वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच भारत सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी में ₹10 प्रति लीटर की कटौती की

एक्साइज ड्यूटी घटने से तेल कंपनियों को राहत, लेकिन आम उपभोक्ताओं के लिए पेट्रोल-डीजल के खुदरा दाम नहीं घटेंगे; बढ़ोतरी की आशंका भी टली

by KhabarCafe
वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच भारत सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी में ₹10 प्रति लीटर की कटौती की

पश्चिम एशिया में अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष तथा होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति के कारण उत्पन्न वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच भारत सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (SAED) में भारी कटौती की है। वित्त मंत्रालय के 26 मार्च 2026 के आदेश के अनुसार, पेट्रोल पर यह ड्यूटी 13 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 3 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है, जबकि डीजल पर 10 रुपये से घटाकर शून्य कर दिया गया है। यह कटौती तुरंत प्रभावी हो गई है।

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया की कच्चे तेल और गैस आपूर्ति का करीब एक-पांचवां हिस्सा (20-25 मिलियन बैरल प्रतिदिन) संभालता है। संघर्ष से पहले भारत अपना 12-15% कच्चा तेल आयात इसी मार्ग से करता था। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गई हैं, जिससे तेल विपणन कंपनियां (OMCs) भारी घाटे में चल रही थीं।

केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी के अनुसार, पहले पेट्रोल पर कंपनियों को करीब 24 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 30 रुपये प्रति लीटर का नुकसान हो रहा था। सरकार ने एक्साइज ड्यूटी घटाकर और खुद राजस्व का नुकसान उठाकर इन कंपनियों को राहत दी है। अनुमान है कि इस फैसले से सरकार को करीब 1.75 लाख करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान होगा।

महत्वपूर्ण बात: कटौती के बावजूद पेट्रोल और डीजल के खुदरा दाम नहीं घटेंगे। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि कीमतें स्थिर रहेंगी — न तो सस्ती होंगी और न ही महंगी। इससे उपभोक्ताओं को बढ़ोतरी से राहत मिली है, जबकि तेल कंपनियों का घाटा काफी हद तक कम हो जाएगा।

नोट: नायरा एनर्जी जैसी कुछ निजी कंपनियों ने हाल ही में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में आंशिक बढ़ोतरी की थी, लेकिन सरकारी कंपनियां (IOC, BPCL, HPCL) अभी मुख्य रूप से स्थिर रखे हुए हैं। प्रीमियम पेट्रोल वेरिएंट्स में पहले ही मामूली बढ़ोतरी हो चुकी है।

सरकार ने एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर भी नया लेवी ढांचा पेश किया है। ATF पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क 50 रुपये प्रति लीटर लगाया गया है, जिसकी आंशिक छूट के बाद प्रभावी दर करीब 29.5 रुपये प्रति लीटर रह गई है। साथ ही डीजल निर्यात पर विंडफॉल टैक्स लगाया गया है।

मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि पश्चिम एशिया संकट के कारण वैश्विक स्तर पर ईंधन महंगा हुआ है — दक्षिण पूर्व एशिया और अफ्रीका में 30-50%, उत्तरी अमेरिका में 30% और यूरोप में 20% तक की बढ़ोतरी हुई है। भारत सरकार ने उपभोक्ताओं को इस उछाल से बचाने के लिए यह कदम उठाया है।

संक्षेप में: यह फैसला तेल कंपनियों को घाटे से उबारने और महंगाई को नियंत्रित रखने के लिए लिया गया है। आम जनता के लिए पेट्रोल-डीजल की कीमतें फिलहाल स्थिर रहेंगी, लेकिन वैश्विक स्थिति पर नजर बनी रहेगी।

(अपडेट: 28 मार्च 2026 तक की रिपोर्ट्स के आधार पर — Reuters, NDTV, The Hindu, Aaj Tak आदि से पुष्टि)


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