‘EVM आप ही लाए थे, तब मशीन सही थी!’ चंद्रबाबू नायडू का कांग्रेस पर हमला
by न्यूज़ डेस्क
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने EVM को लेकर कांग्रेस के रुख पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव जीतने पर मशीन का समर्थन करना और हारने पर उसी पर सवाल खड़े करना सही नहीं है। नायडू ने SIR को लेकर विपक्ष की आपत्तियों पर भी सवाल उठाए।
चुनावी हार के बाद EVM पर सवाल क्यों?
अमरावती में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान चंद्रबाबू नायडू ने कांग्रेस की आलोचना करते हुए कहा कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों का इस्तेमाल शुरू होने के समय कांग्रेस को इनसे कोई परेशानी नहीं थी, लेकिन अब चुनावी हार के बाद इन्हीं मशीनों पर सवाल उठाए जा रहे हैं। नायडू के मुताबिक, राजनीतिक दलों को चुनावी नतीजों को लेकर एक जैसा रुख अपनाना चाहिए। जीत मिलने पर EVM का जश्न मनाना और हारने पर उसे दोष देना दोहरा रवैया है।
उन्होंने कहा कि चुनाव में जनता का भरोसा जीतना जरूरी है। केवल मशीनों पर भरोसा जताने या उन्हें दोष देने से राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी खत्म नहीं हो जाती।
SIR को लेकर भी विपक्ष से पूछे सवाल
EVM के साथ-साथ नायडू ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर भी विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया में राजनीतिक दलों के बूथ-स्तरीय एजेंट शामिल थे, तब आपत्तियां क्यों नहीं उठाई गईं। नायडू ने विपक्ष के रुख को राजनीतिक सुविधा के हिसाब से बदलने वाला रवैया बताया। उनका कहना है कि राजनीतिक दलों को चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाने से पहले अपने रुख में निरंतरता रखनी चाहिए।
CCTV निगरानी का भी किया जिक्र
मुख्यमंत्री ने चुनावी गड़बड़ियों के आरोपों के जवाब में CCTV निगरानी का हवाला दिया और विपक्ष की आपत्तियों को खारिज किया। उनका तर्क है कि चुनावी प्रक्रिया में निगरानी के इंतजाम होने के बावजूद हर हार के लिए व्यवस्था को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। EVM और SIR को लेकर राजनीतिक दलों के बीच जारी बहस ने एक बार फिर चुनावी पारदर्शिता और मतदाता सूची की विश्वसनीयता पर चर्चा तेज कर दी है। ऐसे में अहम सवाल यही है कि चुनावी प्रक्रिया पर उठने वाली आपत्तियों का समाधान राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से होगा या ठोस तथ्यों और पारदर्शी जांच से?