आजमगढ़ हत्याकांड: आरोपी अरविंद की दो बेटियों की जिम्मेदारी उठाएंगे SSP, पुलिसकर्मी भी देंगे एक दिन का वेतन

by न्यूज डेस्क
आजमगढ़ हत्याकांड: आरोपी अरविंद की दो बेटियों की जिम्मेदारी उठाएंगे SSP, पुलिसकर्मी भी देंगे एक दिन का वेतन

आजमगढ़: उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ के शंभूपुर गांव में हुए दिल दहला देने वाले हत्याकांड के बाद पुलिस प्रशासन ने आरोपी अरविंद सिंह की दोनों बेटियों के भविष्य को लेकर बड़ा फैसला किया है। आजमगढ़ के SSP डॉ. अनिल कुमार ने दोनों बच्चियों को गोद लेने और उनकी पढ़ाई-लिखाई से लेकर भविष्य की जिम्मेदारी उठाने का ऐलान किया है।  इस पहल में आजमगढ़ पुलिस के करीब 5 हजार पुलिसकर्मी भी शामिल होंगे। पुलिसकर्मियों की ओर से एक दिन का वेतन देने की बात कही गई है, जबकि SSP डॉ. अनिल कुमार अपनी एक महीने की सैलरी बच्चियों के भविष्य के लिए देंगे। यह राशि दोनों बच्चियों के नाम FD कराने की योजना है।

मां-बाप और भाई को खो चुकी हैं दोनों बच्चियां

शंभूपुर गांव में हुई वारदात के बाद अरविंद की दोनों बेटियां परिवार में बेहद कठिन स्थिति में रह गई हैं। रिपोर्टों के मुताबिक बड़ी बेटी करीब 10-11 साल की है, जबकि छोटी बच्ची अभी 11 महीने की है। घटना के दौरान बड़ी बच्ची मौके पर मौजूद थी और उसने पूरी घटना देखी थी। ऐसे में पुलिस ने बड़ी बच्ची की मानसिक स्थिति को देखते हुए उसकी काउंसलिंग कराने की पहल की है। दोनों बच्चियों को उनकी नानी की देखरेख में रखा गया है। सरकार की योजनाओं के तहत भी दोनों बच्चियों को आर्थिक सहायता दिलाने की प्रक्रिया शुरू की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक बाल सेवा योजना के तहत उन्हें 2,500-2,500 रुपये प्रतिमाह की मदद दिए जाने की बात कही गई है।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट से बेटे की मौत को लेकर बड़ा खुलासा

इस मामले में पुलिस ने अरविंद के आठ वर्षीय बेटे शौर्य की मौत को लेकर भी अपनी जांच के निष्कर्ष बताए हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर पुलिस का कहना है कि बच्चे को 32 बोर की गोली लगी थी। पुलिस के मुताबिक अरविंद के पास 32 बोर का लाइसेंसी रिवॉल्वर था, जबकि पुलिस टीम के पास 9 एमएम के हथियार थे। इसी आधार पर पुलिस ने दावा किया है कि बच्चे को गोली अरविंद ने ही मारी थी। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया डॉक्टरों के पैनल और वीडियोग्राफी के बीच कराए जाने की बात भी सामने आई है। 
करीब ७ घंटे तक पुलिस ने कराया सरेंडर का प्रयास

हत्याकांड के बाद अरविंद अपने बच्चों के साथ घर के एक कमरे में बंद हो गया था। पुलिस अधिकारियों ने कई घंटे तक उससे बातचीत कर सरेंडर कराने की कोशिश की। 
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, करीब सात घंटे तक पुलिस आरोपी को बाहर आने के लिए मनाती रही। बाद में कमरे के भीतर से गोली चलने की आवाज आई। इसके बाद पुलिस टीम ने दरवाजा तोड़कर अंदर प्रवेश किया। पुलिस के मुताबिक अरविंद ने पुलिस टीम पर फायरिंग की, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में उसकी मौत हो गई।
जेब से मिले 18 जिंदा कारतूस

मुठभेड़ के बाद पुलिस ने अरविंद के पास से 18 जिंदा कारतूस बरामद किए। इसके अलावा उसके पास टॉर्च समेत कुछ अन्य सामान मिलने की जानकारी भी सामने आई है। पुलिस का कहना है कि अरविंद ने घर के अंदर खुद को बंद करने से पहले पुलिस से मुकाबले की तैयारी कर रखी थी। पुलिस के अनुसार, वारदात के दौरान और बाद की फायरिंग को मिलाकर कई राउंड गोलियां चलीं।

बच्चियों के भविष्य की जिम्मेदारी उठाने का फैसला

इस दर्दनाक घटना में परिवार के कई सदस्यों की मौत के बाद दोनों बच्चियों के सामने भविष्य का बड़ा सवाल खड़ा हो गया था। ऐसे में SSP डॉ. अनिल कुमार ने उनकी पढ़ाई और भविष्य की जिम्मेदारी उठाने का फैसला किया है। SSP ने कहा कि वह दोनों बच्चियों को अपनी बेटियों की तरह देखेंगे और उनकी पढ़ाई से लेकर शादी तक की जिम्मेदारी उठाएंगे। पुलिसकर्मियों की आर्थिक मदद और सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने से दोनों बच्चियों के भविष्य को आर्थिक सुरक्षा देने की कोशिश की जा रही है।


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