सपा का नया सियासी दांव! लाल के बाद अब ‘नीले’ रंग में दिखेंगे छात्र सभा के कार्यकर्ता, जानें क्या है रणनीति
by न्यूज डेस्क
लखनऊ: समाजवादी पार्टी अब अपने पारंपरिक लाल रंग के साथ एक और रंग को राजनीतिक पहचान देने की तैयारी में है। पार्टी की छात्र इकाई समाजवादी छात्र सभा के कार्यकर्ताओं के लिए नया ड्रेस कोड लागू करने की तैयारी है। इसके तहत छात्र सभा के कार्यकर्ता अब नीली टी-शर्ट और जींस में नजर आ सकते हैं। पार्टी के इस फैसले को सिर्फ ड्रेस कोड में बदलाव के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। इसके पीछे दलित समाज और खास तौर पर युवा वर्ग के बीच अपनी पहुंच बढ़ाने की रणनीति भी मानी जा रही है। समाजवादी पार्टी की राजनीति में 'PDA' यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समीकरण को पहले से ही अहम माना जाता रहा है।
लाल के साथ अब नीले रंग पर फोकस
समाजवादी पार्टी की पहचान लंबे समय से लाल टोपी और लाल रंग से जुड़ी रही है। अब पार्टी छात्र राजनीति के जरिए नीले रंग को भी अपने संगठनात्मक इस्तेमाल में लाने की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित ड्रेस कोड के मुताबिक समाजवादी छात्र सभा के कार्यकर्ता नीली टी-शर्ट और जींस पहनेंगे। माना जा रहा है कि इसके जरिए छात्र संगठन को एक अलग और आधुनिक विजुअल पहचान देने की कोशिश भी होगी।
नीला रंग क्यों है खास?
भारतीय राजनीति में नीला रंग बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर और दलित चेतना से जुड़ा हुआ माना जाता है। ऐसे में छात्र सभा के ड्रेस कोड में नीले रंग को शामिल करना महज फैशन या संगठनात्मक बदलाव नहीं, बल्कि एक स्पष्ट राजनीतिक संदेश के तौर पर भी देखा जा रहा है। समाजवादी पार्टी इसे अपने PDA समीकरण में दलित वर्ग को और मजबूती से जोड़ने की कोशिश के तौर पर पेश कर सकती है। खासकर विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में दलित छात्रों के बीच अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करना पार्टी के लिए अहम माना जा रहा है।
अखिलेश के बदले अंदाज से भी मिले संकेत
इस रणनीति को समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के हालिया सार्वजनिक कार्यक्रमों में नजर आए बदलाव से भी जोड़कर देखा जा रहा है। अखिलेश यादव कुछ हालिया कार्यक्रमों में पारंपरिक लाल की जगह नीला गमछा ओढ़े नजर आए हैं। ऐसे में छात्र सभा के लिए नीली टी-शर्ट और जींस का प्रस्ताव पार्टी की व्यापक राजनीतिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। एक तरफ पार्टी अपने पारंपरिक समाजवादी रंग को बरकरार रखना चाहती है, तो दूसरी तरफ नीले रंग के जरिए दलित समाज और युवाओं तक नए राजनीतिक संदेश के साथ पहुंच बनाने की कोशिश कर रही है।
'जेन-ज़ी' पर भी नजर
समाजवादी पार्टी की इस कवायद में सिर्फ जातीय समीकरण ही नहीं, बल्कि Gen-Z यानी नई युवा पीढ़ी को जोड़ने का लक्ष्य भी दिखाई देता है। टी-शर्ट और जींस जैसे कैजुअल ड्रेस कोड के जरिए छात्र संगठन को पारंपरिक राजनीतिक कार्यकर्ता की छवि से अलग, युवा और आधुनिक रूप देने की कोशिश की जा सकती है। अब देखना होगा कि समाजवादी छात्र सभा के नए ड्रेस कोड को पार्टी किस तरह लागू करती है और नीला रंग उसके संगठनात्मक कार्यक्रमों में कितनी प्रमुखता हासिल करता है। अगर यह प्रयोग सफल रहता है, तो आने वाले समय में पार्टी के दूसरे युवा संगठनों में भी इसके असर देखने को मिल सकते हैं।