UNSC में भारत की वीटो पावर की मांग, पाकिस्तान ने नए स्थायी सदस्यों का किया विरोध

UNSC में भारत की वीटो पावर की मांग, पाकिस्तान ने नए स्थायी सदस्यों का किया विरोध

नई दिल्ली: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार और वीटो पावर को लेकर भारत और पाकिस्तान के रुख में अंतर सामने आया है। भारत ने साफ किया है कि सुरक्षा परिषद में शामिल होने वाले सभी स्थायी सदस्यों को समान अधिकार मिलने चाहिए, जबकि पाकिस्तान ने नए स्थायी सदस्यों को शामिल करने का विरोध किया है। पाकिस्तान का कहना है कि इससे मौजूदा असमानताएं और बढ़ सकती हैं और परिषद के फैसले लेने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

पाकिस्तान ने क्या कहा?

संयुक्त राष्ट्र महासभा में वीटो पावर के इस्तेमाल और सुरक्षा परिषद में सुधार को लेकर हुई चर्चा के दौरान पाकिस्तान के प्रतिनिधि गुल कैसर सरवानी ने मौजूदा व्यवस्था पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों के बीच रणनीतिक प्रतिस्पर्धा और राष्ट्रीय हितों के कारण अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा से जुड़े मामलों में सामूहिक कार्रवाई कई बार बाधित होती है। पाकिस्तान का तर्क है कि स्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाने और नए देशों को वीटो पावर देने से व्यवस्था में सुधार होने के बजाय मौजूदा असमानताएं और गहरी हो सकती हैं। पाकिस्तान ने वीटो पावर को पूरी तरह समाप्त करने या कम से कम इसके इस्तेमाल पर कड़े प्रतिबंध लगाने की वकालत की है।

भारत की क्या है मांग?

भारत लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता की मांग करता रहा है। भारत का कहना है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों और अंतरराष्ट्रीय मामलों में उसकी भूमिका को देखते हुए सुरक्षा परिषद में उसे उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। 26 अक्टूबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरिश पर्वतनेनी ने कहा कि सुरक्षा परिषद में सुधार व्यापक स्तर पर होना चाहिए। भारत ने यह भी स्पष्ट किया कि नए स्थायी सदस्यों को मौजूदा पांच स्थायी सदस्यों के समान अधिकार और जिम्मेदारियां मिलनी चाहिए। भारत के रुख के मुताबिक, स्थायी सदस्यों की एक अलग श्रेणी बनाना, जिन्हें वीटो का अधिकार न मिले, वास्तविक सुधार नहीं होगा।

क्या है वीटो पावर और क्यों है विवाद?

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कुल 15 सदस्य हैं। इनमें अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन पांच स्थायी सदस्य हैं, जिन्हें वीटो पावर हासिल है। बाकी 10 सदस्य अस्थायी होते हैं और उनका चुनाव दो साल के कार्यकाल के लिए किया जाता है। वीटो पावर का मतलब है कि कोई स्थायी सदस्य किसी गैर-प्रक्रियात्मक प्रस्ताव के खिलाफ वोट देकर उसे पारित होने से रोक सकता है। इसी अधिकार को लेकर लंबे समय से विवाद है। कई देश मानते हैं कि मौजूदा व्यवस्था में पांच देशों के पास जरूरत से ज्यादा प्रभाव है, जबकि दुनिया के कई बड़े विकासशील देशों और क्षेत्रों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिलता। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने अप्रैल 2022 में प्रस्ताव 76/262 पारित किया था। इसके तहत सुरक्षा परिषद में वीटो इस्तेमाल होने पर महासभा के अध्यक्ष को 10 कार्य दिवसों के भीतर औपचारिक बैठक बुलानी होती है, ताकि सदस्य देश उस फैसले पर चर्चा कर सकें।

आगे क्या होगा?

सुरक्षा परिषद में सुधार को लेकर सदस्य देशों के बीच मतभेद अब भी बने हुए हैं। भारत नए स्थायी सदस्यों को समान अधिकार देने की मांग कर रहा है, जबकि पाकिस्तान स्थायी सदस्यता के विस्तार का विरोध करते हुए निर्वाचित अस्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाने जैसे विकल्पों का समर्थन करता है। ऐसे में सवाल यह है कि क्या संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को मौजूदा वैश्विक व्यवस्था के अनुरूप बदला जा सकेगा या स्थायी सदस्यों के अधिकारों और प्रतिनिधित्व को लेकर मतभेद सुधार की राह में बाधा बने रहेंगे?


न्यूज़ डेस्क