारत, चीन और रूस के शीर्ष नेताओं की मौजूदगी इस सम्मेलन को और महत्वपूर्ण बना रही है।

बिश्केक पहुंचे PM मोदी, हुआ भव्य स्वागत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी दो दिवसीय उज्बेकिस्तान यात्रा पूरी करने के बाद रविवार को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक पहुंचे। एयरपोर्ट पर किर्गिस्तान के कैबिनेट मंत्रियों के अध्यक्ष अदिलबेक कासिमालियेव ने उनका स्वागत किया। इस दौरान पारंपरिक किर्गिज नृत्य की प्रस्तुति भी हुई। बिश्केक पहुंचने के बाद प्रधानमंत्री का होटल में भी विशेष स्वागत किया गया। यहां ‘वंदे मातरम’ के नारों के साथ उनका अभिनंदन हुआ। प्रधानमंत्री ने ‘मां तुझे सलाम’ गीत पर योग प्रस्तुति देखी। इसके बाद भगवान शिव पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किया गया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि प्रधानमंत्री SCO शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए बिश्केक पहुंचे हैं। उनके मुताबिक, सम्मेलन में SCO के 10 सदस्य देशों के अलावा 15 साझेदार और 2 पर्यवेक्षक देश भी क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा के लिए मौजूद रहेंगे।
सुरक्षा और आतंकवाद पर भारत का जोर

प्रधानमंत्री मोदी किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सदिर जापारोव के निमंत्रण पर SCO सम्मेलन में शामिल हो रहे हैं। भारत से रवाना होने से पहले प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया था कि भारत क्षेत्र में सुरक्षा, संपर्क और विकास के अवसरों को बढ़ाने के पक्ष में है। भारत लंबे समय से आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद को क्षेत्रीय शांति के लिए गंभीर चुनौती बताता रहा है। ऐसे में SCO के मंच से प्रधानमंत्री एक बार फिर आतंकवाद के खिलाफ सहयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर भारत का रुख मजबूती से रख सकते हैं।

शी जिनपिंग, पुतिन और शहबाज शरीफ भी मौजूद

SCO सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के अलावा ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन समेत कई बड़े नेताओं के शामिल होने की उम्मीद है। रूसी राष्ट्रपति कार्यालय क्रेमलिन के प्रवक्ता यूरी उशाकोव के मुताबिक, पुतिन की शी जिनपिंग और मसूद पेजेश्कियन के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय बातचीत भी हो सकती है। वहीं, प्रधानमंत्री मोदी भी SCO बैठक से इतर कई नेताओं के साथ द्विपक्षीय मुलाकात कर सकते हैं। इनमें किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सदिर जापारोव और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ संभावित बैठकें अहम मानी जा रही हैं।

भारत के लिए क्यों अहम है SCO सम्मेलन?

SCO भारत के लिए मध्य एशिया और यूरेशिया के साथ रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण मंच है। सुरक्षा के अलावा ऊर्जा, व्यापार, परिवहन और कनेक्टिविटी जैसे मुद्दे भारत के लिए खास महत्व रखते हैं। एक तरफ भारत रूस के साथ अपने पारंपरिक संबंधों को बनाए रखना चाहता है, वहीं चीन के साथ सीमा और रणनीतिक मुद्दों पर मतभेद भी हैं। ऐसे में मोदी, जिनपिंग और पुतिन का एक ही मंच पर होना सम्मेलन को वैश्विक स्तर पर खास बना रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर होगी कि बिश्केक में होने वाली बैठकों से क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद और बदलते वैश्विक शक्ति संतुलन को लेकर क्या संदेश निकलता है।


रक्षाबंधन पर जशपुर की बहनों ने CM विष्णुदेव साय को बांधी राखी, पंडरीपानी में महतारी सदन की सौगात

जशपुर। रक्षाबंधन के अवसर पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जशपुर जिले में महिलाओं के साथ पर्व मनाया। फरसाबहार विकासखंड के ग्राम पंडरीपानी में आयोजित रक्षाबंधन एवं बहनों से संवाद कार्यक्रम में महिलाओं ने मुख्यमंत्री को राखी बांधी। मुख्यमंत्री ने भी महिलाओं को उपहार देकर उनका सम्मान किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने पंडरीपानी में नवनिर्मित महतारी सदन का लोकार्पण किया। इसके अलावा गांव में कई विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन किया गया। मुख्यमंत्री ने फरसाबहार और भेलवा में भी नए महतारी सदन के निर्माण की घोषणा की।

महतारी वंदन योजना की 31वीं किस्त का किया उल्लेख

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने महतारी वंदन योजना का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश की पात्र महिलाओं को हर महीने 1,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है। मुख्यमंत्री के अनुसार, रक्षाबंधन के अवसर पर महतारी वंदन योजना की 31वीं किस्त जारी की गई है। इस किस्त के तहत 67 लाख से अधिक माताओं और बहनों के बैंक खातों में 631 करोड़ 38 लाख रुपये से अधिक की राशि ट्रांसफर की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य महिलाओं को केवल आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनाकर परिवार, समाज और गांव की अर्थव्यवस्था में उनकी भागीदारी को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि महिलाओं की प्रगति प्रदेश के विकास का महत्वपूर्ण आधार है।

24.70 लाख रुपये से बने महतारी सदन का लोकार्पण

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पंडरीपानी में 24.70 लाख रुपये की लागत से निर्मित महतारी सदन का लोकार्पण किया। रक्षाबंधन के अवसर पर इसे क्षेत्र की महिलाओं को समर्पित किया गया। महतारी सदन में हॉल, किचन, स्टोर, कार्यालय कक्ष और दुकान संचालन के लिए अलग स्थान की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। सरकार के अनुसार, यह भवन महिलाओं की बैठकों, प्रशिक्षण और स्व-सहायता समूहों की गतिविधियों के लिए उपयोग में लाया जाएगा। प्रदेश में पिछले ढाई वर्षों के दौरान 481 महतारी सदनों की स्वीकृति दी गई है।

महिलाओं के प्रशिक्षण और स्वरोजगार का केंद्र बनेगा महतारी सदन

सरकार की योजना के अनुसार महतारी सदन केवल एक भवन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे महिलाओं की विभिन्न आर्थिक और सामाजिक गतिविधियों के केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां स्व-सहायता समूहों की बैठकें, प्रशिक्षण कार्यक्रम, उत्पाद निर्माण और विपणन जैसी गतिविधियां संचालित की जा सकेंगी। इससे महिलाओं को कौशल विकास के साथ रोजगार और स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ने की भी योजना है।

पंडरीपानी में 64.49 लाख रुपये के विकास कार्य

मुख्यमंत्री ने ग्राम पंचायत पंडरीपानी में कुल 64.49 लाख रुपये की लागत से जुड़े छह विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन किया। इन कार्यों में 24.70 लाख रुपये की लागत से निर्मित महतारी सदन और सिसरिंगा बस्ती में 10 लाख रुपये की लागत से सीसी सड़क निर्माण शामिल है। इसके अलावा महलीटोली पहुंच मार्ग में 7.80 लाख रुपये की लागत से सीसी रोड और 3.99 लाख रुपये की लागत से मंच निर्माण का कार्य भी शामिल है। मुख्यमंत्री ने मुडराटोली से बलुआटोली पहुंच मार्ग में 12 लाख रुपये की लागत से सीसी रोड निर्माण की भी घोषणा की। साथ ही फरसाबहार और भेलवा में नए महतारी सदनों के निर्माण की बात कही गई। रक्षाबंधन के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने महिलाओं से संवाद करते हुए महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता को सरकार की प्राथमिकता बताया। कार्यक्रम के दौरान क्षेत्र के विकास कार्यों और महिलाओं के लिए संचालित योजनाओं पर भी चर्चा की गई।


क्या नेपाल में 'Made in China' है फ्लैश फ्लड? आरोपों के बीच बीजिंग ने दिया जवाब

by पूजा झा

काठमांडू/बीजिंग: नेपाल में तिब्बत सीमा के पास आई भीषण फ्लैश फ्लड के बाद चीन की भूमिका को लेकर सवाल उठने लगे हैं। नेपाल के कुछ पत्रकारों के एक समूह ने आरोप लगाया है कि चीन ने संभावित बाढ़ के खतरे को लेकर नेपाल को समय रहते पर्याप्त जानकारी नहीं दी। इन आरोपों के बीच नेपाल में चीन के राजदूत झांग माओमिंग ने आपदा पर प्रतिक्रिया देते हुए चीन की ओर से किए जा रहे राहत प्रयासों और सहायता की जानकारी दी है। चीनी राजदूत झांग माओमिंग ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर ग्यिरोंग-रसुवागढ़ी सीमा क्षेत्र में आई प्राकृतिक आपदा पर दुख जताया। उन्होंने कहा कि इस हादसे से चीन और नेपाल, दोनों देशों के सीमा क्षेत्रों में जान-माल का नुकसान हुआ है। राजदूत ने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि इस मुश्किल घड़ी में चीन नेपाल के साथ खड़ा है। उन्होंने बताया कि चीन की ओर से भी इस आपदा में नुकसान हुआ है, लेकिन इसके बावजूद बीजिंग ने नेपाल के लिए आपातकालीन राहत सामग्री और आर्थिक सहायता की व्यवस्था की है।

चीन ने कहा- हर संभव मदद जारी रहेगी

झांग माओमिंग ने कहा कि चीन आगे भी नेपाल को हरसंभव सहायता देने का प्रयास करेगा। उन्होंने भरोसा जताया कि दोनों देश मिलकर इस मुश्किल दौर से बाहर निकलेंगे और प्रभावित क्षेत्रों में जल्द सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए सहयोग करेंगे। हालांकि, चीनी राजदूत ने नेपाल के पत्रकारों की ओर से लगाए गए उस आरोप पर सीधे तौर पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, जिसमें कहा गया था कि चीन ने बाढ़ के संभावित खतरे की जानकारी नेपाल के साथ समय रहते साझा नहीं की। उनका बयान मुख्य रूप से राहत सामग्री, आर्थिक सहायता और आपदा के बाद दोनों देशों के बीच सहयोग पर केंद्रित रहा।

सीमा क्षेत्र होने के कारण बढ़ी कूटनीतिक बहस

ग्यिरोंग-रसुवागढ़ी क्षेत्र चीन और नेपाल के बीच एक महत्वपूर्ण सीमा इलाका है। ऐसे में फ्लैश फ्लड के बाद सूचना साझा करने, शुरुआती चेतावनी प्रणाली और आपदा प्रबंधन को लेकर उठे सवालों ने इस प्राकृतिक आपदा को कूटनीतिक बहस से भी जोड़ दिया है। फिलहाल दोनों देशों के प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान जारी है। प्रशासन लापता लोगों की तलाश और प्रभावित परिवारों तक जरूरी सहायता पहुंचाने में जुटा हुआ है।

नेपाल में 157 मौतों का दावा, चीन में भी सैकड़ों लापता

इस भीषण फ्लैश फ्लड से नेपाल और चीन के हिमालयी सीमा क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर तबाही हुई है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, नेपाल में अब तक 157 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है, जबकि सैकड़ों लोग लापता बताए जा रहे हैं। वहीं चीन की ओर से भी हालात गंभीर बताए जा रहे हैं और बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने की खबर है। अलग-अलग रिपोर्टों में चीन में 265 लोगों के लापता होने का दावा किया गया है। हालांकि, मृतकों और लापता लोगों के आंकड़े राहत एवं बचाव अभियान आगे बढ़ने के साथ बदल सकते हैं। दोनों देशों की एजेंसियां प्रभावित क्षेत्रों में लगातार तलाशी और राहत अभियान चला रही हैं। फ्लैश फ्लड की वजह को लेकर उठे सवालों और चीन पर लगाए जा रहे आरोपों के बीच फिलहाल सबसे बड़ा मुद्दा प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाना और भविष्य में ऐसी आपदाओं के लिए बेहतर शुरुआती चेतावनी तथा सूचना साझाकरण व्यवस्था तैयार करना है।


नेपाल में भोटेकोशी नदी की भीषण बाढ़: 16 की मौत, 105 भारतीय समेत 400 यात्री लापता, यूपी-बिहार में अलर्ट

by पूजा झा

नेपाल के रसुवा क्षेत्र में भोटेकोशी नदी में आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी है। इस आपदा में अब तक 16 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है, जबकि बड़ी संख्या में लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। नेपाल से भारत आने वाली नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी की आशंका को देखते हुए उत्तर प्रदेश और बिहार में भी प्रशासन को अलर्ट पर रखा गया है।

पीएम मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री से की बात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह से फोन पर बातचीत कर बाढ़ से हुई जनहानि पर गहरा दुख जताया। प्रधानमंत्री मोदी ने नेपाल को हरसंभव मानवीय सहायता और राहत उपलब्ध कराने का भरोसा दिया है। भोटेकोशी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद भारत प्रभावित लोगों के लिए जल्द राहत सामग्री भेजने की तैयारी कर रहा है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, भारत सरकार लगातार काठमांडू के संपर्क में है और हालात पर करीबी नजर रखे हुए है। जरूरत और परिस्थितियों के आधार पर मानवीय सहायता पैकेज जल्द नेपाल भेजा जा सकता है।

यूपी में योगी सरकार ने बढ़ाई सतर्कता

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नेपाल में बाढ़ से हुई तबाही को चिंताजनक बताया है। उन्होंने महाराजगंज और कुशीनगर जिलों में गंडक और नारायणी नदियों के जलस्तर में संभावित बढ़ोतरी को देखते हुए स्थानीय प्रशासन को पूरी तरह सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से राहत और बचाव से जुड़ी सभी जरूरी तैयारियां पहले से पूरी रखने को कहा है, ताकि जलस्तर बढ़ने की स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके।

बिहार में NDRF की टीमें तैनात

वहीं, बिहार में भी नेपाल की बाढ़ के संभावित असर को लेकर प्रशासन अलर्ट मोड में है। बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से बातचीत कर स्थिति पर चर्चा की है। राज्य के संवेदनशील इलाकों पर लगातार नजर रखी जा रही है। कोसी और गंडक नदी बेसिन में जलस्तर बढ़ने की आशंका को देखते हुए NDRF की कई टीमों को बिहार के छह जिलों के लिए रवाना किया गया है।

टिमुरे बाजार और सीमा क्षेत्र में भारी नुकसान

जानकारी के मुताबिक, बुधवार सुबह भोटेकोशी नदी में अचानक पानी का स्तर बढ़ गया, जिससे रसुवा क्षेत्र के टिमुरे बाजार और रसुवा सीमा नाके के कस्टम क्षेत्र में भारी नुकसान हुआ। तेज बहाव में कई वाहन बह गए और कई इलाकों में बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है। बाढ़ का असर ऊर्जा क्षेत्र पर भी पड़ा है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, करीब 13 जलविद्युत परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं। प्रभावित क्षेत्रों में सेना, सुरक्षा एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन की मदद से बचाव अभियान जारी है।

105 भारतीयों समेत 400 यात्रियों के लापता होने की सूचना

पर्यटन और ट्रैवल कंपनियों से मिले शुरुआती रिकॉर्ड के मुताबिक, प्रभावित इलाकों से करीब 400 यात्रियों के लापता होने की जानकारी सामने आई है, जिनमें 105 भारतीय नागरिक भी शामिल बताए जा रहे हैं। हालांकि, इन आंकड़ों की ट्रैवल एजेंसियों, स्थानीय गाइडों, प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के सहयोग से जांच की जा रही है। लापता बताए गए विदेशी पर्यटकों में भारत के अलावा ऑस्ट्रेलिया, नीदरलैंड्स, अमेरिका, मलेशिया, ब्रिटेन और दक्षिण अफ्रीका के नागरिक शामिल हैं। नेपाल में राहत और बचाव अभियान जारी है, जबकि भारत लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है। नेपाल से निकलने वाली नदियों के जलस्तर में संभावित बढ़ोतरी को देखते हुए भारत के सीमावर्ती राज्यों में प्रशासन को किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं।


कैंसर के एक लाख वाले इंजेक्शन में निकला सिर्फ पानी...कालाबाजारी के खेल पर खौफनाक खुलासा

by पूजा झा

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने कैंसर की महंगी दवाओं की कथित कालाबाजारी और नकली दवा सप्लाई से जुड़े एक बड़े रैकेट का खुलासा किया है। जांच में सामने आया कि जिन एंटी-कैंसर इंजेक्शन को मरीज और उनके परिवार ब्लैक मार्केट से करीब एक लाख रुपये तक में खरीद रहे थे, उनमें कैंसर से लड़ने वाला जरूरी तत्व तक मौजूद नहीं था। जांच में एक इंजेक्शन में कथित तौर पर सिर्फ पानी पाए जाने की बात सामने आई है। पुलिस के मुताबिक, मामले में कुल 17 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। यह नेटवर्क दिल्ली-NCR समेत कई राज्यों तक फैला हुआ बताया जा रहा है। आरोप है कि इस रैकेट के जरिए नकली दवाओं के साथ-साथ अस्पतालों और सरकारी सप्लाई से जुड़ी कैंसर की महंगी दवाओं की भी अवैध तरीके से बिक्री की जा रही थी।

जांच में सामने आया चौंकाने वाला सच

क्राइम ब्रांच की जांच के दौरान एवालुमैब इंजेक्शन को लेकर गंभीर खुलासा हुआ। पुलिस के अनुसार, इस इंजेक्शन की जांच दवा निर्माता कंपनी के माध्यम से जर्मनी स्थित मर्क लैब में कराई गई। जांच रिपोर्ट में कथित तौर पर पाया गया कि इंजेक्शन में कैंसर से लड़ने वाला मूल सक्रिय तत्व मौजूद नहीं था। यानी जिस दवा को मरीज इलाज की उम्मीद में भारी कीमत चुकाकर खरीद रहे थे, उसमें जरूरी दवा की मात्रा शून्य बताई गई। इस खुलासे ने कैंसर मरीजों की सुरक्षा और दवा सप्लाई सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

7 राज्यों तक फैला था कथित नेटवर्क

दिल्ली पुलिस ने 20 अगस्त को इस कथित रैकेट का खुलासा किया। पुलिस के मुताबिक, पूरे नेटवर्क का कारोबार करीब 9 करोड़ रुपये तक का हो सकता है। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने 588 भरे हुए एंटी-कैंसर वायल, 6 खाली वायल, 7 खाली दवा के बॉक्स और दूसरी दवाओं की 3,021 यूनिट बरामद की हैं। इसके अलावा करीब 50 लाख रुपये नकद भी जब्त किए गए हैं। बरामद दवाओं में डार्जालेक्स, इमफिंजी, एरबिटक्स, ऑपडाइटा, गाजीवा, बावेन्सियो, एडसेट्रिस और कीट्रूडा जैसी महंगी कैंसर दवाएं शामिल बताई गई हैं। पुलिस का दावा है कि इस नेटवर्क का फैलाव दिल्ली-NCR के अलावा मुंबई, हैदराबाद, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और कई अन्य इलाकों तक था।

गुप्त सूचना से शुरू हुई जांच

पुलिस को 22 जून को इस पूरे मामले की गुप्त सूचना मिली थी। इसके बाद क्राइम ब्रांच ने संदिग्धों और संभावित ठिकानों की निगरानी शुरू की। जांच के दौरान पूर्वी दिल्ली, रोहिणी और मुंबई में कई संदिग्ध ठिकानों की पहचान की गई। 11 जुलाई को ड्रग्स विभाग और स्थानीय पुलिस के सहयोग से सात टीमों ने दिल्ली और नवी मुंबई में एक साथ छापेमारी की। तलाशी और पूछताछ के बाद जांच का दायरा बढ़ता गया और पुलिस ने अलग-अलग जगहों से 17 आरोपियों को गिरफ्तार किया।

सिंडिकेट तक कैसे पहुंचती थीं दवाएं?

पुलिस जांच में दवाओं के सिंडिकेट तक पहुंचने के तीन कथित रास्ते सामने आए हैं। पहला रास्ता गैरकानूनी स्रोतों से नकली दवाओं की खरीद का बताया गया है। दूसरा, अस्पतालों में कैंसर मरीजों के लिए रखी गई दवाओं में कथित हेराफेरी का शक है। तीसरे रास्ते के तौर पर सरकारी संस्थानों और गोदामों से सरकारी सप्लाई की दवाओं को अवैध तरीके से बाहर निकालने की जांच की जा रही है। पुलिस के अनुसार, इन दवाओं को बिना वैध बिल, खरीद रिकॉर्ड, ड्रग लाइसेंस और जरूरी दस्तावेजों के अलग-अलग घरों और ठिकानों पर रखा जाता था। इसके बाद बिचौलियों और कथित सप्लाई नेटवर्क के जरिए इन्हें जरूरतमंद मरीजों तक पहुंचाया जाता था।

असली बॉक्स में नकली दवा का खेल

पुलिस के मुताबिक, आरोपी असली दवाओं के कार्टन और खाली बॉक्स संभालकर रखते थे। इसके बाद बैच नंबर, एमआरपी और दूसरी पहचान संबंधी जानकारी को एसीटोन जैसे केमिकल की मदद से मिटाने का आरोप है। फिर थर्मोकोल बॉक्स, बबल रोल, टेप और पॉलीथीन जैसी सामग्री का इस्तेमाल कर दवाओं को दोबारा पैक किया जाता था। पुलिस को छापेमारी के दौरान दवाओं और नकदी के लेनदेन से जुड़े रजिस्टर और डायरी भी मिली हैं, जिनकी जांच की जा रही है।

कई शहरों से आरोपी पकड़े गए

गिरफ्तार आरोपियों में लक्ष्मी नगर निवासी अभिषेक वैश्य, शुभम कुमार चौधरी और सूरज चौधरी के नाम भी शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, अभिषेक वर्ष 2022 से दवाओं की खरीद और सप्लाई के काम से जुड़ा था। उसके पास से करीब 4 लाख रुपये नकद बरामद किए गए। वहीं, पुलिस ने शुभम कुमार चौधरी के पास से करीब 23 लाख रुपये बरामद करने का दावा किया है। नेटवर्क से जुड़े लोगों की मौजूदगी नोएडा, गुरुग्राम, गाजियाबाद, झज्जर, फरीदाबाद, मुंबई और हैदराबाद समेत कई शहरों में बताई जा रही है। पुलिस के मुताबिक, नोएडा के आनंद कुमार के पास से 337 एंटी-कैंसर वायल बरामद हुए। फरीदाबाद के दीपक उर्फ रवि के पास से 108 वायल और करीब 6.5 लाख रुपये, जबकि गुरुग्राम के मयंक गर्ग के पास से 55 वायल मिलने की बात कही गई है।

IndiaMART समेत ऑनलाइन नेटवर्क की भी जांच

मामले में 12 जुलाई को क्राइम ब्रांच थाने में FIR दर्ज की गई थी। अब पुलिस पूरे सप्लाई नेटवर्क और पैसों के लेनदेन की गहराई से जांच कर रही है। डॉ. मनीष शर्मा की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियों का फोकस सिर्फ एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित नकली और मिलावटी कैंसर दवाओं का असली स्रोत क्या था और इस नेटवर्क से कितने लोग जुड़े हुए थे। जांच में IndiaMART जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए देशभर में दवाओं की सप्लाई के संभावित नेटवर्क की भी पड़ताल की जा रही है। इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों तक कथित नकली या सरकारी सप्लाई से बाहर निकाली गई दवाएं आखिर कब से पहुंच रही थीं। पुलिस अब यह भी पता लगाने में जुटी है कि इस कथित रैकेट के पीछे और कौन लोग शामिल हैं और करोड़ों रुपये के इस कारोबार की जड़ें देश के किन-किन हिस्सों तक फैली हुई हैं।


स्कूल यूनिफॉर्म के साथ हिजाब की अनुमति नहीं, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने छात्रा की याचिका खारिज की

by पूजा झा

प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्कूल की निर्धारित यूनिफॉर्म के साथ हिजाब पहनने की अनुमति मांगने वाली एक छात्रा की याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों को अनुशासन और एकरूपता बनाए रखने के लिए अपना ड्रेस कोड लागू करने का अधिकार है। साथ ही कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि याचिकाकर्ता हिजाब पहनने को इस्लाम की अनिवार्य धार्मिक प्रथा साबित करने के लिए पर्याप्त धार्मिक या कानूनी आधार प्रस्तुत नहीं कर सकी। मामला प्रयागराज के टैगोर पब्लिक स्कूल से जुड़ा है, जहां 11वीं कक्षा की एक मुस्लिम छात्रा ने स्कूल की तय यूनिफॉर्म के साथ हिजाब पहनने की अनुमति मांगी थी। इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति जे.जे. मुनीर और न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने की।

कोर्ट ने ड्रेस कोड को बताया संस्थान का अधिकार

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि यदि किसी स्कूल की यूनिफॉर्म नीति सभी छात्रों पर समान रूप से लागू होती है और उसमें किसी विशेष समुदाय या छात्र के साथ भेदभाव नहीं किया जाता, तो संस्थान को अपना ड्रेस कोड लागू करने का अधिकार है। अदालत ने माना कि स्कूलों में यूनिफॉर्म का उद्देश्य केवल पहनावे को नियंत्रित करना नहीं, बल्कि अनुशासन, समानता और संस्थान की एकरूप पहचान को बनाए रखना भी है। ऐसे में व्यक्तिगत पसंद के आधार पर निर्धारित नियमों में बदलाव की मांग को स्वतः कानूनी अधिकार नहीं माना जा सकता।

'हिजाब अनिवार्य प्रथा होने का पर्याप्त आधार नहीं'

पीठ ने कहा कि छात्रा की ओर से ऐसा कोई ठोस धार्मिक या कानूनी साक्ष्य पेश नहीं किया गया, जिससे यह साबित हो सके कि हिजाब पहनना इस्लाम धर्म की अनिवार्य धार्मिक प्रथा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल किसी धार्मिक आस्था का दावा कर देने भर से संविधान के तहत विशेष छूट का अधिकार स्वतः नहीं मिल जाता। कोर्ट ने इस दौरान यह भी कहा कि धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार महत्वपूर्ण है, लेकिन उसका प्रयोग कानून और सार्वजनिक व्यवस्था के दायरे में ही किया जाता है। शैक्षणिक संस्थानों के समान और गैर-भेदभावपूर्ण नियमों को चुनौती देने के लिए पर्याप्त कानूनी आधार होना जरूरी है। छात्रा ने अदालत में यह तर्क दिया था कि वह कक्षा 6 से लेकर कक्षा 10 तक हिजाब पहनकर स्कूल आती रही थी और उस दौरान स्कूल प्रशासन ने कोई आपत्ति नहीं जताई थी। हालांकि हाईकोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि किसी संस्थान की ओर से पहले दी गई ढील या अनुमति भविष्य में उसी व्यवस्था को स्थायी कानूनी अधिकार नहीं बना देती। यदि स्कूल बाद में अपने निर्धारित ड्रेस कोड को सख्ती से लागू करता है, तो केवल पुरानी सहमति के आधार पर नियमों में बदलाव की मांग नहीं की जा सकती।

कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले का भी दिया हवाला

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में पहले के न्यायिक फैसलों का भी उल्लेख किया। पीठ ने कर्नाटक हाईकोर्ट के उस निर्णय का संदर्भ दिया, जिसमें हिजाब को इस्लाम की अनिवार्य धार्मिक प्रथा मानने के मुद्दे पर विस्तार से विचार किया गया था। अदालत ने कहा कि मौजूदा मामले में पहले के न्यायिक दृष्टिकोण से अलग निष्कर्ष निकालने का पर्याप्त आधार सामने नहीं आया है। इन सभी तथ्यों और कानूनी तर्कों पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने छात्रा की याचिका खारिज कर दी।

स्कूल प्रबंधन को यूनिफॉर्म नियम लागू करने की छूट

फैसले के बाद टैगोर पब्लिक स्कूल प्रबंधन को अपनी निर्धारित यूनिफॉर्म नीति लागू करने का अधिकार बरकरार रहेगा। अदालत ने साफ किया कि जब तक ड्रेस कोड सभी छात्रों के लिए समान और गैर-भेदभावपूर्ण है, तब तक संस्थान अनुशासन और एकरूपता के लिए ऐसे नियम बना और लागू कर सकता है। यह फैसला एक बार फिर शैक्षणिक संस्थानों में धार्मिक स्वतंत्रता और संस्थागत अनुशासन के बीच संतुलन के सवाल को चर्चा में ले आया है।


दिल्ली-NCR में मूसलाधार बारिश से हालात बिगड़े, कई इलाकों में जलभराव; सड़कों पर रेंगती रहीं गाड़ियां

by पूजा झा

दिल्ली-NCR में सोमवार को मौसम ने अचानक करवट ले ली। राजधानी और आसपास के इलाकों में झमाझम बारिश के बाद जहां लोगों को उमस से राहत मिली, वहीं कई जगह जलभराव और भारी ट्रैफिक जाम ने मुश्किलें बढ़ा दीं। तेज बारिश के कारण दिल्ली की कई प्रमुख सड़कों पर वाहनों की रफ्तार बेहद धीमी हो गई और लोगों को घंटों जाम में फंसे रहना पड़ा। मौसम विभाग की चेतावनी के अनुसार, अगले कुछ घंटों के दौरान दिल्ली-NCR के कई हिस्सों में मौसम का मिजाज और बदल सकता है। गाजियाबाद, पूर्वी दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम, दक्षिणी दिल्ली और राजधानी के कुछ अन्य इलाकों में तेज बारिश की संभावना जताई गई है। बारिश के साथ बिजली चमकने और गरज के साथ तेज हवाएं चलने का भी अनुमान है। हवाओं की रफ्तार करीब 25 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है।

हर इलाके में एक जैसा नहीं रहेगा मौसम

दिल्ली-NCR में बारिश की स्थिति सभी जगह एक जैसी नहीं रहने की संभावना है। कुछ क्षेत्रों में तेज और लगातार बारिश हो सकती है, जबकि आसपास के इलाकों में हल्की बारिश या केवल बादल छाए रहने की स्थिति बन सकती है। मौसम में इस तरह के स्थानीय बदलाव के कारण लोगों को यात्रा से पहले मौसम की जानकारी पर नजर रखने की सलाह दी जा रही है। तेज बारिश के दौरान सड़कों पर विजिबिलिटी कम हो सकती है। कई निचले इलाकों और सड़कों पर पानी जमा होने से यातायात प्रभावित होने की आशंका है। खासतौर पर ऑफिस जाने वाले लोगों और लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों को अतिरिक्त समय लेकर निकलने की जरूरत पड़ सकती है।

एमबी रोड पर भीषण जाम, एक घंटे से फंसे रहे लोग

बारिश और जलभराव के बीच दिल्ली के एमबी रोड पर भारी ट्रैफिक जाम देखने को मिला। संगम विहार के आसपास वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और कई लोग करीब एक घंटे तक जाम में फंसे रहे। सड़क पर वाहनों की धीमी रफ्तार के कारण लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में काफी परेशानी हुई। जाम का असर खासतौर पर उन यात्रियों पर पड़ा जिन्हें ऑफिस, दिल्ली एयरपोर्ट और साकेत कोर्ट सहित अन्य जरूरी स्थानों पर पहुंचना था। कई लोगों को समय पर अपने गंतव्य तक पहुंचने में देरी हुई। सुबह और दोपहर के व्यस्त समय में ट्रैफिक की स्थिति और खराब हो गई। बारिश के दौरान दिल्ली की सड़कों पर अक्सर जलभराव और ट्रैफिक जाम की समस्या सामने आती है। सोमवार को भी कुछ इलाकों में यही स्थिति देखने को मिली, जहां गाड़ियां बेहद धीमी गति से आगे बढ़ती नजर आईं।

बारिश के साथ तेज हवाओं की भी संभावना

मौसम के बदले मिजाज के बीच बारिश के साथ तेज हवाएं चलने का भी अनुमान है। हवा की रफ्तार 25 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। तेज हवाओं और बिजली चमकने के दौरान लोगों को खुले स्थानों और पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचने की सलाह दी जाती है। कमजोर होर्डिंग, बिजली के खंभों और निर्माणाधीन इमारतों के आसपास विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। दोपहिया वाहन चालकों के लिए तेज बारिश और फिसलन वाली सड़कें परेशानी बढ़ा सकती हैं। ऐसे में बाइक और स्कूटर चालकों को वाहन की रफ्तार नियंत्रित रखने की जरूरत है।

अगले कुछ घंटे रहेंगे अहम

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, दिल्ली-NCR में अगले कुछ घंटों तक मौसम की स्थिति पर नजर रखना जरूरी है। बारिश की तीव्रता अलग-अलग इलाकों में बदल सकती है और कुछ स्थानों पर अचानक तेज बारिश शुरू हो सकती है। लोगों को सलाह दी गई है कि यदि बहुत जरूरी काम न हो तो तेज बारिश और बिजली चमकने के दौरान बाहर निकलने से बचें। यात्रा करना जरूरी हो तो जलभराव वाले रास्तों से सावधानी से गुजरें और ट्रैफिक की स्थिति देखकर अतिरिक्त समय लेकर निकलें। बारिश ने एक तरफ दिल्ली-NCR के लोगों को गर्मी और उमस से राहत दी है, लेकिन दूसरी तरफ जलभराव और ट्रैफिक जाम ने दैनिक जीवन की रफ्तार धीमी कर दी है। आने वाले घंटों में मौसम कैसा रहता है और बारिश का असर किन इलाकों में ज्यादा पड़ता है, इस पर लोगों की नजर बनी हुई है।


एक साल में 3 फ्री LPG सिलेंडर, ट्रांसजेंडर के लिए मुफ्त में बस सफर... CM विजय का बड़ा ऐलान

by पूजा झा

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने विधानसभा में कई बड़े ऐलान किए हैं. सरकार ने गरीब परिवारों को साल में तीन मुफ्त LPG सिलेंडर देने की योजना का ऐलान किया है. 'अन्नपूर्णानी सुपर सिक्स' नाम की यह योजना पोंगल 2027 से शुरू होगी. इसके तहत सालाना 2.5 लाख रुपये से कम आय वाले परिवारों को हर साल तीन सिलेंडर मुफ्त दिए जाएंगे... सरकार के मुताबिक, इस योजना से करीब 1.30 करोड़ परिवारों को फायदा मिलेगा. इसके लिए राज्य के खजाने से हर साल करीब 4 हजार करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है. मुख्यमंत्री विजय ने बताया कि लाभार्थियों को सिलेंडर खरीदने के बाद उसकी कीमत सीधे उनके बैंक अकाउंट में जमा की जाएगी. हर साल तीन सिलेंडर मुफ्त में मिलेगा.

महिलाओं को फ्री बस सेवा भी मिलेगी

विजय ने महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा को लेकर भी बड़ा ऐलान किया. उन्होंने कहा कि महिलाओं को सिर्फ सामान्य बसों में ही नहीं, बल्कि एक्सप्रेस, LSS और डीलक्स बसों में भी मुफ्त यात्रा की सुविधा मिलेगी. इसके अलावा अंतर-जिला बसों में भी महिलाओं को 'वेट्री पयाना थिट्टम' के तहत मुफ्त यात्रा की सुविधा दी जाएगी. इस योजना को 2 अक्टूबर से शुरू किया जाएगा.मुख्यमंत्री विजय ने कहा कि ट्रांसजेंडर यात्रियों को भी मुफ्त यात्रा की सुविधा दी जाएगी. सरकार के इन फैसलों को राज्य में महिलाओं और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है.

चेन्नई के परंदूर में बनेगा नया एयरपोर्ट

चेन्नई के परंदूर में प्रस्तावित नए एयरपोर्ट को लेकर भी विजय ने सरकार का रुख साफ कर दिया. उन्होंने कहा कि सरकार ऐसे स्थान की तलाश कर रही है, जहां एयरपोर्ट बनने से परिवार प्रभावित न हों. उन्होंने कहा कि परंदूर एयरपोर्ट का स्थानीय लोगों ने विरोध किया था और वह प्रभावित परिवारों के साथ मजबूती से खड़े हैं.विजय ने कहा कि सरकार ने नए एयरपोर्ट के लिए कुछ वैकल्पिक जगहों की पहचान की है. उन्होंने दोहराया कि परंदूर में एयरपोर्ट बनाने के पक्ष में सरकार नहीं है. साथ ही चेन्नई के मौजूदा मीनांबक्कम एयरपोर्ट पर नया टर्मिनल-5 बनाने का भी ऐलान किया गया...मुख्यमंत्री विजय ने किसानों का जिक्र करते हुए कहा कि किसान देश की रीढ़ हैं और विकास के नाम पर उनके हितों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. ऐसे में एक तरफ गरीब परिवारों के लिए मुफ्त सिलेंडर और महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा का ऐलान हुआ है, वहीं परंदूर एयरपोर्ट को लेकर सरकार ने स्थानीय लोगों के पक्ष में अपना रुख दोहराया है.


जयपुर में स्कूल निरीक्षण को लेकर बवाल, CJP कार्यकर्ताओं से मारपीट और गाड़ियों में तोड़फोड़ का आरोप

by पूजा झा

राजस्थान की राजधानी जयपुर के बगरू इलाके के रामपुरा-कंवरपुरा गांव में सरकारी स्कूल के निरीक्षण को लेकर शुक्रवार को विवाद खड़ा हो गया। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के तहत कार्यकर्ता राजकीय प्राथमिक विद्यालय की स्थिति देखने पहुंचे थे। ग्रामीणों के विरोध के बाद मामला बढ़ गया और कथित तौर पर दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की और मारपीट हुई। CJP की ओर से आरोप लगाया गया कि ग्रामीणों ने उसके कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट की, उन्हें गांव से खदेड़ दिया और उनकी गाड़ियों के शीशे तोड़ दिए। पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष रांका के साथ भी धक्का-मुक्की होने का दावा किया गया है। हालांकि, घटना को लेकर ग्रामीणों का पक्ष अलग है। उनका आरोप है कि CJP के कार्यकर्ता स्कूल के मुद्दे को राजनीतिक रूप देने के लिए गांव पहुंचे थे।

स्कूल पहुंची CJP टीम का ग्रामीणों ने किया विरोध

बताया जा रहा है कि सुबह CJP की टीम रामपुरा-कंवरपुरा स्थित सरकारी प्राथमिक स्कूल का निरीक्षण करने पहुंची थी। टीम के पहुंचने पर कुछ ग्रामीणों ने इसका विरोध किया और कार्यकर्ताओं को वहां से जाने के लिए कहा। कुछ समय बाद CJP प्रवक्ता आशुतोष रांका भी मौके पर पहुंचे। उनके पहुंचने के बाद ग्रामीणों ने विरोध और नारेबाजी शुरू कर दी। देखते ही देखते माहौल तनावपूर्ण हो गया और दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई। CJP का आरोप है कि इसके बाद कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट की गई। उनकी गाड़ियों में तोड़फोड़ की गई और शीशे तोड़े गए। पार्टी की ओर से यह भी दावा किया गया कि कार्यकर्ताओं पर रेत और पत्थर फेंके गए। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हो सकी है।

आशुतोष रांका ने बीजेपी कार्यकर्ताओं पर लगाया आरोप

घटना के बाद आशुतोष रांका ने सोशल मीडिया पर आरोप लगाया कि स्कूल में मौजूद लोग सामान्य ग्रामीण नहीं, बल्कि बीजेपी के बुलाए हुए लोग थे। उन्होंने एक व्यक्ति का नाम कमल प्रधान बताते हुए गंभीर आरोप लगाए और दावा किया कि उनकी टीम के जो सदस्य पहले से गांव में मौजूद थे, उनके साथ मारपीट की गई। रांका ने आरोप लगाया कि बीजेपी को सरकारी स्कूलों की बदहाल स्थिति पर सवाल उठाए जाना पसंद नहीं है। उनका कहना था कि अगर बच्चों के लिए स्कूलों को बेहतर बनाने की कोशिश की जा रही है तो इसका विरोध नहीं होना चाहिए। CJP ने पिछले दिनों राजस्थान में ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान शुरू किया है। पार्टी का कहना है कि अभियान के तहत राज्य के अलग-अलग जिलों में सरकारी स्कूलों की स्थिति का जायजा लिया जाएगा और जर्जर भवनों तथा मूलभूत सुविधाओं की कमी को सामने लाया जाएगा।

अभिजीत दिपके ने भी दी प्रतिक्रिया

CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने भी घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए बीजेपी पर निशाना साधा। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में आरोप लगाया कि राजस्थान में आशुतोष रांका पर हमला किया गया और पुलिस ने ऐसा होने दिया। हालांकि, इस आरोप की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

ग्रामीणों ने क्या कहा?

ग्रामीणों ने CJP के आरोपों को खारिज करते हुए स्कूल की समस्या को लेकर अपना पक्ष रखा। ग्रामीण विष्णु कुमार शर्मा के मुताबिक, गांव में प्राथमिक विद्यालय पहले पांचवीं कक्षा तक संचालित होता था और स्कूल भवन के लिए उनके परिवार की ओर से जमीन दी गई थी। उन्होंने बताया कि स्कूल भवन का निर्माण वर्ष 1999 में हुआ था, लेकिन लंबे समय से उसकी मरम्मत नहीं हुई। भवन की हालत खराब होने के कारण बच्चों को फिलहाल गांव के एक बड़े भवन में उपलब्ध कराए गए दो कमरों में पढ़ाया जा रहा है। उनके अनुसार, करीब 20 से 30 बच्चे वहां पढ़ते हैं और दो शिक्षक कक्षाएं संचालित कर रहे हैं। विष्णु कुमार शर्मा ने दावा किया कि बगरू विधानसभा क्षेत्र के विधायक डॉ. कैलाश वर्मा की ओर से स्कूल के लिए करीब 9 लाख रुपये के बजट का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अभी तक निर्माण या मरम्मत का काम शुरू नहीं हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी मुख्य मांग स्कूल की इमारत का जल्द निर्माण और बच्चों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

CJP पर राजनीतिक फायदा उठाने का आरोप

ग्रामीण राजेश कुमार शर्मा ने CJP कार्यकर्ताओं के गांव में पहुंचने का विरोध किया। उन्होंने आरोप लगाया कि स्कूल की समस्या को लेकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करना सभी का अधिकार है, लेकिन किसी गांव में पहुंचकर माहौल बिगाड़ना उचित नहीं है। राजेश कुमार शर्मा ने CJP पर राजनीतिक फायदे के लिए मुद्दे को उठाने का आरोप लगाया। हालांकि, संगठन पर विदेशी फंडिंग से जुड़े उनके आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती। राजेश कुमार शर्मा के मुताबिक, स्कूल की इमारत की समस्या पुरानी है और ग्रामीण चाहते हैं कि सरकार जल्द निर्माण कार्य शुरू कराए। उन्होंने कहा कि यदि सरकार काम नहीं करती है तो ग्रामीण आपसी सहयोग से स्कूल के निर्माण की कोशिश करेंगे।

‘स्कूल ठीक करो’ अभियान को लेकर पहले से विवाद

CJP ने 15 अगस्त से ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान शुरू करने का ऐलान किया था। संगठन ने राजस्थान के जयपुर समेत कई जिलों में सरकारी स्कूलों का निरीक्षण करने की बात कही है। इसी बीच राजस्थान शिक्षा विभाग ने सरकारी स्कूल परिसरों में बाहरी लोगों के प्रवेश और विद्यार्थियों की फोटो-वीडियोग्राफी को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए। आदेश के मुताबिक, प्रधानाचार्य या संस्था प्रमुख की पूर्व अनुमति के बिना बाहरी लोगों को स्कूल परिसर में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। विद्यार्थियों और शिक्षकों की फोटो, वीडियो, इंटरव्यू या लाइव स्ट्रीमिंग के लिए भी अनुमति जरूरी होगी। विभाग ने इसके पीछे विद्यार्थियों की सुरक्षा, गरिमा और निजता को वजह बताया है। CJP ने इस आदेश का विरोध करते हुए कहा है कि स्कूलों की स्थिति का निरीक्षण करने का अभियान जारी रहेगा। रामपुरा-कंवरपुरा की घटना ने एक बार फिर सरकारी स्कूलों की बदहाल स्थिति और राजनीतिक संगठनों के स्कूल निरीक्षण के अधिकार को लेकर बहस तेज कर दी है। फिलहाल मामले में दोनों पक्षों की ओर से अलग-अलग दावे सामने आए हैं और घटना की पूरी तस्वीर पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।


‘टैक्स सेना के जवान भी देते हैं’, लद्दाख में जवानों से बहस का वीडियो वायरल, Gen-Z महिला पर भड़का सोशल मीडिया

by पूजा झा

लद्दाख के करगिल जिले में सुरक्षा बलों और एक महिला पर्यटक के बीच बहस का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। घटना मिनीमार्ग चेकपॉइंट की बताई जा रही है, जहां सुरक्षा कारणों से सड़क को कुछ समय के लिए बंद किया गया था। इसी दौरान महिला की वहां तैनात जवानों से बहस हो गई। वायरल वीडियो में महिला सुरक्षा बलों पर नाराजगी जताते हुए उंगली दिखाकर बहस करती नजर आ रही है। वह खुद को Gen-Z बताते हुए कहती है कि वह ऐसी स्थिति को स्वीकार नहीं करेगी। महिला ने कथित तौर पर यह भी कहा कि सेना के जवानों को मिलने वाली सैलरी आम लोगों के टैक्स से आती है। वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर महिला के बयान को लेकर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। कई यूजर्स ने जवाब देते हुए कहा कि सेना के जवान भी टैक्स देते हैं और देश की सुरक्षा के लिए तैनात सैनिकों के साथ इस तरह का व्यवहार उचित नहीं है।

सैन्य गतिविधियों के चलते बंद था रास्ता

बताया जा रहा है कि मिनीमार्ग चेकपॉइंट पर सड़क को सुरक्षा कारणों से बंद किया गया था। खराब मौसम और सैन्य गतिविधियों के चलते संवेदनशील इलाके में कुछ समय के लिए यातायात रोका गया था। वीडियो में मौजूद जवान महिला को समझाने और स्थिति को शांत रखने की कोशिश करते दिखाई देते हैं। उन्होंने महिला के आक्रामक व्यवहार का उसी अंदाज में जवाब नहीं दिया।

‘टैक्स देने से सुरक्षा नियम तोड़ने का अधिकार नहीं’

घटना पर पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल सतीश दुआ ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सेना की सैलरी टैक्स से आती है कहना सैनिकों के योगदान और बलिदान को कम करके आंकने जैसा है। उन्होंने यह भी कहा कि सेना के जवान खुद भी टैक्स का भुगतान करते हैं और लद्दाख एक संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्र है। लेफ्टिनेंट कर्नल एन. थियागराजन ने भी सुरक्षा अभियानों के दौरान सड़क बंद किए जाने को वैध प्रक्रिया बताया। उनका कहना है कि टैक्स देने से किसी व्यक्ति को सुरक्षा प्रोटोकॉल तोड़ने का अधिकार नहीं मिल जाता।

सोशल मीडिया पर महिला की आलोचना

वीडियो वायरल होने के बाद कई सोशल मीडिया यूजर्स ने महिला के व्यवहार की आलोचना की। लोगों का कहना है कि लद्दाख जैसे संवेदनशील सीमावर्ती इलाके में सुरक्षा बलों की ओर से लगाए गए प्रतिबंधों और निर्देशों का पालन करना जरूरी है। कुछ यूजर्स ने यह भी कहा कि Gen-Z होना अपनी बात रखने का अधिकार जरूर देता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि सुरक्षा नियमों की अनदेखी की जाए या ड्यूटी पर तैनात जवानों से बदसलूकी की जाए।

उमर अब्दुल्ला ने भी दी प्रतिक्रिया

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी इस विवाद पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने महिला के कथित व्यवहार को ‘जानते नहीं हो मेरा बाप कौन है’ वाली मानसिकता का नया रूप बताया। फिलहाल वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर बहस जारी है। विवाद के केंद्र में एक तरफ नागरिकों के अधिकार और दूसरी तरफ संवेदनशील सीमा क्षेत्रों में सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करने का सवाल है।


‘जम्मू-कश्मीर भारत का अहम हिस्सा’, उमर अब्दुल्ला से मुलाकात के बाद बोले अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर

अमेरिका के भारत में राजदूत सर्जियो गोर ने बुधवार, 19 अगस्त 2026 को जम्मू-कश्मीर का दौरा किया। श्रीनगर पहुंचने के बाद उन्होंने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से मुलाकात की। बैठक के बाद गोर ने जम्मू-कश्मीर को “भारत का एक अहम हिस्सा” बताया। उनका यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि कश्मीर के मुद्दे पर भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से विवाद रहा है। गोर ने श्रीनगर में मीडिया से कहा कि यहां आना उनके लिए सुखद अनुभव है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर को खूबसूरत जगह बताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के साथ उनकी मुलाकात काफी अच्छी और गर्मजोशी भरी रही। उन्होंने बताया कि बैठक के बाद कुछ मुद्दों को आगे दिल्ली और वॉशिंगटन में भी उठाया जाएगा।

उमर अब्दुल्ला से किन मुद्दों पर हुई बात?

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बताया कि बैठक में भारत-अमेरिका संबंधों के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। उन्होंने खास तौर पर पर्यटन, बागवानी और नई अर्थव्यवस्था जैसे क्षेत्रों में अमेरिका और जम्मू-कश्मीर के बीच सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर जोर दिया। उमर अब्दुल्ला ने कहा कि कुछ पुराने और लंबित मुद्दे हैं, जिन्हें समय के साथ हल किया जाएगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि अमेरिका और जम्मू-कश्मीर के बीच संपर्क और सहयोग आने वाले समय में और बढ़ेगा।

अमेरिकी ट्रैवल एडवाइजरी पर भी बड़ा संकेत

सर्जियो गोर ने जम्मू-कश्मीर के लिए अमेरिका की मौजूदा ट्रैवल एडवाइजरी की भी समीक्षा के संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका समय-समय पर अपने यात्रा संबंधी दिशा-निर्देशों की समीक्षा करता है और जम्मू-कश्मीर को लेकर भी इसे देखा जाएगा। हालांकि उन्होंने साफ किया कि फिलहाल कोई बड़ा ऐलान नहीं किया जा रहा है।अमेरिकी विदेश विभाग की मौजूदा एडवाइजरी में जम्मू-कश्मीर के बड़े हिस्से के लिए यात्रा को लेकर गंभीर चेतावनी जारी है। गोर ने संकेत दिया कि क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति में सुधार को देखते हुए इसे भविष्य में डाउनग्रेड करने पर विचार किया जा सकता है।

पहली बार कश्मीर पहुंचे सर्जियो गोर

सर्जियो गोर का यह जम्मू-कश्मीर का पहला दौरा है। वह दो दिवसीय यात्रा पर यहां पहुंचे हैं और कश्मीर के बाद लद्दाख जाने का भी कार्यक्रम है। उनके दौरे को भारत-अमेरिका संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। गोर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन में भारत में राजदूत हैं और दक्षिण एवं मध्य एशिया से जुड़े मामलों में भी उनकी भूमिका महत्वपूर्ण है। ऐसे में श्रीनगर का उनका दौरा और जम्मू-कश्मीर को लेकर दिया गया बयान कूटनीतिक नजरिए से भी काफी अहम है।

उमर अब्दुल्ला ने क्या कहा?

उमर अब्दुल्ला ने बैठक को लेकर कहा कि उन्होंने अमेरिकी राजदूत से भारत-अमेरिका संबंधों और जम्मू-कश्मीर के संदर्भ में अमेरिका की भूमिका पर चर्चा की। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि स्थानीय और प्रशासनिक समस्याओं के समाधान के लिए उन्हें केंद्र सरकार के साथ बातचीत को प्राथमिकता देनी होगी। यानी मुलाकात में जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर किसी बाहरी मध्यस्थता की मांग सामने नहीं आई, बल्कि बातचीत का फोकस सहयोग, विकास और भारत-अमेरिका संबंधों पर रहा।

क्यों महत्वपूर्ण है गोर का बयान?

जम्मू-कश्मीर को लेकर अमेरिका की आधिकारिक स्थिति में लंबे समय से भारत-पाकिस्तान के बीच बातचीत और क्षेत्रीय स्थिरता पर जोर रहा है। ऐसे में अमेरिकी राजदूत का जम्मू-कश्मीर को सीधे “भारत का अहम हिस्सा” कहना और साथ ही क्षेत्र में अमेरिकी यात्रा चेतावनी की समीक्षा के संकेत देना नई चर्चा को जन्म देता है। अब सर्जियो गोर के इस दौरे के बाद नजर इस बात पर रहेगी कि क्या अमेरिका जम्मू-कश्मीर को लेकर अपनी ट्रैवल एडवाइजरी में बदलाव करता है और क्या भारत-अमेरिका के बीच जम्मू-कश्मीर से जुड़े आर्थिक और रणनीतिक सहयोग का दायरा आगे बढ़ता है।


KPSC भर्ती घोटाला: 21 ठिकानों पर ED की छापेमारी, जानें क्या है पूरा मामला

कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) की वेटरिनरी ऑफिसर भर्ती में कथित भ्रष्टाचार के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े आरोपों की जांच के तहत कर्नाटक और अहमदाबाद में 21 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया है। जांच के दायरे में KPSC का कार्यालय, आयोग के निलंबित चेयरमैन शिवशंकरप्पा एस. साहूकार, KPSC सदस्य शांता होसमनी और कथित बिचौलियों से जुड़े ठिकाने शामिल हैं। ED की टीमें परीक्षा की डिजिटल कॉपियों की जांच से जुड़ी कंपनी एडुस्टेट सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड के कार्यालय और वेटरिनरी ऑफिसर पद के लिए चयनित कुछ उम्मीदवारों से जुड़े परिसरों पर भी तलाशी ले रही हैं। जांच कर्नाटक के कई शहरों के अलावा अहमदाबाद में भी की जा रही है।

PMLA के तहत ED की कार्रवाई

बताया जा रहा है कि ED ने यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत शुरू की है। जांच में कथित बिचौलियों के तौर पर सामने आए अली और सिकंदर से जुड़े परिसरों की भी तलाशी ली जा रही है। यह कार्रवाई KPSC के निलंबित चेयरमैन शिवशंकरप्पा एस. साहूकार की ओर से जमानत के लिए हाई कोर्ट का रुख किए जाने के बाद सामने आई है।

क्या है KPSC भर्ती विवाद?

पूरा मामला KPSC की वेटरिनरी ऑफिसर भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा है। आयोग ने कुल 400 पदों पर भर्ती शुरू की थी। इनमें 342 नियमित और 58 बैकलॉग पद शामिल थे। इस भर्ती प्रक्रिया में अभ्यर्थियों ने कथित तौर पर भ्रष्टाचार और चयन प्रक्रिया में हेरफेर के आरोप लगाए हैं। उम्मीदवारों का दावा है कि कुछ कथित बिचौलियों ने अंतिम चयन सूची में नाम शामिल कराने के बदले बड़ी रकम की मांग की। आरोपों के मुताबिक, कुछ उम्मीदवारों से कथित तौर पर 80 लाख रुपये तक की मांग की गई और उन्हें भरोसा दिलाया गया कि रकम देने के बाद चयन सुनिश्चित कराया जा सकता है। अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि एजेंटों के जरिए भर्ती प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की गई, जिससे योग्य उम्मीदवारों के साथ अन्याय हुआ। ED की मौजूदा कार्रवाई के बाद KPSC भर्ती मामले की जांच और तेज होने की संभावना है। हालांकि, छापेमारी के दौरान क्या-क्या दस्तावेज या अन्य सामग्री बरामद हुई, इसकी विस्तृत जानकारी जांच एजेंसी की ओर से सामने आना बाकी है।


उज्जैन महाकाल मंदिर में भीड़ का दबाव बढ़ने से भगदड़ जैसे हालात, कई श्रद्धालु गिरे

सावन के तीसरे सोमवार और नागपंचमी के मौके पर उज्जैन के महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। साल में सिर्फ एक बार खुलने वाले नागचंद्रेश्वर मंदिर के दर्शन के लिए भी बड़ी संख्या में भक्त पहुंचे। इसी दौरान हरसिद्धि मंदिर के सामने बैरिकेडिंग वाले क्षेत्र में अचानक भीड़ का दबाव बढ़ गया, जिससे कुछ समय के लिए भगदड़ जैसे हालात बन गए। स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक, इस दौरान कुछ श्रद्धालु गिर गए और कई लोगों की तबीयत बिगड़ गई। करीब 13 श्रद्धालुओं के घायल होने की जानकारी सामने आई है। मौके पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों और परिजनों ने लोगों को भीड़ से बाहर निकाला, जिसके बाद घायलों को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया।

करंट फैलने की अफवाह से मची अफरातफरी

जानकारी के मुताबिक, नागचंद्रेश्वर मंदिर के दर्शन के लिए लगी कतार के पास अचानक करंट फैलने की अफवाह फैल गई। बताया गया कि हरसिद्धि मंदिर चौराहे के पास डीपी के आसपास करंट फैलने की बात कही गई, जिसके बाद श्रद्धालुओं में दहशत फैल गई। अफवाह के बीच भीड़ का दबाव बढ़ा और कुछ लोग गिर गए। कुछ श्रद्धालुओं के बैरिकेडिंग से टकराने की भी जानकारी सामने आई। वहीं, नीलकंठ द्वार के पास कुछ लोगों के बैरिकेडिंग पार करने की तस्वीरें भी सामने आईं।

मंदिर समिति ने भगदड़ की खबरों को बताया भ्रामक

हालांकि, महाकाल मंदिर प्रबंध समिति ने मंदिर परिसर में भगदड़ और अव्यवस्था से जुड़ी कुछ खबरों का खंडन किया है। समिति ने कहा कि नागपंचमी, सावन सोमवार और भगवान महाकाल की सवारी एक ही दिन होने के कारण श्रद्धालुओं की संख्या काफी अधिक रही, लेकिन दर्शन व्यवस्था और सुरक्षा के लिए जरूरी इंतजाम किए गए थे। समिति के मुताबिक, अलग-अलग मार्गों पर लंबी कतारें होने के बावजूद श्रद्धालुओं को सुरक्षित तरीके से दर्शन कराने की व्यवस्था की गई। समिति ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और किसी भी घटना को लेकर केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें।

6 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं के पहुंचने का दावा

सावन के तीसरे सोमवार और नागचंद्रेश्वर मंदिर के विशेष दर्शन के चलते उज्जैन में सुबह से ही भारी भीड़ बनी हुई थी। मंदिर समिति के अनुसार, अब तक करीब 6.19 लाख श्रद्धालु भगवान महाकाल के दर्शन कर चुके हैं। नागचंद्रेश्वर मंदिर के कपाट साल में केवल एक बार नागपंचमी के दिन खोले जाते हैं। इसी वजह से इस दिन मंदिर में दर्शन के लिए देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं। फिलहाल, भीड़ के दबाव और अफवाह के कारण कुछ श्रद्धालुओं के गिरने की घटना सामने आई है, जबकि मंदिर समिति ने इसे व्यापक भगदड़ बताने वाली खबरों को भ्रामक बताया है। अधिकारियों की ओर से घटना और घायलों की संख्या को लेकर विस्तृत आधिकारिक जानकारी का इंतजार है।


दिल्ली में 6 जगहों पर बम की धमकी, हाई कोर्ट से IGI एयरपोर्ट तक मचा हड़कंप

नई दिल्ली: स्वतंत्रता दिवस से एक दिन पहले दिल्ली में कई महत्वपूर्ण स्थानों को बम से उड़ाने की धमकी मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया। दिल्ली हाई कोर्ट, IGI एयरपोर्ट के टर्मिनल-3 समेत राजधानी की छह जगहों को धमकी दी गई है। धमकी ई-मेल और अन्य माध्यमों से मिलने की जानकारी सामने आई है। धमकी मिलने के तुरंत बाद संबंधित परिसरों में सुरक्षा बढ़ा दी गई और बम निरोधक दस्तों तथा खोजी कुत्तों की मदद से तलाशी अभियान चलाया गया। दिल्ली फायर सर्विस की टीमें भी कई स्थानों पर भेजी गईं। शुरुआती जांच में अभी तक किसी भी जगह से कोई संदिग्ध वस्तु बरामद नहीं होने की जानकारी है।

इन 6 जगहों को मिली धमकी

जिन स्थानों को निशाना बनाने की धमकी मिली, उनमें दिल्ली हाई कोर्ट, जामनगर हाउस, झंडेवालान स्थित फ्लैटेड फैक्ट्री कॉम्प्लेक्स, साकेत स्थित कार्यालय/डीएम कार्यालय, IGI एयरपोर्ट का टर्मिनल-3 और दिल्ली कैंट का SDM कार्यालय शामिल हैं। दिल्ली हाई कोर्ट को मिले ई-मेल के बाद कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल ने दिल्ली पुलिस से संपर्क किया। परिसर में सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत जांच की गई। दिल्ली हाई कोर्ट के एक अधिकारी ने धमकी को प्रथम दृष्टया फर्जी बताया और कहा कि स्थिति नियंत्रण में है, हालांकि सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हैं।

15 अगस्त से पहले बढ़ी सुरक्षा

यह धमकी ऐसे समय सामने आई है जब राजधानी में 15 अगस्त को लेकर पहले से ही सुरक्षा व्यवस्था कड़ी है। लाल किले पर स्वतंत्रता दिवस समारोह की तैयारियां चल रही हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 अगस्त को वहां से देश को संबोधित करेंगे। ऐसे में संवेदनशील सरकारी इमारतों, सार्वजनिक स्थानों और परिवहन केंद्रों पर अतिरिक्त निगरानी रखी जा रही है। प्रवेश और निकास मार्गों पर जांच बढ़ाई गई है। सुरक्षा एजेंसियां धमकी भेजने वाले ई-मेल के स्रोत और उसकी विश्वसनीयता की जांच में जुटी हैं। 
फिलहाल जांच में किसी विस्फोटक या संदिग्ध वस्तु के मिलने की पुष्टि नहीं हुई है। सुरक्षा एजेंसियां एहतियात के तौर पर सभी संभावित खतरों को ध्यान में रखते हुए जांच कर रही हैं


‘यह मेरा और छात्रों का संवाद, BCI क्यों टांग अड़ा रहा?’ NALSAR विवाद पर CJI सख्त, मनन मिश्रा को नोटिस

हैदराबाद की NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के 2026 बैच के छात्रों से जुड़े विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के रुख पर सख्त सवाल उठाए हैं। मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले में BCI को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि छात्रों को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी असहमति जाहिर करने के लिए दंडात्मक कार्रवाई का सामना नहीं करना चाहिए। मामला उस समय विवादों में आया जब NALSAR के कुछ छात्रों ने CJI सूर्यकांत को विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि बनाए जाने पर आपत्ति जताई थी। छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन को पत्र लिखकर निमंत्रण पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया था।

CJI ने BCI के हस्तक्षेप पर उठाए सवाल

सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने छात्रों और उनके बीच हुए संवाद का जिक्र करते हुए BCI के हस्तक्षेप पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि छात्रों ने उन्हें पत्र लिखा था और यह उनके तथा छात्रों के बीच का संवाद था। ऐसे में BCI का इसमें हस्तक्षेप करना उचित नहीं है। CJI ने यह भी कहा कि छात्रों को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने और असहमति दर्ज कराने का अधिकार है। उन्होंने अपने छात्र जीवन का जिक्र करते हुए कहा कि वह भी छात्र गतिविधियों और आंदोलनों में सक्रिय रहे हैं।

BCI ने पहले क्या किया था?

विवाद के बीच BCI चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा की ओर से राज्य बार काउंसिलों को NALSAR के 2026 बैच के लॉ ग्रेजुएट्स के एनरोलमेंट को रोकने का निर्देश दिया गया था। इस फैसले पर कानूनी समुदाय और अन्य पक्षों की ओर से सवाल उठे। हालांकि, बढ़ते विवाद के बाद BCI ने अपना यह निर्देश वापस ले लिया। BCI की ओर से कहा गया कि किसी भी छात्र को ऐसी परिस्थितियों के कारण नुकसान नहीं होना चाहिए, जिनमें उसकी कोई भूमिका नहीं थी।

विवाद की पृष्ठभूमि

20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर से जुड़े छात्र प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई के मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान CJI की कुछ मौखिक टिप्पणियों को लेकर NALSAR के छात्रों के बीच असहमति सामने आई थी। इसके बाद छात्रों के एक समूह ने CJI को दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि बनाए जाने पर आपत्ति जताई। इस घटनाक्रम ने छात्र असहमति, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और पेशेवर नियामक संस्थाओं की शक्तियों को लेकर बहस छेड़ दी है। NALSAR के छात्रों के एनरोलमेंट पर रोक का आदेश वापस लिया जा चुका है, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में BCI की भूमिका और उसके फैसले पर सवाल उठ रहे हैं।

CJP ने भी उठाए थे सवाल

इस मामले को लेकर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’  के राष्ट्रीय प्रवक्ता सौरव दास और संस्थापक अभिजीत दीपके ने भी BCI के फैसले की आलोचना की थी। CJP ने छात्रों के भविष्य को प्रभावित करने वाले ऐसे कदम पर सवाल उठाते हुए इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और छात्र अधिकारों से जोड़कर देखा था। अब सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई के दौरान CJI के सख्त रुख के बाद विवाद ने एक नया मोड़ ले लिया है। मामले में आगे की सुनवाई के बाद यह स्पष्ट होगा कि BCI के फैसले और उसकी प्रक्रिया पर अदालत का अंतिम रुख क्या रहता है। 


हल्द्वानी में खड़गे की रैली के बाद ‘शुद्धिकरण यज्ञ’ पर सियासत, कांग्रेस ने बीजेपी पर साधा निशाना

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की 8 अगस्त को उत्तराखंड के हल्द्वानी स्थित रामलीला मैदान में हुई ‘विजय शंखनाद रैली’ के बाद सियासी विवाद खड़ा हो गया है। खड़गे के लौटने के बाद रामलीला मैदान में कराए गए कथित ‘शुद्धिकरण यज्ञ’ को लेकर कांग्रेस और बीजेपी आमने-सामने हैं। रैली के बाद श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास की ओर से रामलीला मैदान में शुद्धिकरण यज्ञ कराया गया। संगठन के सदस्यों ने खड़गे को सनातन और हिंदू संगठनों का विरोधी बताते हुए कहा कि जिस मैदान में रामलीला का मंचन होता है, वहां उनकी रैली के बाद शुद्धिकरण जरूरी था। संगठन ने इसके लिए खड़गे के पुराने कथित सनातन विरोधी बयानों को आधार बताया।

कांग्रेस ने बताया दलित विरोधी मानसिकता

शुद्धिकरण यज्ञ के बाद कांग्रेस अनुसूचित मोर्चे ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए इसे दलित विरोधी मानसिकता का उदाहरण बताया। कांग्रेस का आरोप है कि बीजेपी से जुड़े लोगों ने ही यह आयोजन कराया। पार्टी ने सवाल उठाया कि कांग्रेस की रैली के बाद ही रामलीला मैदान के ‘शुद्धिकरण’ की जरूरत क्यों पड़ी? कांग्रेस नेताओं ने कहा कि 8 अगस्त की रैली में पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा और नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य मंच पर मौजूद थे। कांग्रेस ने दावा किया कि इन नेताओं की सामाजिक पृष्ठभूमि को देखते हुए मैदान का शुद्धिकरण कराया जाना सामाजिक भेदभाव और दलित-पिछड़ा विरोधी सोच को दर्शाता है। इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस अनुसूचित मोर्चे ने बुधवार को हल्द्वानी के बुद्ध पार्क में धरना दिया। कांग्रेस नेताओं ने बीजेपी से इस मामले पर जवाब मांगा और शुद्धिकरण यज्ञ को सामाजिक भेदभाव की मानसिकता का प्रतीक बताया।

‘खड़गे के पुराने बयानों के चलते कराया यज्ञ’

वहीं, श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया है। संगठन का कहना है कि यज्ञ का उद्देश्य किसी जाति या समुदाय का अपमान करना नहीं था। संगठन के मुताबिक, खड़गे के पुराने बयानों को सनातन विरोधी मानते हुए धार्मिक आस्था के आधार पर यह आयोजन किया गया। संगठन ने कहा कि रामलीला जैसे धार्मिक आयोजन से जुड़े मैदान में कथित तौर पर सनातन विरोधी विचार रखने वाले व्यक्ति की रैली के बाद शुद्धिकरण करना उनकी धार्मिक आस्था का विषय है।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने की जांच की मांग

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के संबोधन वाले मंच का बीजेपी से जुड़े लोगों द्वारा ‘शुद्धिकरण’ किया जाना निंदनीय है। उन्होंने इसे जातिगत भेदभाव और संकीर्ण मानसिकता की पराकाष्ठा बताया। गोदियाल ने नैनीताल के एसएसपी से मामले का संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच करने और कानून का उल्लंघन पाए जाने पर कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि छुआछूत और भेदभाव के लिए आधुनिक भारत में कोई स्थान नहीं है।

बीजेपी ने आयोजन से किया किनारा

विवाद बढ़ने के बाद बीजेपी ने खुद को शुद्धिकरण यज्ञ से अलग कर लिया है। बीजेपी जिलाध्यक्ष प्रताप बिष्ट ने कहा कि यज्ञ में पार्टी का कोई पदाधिकारी शामिल नहीं था और बीजेपी का इस आयोजन से कोई लेना-देना नहीं है। फिलहाल हल्द्वानी का रामलीला मैदान इस राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गया है। कांग्रेस इसे दलित और पिछड़ा विरोधी मानसिकता का मामला बता रही है, जबकि श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास इसे सनातन और धार्मिक आस्था से जोड़ रहा है। वहीं बीजेपी आयोजन से पूरी तरह पल्ला झाड़ रही है। ऐसे में एक धार्मिक अनुष्ठान अब जाति, सनातन, सामाजिक सम्मान और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप की बहस का मुद्दा बन गया है।


36 साल पुराने सरवानंद कौल प्रेमी हत्याकांड में SIA की बड़ी कार्रवाई, कश्मीर में 9 ठिकानों पर छापेमारी

जम्मू-कश्मीर में 36 साल पुराने सरवानंद कौल प्रेमी और उनके बेटे वीरेंद्र कौल के दोहरे हत्याकांड की जांच एक बार फिर तेज हो गई है। स्टेट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (SIA) ने बुधवार को इस मामले में जम्मू-कश्मीर के 9 ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। एजेंसी के मुताबिक, राजौरी जिले के दूरदराज इलाकों में 6 स्थानों, जम्मू जिले में 2 और कश्मीर में एक ठिकाने पर छापेमारी की गई। यह मामला 1990 में हुए चर्चित दोहरे हत्याकांड से जुड़ा है, जिसकी FIR अनंतनाग के डोरू पुलिस थाने में दर्ज की गई थी। फिलहाल मामले की जांच SIA कर रही है।

क्या हुआ था 1990 में?

सरवानंद कौल प्रेमी कश्मीर के जाने-माने कवि, लेखक और समाजसेवी थे। वह अनंतनाग के कोकेरनाग क्षेत्र के सोअफ शाली के रहने वाले थे। अप्रैल 1990 के आखिरी दिनों में आतंकियों ने सरवानंद कौल प्रेमी और उनके बेटे वीरेंद्र कौल का कथित तौर पर अपहरण कर लिया था। इसके बाद दोनों की हत्या कर दी गई। 1 मई 1990 को पिता-पुत्र के शव पेड़ से लटके मिले थे। यह घटना कश्मीर में उस दौर की हिंसा से जुड़े चर्चित मामलों में शामिल रही है।

नए सुरागों की भी हो रही जांच

SIA की ताजा कार्रवाई को पुराने मामले की जांच में सामने आए नए विवरणों से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, एजेंसी ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि बुधवार की तलाशी के दौरान क्या-क्या बरामद हुआ या जांच में कौन से नए तथ्य सामने आए हैं। 1990 के दौर से जुड़े पुराने हत्याकांडों की जांच में हाल के समय में तेजी देखी जा रही है। ऐसे में सरवानंद कौल प्रेमी हत्याकांड में 9 ठिकानों पर हुई यह कार्रवाई जांच के लिहाज से अहम मानी जा रही है।


रील का मोह, इन्फ्लुएंसर्स का असर और शॉर्टकट का खतरा... PM मोदी का Gen-Z को संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की आत्मकथा ‘भारतीय गणतंत्र की विजय: मेरा जीवन, मेरा संघर्ष’ के विमोचन कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान पीएम मोदी ने पूर्व राष्ट्रपति के व्यक्तित्व, संघर्ष और उनके कार्यकाल की जमकर सराहना की। पीएम मोदी ने कहा कि रामनाथ कोविंद ने राष्ट्रपति के रूप में एक मिसाल कायम की। पद से मुक्त होने के बाद भी वह देश के लिए लगातार काम कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि कोविंद ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ को लेकर गठित संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के अध्यक्ष हैं।

‘कोविंद की सफलता लोकतंत्र की जीत’

आत्मकथा के विमोचन के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि किताब का शीर्षक बिल्कुल उपयुक्त है। इसमें रामनाथ कोविंद के व्यक्तिगत जीवन और संघर्ष की कहानी है, लेकिन उनकी सफलता सिर्फ उनकी व्यक्तिगत जीत नहीं है, बल्कि यह भारतीय गणतंत्र और लोकतंत्र की जीत भी है। प्रधानमंत्री ने देश की नई पीढ़ी से इस किताब को पढ़ने और रामनाथ कोविंद के अनुभवों से सीख लेने की अपील की।

जब प्रोटोकॉल से हटकर PM को विदा करते थे कोविंद

पीएम मोदी ने रामनाथ कोविंद के साथ अपने पुराने अनुभव भी साझा किए। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री के तौर पर जब वह राष्ट्रपति भवन में कोविंद से मिलने जाते थे, तो कई बार प्रोटोकॉल से हटकर पूर्व राष्ट्रपति उनसे सहजता से बातचीत करते थे। पीएम मोदी के मुताबिक, मुलाकात के बाद रामनाथ कोविंद खुद प्रधानमंत्री को विदा करने के लिए कार के दरवाजे तक आते थे। उन्होंने कई बार कोविंद से ऐसा न करने का अनुरोध किया, लेकिन उनकी विनम्रता और सहजता में कोई बदलाव नहीं आया। प्रधानमंत्री ने कोविंद के गांव परौंख का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति बनने के बाद जब कोविंद अपने गांव पहुंचे तो उन्होंने अपने शिक्षकों के पैर छुए, गांव की मिट्टी को नमन किया और ग्रामीणों के प्रति आभार जताया। पीएम मोदी ने कहा कि रामनाथ कोविंद के इस व्यवहार ने देश और दुनिया के सामने भारत के संस्कार और सांस्कृतिक मूल्यों की एक खास तस्वीर पेश की।

Gen-Z को PM मोदी की ‘शॉर्टकट’ वाली सीख

कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया और Gen-Z को लेकर भी अहम संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आज सोशल मीडिया के दौर में कई इन्फ्लुएंसर्स युवाओं को आकर्षित करते हैं, लेकिन इस शॉर्टकट के दौर में युवाओं को सावधान रहने की जरूरत है। रेलवे स्टेशन का उदाहरण देते हुए पीएम मोदी ने कहा कि कई लोग पुल का इस्तेमाल करने के बजाय जल्दबाजी में पटरी पार करने की कोशिश करते हैं। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा—“A shortcut will cut you short.” यानी गलत शॉर्टकट आपको मंजिल तक पहुंचाने के बजाय नुकसान पहुंचा सकता है। प्रधानमंत्री ने युवाओं से कहा कि अगर वे जीवन में आगे बढ़ना चाहते हैं और दूसरों के अनुभवों से सीखना चाहते हैं, तो उन्हें अपनी पसंद के लोगों की ऑटोबायोग्राफी जरूर पढ़नी चाहिए। उनका कहना था कि महान लोगों के जीवन के संघर्ष और अनुभव युवाओं को सही दिशा दिखाने में मदद कर सकते हैं।


रांची में JPSC-JSSC अभ्यर्थियों पर लाठीचार्ज के बाद बढ़ा आक्रोश, अनशन जारी; बोले- मांगें पूरी होने तक नहीं हटेंगे

रांची: 10 अगस्त की रात रांची की सड़कों पर JPSC और JSSC अभ्यर्थियों के प्रदर्शन के दौरान हुए लाठीचार्ज के बाद छात्रों में आक्रोश बढ़ गया है। प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों का आरोप है कि पुलिस ने रात के अंधेरे में उन पर लाठियां बरसाईं और पानी की बौछारें कीं, जिसमें कई छात्र घायल हुए। घटना के बाद प्रदर्शन से जुड़े कई वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए हैं, जिनमें अभ्यर्थी पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठा रहे हैं। रांची के धुर्वा मोड़ और धरना स्थल पर आमरण अनशन कर रहे अभ्यर्थियों का कहना है कि लाठीचार्ज के बावजूद उनका आंदोलन जारी रहेगा। प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, उनकी प्रमुख मांगों में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच और लंबित भर्ती प्रक्रियाओं को पूरा करना शामिल है।

8वें दिन भी जारी रूपेश पाल का अनशन

JPSC अभ्यर्थी रूपेश कुमार पाल आठवें दिन भी भूख हड़ताल पर डटे हैं। उनका कहना है कि पुलिस की लाठियां और पानी की बौछारें उनके हौसले को नहीं तोड़ सकतीं। उन्होंने कहा कि जब तक उनकी मांगों पर समाधान नहीं होता, अनशन और प्रदर्शन जारी रहेगा। रूपेश के मुताबिक, वह वर्ष 2020 से सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने 11वीं से 13वीं JPSC तक की परीक्षाएं दी हैं और 14वीं JPSC PT में भी शामिल हुए थे। उनका आरोप है कि हर बार किसी न किसी तरह की गड़बड़ी सामने आती है। रूपेश ने बताया कि वह किसान परिवार से आते हैं। परिवार में चार बहनें और दो भाई हैं। उनके बड़े भाई सरकारी नौकरी में हैं, जिससे परिवार का खर्च चल रहा है। उनका कहना है कि आर्थिक स्थिति ऐसी है कि बार-बार परीक्षा की तैयारी करना भी मुश्किल हो जाता है।  उन्होंने बताया कि 10 अगस्त की घटना के बाद अलग-अलग इलाकों से छात्र धरना स्थल पर पहुंच रहे हैं। फिलहाल आंदोलन की आगे की रणनीति को लेकर कोर कमेटी में चर्चा चल रही है और प्रदर्शनकारी सरकार के साथ बातचीत का इंतजार कर रहे हैं।
लाठीचार्ज के बाद भी भूख हड़ताल पर बैठे राहुल कुमार ने सरकार और सत्ताधारी नेताओं के खिलाफ नाराजगी जाहिर की। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन के दौरान हिंसा की शुरुआत पुलिस की ओर से हुई। राहुल ने कहा कि अगर सरकार उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लेती है तो आंदोलन को गांव और प्रखंड स्तर तक ले जाया जाएगा। उन्होंने नेताओं के कार्यक्रमों के बहिष्कार की बात भी कही।  हालांकि, राहुल के बयान में नेताओं को डंडे से दौड़ाने जैसी चेतावनी भी सामने आई है। यह बयान आंदोलन के बढ़ते आक्रोश को दर्शाता है, लेकिन किसी भी तरह की हिंसा या टकराव की स्थिति कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है।

CBI जांच की मांग पर अड़े अभ्यर्थी

धरना स्थल पर देवेंद्र नाथ महतो, राहुल क्रांति, रूपेश कुमार पाल, हबीबा और सविता कुमारी समेत कई अभ्यर्थी आमरण अनशन पर बैठे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनकी लड़ाई केवल सरकारी नौकरी हासिल करने तक सीमित नहीं है, बल्कि भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की भी है। अभ्यर्थी भर्ती प्रक्रिया से जुड़े मामलों की CBI जांच की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के कारण बड़ी संख्या में युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ है। 
10 अगस्त की रात हुई पुलिस कार्रवाई के बाद आंदोलन और अधिक तेज होता दिखाई दे रहा है। अब अभ्यर्थियों की नजर सरकार की ओर से होने वाली संभावित वार्ता पर है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, उनका आंदोलन जारी रहेगा।


JNU में फिर लगे उमर खालिद की रिहाई के नारे, बढ़ा तनाव

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) सोमवार को एक बार फिर नए विवाद से चर्चा में आ गया है. सामने आया है कि यहां एक कार्यक्रम के दौरान जेएनयू छात्र संघ (JNUSU) ने 'उमर खालिद की रिहाई' की मांग को लेकर नारेबाजी की. आरोप है कि JNUSU  ने SSS-2 बिल्डिंग के बाहर 'उमर खालिद को रिहा करो' और 'जेल के ताले टूटेंगे, सारे साथी छूटेंगे' जैसे नारे लगाए.
 
असल में सोमवार को यूनिवर्सिटी कैंपस में उमर खालिद की किताब 'Fractured Communities' पर चर्चा आयोजित की गई थी. इसी किताब पर चर्चा के दौरान विवाद हो गया. इसी दौरान (JNUSU) के छात्र नेता 'उमर खालिद को रिहा करो' जैसे नारे लगाने लगे. इसके जवाब में कार्यक्रम का विरोध कर रहे ABVP समर्थकों ने 'खालिद पाकिस्तानी है' जैसे नारे लगाए... JNUSU ने उमर खालिद की किताब पर चर्चा के लिए कार्यक्रम आयोजित किया था. छात्र संघ के मुताबिक, JNU प्रशासन ने आखिरी समय में कार्यक्रम के लिए ऑडिटोरियम की बुकिंग रद्द कर दी. इसके बावजूद JNUSU ने कार्यक्रम आयोजित करने का फैसला किया और बाद में इसे SSS-2 बिल्डिंग के बाहर किया गया. इस दौरान ABVP समर्थक भी मौके पर पहुंचे और कार्यक्रम के खिलाफ नारेबाजी की. दोनों पक्षों की ओर से नारे लगाए जाने के कारण कार्यक्रम के दौरान तनाव की स्थिति बन गई... 

घटना के बाद JNUSU ने बयान जारी कर JNU प्रशासन पर कार्यक्रम की अनुमति आखिरी समय में रद्द करने का आरोप लगाया. छात्र संघ ने प्रशासन को 'संघी प्रशासन' बताते हुए दावा किया कि यह कदम विश्वविद्यालय में बहस, चर्चा और असहमति की संस्कृति को सीमित करने की कोशिश है. JNUSU ने दावा किया कि अनुमति रद्द होने और विरोध के बावजूद सैकड़ों छात्र कार्यक्रम में शामिल हुए. छात्र संघ के मुताबिक, इससे छात्रों ने यह संदेश दिया कि वे विश्वविद्यालय के लोकतांत्रिक माहौल को बचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

JNUSU ने ABVP पर भी कार्यक्रम बाधित करने का आरोप लगाया. छात्र संघ ने दावा किया कि ABVP समर्थकों ने स्पीकर से माइक्रोफोन छीनने की कोशिश की और पैनलिस्टों के साथ दुर्व्यवहार किया. हालांकि, इन आरोपों पर ABVP या JNU प्रशासन की प्रतिक्रिया का विवरण तत्काल उपलब्ध नहीं है.


देशभर में बारिश का कहर, जम्मू में अमरनाथ यात्रा रुकी, दिल्ली-NCR में जलभराव

नई दिल्ली: देश के कई हिस्सों में मानसून की बारिश ने जनजीवन प्रभावित किया है। जम्मू-कश्मीर से लेकर दिल्ली-NCR, बिहार, उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश तक भारी बारिश के कारण जलभराव, भूस्खलन और बाढ़ जैसी स्थिति सामने आ रही है। खराब मौसम को देखते हुए शनिवार को जम्मू से अमरनाथ यात्रा रोक दी गई। वहीं दिल्ली-NCR में तेज बारिश के बाद कई इलाकों में जलभराव और ट्रैफिक की समस्या देखने को मिली।जम्मू-कश्मीर में बारिश और लैंडस्लाइड का खतरा, अमरनाथ यात्रा रोकी, जम्मू-कश्मीर में खराब मौसम और आने वाले दिनों में भारी बारिश की संभावना को देखते हुए शनिवार को जम्मू से अमरनाथ यात्रा रोक दी गई। भगवती नगर बेस कैंप से श्रद्धालुओं के नए जत्थे को कश्मीर के लिए रवाना नहीं किया गया। प्रशासन जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे और मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, अगले कुछ दिनों में भारी बारिश के कारण जम्मू क्षेत्र में अचानक बाढ़ और भूस्खलन का खतरा बना हुआ है। इसी वजह से श्रद्धालुओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए यात्रा को अस्थायी रूप से रोका गया है। शनिवार को भी मौसम खराब रहने की आशंका जताई गई थी। इस साल अब तक लाखों श्रद्धालु अमरनाथ गुफा के दर्शन कर चुके हैं। खराब मौसम के कारण यात्रा मार्ग पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन अतिरिक्त सतर्कता बरत रहा है।

दिल्ली-NCR में बारिश से जलभराव, ट्रैफिक प्रभावित

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और आसपास के इलाकों में शुक्रवार को हुई तेज बारिश ने कई जगहों पर यातायात व्यवस्था को प्रभावित किया। दिल्ली के साथ गुरुग्राम और नोएडा के कुछ हिस्सों में जलभराव के कारण वाहनों की रफ्तार धीमी हुई और कई प्रमुख सड़कों पर ट्रैफिक दबाव बढ़ा। गुरुग्राम में भारी बारिश के कारण कई प्रमुख मार्ग प्रभावित हुए। दिल्ली-NCR में बारिश के कारण रोजाना आवाजाही करने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। बारिश के आंकड़ों के लिहाज से भी अगस्त की शुरुआत दिल्ली के लिए खास रही है। 1 से 7 अगस्त के बीच राजधानी में 127 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो 2011 के बाद अगस्त के पहले सात दिनों में सबसे ज्यादा है। 
हालांकि, शनिवार 8 अगस्त के लिए उपलब्ध ताजा रिपोर्ट में IMD ने दिल्ली के लिए येलो अलर्ट जारी किया है और दिन के दौरान बारिश की संभावना जताई गई है।

बिहार में नदियां उफान पर

बिहार में भी लगातार बारिश और नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में बारिश के कारण नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी हुई है। बागमती और गंडक समेत कई नदियों में पानी बढ़ने से निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। पिछली रिपोर्टों में पश्चिम चंपारण के बगहा क्षेत्र में गंडक नदी के बढ़े जलस्तर के कारण 300 से अधिक घरों के प्रभावित होने और लोगों के सुरक्षित स्थानों की ओर जाने की जानकारी सामने आई थी।

उत्तर प्रदेश में गंगा का जलस्तर बढ़ा

उत्तर प्रदेश में भी लगातार बारिश के कारण कई नदियों का जलस्तर बढ़ा हुआ है। वाराणसी में गंगा के बढ़ते जलस्तर का असर घाटों पर दिखाई दे रहा है। निचले इलाकों में पानी पहुंचने से लोगों की मुश्किलें बढ़ी हैं। आगरा समेत राज्य के कुछ अन्य हिस्सों में भी बारिश के कारण सड़क और यातायात व्यवस्था प्रभावित होने की खबरें हैं।

हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश, सड़कें प्रभावित

हिमाचल प्रदेश में भी बारिश का दौर जारी है। पहाड़ी इलाकों में लगातार बारिश के कारण भूस्खलन और अचानक बाढ़ का खतरा बना हुआ है। कई स्थानों पर सड़क यातायात प्रभावित हुआ है। राज्य के कांगड़ा, कुल्लू, मंडी और शिमला समेत कई जिलों में भारी बारिश की चेतावनी के बीच प्रशासन और स्थानीय एजेंसियां संवेदनशील इलाकों पर नजर बनाए हुए हैं। बारिश के कारण पहाड़ी सड़कों पर मलबा आने और यातायात बाधित होने का खतरा लगातार बना हुआ है।

लोगों को सतर्क रहने की सलाह

मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन की चेतावनियों को देखते हुए पहाड़ी क्षेत्रों, नदी-नालों और जलभराव वाले इलाकों में रहने वाले लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। भारी बारिश के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने और स्थानीय प्रशासन की ओर से जारी ट्रैफिक तथा मौसम संबंधी एडवाइजरी का पालन करने की अपील की जा रही है। फिलहाल जम्मू-कश्मीर में अमरनाथ यात्रा रोकने से लेकर दिल्ली-NCR में जलभराव और हिमाचल में सड़क बाधित होने तक, देश के कई हिस्सों में मानसून का असर साफ दिखाई दे रहा है। आने वाले दिनों में बारिश की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है।


Gen-Z की नब्ज समझ रहे हैं मोहन भागवत? युवा पीढ़ी से संवाद के पीछे क्या है RSS का संदेश

मुंबई में Gen-Z और Gen-Alpha से मोहन भागवत का संवाद सिर्फ बातचीत नहीं, बल्कि युवाओं की बदलती राजनीतिक सोच को समझने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। विरोध, असहमति, रोजगार, शिक्षा और जवाबदेही जैसे मुद्दों पर संघ प्रमुख की टिप्पणियों ने RSS-BJP के रिश्ते और युवा वोटरों तक पहुंच की रणनीति को लेकर नई बहस छेड़ दी है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत का 6 अगस्त को मुंबई में Gen-Z और Gen-Alpha के युवाओं के साथ संवाद ऐसे समय हुआ, जब देश में युवाओं से जुड़े कई मुद्दे राजनीतिक बहस के केंद्र में हैं। हाल ही में दिल्ली के जंतर-मंतर पर Cockroach Janta Party (CJP) से जुड़े छात्र आंदोलन ने शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा में कथित अनियमितताओं और सरकार की जवाबदेही जैसे सवालों को राष्ट्रीय चर्चा का विषय बनाया था। यह आंदोलन 49 दिनों तक चला और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद समाप्त हुआ। ऐसे माहौल में भागवत का युवाओं से सीधे संवाद करना महज एक सामाजिक कार्यक्रम नहीं माना जा रहा। इसे RSS की उस कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है, जिसमें वह नई पीढ़ी के सवालों, असंतोष और राजनीतिक सोच को समझने की कोशिश कर रहा है।

Gen-Z देश-विरोधी नहीं, भागवत का सबसे अहम संदेश

मुंबई में बातचीत के दौरान मोहन भागवत ने Gen-Z के विरोध और असहमति को लेकर अहम टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि युवाओं का विरोध करना उन्हें देश-विरोधी नहीं बनाता। उनके मुताबिक विरोध करने वाले भी देश और समाज का ही हिस्सा हैं। भागवत ने युवाओं को ईमानदार, देशभक्त और सेवा की भावना रखने वाली पीढ़ी के रूप में पेश किया। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि युवाओं के सवालों को केवल विरोध के नजरिए से नहीं, बल्कि उन समस्याओं के संदर्भ में समझना चाहिए जिनसे वे जूझ रहे हैं।
यह टिप्पणी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछले कुछ महीनों में युवाओं के नेतृत्व वाले CJP आंदोलन के दौरान सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी राजनीतिक बयानबाजी देखने को मिली थी। आंदोलन की शुरुआत परीक्षा और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर हुई थी, लेकिन बाद में इसमें रोजगार, जवाबदेही और शासन से जुड़े व्यापक सवाल भी शामिल हो गए।

विरोध लोकतंत्र का हिस्सा, लेकिन तरीका भी महत्वपूर्ण

भागवत ने युवाओं के विरोध करने के अधिकार को खारिज नहीं किया। उनका संदेश यह था कि जब बातचीत और संवाद के रास्ते बंद होते हैं, तब विरोध किसी मुद्दे को सार्वजनिक बहस में लाने का माध्यम बन सकता है। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं था कि उन्होंने विरोध के हर तरीके का समर्थन किया। उन्होंने आंदोलन के तरीके और लोकतांत्रिक मर्यादा की जरूरत पर भी जोर दिया। यही अंतर राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। किसी आंदोलन की मांग और उसके दौरान अपनाए गए हर तरीके को एक ही नजरिए से देखने के बजाय भागवत ने शिकायत और विरोध के तरीके को अलग-अलग करके देखने का संकेत दिया।

Gen-Z की राजनीति, क्यों का जवाब चाहिए

भागवत के संवाद का एक बड़ा संदेश युवा पीढ़ी की बदलती सोच को लेकर था। Gen-Z ऐसी पीढ़ी है जो राजनीतिक भाषणों को सिर्फ सुनती नहीं, बल्कि सोशल मीडिया पर तुरंत उनकी जांच, तुलना और आलोचना भी करती है। इस पीढ़ी के लिए केवल यह कहना पर्याप्त नहीं है कि कोई निर्णय सही है क्योंकि उसे सत्ता में बैठे लोगों ने लिया है। सवाल यह है कि निर्णय क्यों लिया गया, उसका आधार क्या है और उसका असर आम लोगों पर क्या पड़ेगा। यही वजह है कि शिक्षा, रोजगार, परीक्षा व्यवस्था और सरकारी जवाबदेही जैसे मुद्दे युवाओं के बीच तेजी से राजनीतिक मुद्दे बनते हैं। CJP आंदोलन इसका एक उदाहरण रहा। सोशल मीडिया से शुरू हुआ यह अभियान कुछ ही समय में जंतर-मंतर के बड़े युवा आंदोलन में बदल गया। Reuters के मुताबिक, आंदोलन की जड़ें बेरोजगारी और परीक्षा में पेपर लीक को लेकर युवाओं की नाराजगी में थीं।
RSS के लिए युवा क्यों महत्वपूर्ण हैं?

नई पीढ़ी से संवाद RSS के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि Gen-Z का राजनीतिक जुड़ाव पारंपरिक संगठनों से अलग तरीके से बन रहा है। सोशल मीडिया, मीम्स, शॉर्ट वीडियो और डिजिटल कम्युनिकेशन ने राजनीतिक संवाद की भाषा बदल दी है। जंतर-मंतर आंदोलन के दौरान भी युवाओं ने पारंपरिक राजनीतिक रैलियों के बजाय मीम, व्यंग्य, सोशल मीडिया पोस्ट और डिजिटल कैंपेन को आंदोलन की भाषा बनाया। ऐसे में RSS के सामने चुनौती सिर्फ युवाओं को अपने विचार समझाने की नहीं, बल्कि उनकी भाषा और उनके सवालों को समझने की भी है। मुंबई में भागवत का संवाद इसी दिशा में एक प्रयास के तौर पर देखा जा सकता है। BJP-RSS रिश्ते के बीच भी

अहम है यह संदेश

RSS और BJP के रिश्ते को लेकर समय-समय पर सार्वजनिक बहस होती रही है। 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले तत्कालीन BJP अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा था कि पार्टी अब उस दौर से आगे निकल चुकी है जब उसे हर स्तर पर RSS के सहारे की जरूरत होती थी। इस बयान को दोनों संगठनों के रिश्तों के संदर्भ में देखा गया था। चुनाव परिणामों के बाद मोहन भागवत ने सार्वजनिक जीवन में विनम्रता, मर्यादा और विपक्ष को दुश्मन नहीं मानने जैसे मुद्दों पर जोर दिया था। इन टिप्पणियों को राजनीतिक हलकों में BJP के लिए अप्रत्यक्ष संदेश के रूप में भी देखा गया। हालांकि, यह कहना सही नहीं होगा कि भागवत की हर टिप्पणी सीधे BJP की रणनीति या सरकार की आलोचना होती है। RSS और BJP के रिश्ते जटिल हैं और दोनों के बीच संवाद तथा वैचारिक निकटता के बावजूद संगठनात्मक भूमिकाएं अलग हैं। क्या RSS युवा वोटरों तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रहा है? मुंबई का कार्यक्रम इस सवाल को जरूर जन्म देता है। भागवत ने युवाओं से यह नहीं कहा कि वे सवाल पूछना बंद करें। उन्होंने असहमति को देश-विरोध के बराबर मानने से भी इनकार किया। इसके बजाय उन्होंने संवाद, तर्क और जवाबदेही पर जोर दिया। राजनीतिक रूप से इसका मतलब यह हो सकता है कि RSS नई पीढ़ी के साथ संवाद की ऐसी भाषा तलाश रहा है, जिसमें राष्ट्रवाद और संगठनात्मक विचारधारा के साथ-साथ युवाओं की व्यक्तिगत समस्याओं और आकांक्षाओं को भी जगह मिले। लेकिन यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि इससे BJP की राजनीतिक रणनीति में तत्काल कोई बड़ा बदलाव आएगा।

असली चुनौती भाषा नहीं, सोच बदलने की

मोहन भागवत का Gen-Z के साथ संवाद एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत जरूर है, लेकिन इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि आने वाले दिनों में युवा मुद्दों पर BJP और RSS की जमीन पर क्या रणनीति दिखाई देती है। सोशल मीडिया पोस्ट की भाषा बदलना आसान है। मुश्किल यह है कि युवाओं के सवालों को वास्तव में सुनना, उनके असंतोष को समझना और उन सवालों का ठोस जवाब देना। Gen-Z को केवल वोट बैंक की तरह देखना शायद पर्याप्त नहीं होगा। यह पीढ़ी सवाल पूछती है, जवाब मांगती है और जरूरत पड़ने पर सड़क पर उतरने से भी नहीं हिचकती। मुंबई में मोहन भागवत का संदेश इसी बदलती राजनीतिक मनोवृत्ति को पहचानने की कोशिश के रूप में देखा जा सकता है। अब देखना यह होगा कि यह संवाद केवल एक कार्यक्रम तक सीमित रहता है या आने वाले समय में BJP-RSS की युवा नीति और राजनीतिक भाषा में भी इसका असर दिखाई देता है। 


अतीक अहमद के छोटे बेटे अबान की सड़क हादसे में मौत, कार डिवाइडर से टकराई

प्रयागराज/झांसी: माफिया से नेता बने दिवंगत अतीक अहमद के सबसे छोटे बेटे अबान अहमद की उत्तर प्रदेश के झांसी जिले में हुए एक भीषण सड़क हादसे में मौत हो गई। हादसा झांसी के पूंछ थाना क्षेत्र में हुआ, जिसमें अबान समेत तीन लोगों की जान चली गई, जबकि तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, सभी लोग प्रयागराज से झांसी जेल में बंद अली अहमद से मिलने जा रहे थे। इसी दौरान हाईवे पर उनकी तेज रफ्तार कार अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकरा गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि कार का अगला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और उसमें सवार लोगों को गंभीर चोटें आईं। 
हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और राहत दल मौके पर पहुंचे। घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने अबान अहमद सहित तीन लोगों को मृत घोषित कर दिया। घायल मोहम्मद जैद, उमर और एक अन्य व्यक्ति का इलाज जारी है। पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि हादसा तेज रफ्तार, चालक के नियंत्रण खोने या किसी अन्य वजह से हुआ। घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए गए हैं और क्षतिग्रस्त वाहन की भी जांच की जा रही है। अबान अहमद, अतीक अहमद के सबसे छोटे बेटों में से एक था। उमेश पाल हत्याकांड के बाद अबान और उसके भाई अहजम को नाबालिग होने के कारण बाल संरक्षण गृह भेजा गया था। बाद में अक्टूबर 2023 में दोनों को उनकी बुआ की सुपुर्दगी में रिहा किया गया था।

गौरतलब है कि अतीक अहमद के बेटे अली अहमद को 1 अक्टूबर 2025 को नैनी सेंट्रल जेल से झांसी जेल स्थानांतरित किया गया था। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, अबान और परिवार के अन्य सदस्य उसी से मुलाकात करने झांसी जा रहे थे, तभी यह हादसा हो गया। इस घटना के बाद पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है और दुर्घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाने का प्रयास कर रही है


यौन उत्पीड़न मामले में तरुण तेजपाल दोषी करार, बॉम्बे हाईकोर्ट ने पलटा ट्रायल कोर्ट का फैसला

by न्यूज डेस्क

मुंबई: बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा पीठ ने 'तहलका' पत्रिका के पूर्व प्रधान संपादक तरुण तेजपाल को 2013 के चर्चित यौन उत्पीड़न मामले में दोषी करार दिया है। अदालत ने वर्ष 2021 में गोवा की ट्रायल कोर्ट द्वारा दिए गए बरी किए जाने के फैसले को पलटते हुए कहा कि मामले में उपलब्ध साक्ष्यों का उचित मूल्यांकन नहीं किया गया था। यह मामला नवंबर 2013 का है, जब 'तहलका' की एक पूर्व महिला सहयोगी ने आरोप लगाया था कि गोवा के एक पांच सितारा होटल में आयोजित पत्रिका के वार्षिक कार्यक्रम के दौरान तरुण तेजपाल ने दो अलग-अलग मौकों पर लिफ्ट के भीतर उसके साथ यौन उत्पीड़न किया। पीड़िता की शिकायत के आधार पर गोवा पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। मामले की सुनवाई के बाद मापुसा की सत्र अदालत ने मई 2021 में तरुण तेजपाल को सभी आरोपों से बरी कर दिया था। ट्रायल कोर्ट ने अपने फैसले में जांच और अभियोजन पक्ष की कार्यवाही पर कई सवाल उठाए थे। इसके बाद गोवा सरकार ने इस फैसले को बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा पीठ में चुनौती दी थी।

हाईकोर्ट ने अपील पर सुनवाई करते हुए ट्रायल कोर्ट के फैसले को निरस्त कर दिया और कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों तथा गवाहों के बयानों का समुचित मूल्यांकन आवश्यक था। अदालत ने अपने निर्णय में तरुण तेजपाल को दोषी ठहराया। सजा (Quantum of Sentence) पर आदेश अलग से सुनाया जाएगा। यह मामला देश के सबसे चर्चित यौन उत्पीड़न मामलों में से एक रहा है और इसके फैसले पर लंबे समय से कानूनी और सामाजिक हलकों की नजर बनी हुई थी।


PM मोदी पर अभद्र टिप्पणी करने वाली नाबालिग को बड़ी राहत, शिकायतकर्ता ने वापस ली FIR

by न्यूज डेस्क

दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित अभद्र टिप्पणी के मामले में नया मोड़ आया है. शिकायत दर्ज कराने वाली स्मृति सिंह ने अपनी शिकायत वापस लेने का फैसला किया है. उनका कहना है कि प्रधानमंत्री की ओर से बच्चों को माफ किए जाने और नाबालिग की सार्वजनिक माफी के बाद उन्होंने यह कदम उठाया.जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अभद्र भाषा के इस्तेमाल का मामला अब नए दौर में पहुंच गया है. गाजियाबाद की रहने वाली स्मृति सिंह ने बताया कि उन्होंने इस मामले में एक नाबालिग के खिलाफ नोएडा के एक्सप्रेसवे थाने में शिकायत दी थी. घटना दिल्ली की होने की वजह से इसे जीरो FIR के रूप में दर्ज किया गया था. इसके बाद जांच दिल्ली पुलिस को सौंप दी गई.

स्मृति सिंह का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री और उनकी मां के लिए आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया था. इसी वजह से उन्होंने शिकायत दर्ज कराई थी. हालांकि अब, प्रधानमंत्री की ओर से बच्चों को माफ किए जाने और नाबालिग की सार्वजनिक माफी के बाद उन्होंने शिकायत वापस लेने का फैसला किया है.


E20 विवाद, बॉम्बे हाईकोर्ट से नितिन गडकरी को अंतरिम राहत

by न्यूज डेस्क

मुंबई/ केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को E20 फ्यूल विवाद से जुड़े कथित डीपफेक (Deepfake) और AI जनरेटेड आपत्तिजनक कंटेंट मामले में बड़ी राहत मिली है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित गडकरी से जुड़े कथित फर्जी वीडियो और AI से तैयार की गई आपत्तिजनक तस्वीरों को तत्काल हटाने का अंतरिम आदेश जारी किया है। अदालत ने कहा कि इस तरह का कंटेंट सार्वजनिक मंचों पर बने रहने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

क्या है पूरा मामला?
नितिन गडकरी ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर आरोप लगाया था कि सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने E20 फ्यूल नीति को लेकर उनकी छवि खराब करने के उद्देश्य से डीपफेक वीडियो और AI जनरेटेड फर्जी तस्वीरें प्रसारित की हैं। इनमें से एक वीडियो इंस्टाग्राम रील के रूप में वायरल हुआ था, जबकि अन्य तस्वीरों और पोस्ट में भी उनके नाम और तस्वीर का कथित तौर पर दुरुपयोग किया गया। याचिका में कहा गया कि यह सामग्री न केवल भ्रामक है, बल्कि उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाली भी है।

कोर्ट ने क्या कहा?
जस्टिस अरिफ डॉक्टर की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश किए गए कंटेंट का अवलोकन किया। अदालत ने प्रारंभिक तौर पर माना कि संबंधित सामग्री अत्यंत आपत्तिजनक, अश्लील और अपमानजनक प्रतीत होती है। कोर्ट ने कहा कि ऐसे कंटेंट का सार्वजनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कोई स्थान नहीं है, क्योंकि इसे बच्चे, युवा और आम नागरिक भी आसानी से देख सकते हैं। अदालत ने यह भी माना कि याचिकाकर्ता ने अंतरिम राहत पाने के लिए पर्याप्त आधार प्रस्तुत किया है।

Meta और Google ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान Meta और Google की ओर से पेश वकीलों ने अदालत को आश्वस्त किया कि याचिका के Exhibit-C में सूचीबद्ध सभी आपत्तिजनक लिंक और सामग्री को संबंधित प्लेटफॉर्म से हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। अदालत ने कंपनियों के इस आश्वासन को रिकॉर्ड पर लेते हुए आपत्तिजनक कंटेंट हटाने का अंतरिम आदेश जारी किया।

4 सप्ताह बाद होगी अगली सुनवाई
हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद निर्धारित की है। तब तक संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को अदालत के निर्देशों का पालन करते हुए विवादित सामग्री हटानी होगी और आगे की कार्रवाई पर अपना पक्ष रखना होगा। 
हाल के वर्षों में Artificial Intelligence (AI) और Deepfake तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल ने फर्जी वीडियो और तस्वीरों के जरिए गलत सूचना फैलाने की घटनाओं में तेजी लाई है। विशेषज्ञों का मानना है कि सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों की छवि खराब करने और गलत जानकारी फैलाने के लिए इस तकनीक का दुरुपयोग एक गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। बॉम्बे हाईकोर्ट का यह अंतरिम आदेश ऐसे मामलों में डिजिटल प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी और फर्जी AI कंटेंट पर न्यायपालिका के सख्त रुख को भी दर्शाता है।


रांची में 12वें दिन भी जारी आंदोलन, सोनम वांगचुक के आग्रह पर देवेंद्र महतो ने जल ग्रहण किया

by न्यूज डेस्क

रांची: झारखंड की राजधानी रांची में JPSC और JSSC समेत विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। राजधानी के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में चल रहा यह प्रदर्शन मंगलवार को 12वें दिन में प्रवेश कर गया। इस बीच आंदोलन को उस समय नया मोड़ मिला, जब लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक ने आंदोलन का समर्थन करते हुए फोन पर अनशन पर बैठे JLKM के केंद्रीय उपाध्यक्ष देवेंद्र नाथ महतो से बातचीत की। कई दिनों से आमरण अनशन पर बैठे देवेंद्र महतो ने पहले शर्त रखी थी कि वे तभी अपना अनशन तोड़ेंगे, जब सोनम वांगचुक स्वयं रांची आकर उनसे मुलाकात करेंगे। हालांकि स्वास्थ्य लगातार बिगड़ने की आशंका के बीच वांगचुक ने फोन पर उनसे बातचीत कर सेहत का ख्याल रखने की अपील की।

वांगचुक के आग्रह पर पिया पानी

फोन पर हुई बातचीत के दौरान सोनम वांगचुक ने देवेंद्र महतो से कहा कि आंदोलन का उद्देश्य खुद को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि सरकार तक छात्रों की आवाज पहुंचाना है। उन्होंने महतो से आग्रह किया कि वे कम से कम पानी और शहद लें ताकि उनका स्वास्थ्य अधिक न बिगड़े और आंदोलन जारी रह सके। लंबी बातचीत और लगातार समझाने के बाद देवेंद्र महतो ने वांगचुक की बात मानते हुए जल ग्रहण किया। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन और सरकार के खिलाफ विरोध जारी रहेगा। बातचीत के दौरान देवेंद्र महतो ने कहा कि वे सोनम वांगचुक का बहुत सम्मान करते हैं और चाहते हैं कि वे रांची आकर छात्रों का समर्थन करें। इस पर वांगचुक ने उन्हें भरोसा दिलाया कि वे जल्द ही रांची पहुंचकर आंदोलन में शामिल होने की कोशिश करेंगे। वांगचुक ने कहा कि लंबे समय तक बिना पानी और नमक के अनशन करना शरीर के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है। उन्होंने महात्मा गांधी के अनशन का उदाहरण देते हुए कहा कि गांधीजी भी उपवास के दौरान पानी में नींबू मिलाकर लेते थे ताकि शरीर में ऊर्जा बनी रहे। उन्होंने सुझाव दिया कि पानी, शहद और नींबू जैसी चीजें शरीर को आवश्यक ऊर्जा देती हैं और आंदोलन को लंबे समय तक जारी रखने में मदद करती हैं।

क्यों हो रहा आंदोलन?

रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में बड़ी संख्या में प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थी पिछले कई दिनों से धरने पर बैठे हैं। छात्रों का आरोप है कि JPSC, JSSC, CGL और अन्य भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताएं हुई हैं, जिससे योग्य अभ्यर्थियों के साथ अन्याय हुआ है।

प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगें 
JPSC-JSSC परीक्षाओं में गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच
दोषी अधिकारियों और संबंधित लोगों पर कड़ी कार्रवाई
भर्ती प्रक्रिया में पूरी तरह से पारदर्शिता सुनिश्चित करना
भविष्य में परीक्षाओं को निष्पक्ष तरीके से करवाना 

छात्रों के इस आंदोलन को विभिन्न छात्र संगठनों, सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों का समर्थन भी मिल रहा है। आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लेती, तब तक धरना और विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। दूसरी ओर, देवेंद्र महतो के स्वास्थ्य को लेकर समर्थकों और डॉक्टरों ने भी चिंता जताई थी। सोनम वांगचुक के हस्तक्षेप के बाद उनके पानी ग्रहण करने से समर्थकों ने कुछ राहत की सांस ली है। वहीं खबर लिखे जाने तक झारखंड सरकार की ओर से आंदोलन समाप्त कराने या छात्रों की मांगों पर किसी बड़े फैसले की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है, जबकि प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखने पर अड़े हैं। अब देखना होगा कि आगे ये आंदोलन क्या मोड़ लेता है 


लोकसभा में विरोध के बावजूद एप्रोप्रिएशन बिल पास , ध्वनिमत से मिली मंजूरी

by न्यूज डेस्क

नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र के दौरान मंगलवार को लोकसभा में विपक्ष के लगातार हंगामे और नारेबाजी के बीच 'द एप्रोप्रिएशन (नंबर-3) बिल, 2026' को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। विपक्षी सांसद पूरे समय सदन के वेल में विरोध प्रदर्शन करते रहे, जबकि सरकार वित्तीय कार्यवाही आगे बढ़ाने पर अड़ी रही। हंगामे के कारण विधेयक पर सामान्य चर्चा नहीं हो सकी और अंततः स्पीकर ने ध्वनिमत से इसे मंजूरी दे दी।  लोकसभा अध्यक्ष ने कार्यवाही के दौरान विपक्षी सांसदों से अपनी-अपनी सीटों पर लौटने और सरकारी खर्च से जुड़े प्रावधानों पर निर्धारित चर्चा में हिस्सा लेने की अपील की। हालांकि विपक्षी सदस्यों ने नारेबाजी जारी रखी, जिसके बाद सदन ने बिना विस्तृत बहस के विधेयक को पारित कर दिया।

क्या है एप्रोप्रिएशन (नंबर-3) बिल?

द एप्रोप्रिएशन (No. 3) Bill, 2026 संसद की वित्तीय प्रक्रिया का अहम हिस्सा है। इस विधेयक के जरिए केंद्र सरकार को भारत की संचित निधि से संसद द्वारा स्वीकृत धनराशि निकालने और विभिन्न मंत्रालयों व सरकारी योजनाओं पर खर्च करने का कानूनी अधिकार मिलता है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 114 के अनुसार, संसद की मंजूरी के बिना संचित निधि से कोई भी राशि खर्च नहीं की जा सकती। इसी संवैधानिक प्रक्रिया को पूरा करने के लिए एप्रोप्रिएशन बिल पारित किया जाता है।

हंगामे के कारण नहीं हो सकी सामान्य चर्चा

विधेयक पर चर्चा शुरू होने से पहले ही विपक्षी सांसद विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। सरकार चाहती थी कि वित्तीय प्रस्तावों पर सदन में चर्चा हो, लेकिन लगातार विरोध के कारण कार्यवाही सामान्य रूप से नहीं चल सकी। विपक्ष के हंगामे के बीच पीठासीन अधिकारी ने विधेयक को ध्वनिमत के लिए रखा और सदन ने इसे मंजूरी दे दी।

बिल पारित होने के बाद भी जारी रहा विरोध

एप्रोप्रिएशन (नंबर-3) बिल पारित होने के बाद भी विपक्षी सांसदों का विरोध जारी रहा। सदन में लगातार शोर-शराबे की स्थिति बनी रहने के कारण लोकसभा की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई। अब संसद के वित्तीय एजेंडे के तहत अगला महत्वपूर्ण चरण फाइनेंस बिल पर चर्चा और उससे जुड़ी कार्यवाही होगी।

क्यों अहम है यह विधेयक?

एप्रोप्रिएशन बिल के जरिए संसद पहले से स्वीकृत Demands for Grants के तहत सरकारी खर्च को कानूनी मंजूरी देती है। इसके अलावा, 'Charged Expenditure' यानी ऐसे खर्च, जिन पर लोकसभा में मतदान नहीं होता लेकिन जिन्हें संचित निधि से भुगतान किया जाना होता है, उन्हें भी इसी विधेयक के माध्यम से वैधानिक आधार मिलता है। 
इसलिए एप्रोप्रिएशन बिल के पारित होने के बाद ही केंद्र सरकार स्वीकृत बजटीय प्रावधानों के अनुरूप सरकारी व्यय कर सकती है।


दिल्ली फ्लाइट में भीषण टर्बुलेंस, 12 यात्री और क्रू मेंबर घायल

by न्यूज डेस्क

नई दिल्ली: थाईलैंड के फुकेट (Phuket) से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की फ्लाइट AI2379 मंगलवार को दिल्ली पहुंचने से पहले तेज टर्बुलेंस (वायुमंडलीय अशांति) की चपेट में आ गई। उड़ान के दौरान अचानक आए तेज झटकों के कारण विमान में सवार 12 लोग, जिनमें यात्री और चालक दल (क्रू) के सदस्य शामिल हैं, घायल हो गए। विमान की सुरक्षित लैंडिंग के बाद सभी प्रभावित लोगों को एहतियात के तौर पर दिल्ली एयरपोर्ट स्थित मेडिकल सुविधा केंद्र ले जाया गया, जहां उनका इलाज और स्वास्थ्य परीक्षण किया गया।

मिली जानकारी के अनुसार, फ्लाइट जब दिल्ली के करीब पहुंच रही थी, तभी उसे अचानक तेज टर्बुलेंस का सामना करना पड़ा। प्रत्यक्षदर्शी यात्रियों ने बताया कि विमान कुछ क्षणों के लिए तेजी से नीचे आया और जोरदार हिचकोले खाने लगा, जिससे केबिन में अफरा-तफरी मच गई। कई यात्रियों को सीटों और केबिन के हिस्सों से टकराने के कारण चोटें आईं। घायलों के परिजनों के अनुसार, एक यात्री के कान पर दबाव इतना अधिक पड़ा कि उसके कान का पर्दा प्रभावित हो गया। वहीं कुछ अन्य यात्रियों को गर्दन, कंधे और शरीर के अन्य हिस्सों में चोटें आईं। हालांकि एयर इंडिया ने आधिकारिक तौर पर केवल इतना कहा है कि कुछ यात्रियों और चालक दल के सदस्यों को मामूली चोटें आई हैं और उन्हें आवश्यक चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराई गई है। एयर इंडिया के प्रवक्ता ने बयान जारी कर कहा, "यात्रियों और चालक दल की सुरक्षा तथा उनका स्वास्थ्य हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रभावित लोगों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। एयरलाइन संबंधित अधिकारियों के साथ मिलकर घटना की जांच में पूरा सहयोग कर रही है।"

क्या होता है एयर टर्बुलेंस?

एयर टर्बुलेंस वह स्थिति है, जब विमान के आसपास हवा का प्रवाह अचानक अस्थिर और अनियमित हो जाता है। इसके कारण विमान को तेज झटके महसूस होते हैं। टर्बुलेंस कई कारणों से हो सकता है, जैसे:
गरज-चमक वाले बादल और खराब मौसम
ऊंचाई पर बहने वाली तेज जेट स्ट्रीम
गर्म और ठंडी हवा के टकराने से बनने वाली वायुमंडलीय अशांति
पहाड़ों के ऊपर बनने वाली एयर वेव्स

क्लियर एयर टर्बुलेंस (CAT), जो बिना बादलों के भी हो सकता है और पायलट के लिए पहले से पहचानना कठिन होता है। विशेषज्ञों के अनुसार, टर्बुलेंस आमतौर पर विमान की संरचनात्मक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा नहीं होता, लेकिन यदि यात्री सीट बेल्ट नहीं लगाए हों तो चोट लगने का जोखिम बढ़ जाता है। इसी वजह से उड़ान के दौरान सीट पर बैठे समय हमेशा सीट बेल्ट बांधे रखने की सलाह दी जाती है।


बांकीपुर में प्रशांत किशोर ने मारी बाजी, दतिया में कांग्रेस और मंजलपुर में BJP की जीत

by newsdesk

बांकीपुर में प्रशांत किशोर ने मारी बाजी, दतिया में कांग्रेस और मंजलपुर में BJP की जीत

तीन राज्यों बिहार, मध्य प्रदेश और गुजरात की विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनावों के नतीजे अब लगभग साफ हो गए हैं। बिहार की सबसे चर्चित बांकीपुर सीट पर जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने दोपहर बाद ही निर्णायक बढ़त बना ली थी...जो आगे तक कायम रही... वहीं मध्य प्रदेश के दतिया में कांग्रेस उम्मीदवार ने बढ़त ली थी... और अब जीत हासिल की ... जबकि गुजरात की मंजलपुर सीट पर भाजपा ने बड़ी जीत दर्ज कर ली है। मतगणना 3 अगस्त को हुई, जबकि मतदान 30 जुलाई को कराया गया था।
बिहार: बांकीपुर में प्रशांत किशोर की बाजी
बांकीपुर विधानसभा सीट पर 26वें राउंड की मतगणना तक जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर को 53,566 वोट मिले, जबकि भाजपा उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा को 37,702 वोट प्राप्त हुए । इस तरह प्रशांत किशोर ने 15,864 से ज्यादा वोटों से बड़ी जीत हासिल की ।
यह सीट भाजपा का मजबूत गढ़ मानी जाती रही है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन यहां से लगातार पांच बार विधायक रहे थे। उनके राज्यसभा सदस्य बनने के बाद सीट खाली हुई, जिसके कारण यहां उपचुनाव कराया गया। यदि यह बढ़त अंतिम नतीजे तक कायम रहती है, तो इसे बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव माना जाएगा।
मध्य प्रदेश: दतिया में कांग्रेस उम्मीदवार जीते
मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह बढ़त बनाए हुए थे। 13वें राउंड की मतगणना तक उन्हें 61,677 वोट मिले थे, जबकि भाजपा उम्मीदवार आशुतोष तिवारी को 50,623 वोट प्राप्त हुए थे। भाजपा ने इस उपचुनाव में पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया था। शुरुआती रुझानों में कांग्रेस को करीब 10 हजार वोटों की बढ़त मिलती दिखाई दी। और बाद में उन्होने ही जीत हासिल की .. 
गुजरात: मंजलपुर सीट बीजेपी ने बड़े अंतर से जीती
गुजरात की मंजलपुर विधानसभा सीट पर भाजपा उम्मीदवार सतीश (सतेन्द्रभाई) पटेल ने कांग्रेस के भिखाभाई रबारी को 30,499 वोटों के बड़े अंतर से हराकर जीत दर्ज की है। इस सीट पर 30 जुलाई को हुए मतदान में लगभग 37.05 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया था। मंजलपुर सीट लंबे समय से भाजपा का मजबूत गढ़ रही है और इस उपचुनाव में भी पार्टी ने अपना कब्जा बरकरार रखा।
उपचुनाव क्यों हुए?
इन तीनों सीटों पर अलग-अलग कारणों से उपचुनाव कराए गए।
बिहार (बांकीपुर): नितिन नवीन के राज्यसभा जाने के बाद सीट खाली हुई।
मध्य प्रदेश (दतिया): कांग्रेस विधायक की सदस्यता समाप्त होने के बाद उपचुनाव हुआ ।
गुजरात (मंजलपुर): भाजपा विधायक के निधन के कारण सीट रिक्त हुई।
तीन राज्यों के उपचुनावों की तस्वीर अब लगभग साफ हो चुकी है...  बांकीपुर में प्रशांत किशोर ने जीत हासिल की... जबाकि दतिया में कांग्रेस और मंजलपुर में BJP ने बीजेपी ने बाजी मार ली...


केंद्र सरकार ने NEET-UG 2026 री-एग्जाम से पहले टेलीग्राम पर अस्थायी प्रतिबंध लगाया

by khabarcare

नई दिल्ली, 16 जून 2026: केंद्र सरकार ने NEET-UG 2026 री-एग्जाम की निष्पक्षता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए देशभर में लोकप्रिय मैसेजिंग ऐप टेलीग्राम पर अस्थायी प्रतिबंध लगा दिया है। यह कदम परीक्षा से जुड़े फर्जी पेपर लीक, धोखाधड़ी वाले रैकेट्स और गलत सूचनाओं को रोकने के लिए उठाया गया है।

फैसले की मुख्य बातें

  • प्रतिबंध की अवधि: टेलीग्राम एक्सेस पर 22 जून 2026 तक रोक रहेगी, यानी री-एग्जाम (21 जून) और उसके तुरंत बाद का समय कवर होगा।
  • कानूनी आधार: इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 की धारा 69A के तहत निर्देश जारी किए। यह NTA की सिफारिश पर आधारित है।
  • अतिरिक्त उपाय: टेलीग्राम को भारत में पहले से पोस्ट किए गए मैसेजों की एडिटिंग फीचर को 30 जून तक डिसेबल करने का निर्देश दिया गया है, ताकि गलत सूचना फैलाने में आसानी न हो।

राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने इस फैसले का स्वागत किया है। NTA के बयान में कहा गया कि बड़े पैमाने पर चैनल्स, ग्रुप्स और बॉट्स को ब्लॉक करने के बावजूद धोखाधड़ी वाले तत्व सक्रिय थे, इसलिए यह सीमित और लक्षित कदम जरूरी था।

पृष्ठभूमि

NEET-UG 2026 का मूल परीक्षा 3 मई को हुई थी, जिसे पेपर लीक और अनियमितताओं के आरोपों के चलते रद्द कर दिया गया था। CBI जांच चल रही है। री-एग्जाम 21 जून 2026 (रविवार) को दोपहर 2:00 बजे से 5:15 बजे तक 551 शहरों में आयोजित होगा।

परीक्षा की सुरक्षा के लिए कई कड़े इंतजाम किए गए हैं, जैसे:

  • सशस्त्र एस्कॉर्ट के साथ पेपर ट्रांसपोर्ट
  • AI मॉनिटरिंग वाली CCTV
  • बायोमेट्रिक्स और जammers
  • PMO स्तर की निगरानी

छात्रों और अभिभावकों के लिए सलाह

  • परीक्षा से संबंधित सभी अपडेट केवल आधिकारिक NTA वेबसाइट और उनके सोशल मीडिया हैंडल से लें।
  • अफवाहों पर ध्यान न दें। टेलीग्राम प्रतिबंध अस्थायी है और परीक्षा की शुचिता बनाए रखने के लिए है।
  • एडमिट कार्ड और अन्य दस्तावेज पहले से तैयार रखें।

सरकार और NTA का कहना है कि यह कदम छात्रों के हित में है और परीक्षा निष्पक्ष रूप से आयोजित होगी। 22 जून के बाद सेवाएं सामान्य हो जाएंगी।

अपडेट: यह जानकारी 16 जून 2026 की नवीनतम रिपोर्ट्स पर आधारित है। स्थिति में कोई बदलाव होने पर NTA तुरंत सूचित करेगा।

यह समाचार पूरी तरह तथ्यों पर आधारित और मूल रूप से तैयार किया गया है। छात्रों से अपील है कि वे शांत रहें और तैयारी पर फोकस करें।


आपके फोन में भी तेज सायरन की आवाज सुनाई दी? घबराएं नहीं, ये बस ट्रायल अलर्ट था

by newsdesk

नई दिल्ली ०२ मई २०२६ : देशभर में आज यानी दो मई को करोड़ों लोगों के मोबाइल फोन पर अचानक तेज सायरन जैसी आवाज सुनाई देने लगी, जिससे सभी घबरा गए। अगर आपके भी मोबाइल फोन पर सायरन बजा हो तो घबराने की जरूरत नहीं है। क्योंकि यह किसी आपदा का संकेत नहीं, बल्कि सरकार द्वारा किए जा रहे एक टेस्ट का हिस्सा है। दरअसल, भारत सरकार का Department of Telecommunications (DoT) और National Disaster Management Authority (NDMA) ने साथ मिलकर एक नए मोबाइल आधारित आपदा चेतावनी सिस्टम का परीक्षण किया है। इस सिस्टम का उद्देश्य किसी भी आपात स्थिति जैसे भूकंप, बाढ़ या चक्रवात के समय लोगों को तुरंत अलर्ट करना है। इस सिस्टम को SACHET (नेशनल डिजास्टर अलर्ट पोर्टल) नाम दिया गया है। इससे पहले भी इसे दिल्ली-एनसीआर और अन्य बड़े शहरों में टेस्ट किया जा चुका है।


मई के पहले दिन फूटा महंगाई बम! 19 किलो कमर्शियल LPG सिलेंडर 993 रुपये महंगा, अब दिल्ली में 3071.50 रुपये

by newsdesk

मई की शुरुआत के साथ ही आम लोगों और कारोबारियों पर महंगाई का नया झटका लगा है। तेल विपणन कंपनियों ने आज से 19 किलो वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में भारी बढ़ोतरी कर दी है। एक सिलेंडर पर औसतन 993 रुपये की बढ़ोतरी हुई है, जिसके बाद दिल्ली में इसकी नई कीमत 3,071.50 रुपये हो गई है।

घरेलू सिलेंडर की कीमत में राहत, लेकिन व्यापारियों पर बोझ

घरेलू उपयोग के 14.2 किलो वाले एलपीजी सिलेंडर की कीमत में इस बार कोई बदलाव नहीं किया गया है। दिल्ली में यह अभी भी 913 रुपये में उपलब्ध है। सरकार ने आम उपभोक्ताओं को महंगाई से बचाने के लिए घरेलू सिलेंडर को स्थिर रखा है।

हालांकि, होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा और छोटे-बड़े खाद्य व्यवसायों पर इस बढ़ोतरी का सीधा असर पड़ेगा। ये सभी मुख्य रूप से 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर का इस्तेमाल करते हैं।

5 किलो LPG सिलेंडर भी हुआ महंगा

कमर्शियल श्रेणी के छोटे 5 किलो वाले एलपीजी सिलेंडर (FTL - Free Trade LPG) की कीमत में भी बढ़ोतरी हुई है। विभिन्न शहरों में यह लगभग 51 रुपये तक महंगा हो गया है। इससे पहले अप्रैल में भी 5 किलो सिलेंडर पर 51 रुपये की बढ़ोतरी देखी गई थी।

क्यों बढ़ी कीमतें?

तेल कंपनियों के अनुसार, इस भारी बढ़ोतरी का मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और एलपीजी की कीमतों में उछाल है। अमेरिका-ईरान-इजराइल के बीच बढ़ते तनाव और हार्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान के चलते वैश्विक आपूर्ति प्रभावित हुई है। यह तीसरी बड़ी बढ़ोतरी है, जो मार्च-अप्रैल के बाद मई में आई है।


ट्रंप बोले- ईरान का तेल लेना हमारा पसंदीदा विकल्प, खार्ग द्वीप आसानी से कब्जा कर सकते हैं

ईरान-अमेरिका जंग 30वें दिन में प्रवेश, ईरान ने जमीनी हमले की चेतावनी दी

by KhabarCafe

न्यूज डेस्क, 30 मार्च 2026: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के मुख्य तेल निर्यात केंद्र खार्ग द्वीप पर कब्जे की संभावना जताई है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका का पसंदीदा विकल्प "ईरान का तेल लेना" है और खार्ग द्वीप को "बहुत आसानी से" लिया जा सकता है। वहीं ईरान ने अमेरिका को जमीनी आक्रमण से सख्त चेतावनी दी है कि अगर अमेरिकी सैनिक ईरानी जमीन पर उतरे तो उन्हें "आग में झोंक" दिया जाएगा।

ट्रंप का विवादास्पद बयान

ट्रंप ने फाइनेंशियल टाइम्स को दिए इंटरव्यू में कहा, "मेरा पसंदीदा विकल्प ईरान का तेल लेना है।" उन्होंने खार्ग द्वीप (Kharg Island) का जिक्र करते हुए बताया कि इसे कब्जे में लेना आसान है क्योंकि वहां ईरान की कोई खास रक्षा नहीं है। ट्रंप ने दावा किया कि युद्ध में ईरान के कई प्रमुख नेता मारे जा चुके हैं, जिसे उन्होंने "रेजीम चेंज" करार दिया।

ट्रंप ने आगे कहा कि बातचीत "बहुत अच्छी" चल रही है और डील जल्द हो सकती है, लेकिन ईरान को अमेरिका की शर्तें माननी होंगी। उन्होंने ईरान की ऊर्जा साइट्स पर हमले 6 अप्रैल तक टाल दिए हैं।

ईरान की सख्त प्रतिक्रिया

ईरानी संसद स्पीकर मोहम्मद बागेर घालिबाफ और रिवोल्यूशनरी गार्ड ने चेतावनी दी कि अमेरिकी सैनिकों के जमीनी हमले पर उन्हें "आग में झोंक" दिया जाएगा। ईरान ने अमेरिकी और इजराइली अधिकारियों के निजी आवासों को भी वैध टारगेट बताते हुए हमले की धमकी दी है।

ईरान ने युद्ध रोकने के लिए 5 शर्तें रखी हैं, जिसमें सभी हमले बंद करना, युद्ध क्षति का मुआवजा और हार्मुज जलडमरूमध्य पर अपना अधिकार शामिल है। ईरान ने अमेरिका के 15-पॉइंट प्रस्ताव को खारिज कर दिया है।

सैन्य स्थिति

  • अमेरिका ने मध्य पूर्व में अतिरिक्त 3,500 मरीन भेजे हैं, अब कुल 50,000 से ज्यादा अमेरिकी सैनिक तैनात हैं।
  • अमेरिका-इजराइल ने ईरान के न्यूक्लियर साइट्स, मिसाइल बेस और विश्वविद्यालयों समेत हजारों टारगेट्स पर हमले किए हैं।
  • ईरान की मिसाइल और वायु रक्षा क्षमता बुरी तरह प्रभावित हुई है।

कूटनीतिक प्रयास

क्षेत्रीय देश पाकिस्तान में बैठक कर युद्ध समाप्त करने की कोशिश कर रहे हैं। अमेरिका ने पाकिस्तान के जरिए ईरान को 15-पॉइंट प्रस्ताव दिया था, जिसमें न्यूक्लियर प्रोग्राम बंद करना और हार्मुज में नेविगेशन फ्री रखना शामिल है।

निष्कर्ष: जंग एक महीने पूरा होने को है। ट्रंप "डील" की बात कर रहे हैं, लेकिन दोनों तरफ सैन्य दबाव और चेतावनियां जारी हैं। स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है।

आपके न्यूज पोर्टल के लिए शॉर्ट वर्जन: ट्रंप: ईरान का तेल लेना चाहते हैं, खार्ग द्वीप पर कब्जा आसान ईरान ने जमीनी हमले की धमकी दी, पाकिस्तान में शांति बैठक। 50 हजार अमेरिकी सैनिक तैनात।

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ईरान वॉर का पर्यावरणी तबाही: 14 दिनों में साल भर का प्रदूषण! अगर युद्ध 1 साल चला तो क्या होगा?

ईरान-इजराइल-अमेरिका युद्ध के महज 14 दिनों (28 फरवरी से 14 मार्च 2026) में इतना कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जित हो चुका है, जितना किसी मध्यम आकार के देश जैसे कुवैत पूरे साल में निकालता है।

by KhabarCafe

लखनऊ/नई दिल्ली, 28 मार्च 2026: ईरान-इजराइल-अमेरिका युद्ध के महज 14 दिनों (28 फरवरी से 14 मार्च 2026) में इतना कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जित हो चुका है, जितना किसी मध्यम आकार के देश जैसे कुवैत पूरे साल में निकालता है। Climate and Community Institute की नई रिसर्च के मुताबिक, इस दौरान 50.55 लाख टन CO₂e (कार्बन डाइऑक्साइड समकक्ष) निकला – जो आइसलैंड के पूरे साल के उत्सर्जन से भी ज्यादा है।

अगर युद्ध इसी रफ्तार से 1 साल तक चला तो कुल उत्सर्जन 13 करोड़ 14 लाख टन CO₂e के आसपास पहुंच जाएगा! यह आंकड़ा 84 सबसे कम प्रदूषण फैलाने वाले देशों के पूरे साल के संयुक्त उत्सर्जन के बराबर है।

कहां से निकला इतना प्रदूषण?

रिसर्च बताती है कि सबसे बड़ा हिस्सा घरों, स्कूलों और इमारतों के ध्वस्त होने से आया – करीब 24 लाख टन CO₂e। इसके बाद तेल भंडारण, रिफाइनरी और टैंकरों पर हमले से 19 लाख टन। जेट, जहाज, मिसाइल और ड्रोन के ईंधन से 5 लाख टन।

तेहरान और आसपास के इलाकों में तेल के आग के धुएं ने "ब्लैक रेन" (काला बारिश) की स्थिति पैदा कर दी। लोग मास्क लगाकर सड़कों पर घूम रहे हैं, हवा में जहरीली गैसें भरी हैं।

1 साल चला तो क्या होगा?

  • जलवायु संकट तेज: इतना CO₂ ग्लोबल वार्मिंग को और बढ़ाएगा। समुद्र स्तर बढ़ना, मौसम चरम, सूखा-बाढ़ बढ़ेगा।
  • स्वास्थ्य खतरा: काला धुआं, सल्फर डाइऑक्साइड और पार्टिकुलेट मैटर से सांस की बीमारियां, कैंसर का खतरा।
  • तेल संकट: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से दुनिया की 20% तेल सप्लाई प्रभावित – भारत जैसे आयातक देशों पर महंगा असर।
  • लंबे समय का नुकसान: रिफाइनरी जलने से मिट्टी-नदी-समुद्र में प्रदूषण दशकों तक रहेगा।


मंत्रिपरिषद की बैठक में PM मोदी की दो टूक, अपने क्षेत्रों में नजर और संपर्क बनाए रखें मंत्री

विपक्ष के हमलों के बीच पीएम मोदी ने मंत्रिपरिषद की बैठक की।

नई दिल्ली: कोरोना की दूसरी लहर देश में तांडव मचा रही है। इस बीच सरकारें कोरोना से लोगों को बचाने के लिए लगातार जरूरी कदम उठा रही है। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को मंत्रिपरिषद के सदस्यों से कोरोना प्रबंधन एवं भावी चुनौतियों पर चर्चा की।

पीएम ने सभी से हर स्तर पर नजर बनाए रखने को कहा। कोरोना को 'सदी में एक बार आने वाली त्रासदी' बताते हुए प्रधानमंत्री ने भरोसा जताया कि केंद्र, राज्य और जनता के एकजुट प्रयास से देश यह जंग जीतेगा।


बैठक में दो प्रजेंटेशन दिए गए। इनमें कोरोना संकटके दौरान पिछले 14 महीनों में उठाए गए कदमों की जानकारी दी गई। यह बताया गया कि केंद्र और राज्य मिलकर पूरी स्थिति से निपट रहे हैं। केंद्र हर स्तर पर राज्यों के साथ खड़ा है। गरीबों के लिए दो महीने तक फिर से मुफ्त राशन की व्यवस्था की गई है, ताकि उन्हें परेशानी न हो। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बैठक में सबसे ज्यादा जोर इस बात पर था कि मंत्री अपने-अपने क्षेत्रों और राज्यों में लोगों के संपर्क में रहें। यह देखें कि केंद्र की ओर से दी गई मदद जरूरतमंद लोगों पहुंच रही है या नहीं। यह वक्त एक टीम की तरह काम करने का है ताकि देश फिर से जंग जीत सके। इस दौरान पीएम मोदी ने  मंत्रियों को इसकी भी याद दिलाई कि कोरोना प्रोटोकाल का पालन करें और दूसरों से भी करवाएं।


कोरोना से जंग: चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने PM मोदी को भेजा संदेश, मदद का दिया प्रस्ताव

चीन ने भारत को कोरोना के विरुद्ध युद्ध में मदद करने का प्रस्ताव दिया है।

नई दिल्ली: कोरोना के कहर के बीच चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पीएम मोदी को चिट्ठी लिखी है। इस चिट्ठी में उन्होंने कोरोना के खिलाफ लड़ाई में मदद का प्रस्ताव दिया है। इस संबंध में भारत में चीन के राजदूत सुन वेईदोंग ने ट्वीट कर जानकारी दी है।

इससे पहले चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने गुरुवार को कहा था कि कोविड-19 के खिलाफ जंग में उनका देश भारत की हरसंभव मदद करेगा और कहा कि चीन में बनी महामारी रोधी सामग्री ज्यादा तेज गति से भारत पहुंचाई जा रही हैं।

विदेश मंत्री एस जयशंकर को लिखे पत्र में वांग ने कहा, ‘‘भारत जिन चुनौतियों का सामना कर रहा है, उनके प्रति संवेदना रखता है और गहरी सहानुभूति प्रकट करता है।’’

भारत में चीन के राजदूत सुन वेइदोंग ने इस पत्र को ट्विटर पर साझा किया जिसमें लिखा है, ‘‘ कोरोना वायरस मानवता का साझा दुश्मन है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को एकजुट और समन्वयित होकर इसका मुकाबला करने की जरूरत है। चीनी पक्ष भारत सरकार और वहां के लोगों का, महामारी से लड़ाई में समर्थन करता है।’’


कोरोना से जंग जीतने के साथ ही एक्शन में सीएम योगी, डीआरडीओ अस्पताल का किया निरीक्षण

सीएम योगी कोरोना संक्रमित होने के बावजूद लगातार राज्य में कोरोना के हालात पर नजर बनाए हुए थे।

लखनऊ: यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने कोरोना को हरा दिया है। अब वह पूरी तरह स्वस्थ्य हैं। कोरोना से ठीक होने की जानकारी सीएम योगी ने ट्वीट करके दी।

बता दें कि योगी आदित्यनाथ 14 अप्रैल को कोविड-19 से संक्रमित पाए गए थे और इसके बाद से वह सेल्फ आइसोलेशन में थे। इस दौरान वह सभी काम वर्चुअली कर रहे थे। योगी आदित्यनाथ ने ट्वीट कर कहा, 'आप सभी की शुभेच्छा और चिकित्सकों की देखरेख से अब मैं कोरोना निगेटिव हो गया हूं। आप सभी के द्वारा मुझे दिए गए सहयोग और शुभकामनाओं के लिए धन्यवाद।'


सीएम ने किया अस्पताल का निरीक्षीण

सीएम योगी आदित्यनाथ ने अपने सरकारी आवास पर टीम-11 के साथ समीक्षा बैठक के बाद अब मैदान में उतर गए हैं। इसी क्रम में वह शुक्रवार को दोपहर में अवध शिल्प ग्राम में बने 400 बेड के कोविड अस्पताल के आइसीयू का निरीक्षण करने पहुंंचे।

लखनऊ के अवध शिल्प ग्राम प्रांगण में बने डीआरडीओ अस्‍पताल का न‍िरीक्षण करने पहुंचे सीएम योगी आद‍ित्‍यनाथ को आर्मी के अफसरों और डीएम अभ‍िषेक प्रकाश ने DRDO के अस्‍पताल की पूरी जानकारी दी। सीएम ने अस्‍पताल के साथ आइसीयू और प्रशासन‍िक भवन का भी न‍िरीक्षण क‍िया। डीआरडीओ के सूत्रों के अनुसार अस्‍पताल पूरी तरह से मरीजों के उपचार के ल‍िए तैयार है। सभी तरह के ट्रायल पूरे कर ल‍िए गए हैं। अब बस प्रशासन की तरफ से ऑक्‍सीजन उपलब्‍ध कराने का इंतजार है। ऑक्‍सीजन उपलब्‍ध होते ही अस्‍पताल अपनी पूरी क्षमता से काम करने लगेगा।     

बताते चलें कि कोरोना की दूसरी लहर इस समय पीक पर है और प्रतिदिन लगभग 4 लाख केस देशभर से सामने आ रहे हैं। यूपी भी इससे अछूता नहीं है। सैकड़ों लोग प्रतिदिन यूपी में ही कोरोना से मर रहे हैं। इन सबके बीच सूबे की योगी सरकार लगातार कोरोना के खिलाफ जंग लड़ रही है और हर वह कदम उठा रही है जिससे कोरोना की कमर तोड़ी जा सके।




भारत में कोरोना के दूसरे लहर कहर जारी है। भारत मे कोरोना केसों में दुनियाँ का 40 फीसदी केस हर दिन दर्ज होता है।

ताजा आंकड़ों के अनुसार, पिछले 24 घंटों में रिकॉर्ड 3,86,452 नए कोरोना केस आए 3498 संक्रमितों की जान चली गई है। हालांकि 24 घंटे में 2,97,540 लोग कोरोना से ठीक भी हुए हैं।

 ताजा आंकड़ों के अनुसार, पिछले 24 घंटों में रिकॉर्ड  3,86,452 नए कोरोना केस आए
 3498 संक्रमितों की जान चली गई है। हालांकि 24 घंटे में 2,97,540 लोग कोरोना से ठीक भी हुए हैं।
इससे पहले बुधवार को देश में 379,257 नए केस आए थे

जानिए देश में कोरोना के ताजा हालात
कुल कोरोना केस- एक करोड़ 87 लाख 62 हजार 976
कुल डिस्चार्ज- एक करोड़ 53 लाख 84 हजार 418
कुल एक्टिव केस- 31 लाख 70 हजार 228
कुल मौत- 2 लाख 8 हजार 330
कुल टीकाकरण- 15 करोड़ 22 लाख 45 हजार 179 डोज दी गई
दिल्ली में 1 दिन में सबसे अधिक मौतों का रिकॉर्ड
दिल्ली में कोरोना से होने वाली मौतों में लगातार इजाफा हो रहा है।
गुरुवार को दिल्ली में कोरोना से 395 व्यक्तियों की मौत हुई है।
कोरोना के कारण होने वाली मौतों का यह एक नया रिकॉर्ड है।
.दिल्ली में इससे पहले 1 दिन में इतनी बड़ी संख्या में कोरोना रोगियों की मौत नहीं हुई है।

जहां दिल्ली में कोरोना से 395 कोरोना मरीजों की मौत हुई वहीं, 24235 नए कोरोना मरीज सामने आए हैं।
24 घंटे के दौरान 73,851 कोरोना टेस्ट किए गए थे इनमें से 32.82 फीसदी व्यक्ति कोरोना पॉजिटिव पाए गए। इन्हीं 24 घंटों के दौरान दिल्ली में 25,615 कोरोना रोगी स्वस्थ भी हुए हैं।

अब तक 15 करोड़ से जड्यादा कोरोना टीके लगाए गए
देश में 16 जनवरी से कोरोना का टीका लगाए जाने के अभियान की शुरुआत हुई थी।
29 अप्रैल तक देशभर में 15 करोड़ 22 लाख 45 हजार 179 कोरोना डोज दिए जा चुके हैं।
.बीते दिन 22 लाख 24 हजार 548 टीके लगे। वैक्सीन की दूसरी खुराक देने का अभियान 13 फरवरी से शुरू हुआ था।
 1 अप्रैल से 45 साल से ऊपर से सभी लोगों को टीका लगाया जा रहा है। अब 1 मई से 18 से ऊपर के लोगों को भी टीका लगाया जाएगा।
देश में कोरोना से मृत्यु दर 1.11 फीसदी है जबकि रिकवरी रेट करीब 82 फीसदी है। एक्टिव केस बढ़कर 17 फीसदी हो गए। कोरोना एक्टिव केस मामले में दुनिया में भारत का दूसरा स्थान है। कुल संक्रमितों की संख्या के मामले में भी भारत का दूसरा स्थान है। जबकि दुनिया में अमेरिका, ब्राजील, मैक्सिको के बाद सबसे ज्यादा मौत भारत में हुई है।


कई राज्यों में बदल गए लॉकडाउन के नियम, महाराष्ट्र में 15 मई तक मिनी लॉकडाउन

बिहार में तो शाम ४ बजे ही दुकानों को बंद करने का आदेश है।

नई दिल्ली: देश में  तेजी बढ़ रहे कोरोना केस के कारण कई राज्यों ने अपने यहां कई कड़े प्रतिबंध लगा दिए है। यूपी, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु सहित कई राज्यों ने लोगों की सुरक्षा के लिए लॉकडाउन और नाइट कर्फ्यू के लिए नई गाइडलाइंस जारी किए हैं। आइए जानते हैं किस राज्य में क्या प्रतिबंध लगाया है। वहीं महाराष्ट्र सरकार ने अगले 15 दिन के लिए राज्य में मिनी लॉकडाउन लगा दिया है।


यूपी में लॉकडाउन की सीमा बढ़ाई गई

यूपी में कोरोना संक्रमण की रफ्तार को देखते हुए वीकेंड लॉकडाउन में एक दिन का इजाफा कर दिया गया है। अब यहां शुक्रवार रात 8 बजे से मंगलवार सुबह 7 बजे तक लॉकडाउन रहेगा। इससे पहले शनिवार और रविवार को लॉकडाउन लागू रहता था जबकि नई गाइडलाइंस के अनुसार, अब सोमवार को भी लॉकडाउन जारी रहेगा। 

इस दौरान सिर्फ जरूरी सेवाओं जैसे मेडिकल शॉप, क्लीनिक, अस्पताल, दूध और सब्जी की दुकानों को ही इजाजत रहेगी। इसके अलावा यूपी के सभी जिलों में रात 8 बजे से सुबह 7 बजे का नाइट कर्फ्यू भी लागू है। बता दें कि यूपी में कोरोना की पॉजिविटी रेट लगभग 30 फीसद हो चुकी है। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने प्रदेश के बड़े शहरों 14 दिन लॉकडाउन लगाने की मांग की थी।

बिहार में लॉकडाउन के नियम


बिहार में नीतीश सरकार ने बुधवार को कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच नई गाइडलाइंस जारी की हैं। इसके अनुसार, शाम के 6 बजे से सुबह के 6 बजे तक नाइट कर्फ्यू रहेगा। इस दौरान पूरे राज्य में धारा 144 लगाने का फैसला किया गया है। इसके साथ ही शादी समारोह में भी अब अधिकतम 50 लोग ही शामिल हो सकेंगे वहीं अंतिम संस्कार में अधिकतम 20 लोग ही शामिल हो सकेंगे। 

नई गाइडलाइंस के मुताबिक शाम 4 बजे तक ही दुकानें खुलेगी। दवा और दूध की दुकानें खुली रहेंगी। औद्योगिक प्रतिष्ठान में निर्माण कार्य जारी रहेंगे। ई-कॉमर्स से जुड़ी सारी गतिविधियां जारी रहेंगी। स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े सभी प्रतिष्ठान और गतिविधियां भी जारी रहेगी। ठेले पर फल और सब्जी घूम-घूम कर बेचने की अनुमति है। कृषि और इससे जुड़े कार्य जारी रहेंगे। रेस्तरां और होटल या खाने की दुकान पर रात 9 बजे तक ही खाना घर ले जाने की अनुमति है।

राजस्थान में शाम 6 बजे से सुबह 5 बजे तक वीकेंड कर्फ्यू

राजस्थान में पिछले हफ्ते से एक बार फिर गहलोत सरकार ने वीकेंड कर्फ्यू की घोषणा कर दी है। इसके तहत शुक्रवार शाम 6 बजे से लेकर सोमवार सुबह 5 बजे तक पूर्ण रूप से वीकेंड कर्फ्यू लागू रहेगा। यह आदेश 25 अप्रैल सुबह 5 बजे से लागू हुए हैं। इस दौरान बाजार शनिवार-रविवार पूर्णतया बंद रहेंगे। सरकार की ओर से जारी नई गाइडलाइन में बहुत सी नई पाबंदियों को भी जोड़ा है। 

आदेश के अनुसार सभी खाद्य पदर्थों और किराने के सामान, आटा चक्की, पशुचारे से संबंधित दुकानें सोमवार से शुक्रवार सुबह 6 बजे से 11 बजे तक खुलेंगी। वहीं कृषि आदान विक्रेताओं की दुकानें सोमवार और गुरुवार को सुबह 6 बजे से 11 बजे तक खुलेंगे। डेयरी व दूध की दुकानें रोजाना सुबह 6 बजे से 11 बजे और शाम को 5 बजे से 7 बजे तक खोली जा सकेंगी। जबकि मण्डियां, फल-सब्जियां, फूल मालाएं और सब्जी व फलों के ठेले रोजाना सुबह 6 बजे से दोपहर 11 बजे तक खुली रहेंगी।


मध्य प्रदेश के भोपाल समेत 5 शहरों में तीन मई तक लॉकडाउन

मध्य प्रदेश में भोपाल समेत छिंदवाड़ा, रतलाम, सागर और जबलपुर में जारी पाबंदियों को बढ़ा दिया है। भोपाल में अब तीन मई तक लॉकडाउन जैसी पाबंदियां लागू रहेंगी। वहीं, छिंदवाड़ा, रतलाम, सागर और जबलपुर में ये प्रतिबंध 1 मई तक के लिए रहेगा। 

गाइडलाइन के अनुसार अनिवार्य सेवाओं को छोड़कर सभी सरकारी और निजी कार्यालय 10 प्रतिशत कर्मचारियों के साथ ही संचालित होंगे। सामाजिक, राजनैतिक, खेलकूद, मनोरंजन, शैक्षणिक, सांस्कृतिक, सार्वजनिक तथा धार्मिक कार्यक्रमों के आयोजनों के लिए लोगों का एकत्रित होना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।


भारत की मदद के बहाने आपदा में ‘अवसर’ खोज रहा चीन

कोरोना का तोहफा देने वाले चीन अब भारत की हर संभव मदद करने की बात कह रहा है।

बीजिंग/नई दिल्ली: कोरोना वायरस की उत्तपत्ति करने वाला और पूरी दुनिया को धोखे में रखने वाला चीन अब कोरोना के खिलाफ लड़ाई में भारत की मदद करना चाह रहा है। यह मदद है या फिर आपदा को अवसर में बदलने की तरकीब यह तो आने वाला समय ही बताएगा।


दरअसल, चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने गुरुवार को वादा किया कि कोविड-19 के बढ़ते मामलों के खिलाफ भारत की लड़ाई में उनका देश हर संभव मदद करेगा। उन्होंने कहा कि चीन महामारी के खिलाफ उपयोग होने वाली वस्तुओं को तेजी से भारत पहुंचा रहा है। विदेश मंत्री एस जयशंकर को लिखे पत्र में वांग ने कहा, 'चीनी पक्ष, भारत जिन चुनौतियों का सामना कर रहा है, उनके प्रति संवेदना रखता है और गहरी सहानुभूति प्रकट करता है।


भारत में चीन के राजदूत सुन वेइदोंग ने इस पत्र को ट्विटर पर साझा किया जिसमें लिखा है, 'कोरोना वायरस मानवता का साझा दुश्मन है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को एकजुट होकर और समन्वयित होकर इसका मुकाबला करने की जरूरत है। चीनी पक्ष भारत सरकार और वहां के लोगों का, महामारी से लड़ाई में समर्थन करता है।


वांग ने कहा कि चीन में उत्पादित महामारी रोधी वस्तुएं तेजी से भारत में भेजी जा रही हैं ताकि भारत की इस महामारी में मदद की जा सके। उन्होंने कहा, 'चीनी पक्ष भारत की जरूरत के अनुरूप यथासंभव समर्थन और मदद पहुंचाना जारी रखेगा। हमें उम्मीद और भरोसा है कि भारत सरकार के नेतृत्व के अंतर्गत लोग यथा शीघ्र इस महामारी पर काबू पा लेंगे। वांग का पत्र ऐसे समय आया है जब दोनों देशों की सेनाओं की पूर्वी लद्दाख के बाकी बचे तनाव वाले इलाके से वापसी होनी बाकी है। दोनों देशों की सेना फरवरी में पैगोंग झील के इलाके से पीछे हटी थीं।


भारत आनी थी ऑक्सीजन डिवाइस,चीन ने रोकी फ्लाइट


बताते चलें कि चीन की सिचुआन एयरलाइंस ने भारत आने वाली सभी कार्गो फ्लाइट पर अगले 15 दिन के लिए रोक लगा दी है। इन कार्गो फ्लाइट के द्वारा भारत की कई निजी कंपनियां चीन से ऑक्सीजन कान्सेंट्रेटर और कई अन्य जरूरी मेडिकल डिवाइस मंगाने वाली थीं।  सिचुआन एयरलाइंस से जुड़ी कंपनी सिचुआन चुआनहांग लाॅजिस्टिक कंपनी ने कहा है एयरलाइंस ने कुल छह रूट पर अपने कार्गो फ्लाट निलंबित किए हैं। यह चीन की एक सरकारी विमान कंपनी है। इसकी वजह से निजी क्षेत्र द्वारा चीन से कोविड संबंधी मेडिकल सप्लाई मंगाने में काफी अड़चन आएगी। देश में बड़े पैमाने पर ऑक्सीजन की कमी को देखते हुए व्यापारियों ने ऑक्सीजन कान्सेंट्रेटर चीन से आयात करने का निर्णय लिया था।


बहरहाल, अब चीन किस तरह से भारत की मदद करता है यह तो आने वाला समय ही बताएगा। लेकिन जिस तरह से उसने कोरोना वायरस के बारे में दुनिया को अंधेरे में रखा और फिर कोरोना के खिलाफ जंग में लगातार दूसरों की टांगे खीचता रहा वह भारत के लिए किस तरह के ‘संभव’ वाली मदद करेगा यह देखना बाकी है।


चारा घोटाला : CBI कोर्ट ने लालू यादव की रिहाई का जारी किया आदेश

लालू यादव का इलाज फिलहाल एम्स में चल रहा है।

रांची: बिहार के पूर्व सीएम और बहुचर्चित चारा घोटाले के मामले में सजा का रहे लालू प्रसाद यादव को राहत देते हुए उनकी रिहाई का आदेश जारी कर दिया है। रिहाई का आदेश सीबीआई कोर्ट द्वारा लालू की ओर से 10 लाख रुपये जुर्माना राशि कोर्ट में जमा करने के बाद अदालत ने रिलीज आर्डर जारी किया है।


लालू यादव के लिए बेलर के तौर पर निशिकांत और राजू गोप कोर्ट में उपस्थित रहें। लालू यादव चारा घोटाले में सजायाफ्ता थें और उनकी तबियत खराब हो जाने के बाद उन्हें दिल्ली स्थित एम्स में भर्ती कराया गया था। हालांकि, अभी भी लालू यादव एम्स में ही इलाज कराएंगे बस अब वह जेल कस्टडी से बाहर हो जाएंगे। इस बात की जानकारी उनके बेटे तेजस्वी यादव द्वारा पहले की दी जा चुकी है। एम्स में वो फिलहाल बिरसा मुंडा जेल के कस्टडी में इलाज करवा रहे हैं।


मुश्किल से भरा गया बेल बॉंड


लालू यादव के वकील प्रभात कुमार ने बताया कि चाह कर भी हम लोग बेल बांड नहीं भर पा रहे थे। कल शाम को हमें बार काउंसिल ऑफ इंडिया की तरफ एक पत्र आया, जिसमें कहा गया कि जिनका बेल हो गया है, उनका बेल बांड अधिवक्ता भर सकते हैं। इसी निर्देश के आलोक में हमने बेल बांड भरा, जिसे न्यायालय ने स्वीकार कर लिया। अब रिलीज ऑर्डर जेल पदाधिकारियों के पास चली जाएगी।


17 अप्रैल को दे दी गई थी जमानत


चारा घोटाला मामले में दोषी आरजेडी सुप्रीमो को झारखंड हाई कोर्ट ने इसी महीने की 17 तारीख को सशर्त जमानत दी है। बता दें कि जस्टिस अपरेश सिंह की अदालत ने जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए सजा की आधी अवधि पूरी करने के आधार पर लालू प्रसाद यादव को दुमका कोषागार से अवैध निकासी के मामले में जमानत प्रदान की है।


गौरतलब है कि चाईबासा और देवघर कोषागार से अवैध निकासी मामले में पूर्व में ही लालू प्रसाद यादव को जमानत मिल चुकी है। लालू यादव को कोर्ट ने कई शर्तों के साथ जमानत दी है। इन शर्तों में बिना अनुमति के देश से बाहर ना जाने और अपना पता, मोबाइल नंबर ना बदलने समेत कई शर्तें शामिल हैं।


पूर्व पीएम मनमोहन सिंह ने कोरोना को हराया

एम्स से मनमोहन सिंह को मिली छुट्टी।

नई दिल्ली: कोरोना संक्रमित होने के बाद एम्स में भर्ती कराए गए पूर्व पीएम मनमोहन सिंह को आज अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। उन्होंने कोरोनो का मात दे दी है।

पूर्व पीएम मनमोहन सिंह को 19 अप्रैल को एम्स में भर्ती कराया गया था। उनकी कोरोना वायरस टेस्ट पॉजिटिव आई थी। मनमोहन सिंह को दिल्ली एम्स के ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया था। सिंह को हल्का बुखार था और जांच में उनके कोरोना वायरस से संक्रमित होने की पुष्टि हुई थी जिसके बाद वह चिकित्सकों की निगरानी में थे।

पूर्व प्रधानमंत्री कोरोना के टीके की दोनों खुराक ले चुके हैं बावजूद इसके वह कोरोना की चपेट में आने से नहीं बच सके। पिछले साल नई दवा के कारण रिएक्शन और बुखार होने के बाद उन्हें को एम्स में भर्ती कराया गया था। कई दिनों के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिली थी। 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कोविड-19 से संक्रमित पाए गए पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के जल्द स्वस्थ होने की कामना की थी। उन्होंने ट्वीट कर कहा था, ‘‘अपने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी के उत्तम स्वास्थ्य और जल्द से जल्द उनके ठीक होने की कामना करता हूं।’’ 


कानपुर देहात: जिला अस्पताल से CMO-CMS स्टाफ समेत मिले नदारद, डीएम हैरान, मरीज परेशान

यहां मौके पर ना तो सीएमओ मिले और ना ही सीएमएस। बात दूसरे स्टाफ की करें तो वह भी नदारद ही मिले।

कानपुर देहात: धरती पर डॉक्टर्स को धरती का भगवान कहा जाता है और कोरोना काल में अगर सबसे ज्यादा किसी की जरूरत है तो डॉक्टर्स की। लेकिन कानपुर देहात जिला अस्पताल में तैनात डॉक्टर्स मौज कर रहे हैं। दरअसल, इसका खुलासा तब हो सका जब जिलाधिकारी ने अचानक जिला अस्पताल का निरीक्षण किया। यहां मौके पर ना तो सीएमओ मिले और ना ही सीएमएस। बात दूसरे स्टाफ की करें तो वह भी नदारद ही मिले।

जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह गुरुवार को जिला अस्पताल पहुंचे, जहां उन्होंने वैक्सीनेशन कराया। वहीं जिला अस्पताल की इमरजेंसी में हो रहे इलाज से लेकर स्वास्थ्यकर्मियों एवं डॉक्टरों की उपस्थिति व अस्पताल में स्वास्थ्य सम्बंधी मूलभूत सुविधाओं को लेकर उपस्थित डॉक्टरों से वार्ता कर समस्याएं जानीं। ऑक्सीजन सिलेंडर की समस्या को लेकर जहां चिंता प्रकट की, वही ऑक्सीजन सिलेंडर इतनी जल्दी खाली होने की डॉक्टरों द्वारा दी गई जानकारी पर एसडीएम को भाव्या गैस सर्विस के संचालक से वार्ता कर सिलेंडर में कम गैस की आपूर्ति पर संदेह जताया। ड्यूटी में तैनात महिला डॉक्टर ने जिलाधिकारी को बताया कि सेनीटाइजर मार्क्स हैंड ग्लब्स से लेकर अन्य कई प्रकार की समस्याएं आ रही हैं।

सीएमओ डॉ. राजेश कटियार, सीएमएस डॉ. बीपी सिंह बिना डीएम को अवगत कराए काफी समय से लापता चल रहे हैं। वहीं जिले की स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल है। डीएम ने जब उपस्थित रजिस्टर मांगे तो काफी देर बाद उपलब्ध कराये जा सके। जिसमे कई डॉक्टर कई दिनों से नदारद मिले। कुछ डॉक्टर निरीक्षण के समय तक उपस्थित नहीं हो सके। यही हाल अन्य स्वास्थ्यकर्मियों का रहा। जिला अस्पताल के आधे डॉक्टर एवं स्वास्थ्य कर्मी अनुपस्थित मिले। जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने एसडीएम अकबरपुर राजीव राज को जिला अस्पताल में मूलभूत सुविधाओं की आवश्यकता एवं स्टाफ की उपस्थिति संबंधी सारा विवरण तलब किया है। डीएम ने गैरहाजिर स्टाफ पर कठोर कार्रवाई के संकेत दिए हैं। 

बदहाल स्वास्थ्य विभाग पर जिलाधिकारी का पारा सर चढ़कर बोल रहा था।उन्होंने कहा कि इस मामले में लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ एफआईआर होगी। वही सीएमओ एवं सीएमएस बिना बताए जिले से नदारद हैं। इस मामले में शासन को अवगत कराते हुए उनके खिलाफ भी कठोर कार्रवाई की जाएगी।


पुलवामा हमले में घायल सीआरपीएफ जवान अजय कुमार तिवारी की इलाज के दौरान मौत

गुरुवार को जवान का शव पैतृक गांव बलिया पहुंचते ही लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा।

बलिया। पुलवामा आतंकी हमले में घायल सीआरपीएफ जवान अजय कुमार तिवारी की मौत दिल्ली स्थित पर्क अस्पताल में इलाज के दौरान हो गयी। इसकी सूचना मिलते ही परिजनों सहित इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। गुरुवार को जवान का शव पैतृक गांव बलिया पहुंचते ही लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। लोग अपने लाल की अंतिम झलक पाने को बेताब दिखे।

हल्दी थाना क्षेत्र के बगही गांव निवासी अजय कुमार तिवारी पुत्र स्व. बिंदेश्वरी तिवारी सीआरपीएफ में सब इंस्पेक्टर के पद पर पुलवामा में तैनात थे। 26 नवंबर 2020 को आतंकी हमले में अजय कुमार तिवारी घायल होने के एक सप्ताह बाद कोमा में चले गए थे। उनके ब्रेन का ऑपरेशन पुलवामा में ही किया गया। फिर चिकित्सकों ने उन्हें दिल्ली के लिए रेफर कर दिया, जहां पर्क अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। मंगलवार को इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। जवान का पार्थिव शरीर दिल्ली से हवाई जहाज द्वारा गुरुवार की सुबह वाराणसी पहुंचा। वहां पहड़िया (वाराणसी) स्थित सीआरपीएफ 95 बटालियन के जवान पार्थिव शरीर लेकर सड़क मार्ग से पैतृक गांव पहुंचे।



ग्रामीणों ने अपनी माटी के लाल को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान पत्नी निशा, पुत्री अंजली, पुत्र मोहित व अंकुश का रोते-रोते बुरा हाल था। जवान का अंतिम संस्कार गंगा नदी के हुकुम छपरा घाट पर किया गया, जहां सीआरपीएफ जवानों ने अपने साथी को गार्ड आफ ऑनर देकर अंतिम विदाई दी। इस मौके पर सीआरपीएफ के असिस्टेंट कमांडेंट ज्ञानरंजन, एसआई बीके शर्मा, हवलदार अभिमन्यु व राकेश कुमार, पूर्व ग्राम प्रधान संजय कुमार ओझा, समाजसेवी नितेश कुमार सिंह, अवधेश मिश्रा, मुन्ना मिश्रा, गोपाल जी गुप्ता, विजय तिवारी समेत सैकड़ों लोग मौजूद रहे।



बेटे को सीने से लगाने की कोशिश करने लगी बूढ़ी मां

95 वर्षीय बूढ़ी मां कौशल्या को जैसे ही पता चला कि उनके जिगर का टुकड़ा अजय अब दुनिया में नहीं रहा, वह टूट गई। उन्हें काठ मार गया। दरवाजे पर रखे बेटे के शव के पास पहुंची बूढ़ी मां उसे सीने से लगाने की कोशिश करने लगी। मां का यह ममत्व देख, वहां उपस्थित हर किसी की आंखों का कोर भींग गया और जुबां से सिर्फ यही आवाज निकली की मां तो मां होती है।विधाता तूने क्या किया।

बताया जा रहा है कि अजय पूरे परिवार के साथ फरवरी 2020 में पैतृक गांव बगही में अपने भतीजे के शादी में आए थे। शादी के बाद अजय मां कौशल्या से कह कर गए थे कि अगली बार आऊंगा तो बेटे मोहित का यज्ञोपवीत संस्कार करूंगा, लेकिन विधाता को कुछ और ही मंजूर था। पत्नी निशा तिवारी एवं बेटी अंजलि तिवारी का तो रोते-रोते बुरा हाल है। बड़े भाई विजय व कृष्ण कुमार को तो काठ सा मार गया है।



कोरोना से जंग: आर्मी चीफ ने PM मोदी से की मुलाकात

सेना द्वारा किए जा रहे कार्यों की दी जानकारी

by News9India

नई दिल्ली: पूरी दुनिया लिए दहसत का पर्याय बन चुके कोरोना के खिलाफ लड़ाई जारी है। खासकर दूसरे लहर के बीच कोरोना अपने पीक पर है और उसे हराने के लिए हर तरह के इंतजाम किए जा रहे हैं। अब कोरोना के खिलाफ लड़ाई में देश की सेनाएं भी जुट गई हैं। ताजा मामले में भारतीय सेना के प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने आज पीएम मोदी से मुलाकात की और सेना द्वारा कोरोना के खिलाफ लड़ी जा रही जंग में किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी और भविष्य की प्लानिंग के बारे में भी चर्चा की। । ये जानकारी प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से दी गई है। 

जनरल नरवणे ने प्रधानमंत्री मोदी को बताया कि सेना जहां संभव हो रहा है वहां अपने अस्पतालों को आम लोगों के लिए खोल रही है, आम नागरिक नकदीकी सैन्य अस्पताल जा सकते हैं। सेना कोविड के मामलों से निपटने के लिए देश के विभिन्न हिस्सों में अस्थायी अस्पताल बना रही है। सेना प्रमुख ने प्रधानमंत्री को इस बात से भी अवगत कराया कि आयात किए गए ऑक्सीजन टैंकरों और गाड़ियों के प्रबंधन में जहां विशेषज्ञ कौशल की जरूरत पड़ रही है। वहां सेना की ओर से मदद पहुंचाई जा रही है।

वायु सेना प्रमुख भी कर चुके हैं पीएम मोदी से मुलाकात

पीएम मोदी से एक दिन पहले ही वायुसेना प्रमुख आरकेएस भदौरिया ने मुलाकात की थी और वायु सेना द्वारा कोरोना वायरस के खिलाफ किए जा कार्यों की पूरी जानकारी दी थी। पीएम मोदी और वायु सेना प्रमुख के बीच हुई मुलाकात में ऑक्सीजन टैंकरों और अन्य आवश्यक उपकरणों के परिवहन में सुरक्षा का ध्यान रखते हुए तेजी लाने पर बल दिया गया। वायुसेना प्रमुख आरकेएस भदौरिया ने पीएम मोदी से मुलाकात की और देश में कोविड-19 की ताजा स्थिति में सुधार के लिए वायु सेना द्वारा किए जा रहे प्रयासों से उन्हें अवगत कराया।

पीएम मोदी ने ट्वीट कर कहा, "कोरोना से मुकाबले के लिए भारतीय वायु सेना द्वारा किए जा रहे प्रयासों का जायजा लिया। वायु सेना, जो देशभर में कई नागरिकों की मदद कर रहा है, कोविड से राहत कार्यों के विभिन्न पहलुओं पर ध्यान केद्रित कर रहा है।"

बयान के मुताबिक, "एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया ने बताया कि वायुसेना सभी क्षेत्रों को कवर करने के लिए बड़े के साथ-साथ मध्यम आकार के विमानों की तैनाती कर रहा है। प्रधानमंत्री ने ऑक्सीजन टैंकरों और अन्य आवश्यक वस्तुओं के परिवहन संचालन की गति तेज करने, उसका स्तर बढ़ाने और उसकी सुरक्षा पर ध्यान देने की आवश्यकता पर बल दिया।"


देश मे कोरोना का विस्फोट जारी। दूसरी लहर में 24 घंटे में रिकॉर्ड 3645 मरीजों की मौत!

भारत में कोरोना की दूसरी लहर का क़हर हर दिन तेज।

भारत में कोरोना की दूसरी लहर का क़हर हर दिन तेज।
 हर दिन कोरोना संक्रमण के मामले और मौत की संख्या रिकॉर्ड बढ़ोतरी हो रही है स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, पिछले 24 घंटों में 379,257 नए कोरोना केस आए और 3645 संक्रमितों की जान चली गई है।
 हालांकि, इस दौरान 2,69,507 लोग कोरोना से ठीक भी हुए। इससे पहले मंगलवार को देश में 360,960 नए केस आए थे।
 इस साल 1 फरवरी को कोरोना के मामले घटकर 8,635 नए कोरोना केस दर्ज किए गए थे।
 एक दिन में कोरोना मामलों की ये संख्या इस साल सबसे कम थी। लेकिन दूसरी लहर ने तोड़े सारे रिकॉर्ड।
जानिए देश में आज कोरोना की ताजा स्थिति क्या है---
कुल कोरोना केस- एक करोड़ 83 लाख 76 हजार 524
कुल डिस्चार्ज- एक करोड़ 50 लाख 86 हजार 878
कुल एक्टिव केस- 30 लाख 84 हजार 814
कुल मौत- 2 लाख 4 हजार 832
कुल टीकाकरण- 15 करोड़ 20 हजार 648 डोज दी गई
महाराष्ट्र में कल 985 लोगों की मौत
महाराष्ट्र में कल कोविड के 63,309 नए मामले आए और संक्रमण से 985 और लोगों की मौत हो गयी. नए मामलों के साथ राज्य में संक्रमितों की संख्या 44,73,394 और मृतक संख्या 67,214 हो गयी है.
पिछले 24 घंटो में राजधानी दिल्ली में बेक़ाबू कोरोना लॉक डाउन के बावज़ूद लॉक नहीं हो रहा है। 
बुधवार को देर रात आंकड़े में बताया गया कि  24 घंटे के अंदर दिल्ली में कोरोना संक्रमण से 368 मौत हुई है और संक्रमण के 25,986 नए मामले सामने आए हैं। 
दिल्ली सरकार के आंकड़ों के मुताबिक नए मामले सामने आने के बाद दिल्ली में सक्रिय मरीजों की संख्या बढ़कर 99752 हो गई है और 53,819 मरीजों का इलाज घर में आइसोलेशन में किया जा रहा है।
 24 घंटे के अंदर दिल्ली की संक्रमण की दर 31.76 फीसद रही है।
दिल्ली सरकार की रिपोर्ट के मुताबिक बुधवार को दिल्ली में कुल 81,829 जांच की गई थी। इस समय दिल्ली के अस्पालत में 19,243, कोविड केयर सेंटर में 544 और कोविड हेल्थ सेंटर में 160 मरीज भर्ती है। नए मामले आने के बाद दिल्ली में अब सील क्षेत्रों की संख्या बढ़कर 33,749 हो गई है। इन 24 घंटे में 20,458 मरीज ठीक होकर वापस अपने घरों को लौटे हैं।


1 मई से 18+उम्र का वैक्सीनेशन, पहले दिन 1.32 करोड़ ने कराया रेजिस्ट्रेशन!

1 मई से 18+उम्र का वैक्सीनेशन, पहले दिन 1.32 करोड़ ने कराया रेजिस्ट्रेशन!


बुधवार 28 अप्रैल से 18 साल से 44 साल के लोगों को भी कोरोना वैक्सीन लगाने के लिए रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया  शुरू हो चुकी है।
टीकाकरण के लिए पहले दिन ही 1.32 करोड़ लोगों ने रजिस्ट्रेशन करा लिया है। लेकिन जिन लोगों ने रजिस्ट्रेशन करा लिया है, उन्हें अभी अपॉइंटमेंट नहीं मिली है। यानी कि उन्हें अभी वैक्सीनेशन की तारीख और टाइम स्लॉट के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है।
18+ वालों के वैक्सीनेशन के लिए कोविन और आरोग्य सेतु एप के अलावा कोविन पोर्टल पर भी रजिस्ट्रेशन हो रहा है।
लेकिन लोगों का आरोप है कोविन एप पर रजिस्ट्रेशन के दौरान उन्हें कई परेशानी भी हुई हैं।
 इसके अलावा कोविन पोर्टल पर भी काफी दिक्कतों की शिकायत मिलती रही।. कुछ लोगों को ओटीपी के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा।
 इन समस्याओं को लेकर सोशल मीडिया पर कई हैशटैग ट्रेंड होते रहे।
लोगों ने स्क्रीनशॉट भी शेयर किए. कुछ यूजर्स को ये भी मैसेज मिला कि अभी सिर्फ 45+ लोगों का ही रजिस्ट्रेशन हो रहा है।
वेबसाइट और एप में दिक्कत की शिकायत के बाद आरोग्य सेतु ने ट्वीट कर कहा है कि कोविन पोर्टल अब ठीक से काम कर रहा है।
 शाम के चार बजे मामूली दिक्कत आई थी. 18 साल से अधिक उम्र के लोग रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं।

एक मई से कोविन पोर्टल पर दिखेंगी टीके की कीमतें
इस समय देश में कोरोना की दो वैक्सीन भारत बायोटेक की कोवैक्सीन और सीरम इंस्टीट्यूट की कोविशील्ड उपलब्ध है।
.एक मई से नागरिकों के लिए कोरोना वायरस रोधी टीकों के प्रकार और उनकी कीमतें कोविन पोर्टल पर दिखाई जाएंगी।
18 से 44 उम्र के लोग किसी भी निजी कोविड टीकाकरण केंद्र (सीवीसी) से पैसे देकर टीका लगवा सकेंगे. 45 साल से कम आयु के नागरिक राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में किसी भी सरकारी सीवीसी से टीका लगवा सकेंगे।


पश्चिम बंगाल में आठवें और अंतिम चरण का मतदान शुरू हो गया है। अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती ने डाला वोट।

पश्चिम बंगाल में आज 35 विधानसभा सीटों के लिए लोट डाले जा रहे हैं। लोग सुबह से ही लंबी कतार में खड़े नजर आए।

 
विधानसभा चुनाव के अंतिम चरण के लिए अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती ने उत्तर कोलकाता के काशीपुर-बेलगछिया के एक मतदान केंद्र पर वोट डाला। उन्होंने कहा, ''इससे पहले इतना शांतिपूर्ण मतदान मैंने नहीं देखा. सुरक्षा के बहुत अच्छे प्रबंध हैं, इसके लिए बधाई देता हूं.''
 इस चरण में टीएमसी और वाम-कांग्रेस गठबंधन के बीच टक्कर होती दिख रही है।  क्या इसका फायदा BJP को होगा इस पर सबकी नजर है।
दरअसल इन सीटों पर मुस्लिम आबादी ज्यादा है और इस वजह से राजनीतिक दलों की निगाहें अल्पसंख्यक वोट पर टिकी हैं।
आज जिन 35 सीटों पर मतदान होगा उसमें मालदा की 6, बीरभूम की 11, मुर्शिदाबाद की 11 और कोलकाता नॉर्थ की 7 सीट हैं। मालदा और मुर्शिदाबाद की कुछ सीटों पर पिछले चरण में मतदान हो भी चुका है। 
पिछले चुनाव में भी इन सीटों पर टीएमसी और कांग्रेस का ही वर्चस्व था। टीएमसी के खाते में 17 तो कांग्रेस के खाते में 13 सीटें आई थीं। 
हालांकि लोकसभा चुनाव के दौरान इन सीटों पर भाजपा ने कांग्रेस को पीछे छोड़ दिया था। मालदा और मुर्शिदाबाद में मुसलमान कांग्रेस का समर्थन ज्यादा करते हैं।
इस चरण में तृणमूल के दो मंत्री शशि पांजा और साधन पांडेय श्यामपुकुर और मानिकताला सीट से प्रत्याशी हैं। मालदा और मुर्शिदाबाद की 17 सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबला हो सकता है। इस चरण में 84 लाख मतदाता हैं और 283 उम्मीदवार मैदान में हैं। 11860 मतदान केंद्र बनाए गए हैं और केंद्रीय बलों की 641 कंपनियों को तैनात किया गया है।
भाजपा नेता ने टीएमसी के कार्यकर्ताओं पर लगाए आरोप
पश्चिम बंगाल: मालदा से भाजपा उम्मीदवार गोपाल चंद्र साहा ने वोट डाला। उन्होंने कहा, ''यहां उम्मीदवार भी सुरक्षित नहीं हैं। TMC के गुंडों ने बहुत से भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या की है। कुछ मतदान केंद्र में हमारे मतदान एजेंट को घुसने नहीं दिया जा रहा है।'' बता दें कि पश्चिम बंगाल में पहले के चरणों में हिंसा भी हो चुकी है। पांचवें चरण के दौरान चार लोंगों की मौत हो गई थी


महाराष्ट्र में बेकाबू कोरोना से टूटा 24 घंटे में मौत के सारे रिकॉर्ड! पिछले 24 घंटे में आए कोरोना के 63,309 नए केस। मिनी लॉकडाउन 15 दिन बढ़ना तय।

भारत मे कोरोना की सुनामी की सबसे ज़्यादा मार झेलने वाले प राज्य महाराष्ट्र में कोविड 19 के नए मामलों में बेतहाशा बढ़ोतरी कम होने का नाम नहीं ले रहा।

भारत मे कोरोना की सुनामी की सबसे ज़्यादा मार झेलने वाले प
राज्य महाराष्ट्र में कोविड 19 के नए मामलों में बेतहाशा बढ़ोतरी कम होने का नाम नहीं ले रहा।
पिछले 24 घंटे में 63,309 लोग कोरोना से संक्रमित हुए हैं। 
अबतक राज्य में कुल 44,73,394 लोग कोरोना की चपेट में आए हैं।
राज्य में पिछले 24 घंटे में 985 मरीजों की मौत हुई है। ये एक दिन में कोरोना से जान गंवाने वाले लोगों का सबसे बड़ा आंकड़ा है।
 इसी के साथ मृतकों की संख्या राज्य में 67214 हो गई है। राज्य में मंगलवार को 66 हजार 358 नए केस आए थे और 895 मरीजों की मौत हुई थी। सोमवार को 48,700 नए मामलों की पुष्टि हुई थी और 524 मरीजों की मौत हुई थी।
महाराष्ट्र में 18 अप्रैल को सर्वाधिक 68,631 मामले आए थे।
लेकिन मिनी लॉकडाउन के बावज़ूद हालात नहीं सुधरे।


कोरोना के नए मामलों में बेतहाशा बढ़ोतरी को देखते हुए उद्धव ठाकरे की महाराष्ट्र में 30 अप्रैल के बाद भी 15 दिनों के लिए लॉकडाउन जैसे प्रतिबंधों को बढ़ाने का एलान कल कर सकती है।


Covid Vaccination: 18+ उम्र के लोगों के लिए वैक्सीनेशन के लिए रजिस्ट्रेशन कराने में मशक्कत!

सर्वर पर लोड बढ़ने से कई बार हुआ क्रैश, ज्यादातर यूजर्स को रेजिस्ट्रेशन में हो रही दिक्कत.

by राजन सिंह

नई दिल्ली: आज शाम 4 बजे से 18 साल से ऊपर के लोगों के वैक्सीनेशन के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया जैसे ही शुरू हुई, कोविन का सर्वर डाउन हो गया। कोवि प्लेटफॉर्म या आरोग्य सेतु ऐप के जरिए रजिस्ट्रेशन में लोगों को बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

रजिस्ट्रेशन शुरू, अचानक लोड बढ़ने से कोविन का सर्वर डाउन
वक़्त नहीं है? 18 से 44 उम्र वालों के रजिस्ट्रेशन शुरू होते ही इन प्लेटफॉर्म्स पर अचानक इतना लोड बढ़ गया है कि सर्वर काम नहीं कर रहा। ज्यादातर यूजर्स के पास यह संदेश आ रहा है कि कोविन सर्वर दिक्कतों का सामना कर रहा है। कृपया थोड़ी देर बाद कोशिश करें। इस बीच कुछ लोग रजिस्ट्रेशन कराने में सफल हुए। कई यूजर्स तो आरोग्य सेतु ऐप के न खुलने की शिकायत कर रहे हैं। उन्हें एरर का मेसेज आ रहा है। एक साथ बड़ी संख्या में लोग रजिस्ट्रेशन के लिए कोशिश कर रहे हैं और सर्वर इतना लोड नहीं उठा पा रहा है। 18 साल से 44 साल के लोग भी 1 मई से कोरोना से बचाव की वैक्सीन लगवा सकते हैं लेकिन उसके लिए पहले से ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है। 
दावा- कुछ देर के लिए थी तकनीकी दिक्कत, अब दूर हो गई। आरोग्य सेतु के ऑफिशल ट्विटर हैंडल से ट्वीट कर बताया गया है कि कोविन पोर्टल काम कर रहा है। 4 बजे एक छोटी सी गड़बड़ी आई थी जिसे दूर कर लिया गया है। 18 साल से ऊपर के लोग रजिस्टर कर सकते हैं। 18 साल से ज्यादा उम्र वाले आज से करा सकते हैं।

रजिस्ट्रेशन हो रहा, लेकिन नहीं मिल रहा स्लॉट
जिन लोगों का रजिस्ट्रेशन हो भी रहा है, उन्हें वैक्सीनेशन का टाइम स्लॉट अलॉट नहीं हो रहा। अपॉइंटमेंट के लिए उन्हें कुछ देर बार फिर से चेक करने का मेसेज आ रहा है। अब आरोग्य सेतु ऐप के ऑफिशल ट्विटर हैंडल से इसे लेकर तस्वीर साफ की गई है। ट्वीट में बताया गया है कि 18 साल से ऊपर के लोगों को वैक्सीनेशन का अपॉइंटमेंट तभी संभव होगा जब राज्य सरकारें और प्राइवेट वैक्सीनेशन सेंटर वैक्सीनेशन सेशंस शुरू करेंगी।

रजिस्ट्रेशन कराने के लिए 18 से 44 साल तक की आयु के लोगों के लिए कोविड-19 टीका लगवाने का समय लेना अनिवार्य होगा क्योंकि शुरुआत में सीधे आकर टीका लगवाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। हालांकि, 45 साल से अधिक आयु के लोग अब भी मौके पर पंजीकरण कराकर टीका लगवा सकते हैं। 18 से 44 वर्ष की उम्र वर्ग के लोग किसी भी निजी कोविड टीकाकरण केंद्र (सीवीसी) से भी पैसे देकर टीका लगवा सकेंगे।


सीरम इंस्टीट्यूट ने घटाई कोरोना वैक्सीन की कीमत, जानें; क्या होंगी नई कीमतें

Covishield price for states reduced to INR 300 per dose, says Adar Poonawalla

by राजन सिंह

नई दिल्ली: दुनिया की सबसे बड़ी वैक्सीन निर्माता कंपनियों में से एक सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने वैक्सीन की कीमतों को घटाने का ऐलान किया है. कंपनी के सीईओ अदार पूनावाला ने कहा कि उन्होंने राज्यों के लिए तय की गई कीमत 400 रुपये से घटाकर 300 रुपये कर दी है. ताकि अधिक से अधिक लोगों को वैक्सीन का लाभ मिल सके. उन्होंने खुद ट्वीट कर ये जानकारी दी. 

अदार पूनावाला का ट्वीट
अदार पूरानाला ने ट्विटर पर लिखा, 'सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की तरफ से परोपकार की भावना के तहत मैं राज्यों के लिए तय की गई वैक्सीन की कीमत 400 रुपये प्रति डोज से घटाकर 300 रुपये प्रति डोज कर रहा हूं. कीमतों में बदलाव तुरंत लागू हो गई हैं. इससे राज्य सरकारों के फंड के सैड़कों करोड़ रुपये बचेंगे, जिससे और भी अधिक लोगों तक वैक्सीन पहुंचाई जा सकेगी, साथ ही अनगिनत जिंदगियों को भी बचाया जा सकेगा.'

सरकार ने की थी दाम करने करने की गुजारिश
पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) ने अपने कोविड-19 टीके 'कोविशिल्ड' की राज्य सरकारों के लिए कीमत 400 रुपये प्रति खुराक घोषित की थी और निजी अस्पतालों के लिए 600 रुपये प्रति खुराक घोषित की है. दोनों टीके 150 रुपये प्रति खुराक की दर से केंद्र सरकार को उपलब्ध हैं. जिसके बाद केंद्र सरकार ने वैक्सीन बनाने वाली सभी कंपनियों से दामों में कमीं करने की अपील की थी. इसके बाद ही अदार पूनावाला ने काम करने की घोषणा की है.


क्‍या श‍िवराज सरकार झूठ बोल रही है या फिर शहर के मुख्य श्मशान घाट के आंकड़े? जानें क्‍या है सच्‍चाई

मध्‍य प्रदेश की राजधानी भोपाल में लगातार कोरोना से मौत का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है. सरकार इन आंकड़ों को ना के बराबर बता रही है, लेकिन दूसरी तरफ शहर के मुख्य श्मशान घाट और कब्रिस्तान के आंकड़ों पर यकीन करें तो तस्वीर अलग ही सामने आ रही है. क्या सरकार मौत के आंकड़ों को छुपाने का काम कर रही है या तो सरकार झूठ बोल रही है या फिर शहर के मुख्य श्मशान घाट के आंकड़े.

21 अप्रैल को 138 शवों का कोरोना प्रोटोकॉल के तहत अंतिम संस्कार हुआ. भदभदा विश्राम घाट में 92 और सुभाष विश्राम घाट में 33 शवों का अंतिम संस्कार हुआ. झदा कब्रिस्तान में 13 शवों को दफनाया गया. सरकारी आंकड़ों में कोरोना से 5 की मौत बताई गई है. 20 अप्रैल को 148 शवों का कोरोना प्रोटोकॉल के तहत अंतिम संस्कार हुआ था.

यह आंकड़ा रोजाना शहर में कोरोना से मौत होने वाले शवों के अंतिम संस्कार के लिए तय किए गए. भदभदा, सुभाष विश्राम घाट और झदा कब्रिस्तान से आ रहे हैं. इस तरह बढ़ रहा मौत का ग्राफ



-15 अप्रैल को 112 शवों का कोरोना प्रोटोकॉल के तहत अंतिम संस्कार हुआ था.
- 16 अप्रैल को एक दिन में 118 शवों का कोरोना प्रोटोकॉल के तहत अंतिम संस्कार किया गया था.
- 17 अप्रैल के आंकड़ों के अनुसार, शहर के मुख्य विश्राम घाट और कब्रिस्तान में कोरोना प्रोटोकॉल के तहत 92 लोगों का अंतिम संस्कार किया गया था. सरकारी आंकड़ों में कोरोना से 3 मौत होना बताई गई थी.
-18 अप्रैल को 112 शवों का कोविड प्रोटोकॉल के अंतिम संस्कार साथ किया गया था. सबसे ज्यादा शवों का अंतिम संस्कार भदभदा विश्राम घाट में किया गया.
-19 अप्रैल को 123 शवों का अंतिम संस्कार कोरोना प्रोटोकॉल के तहत किया गया था.
-20 अप्रैल को 148 शवों का कोरोना प्रोटोकॉल के तहत अंतिम संस्कार हुआ था.

मध्य प्रदेश मे जारी कोरोना का कहर
प्रदेश भर में 21 अप्रैल को 13107 कोरोना के नए मामले सामने आए. इंदौर में 1781, भोपाल में 1709, जबलपुर में 789, ग्वालियर मे 1219 कोरोना पॉज़िटिव मरीज मिले. 75 लोगों की कोरोना संक्रमण से मौत हुई. मध्‍य प्रदेश में 82268 एक्टिव मरीज़ों की संख्या हुई. राज्‍य में बढ़ते कोरोना संक्रमण के बीच अच्छी खबर है. प्रदेश भर में 9035 मरीज़ स्वस्थ होकर अस्पताल से डिस्चार्ज हुए. इंदौर में 1024, भोपाल 1664, जबलपुर में 437, ग्वालियर में 502 मरीज़ स्वस्थ हुए.