उर्वरक की जमाखोरी और कालाबाजारी पर सरकार की बड़ी कार्रवाई, 6,900 से अधिक लाइसेंस रद्द या निलंबित

अप्रैल 2025 से अब तक 4.66 लाख छापे, 16,246 कारण बताओ नोटिस और 821 प्राथमिकी दर्ज; किसानों के हितों की रक्षा के लिए सख्त प्रवर्तन

उर्वरक की जमाखोरी और कालाबाजारी पर सरकार की बड़ी कार्रवाई, 6,900 से अधिक लाइसेंस रद्द या निलंबित

भारत सरकार ने उर्वरकों की जमाखोरी, हेराफेरी और कालाबाजारी पर अंकुश लगाने के लिए सख्त प्रवर्तन उपाय तेज कर दिए हैं। रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री अनुप्रिया एस. पटेल ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत उर्वरकों को आवश्यक वस्तु घोषित किया गया है और उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 के तहत राज्य सरकारों को दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार दिया गया है। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग राज्य सरकारों के साथ समन्वय में साप्ताहिक आधार पर इन प्रवर्तन कार्रवाइयों की निगरानी कर रहा है।

अप्रैल 2025 से अब तक की प्रमुख कार्रवाइयां:

  • कुल 4,66,415 छापे मारे गए
  • 16,246 कारण बताओ नोटिस जारी किए गए
  • 6,802 लाइसेंस निलंबित या रद्द किए गए (सरकारी आंकड़ों और मीडिया रिपोर्ट्स में इसे 6,900 से अधिक बताया जा रहा है)
  • उल्लंघनकर्ताओं के खिलाफ 821 प्राथमिकी दर्ज की गईं

विशेष रूप से फरवरी 2026 में जमाखोरी के मामलों में 28 कारण बताओ नोटिस जारी किए गए, 2 लाइसेंस निलंबित/रद्द किए गए और 2 प्राथमिकी दर्ज की गईं।

ये कड़े कदम किसानों को अनुचित मूल्यों, कालाबाजारी और कमी से बचाने के सरकार के दृढ़ संकल्प को दर्शाते हैं। वर्तमान रबी 2025-26 सीजन के दौरान देश में यूरिया, डीएपी, एमओपी और एनपीकेएस जैसे प्रमुख उर्वरकों की उपलब्धता पर्याप्त बनी हुई है।

सरकार का फोकस किसानों को समय पर और उचित दर पर उर्वरक उपलब्ध कराने पर है, साथ ही कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जा रही है।

(अपडेट: 27-28 मार्च 2026 के PIB और समाचार रिपोर्ट्स के आधार पर)

यह संस्करण मूल समाचार को थोड़ा अधिक आकर्षक, स्पष्ट और वर्तमान आधिकारिक आंकड़ों के अनुरूप बनाया गया है, जिसमें "लगभग 7 हजार" को वास्तविक रिपोर्टेड आंकड़े (6,802 से अधिक) के साथ संतुलित किया गया है।


अभिषेक सिंह